Saturday, November 30, 2019

Senior Wrestling Championship: 35 साल की रेसलर से हारीं दिव्या काकरन

दिव्या काकरन ने एशियन गेम्स 2018 (Asian Games 2018) में 68 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था

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एचआईवी पॉजिटिव लोगों ने साझा की अपने संघर्ष की सच्ची कहानियां

लाइफस्टाइल डेस्क. जागरूकता कार्यक्रमों और सावधानियों के बावजूद एचआईवी पॉजीटिव आना... किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए सदमे जैसा ही होता है। एड्स सुनते ही लोगों का रवैया अक्सर बदल जाता है। शारीरिक तकलीफें तो होती ही हैं, मानसिक तकलीफें उससे भी ज्यादा। एक दिसंबर एड्स दिवस के अवसर पर हमने ढूंढी, शहर के कुछ ऐसे परिवारों की कहानियां, जहां यह वायरस भी रिश्तों में दरार न डाल सका।


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HIV positive people shared true stories of their struggle


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लाइफस्टाइल डेस्क. जागरूकता कार्यक्रमों और सावधानियों के बावजूद एचआईवी पॉजीटिव आना... किसी भी व्यक्ति और उसके परिवार के लिए सदमे जैसा ही होता है। एड्स सुनते ही लोगों का रवैया अक्सर बदल जाता है। शारीरिक तकलीफें तो होती ही हैं, मानसिक तकलीफें उससे भी ज्यादा। एक दिसंबर एड्स दिवस के अवसर पर हमने ढूंढी, शहर के कुछ ऐसे परिवारों की कहानियां, जहां यह वायरस भी रिश्तों में दरार न डाल सका।


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खिताब से एक कदम दूर सौरभ वर्मा, फाइनल में ताइवान की मुश्किल चुनौती

सौरभ वर्मा (Sourabh Verma) ने सेमीफाइनल मुकाबले में कोरियाई खिलाड़ी पर जीत दर्ज की

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रेसिपी: बनाएं सूजी के कुरकुरे पकौड़े, भूल जाएंगे सारे स्वाद

सूजी के पकौड़े खाने में काफी टेस्टी लगते हैं. क्या आपने खाए हैं कभी सूजी के पकौड़े. आइए आज जानते हैं सूजी के पकौड़े बनाने की रेसिपी....

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मदर्स ऑफ कमबैक: ऐसी जीत जिन्होंने साबित किया मां बनना कमजोरी नहीं रहमत है!

मैरीकॉम (MC Marykom) से लेकर डाना टोरेस (Dana Torres) तक ऐसी कई महिला एथलीट हैं जिन्होंने मां बनने के बावजूद करियर जारी रखा

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नेशनल प्लेयर ने पुलेला गोपीचंद पर लगाए गंभीर आरोप, कहा-चयन में होता है भेदभाव

प्राजक्ता सावंत (Prajakta Sawant) डब्लस बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और उन्होंने साउथ एशियन गेम्स (South Asian Games) में खिलाड़ियों के चयन पर सवाल उठाए

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Syed Modi International Badminton: ऋतुपर्णा दास सेमीफाइनल में हारींं

तेइस साल की चैंपियन ऋतुपर्णा दास (Rituparna Das) को 39 मिनट चले महिला एकल सेमीफाइनल में चाइवान के खिलाफ 22-24 15-21 से शिकस्त झेलनी पड़ी

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ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से समिट रहा फिलीपिंस का एक गांव

