लाइफस्टाइल डेस्क. हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत आवश्यक होता है। लेकिन इसके लिए संतुलित और पौष्टिक खान-पान के साथ योग भी मददगार हो सकता है।जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट केमुख्य योग अधिकारीडॉ. राजीव राजेश से जानें योग से नीरोग रहने का तरीका:
मत्स्यासन
मत्स्यासन
मत्स्यासन पीठ के बल लेट जाएं। हाथों को शरीर के बाजू में रखें, हथेलियां जमीन पर पूरी तरह जमाकर। अब धीरे-धीरे सीने को उठाएं, गर्दन का सहारा लेते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को यूं टिकाएं कि बाज़ुओं से ऊपरी पीठ तक शरीर एक कर्व बन जाए। इस स्थिति में कोहनियां और हथेलियां जमीन पर टिकी होनी चाहिए। चार-पांच सांस तक रूकें फिर धीरे-धीरे सिर को पुन: फर्श पर सीधा कर टिका लें।
इस आसन को करने का दूसरा तरीका पद्मासन की मुद्रा का भी है, जिसमें लेटने के बाद पैरों को पद्मासन में बांधा जाता है। हाथों की मदद से तस्वीर अनुसार पीठ को ऊपर उठाएं और पैरों व सिर के बल शरीर को संतुलित करें। अब बाएं पैर के पंजों को बांएं हाथ से और दाएं पैर को दाएं हाथ से पकड़ें। इस दौरान, कोहनियां और घुटने जमीन से सटे होने चाहिए। इस अवस्था में रहते हुए धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें। करीब 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें।
मत्स्यासन से लाभ
शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ेगा, फेफड़े मजबूत बनेंगे। रक्तसंचार बेहतर होगा। यह दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है। गर्दन की तकलीफ़ वाले या हृदय रोगी इसे न करें।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए (दंडासन में) बैठ जाएं। दोनों हाथों को ज़मीन पर रखें। सांस अंदर लेते हुए रीढ़ की हड्डी सीधी करें। अब तस्वीर अनुसार बायां पैर मोड़ें और पंजे को कूल्हे की ओर दाएं घुटने के पीछे ले जाएं। दाएं पैर को इस तरह मोड़कर रखें कि तलवे ऊपर की ओर खुले रहें (चित्र देखें)। अब बांयां हाथ ज़मीन पर रखते हुए शरीर को इस पर टिकाएं। वहीं दाएं हाथ की कोहनी बाएं पैर के घुटने पर रखें। अब शरीर को बांईं ओर खींचें। इस मुद्रा में 20-30 सेकंड के लिए रुकें। विपरीत दिशा में इस योगासन को दोहराएं।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन से लाभ
इससे रीढ़ की हड्डी का दबाव कम होता है। ये प्रतिरक्षा प्रणाली सहित शरीर के आंतरिक कार्यों में सुधार करता है। ख़राब पाचन शरीर में विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिंस) का कारण बनता है, जिससे संक्रमण होता है। ये आसन पाचन संबंधी समस्याएं दूर करता है। इससे पेट की चर्बी कम होती है, शरीर का लचीलापन बढ़ता है।
उत्कटासन
उत्कटासन
सीधे खड़े हो जाएं। अब शरीर और सिर दोनों को सीधा रखते हुए ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को पास-पास रखें। दोनों हाथों को सीधा रखें। अब सांस अंदर लेते हुए, दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और दोनों को आपस में जोड़ें। अब धीरे-धीरे घुटनों को सामने की ओर मोड़ें और कूल्हों को पीछे और नीचे की ओर लाएं। कूल्हों को फर्श के समानांतर लाने का प्रयास करें। गर्दन और रीढ़ की हड्डी को ताने रखें। इसे करते वक्त शरीर का आकार ऐसा लगेगा जैसे कि एक काल्पनिक कुर्सी पर बैठे हुए हैं। इस आसन को एक मिनट तक क्षमता अनुसार करें। इस प्रक्रिया को विपरीत दोहराकर सामान्य अवस्था में आएं और फिर कुछ देर के लिए सुखासन में बैठ जाएं।
उत्कटासन से लाभ
शरीर का संतुलन सुधारता है। रक्तसंचार को दुरुस्त करता है और चर्बी घटाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से उत्कटासन का अभ्यास करना फ़ायदेमंद है।
सुखासन
सुखासन
फर्श पर योग मैट बिछाकर बैठ जाएं। पैरों को घुटने से मोड़कर पालथी बांधकर आराम से रहें। रीढ़ की हड्डी, सिर और गर्दन को बिना खिंचाव बनाए सीधा रखें। दोनों हाथों को ध्यान की मुद्रा में घुटनों पर रखें। अब आंखें बंद कर लें और पूरे शरीर को ढीला रखें। गहरी सांस लें और छोड़ें। इस आसन को 10-15 मिनट या क्षमता के अनुसार करें।