लाइफस्टाइल डेस्क. फिलीफिन्स की राजधानी मनीला से 17 किलो मीडर दूर सिटियो परिहाना नाम एक गांव हैं, ये गांव समुद्र किनारे बसा हुआ है। लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते समुद्र जल स्तर बढ़ रहा है और धीरे-धीरे ये गांव सिमटता जा रहा है। जल स्तर बढ़ने की वजह से गांव हर साल 4 सेंटीमीटर घटता जा रहा है। यहां हालात ऐसे हैं कि चलने के लिए जमीन बामुश्किल नसीब होती है। बच्चे नाव के जरिए स्कूल जाते हैं। ये समस्या एशिया के कई देशों में देखी जा रही है। इसका असर सबसे ज्यादा गरीब समुदायों में देखने को मिल रहा है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन 2-13 दिसंबर से मैड्रिड में आयोजित किया जाएगा। समिट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग और यूरोप में आई बाढ़ को शामिल किया जाएगा। ऐसे में फिलीफीन्स की जनता सरकार पर दबाव बना रही है कि सिटियो परिहाना जैसे मुद्दे को भी समित में उठाया जाए।

नहीं बचा पीने लायक पानी

  • सिटियो परिहाना गांव में भू-जल भी नहीं बचा है और अब पीने के लिए पूरा गांव एक कुएं पर निर्भर है। ज्यादातर घर पानी में डूबे हुए हैं इस वजह से यहां बिजली के खंबे नहीं लगाए गए हैं। लोगों ने छतों पर सोलार पैनल लगा रखे हैं। यहां के लोग अपने घरों से तभी निकलते हैं जब कोई काम हो। बाकी समय घर पर बिताना इनकी मजबूरी हो जाती है।
  • पानी भर जाने की वजह से महीनों से यहां के चर्च में प्रर्थना सभा का आयोजन नहीं किया गया है। इस गांव के हालात 2011 में आए टायफून नेसात तूफान के बाद से ज्यादा खराब होने लगे हैं।इस तूफान में उठी समुद्री लहरें काफी ऊंची थीं, जिस वजह से घर, स्कूल और कई सरकारी इमारते तबाह हो गई। इस तूफान के बाद 50 अधिक परिवारों ने गांव छोड़ दिया।
  • यहां रहने वालों को जिंदगी गुजर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। समुद्री जीव यहां का मुख्य भोजन है। जो लोग यहां बच गए वो इसलिए लिए ये जगह नहीं छोड़कर जाना चाहते क्योंकि उन्होंने यहां जीना सीख लिया है और अगर वो शहर की तरफ गए तो उन्हें डर है कि उन्हें भिखारी की जिंगदी जीनी पड़ सकती है।

नाव के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं करते रहवासी

  • यहां रहने वाली 16 साल की डेनिका मार्टीनेज बताती हैं, मैं रोज सुबह अपने भाई-बहनों के साथ नाव से स्कूल जात हूं। स्कूल पहुंचने में मुझे 30 मिनट का समय लगता है। समुद्र में उठती तेज लहरों की वजह से कभी-कभी मैं पूरी तरह से भीग जाती हूं। यहां रहना बेहद मुश्किल हैं लेकिन हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। यहां रहना खतरे से भरा है लेकिन अब हमें आदत हो गई है। बिना नाव के यहां रहने की कल्पना नहीं की जा सकती है।
  • डेनिका की मां मेरी जेन मार्टीनेज केकड़े बेचना का काम करती हैं, जिन्हें उनके पति पकड़ते हैं। मेरी के मुताबिक यहां रहना दिन-ब-दिन तकलीफ देह होता जा रहा है। लेकिन शहर जा बसना और नए सिरे जिंदगी शुरू करना उनके लिए संभव नहीं है। इसलिए वो ये गांव नहीं छोड़ रहे हैं।


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A village in the Philippines was held due to global warming
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पाइप पर गैस सिलेंडर, बोतल पर टीवी भी बैलेंस कर देते हैं मोहम्मद; यूट्यूब पर वीडियो देखकर मिली प्रेरणा

लाइफस्टाइल डेस्क. फिलिस्तीन के रहने वाले मोहम्मद अल शेनबारी किसी भी चीज को बैलेंस कर सकते हैं। मोहम्मद कहते हैं कि वे किसी भी चीज को देखकर उसका 'बैलेंस पॉइंट' ढूंढने की कोशिश करते हैं और फिर उसे बैलेंस कर देते हैं। मोहम्मद जिस तरह से चीजों को बैलेंस करते हैं, उससे गुरुत्वाकर्षण के नियम भी फेल हो जाते हैं। 24 साल के मोहम्मद का दावा है कि वे अपने दिमाग और शरीर की मदद से लगभग सभी चीजों को बैलेंस कर सकते हैं।

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Gas cylinders on pipes, TVs on bottles also balance Mohammed; Inspired by watching video on YouTube
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ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से समिट रहा फिलीपिंस का एक गांव

लाइफस्टाइल डेस्क. फिलीफिन्स की राजधानी मनीला से 17 किलो मीडर दूर सिटियो परिहाना नाम एक गांव हैं, ये गांव समुद्र किनारे बसा हुआ है। लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते समुद्र जल स्तर बढ़ रहा है और धीरे-धीरे ये गांव सिमटता जा रहा है। जल स्तर बढ़ने की वजह से गांव हर साल 4 सेंटीमीटर घटता जा रहा है। यहां हालात ऐसे हैं कि चलने के लिए जमीन बामुश्किल नसीब होती है। बच्चे नाव के जरिए स्कूल जाते हैं। ये समस्या एशिया के कई देशों में देखी जा रही है। इसका असर सबसे ज्यादा गरीब समुदायों में देखने को मिल रहा है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन 2-13 दिसंबर से मैड्रिड में आयोजित किया जाएगा। समिट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग और यूरोप में आई बाढ़ को शामिल किया जाएगा। ऐसे में फिलीफीन्स की जनता सरकार पर दबाव बना रही है कि सिटियो परिहाना जैसे मुद्दे को भी समित में उठाया जाए।

नहीं बचा पीने लायक पानी

  • सिटियो परिहाना गांव में भू-जल भी नहीं बचा है और अब पीने के लिए पूरा गांव एक कुएं पर निर्भर है। ज्यादातर घर पानी में डूबे हुए हैं इस वजह से यहां बिजली के खंबे नहीं लगाए गए हैं। लोगों ने छतों पर सोलार पैनल लगा रखे हैं। यहां के लोग अपने घरों से तभी निकलते हैं जब कोई काम हो। बाकी समय घर पर बिताना इनकी मजबूरी हो जाती है।
  • पानी भर जाने की वजह से महीनों से यहां के चर्च में प्रर्थना सभा का आयोजन नहीं किया गया है। इस गांव के हालात 2011 में आए टायफून नेसात तूफान के बाद से ज्यादा खराब होने लगे हैं।इस तूफान में उठी समुद्री लहरें काफी ऊंची थीं, जिस वजह से घर, स्कूल और कई सरकारी इमारते तबाह हो गई। इस तूफान के बाद 50 अधिक परिवारों ने गांव छोड़ दिया।
  • यहां रहने वालों को जिंदगी गुजर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। समुद्री जीव यहां का मुख्य भोजन है। जो लोग यहां बच गए वो इसलिए लिए ये जगह नहीं छोड़कर जाना चाहते क्योंकि उन्होंने यहां जीना सीख लिया है और अगर वो शहर की तरफ गए तो उन्हें डर है कि उन्हें भिखारी की जिंगदी जीनी पड़ सकती है।

नाव के बिना जिंदगी की कल्पना नहीं करते रहवासी

  • यहां रहने वाली 16 साल की डेनिका मार्टीनेज बताती हैं, मैं रोज सुबह अपने भाई-बहनों के साथ नाव से स्कूल जात हूं। स्कूल पहुंचने में मुझे 30 मिनट का समय लगता है। समुद्र में उठती तेज लहरों की वजह से कभी-कभी मैं पूरी तरह से भीग जाती हूं। यहां रहना बेहद मुश्किल हैं लेकिन हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। यहां रहना खतरे से भरा है लेकिन अब हमें आदत हो गई है। बिना नाव के यहां रहने की कल्पना नहीं की जा सकती है।
  • डेनिका की मां मेरी जेन मार्टीनेज केकड़े बेचना का काम करती हैं, जिन्हें उनके पति पकड़ते हैं। मेरी के मुताबिक यहां रहना दिन-ब-दिन तकलीफ देह होता जा रहा है। लेकिन शहर जा बसना और नए सिरे जिंदगी शुरू करना उनके लिए संभव नहीं है। इसलिए वो ये गांव नहीं छोड़ रहे हैं।