सुखासन से लाभ
इस आसन से तनाव के लिए ज़िम्मेदार हॉर्मोन का स्राव कम करने में मदद मिलती है। इससे हृदय गति संतुलित होती है और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं कम करने में भी मदद मिल सकती है।
इसका रखें ध्यान
अगर रीढ़ की हड्डी से संबंधित कोई समस्या, घुटनों में दर्द, हर्निया या फिर अल्सर है, तो इन योगासन को बिल्कुल न करें।
लाइफस्टाइल डेस्क. हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत आवश्यक होता है। लेकिन इसके लिए संतुलित और पौष्टिक खान-पान के साथ योग भी मददगार हो सकता है।जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट केमुख्य योग अधिकारीडॉ. राजीव राजेश से जानें योग से नीरोग रहने का तरीका:
मत्स्यासन
मत्स्यासन
मत्स्यासन पीठ के बल लेट जाएं। हाथों को शरीर के बाजू में रखें, हथेलियां जमीन पर पूरी तरह जमाकर। अब धीरे-धीरे सीने को उठाएं, गर्दन का सहारा लेते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को यूं टिकाएं कि बाज़ुओं से ऊपरी पीठ तक शरीर एक कर्व बन जाए। इस स्थिति में कोहनियां और हथेलियां जमीन पर टिकी होनी चाहिए। चार-पांच सांस तक रूकें फिर धीरे-धीरे सिर को पुन: फर्श पर सीधा कर टिका लें।
इस आसन को करने का दूसरा तरीका पद्मासन की मुद्रा का भी है, जिसमें लेटने के बाद पैरों को पद्मासन में बांधा जाता है। हाथों की मदद से तस्वीर अनुसार पीठ को ऊपर उठाएं और पैरों व सिर के बल शरीर को संतुलित करें। अब बाएं पैर के पंजों को बांएं हाथ से और दाएं पैर को दाएं हाथ से पकड़ें। इस दौरान, कोहनियां और घुटने जमीन से सटे होने चाहिए। इस अवस्था में रहते हुए धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें। करीब 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें।
मत्स्यासन से लाभ
शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ेगा, फेफड़े मजबूत बनेंगे। रक्तसंचार बेहतर होगा। यह दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है। गर्दन की तकलीफ़ वाले या हृदय रोगी इसे न करें।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए (दंडासन में) बैठ जाएं। दोनों हाथों को ज़मीन पर रखें। सांस अंदर लेते हुए रीढ़ की हड्डी सीधी करें। अब तस्वीर अनुसार बायां पैर मोड़ें और पंजे को कूल्हे की ओर दाएं घुटने के पीछे ले जाएं। दाएं पैर को इस तरह मोड़कर रखें कि तलवे ऊपर की ओर खुले रहें (चित्र देखें)। अब बांयां हाथ ज़मीन पर रखते हुए शरीर को इस पर टिकाएं। वहीं दाएं हाथ की कोहनी बाएं पैर के घुटने पर रखें। अब शरीर को बांईं ओर खींचें। इस मुद्रा में 20-30 सेकंड के लिए रुकें। विपरीत दिशा में इस योगासन को दोहराएं।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन से लाभ
इससे रीढ़ की हड्डी का दबाव कम होता है। ये प्रतिरक्षा प्रणाली सहित शरीर के आंतरिक कार्यों में सुधार करता है। ख़राब पाचन शरीर में विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिंस) का कारण बनता है, जिससे संक्रमण होता है। ये आसन पाचन संबंधी समस्याएं दूर करता है। इससे पेट की चर्बी कम होती है, शरीर का लचीलापन बढ़ता है।
उत्कटासन
उत्कटासन
सीधे खड़े हो जाएं। अब शरीर और सिर दोनों को सीधा रखते हुए ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को पास-पास रखें। दोनों हाथों को सीधा रखें। अब सांस अंदर लेते हुए, दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और दोनों को आपस में जोड़ें। अब धीरे-धीरे घुटनों को सामने की ओर मोड़ें और कूल्हों को पीछे और नीचे की ओर लाएं। कूल्हों को फर्श के समानांतर लाने का प्रयास करें। गर्दन और रीढ़ की हड्डी को ताने रखें। इसे करते वक्त शरीर का आकार ऐसा लगेगा जैसे कि एक काल्पनिक कुर्सी पर बैठे हुए हैं। इस आसन को एक मिनट तक क्षमता अनुसार करें। इस प्रक्रिया को विपरीत दोहराकर सामान्य अवस्था में आएं और फिर कुछ देर के लिए सुखासन में बैठ जाएं।