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पाइप पर गैस सिलेंडर, बोतल पर टीवी भी बैलेंस कर देते हैं मोहम्मद; यूट्यूब पर वीडियो देखकर मिली प्रेरणा

लाइफस्टाइल डेस्क. फिलिस्तीन के रहने वाले मोहम्मद अल शेनबारी किसी भी चीज को बैलेंस कर सकते हैं। मोहम्मद कहते हैं कि वे किसी भी चीज को देखकर उसका 'बैलेंस पॉइंट' ढूंढने की कोशिश करते हैं और फिर उसे बैलेंस कर देते हैं। मोहम्मद जिस तरह से चीजों को बैलेंस करते हैं, उससे गुरुत्वाकर्षण के नियम भी फेल हो जाते हैं। 24 साल के मोहम्मद का दावा है कि वे अपने दिमाग और शरीर की मदद से लगभग सभी चीजों को बैलेंस कर सकते हैं।

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मेकअप की सही टेक्नीक से छुपाएं चाहरे के दाग-धब्बे और पिंपल्स

हेल्थ डेस्क. पिंपल्स की वजह से अकसर महिलाएं कॉन्फिडेंस की कमी महसूस करती हैं। इस वजह से काफी स्ट्रेस भी हो जाता है। उन्हें हर वक्त यह महसूस होता रहता है कि हर कोई त्वचा को घूर रहा है। किसी स्पेशल डे को यदि आप पिंपल की वजह से खराब होने से बचाना चाहती हैं, तो आज हम आपको बता रहे हैं कि मेकअप से इन्हें कैसे कवर कर सकती हैं। चूंकि पिंपल्स अलग-अलग तरह के होते हैं, मेकअप एक्सपर्ट कायनात हुसैन आपको उन्हीं के हिसाब से मेकअप टिप्स दे रही हैं...

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Hide the pimples with the right makeup technique


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TTF Men's World Cup: दो बार के वर्ल्ड चैंपियन से हारे जी साथियान

जी साथियान (G Sathiyan) को वर्ल्ड नंबर आठ टीमो बुल (Timo Bull) ने 4-1 से मात देकर टूर्नामेंट से बाहर किया

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हड्डियां मजबूत करेगा अंजीर और अनिद्रा से राहत देगा कीवी, सर्दियों में जरूरत के मुताबिक चुनें फल

हेल्थ डेस्क. सर्दियों के मौसम में कई तरह केफल बाजार में मिलने लगते हैं। ये रसीले और बेहद स्वादिष्ट होते हैं। इन मौसमी फलों में कई गुण भी छुपे होते हैं जो हमारे शरीर को पोषण देते हैं। सर्दियों में मिलने वाले फल आंखो से लेकर मसल टिशू के लिए फायदेमंद होते हैं। फूड ब्लॉगर मानसी पुजारा से जानिए सर्दियों में मिलने वाले फलों के बारे में...



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choose fruits according to need in winter


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हड्डियां मजबूत करेगा अंजीर और अनिद्रा से राहत देगा कीवी, सर्दियों में जरूरत के मुताबिक चुनें फल

हेल्थ डेस्क. सर्दियों के मौसम में कई तरह केफल बाजार में मिलने लगते हैं। ये रसीले और बेहद स्वादिष्ट होते हैं। इन मौसमी फलों में कई गुण भी छुपे होते हैं जो हमारे शरीर को पोषण देते हैं। सर्दियों में मिलने वाले फल आंखो से लेकर मसल टिशू के लिए फायदेमंद होते हैं। फूड ब्लॉगर मानसी पुजारा से जानिए सर्दियों में मिलने वाले फलों के बारे में...



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Diwali 2020: परफेक्ट हलवाई स्टाइल में घर पर ऐसे बनाएं गुजिया, ये हैं 5 टिप्‍स

Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...