उत्कटासन से लाभ
शरीर का संतुलन सुधारता है। रक्तसंचार को दुरुस्त करता है और चर्बी घटाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से उत्कटासन का अभ्यास करना फ़ायदेमंद है।
सुखासन
सुखासन
फर्श पर योग मैट बिछाकर बैठ जाएं। पैरों को घुटने से मोड़कर पालथी बांधकर आराम से रहें। रीढ़ की हड्डी, सिर और गर्दन को बिना खिंचाव बनाए सीधा रखें। दोनों हाथों को ध्यान की मुद्रा में घुटनों पर रखें। अब आंखें बंद कर लें और पूरे शरीर को ढीला रखें। गहरी सांस लें और छोड़ें। इस आसन को 10-15 मिनट या क्षमता के अनुसार करें।
सुखासन से लाभ
इस आसन से तनाव के लिए ज़िम्मेदार हॉर्मोन का स्राव कम करने में मदद मिलती है। इससे हृदय गति संतुलित होती है और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं कम करने में भी मदद मिल सकती है।
इसका रखें ध्यान
अगर रीढ़ की हड्डी से संबंधित कोई समस्या, घुटनों में दर्द, हर्निया या फिर अल्सर है, तो इन योगासन को बिल्कुल न करें।
हेल्थ डेस्क. वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण से बचना है तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाइए। आयुर्वेद में मसालों से इम्युनिटी बढ़ाने के कई तरीके बताए गए हैं। किचन में मौजूद मसालों से बनी चाय भी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। वीडियो में शेफ संजीव कपूर बता रहे हैं इसे घर पर कैसे बनाएं।
क्या चाहिए
4 छोटी इलायची, 2 लौंग, 1 इंच दालचीनी, 1 कालीमिर्च, एक चुटकी सौंफ, थोड़ी सी अदरक, दूध, चीनी और पानी।
ऐसे बनाएं
सारे मसालों को कूट लें। अदरक को कूटकर अलग रखें। अब डेढ़कप पानी गर्म करें। इसमें एक छोटा चम्मच चायपत्ती डालें। कुटे हुए मसाले डालें। जब पानी खौलने लगे तो अदरक डालें। चाय 3-4 मिनट तक खौलने दें। अब इसमें दूध और चीनी डालें। लीजिए तैयार है चाय।
वीमेन डेस्क. मलेशियाई सरकार कोरोनावायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन के निर्देश जारी कर रही है। लेकिन मलेशिया के महिला मंत्रालय कानया कैंपेन #WomenPreventCOVID19 विवादों में आ गया है। महिला मंत्रालय ने सलाह दी है कि लॉकडाउन के दौरान महिलाएं घर परमेकअप करें लेकिन पतियों को परेशान न करें। देशभर में महिलाएं इस लिंगभेद टिप्पणी की आलोचना कर रही हैं।
लॉकडाउन में डोरेमोन की आवाज निकालें महिलाएं
मलेशिया का महिला मंत्रालय फेसबुक और इंस्टाग्राम पर महिलाओं को टिप्स दे रहा है कि वे लॉकडाउन के दौरान कैसे रहें। इसी कड़ी में मंत्रालय ने एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, लॉकडाउन के दौरान महिलाएं पतियों को परेशान न करें। मंत्रालय का लक्ष्य लॉकडाउन के दौरान घरेलू कलह के मामलों पर रोक लगाना था। इसके बाद एक और पोस्ट में लिखा, लॉकडाउन में महिलाओं को फेमस कार्टून कैरेक्टर डोरेमोन की आवाज निकालनी चाहिए। इस दौरान साफ कपड़ों में रहें। किचन और कमरों को साफ रखें।
सोशल मीडिया से हटाईं पोस्ट
विवाद बढ़ने पर मंत्रालय ने सोशल मीडिया से कुछ पोस्ट हटाईं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, अच्छे से तैयार और मेकअप करके कैसे कोरोनावायरस से बचाव कर सकते हैं, जरा हमें बताएं। एक दूसरे यूजर ने लिखा, ये 2020 है, आगे बढ़ें और महिलाओं से जुड़े जरूरी मुद्दों पर ध्यान दें।
जेंडर असमानता को बढ़ावा दे रही पोस्ट
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर महिलाओं का कहना है कि इस तरह की पोस्ट जेंडर असमानता को बढ़ावा दे रही हैं। एक यूजर लिखती हैं कि घरेलू हिंसा से कैसे निपटें मंत्रालय को इस पर अपनी सलाह जारी करनी चाहिए।
लॉकडाउन में शोषण के मामले बढ़े
मलेशिया में महिलाओं से जुड़े घरेलू हिंसा और शोषण मामले बढ़े हैं। मलेशिया में घरेलू हिंसा से जूझने वाली महिलाओं के बनाई गई हेल्पलाइनके आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन की शुरुआत (18 मार्च) से अब तक ऐसे 50 मामलों में बढोतरी हुई है।
वीमेन डेस्क. मलेशियाई सरकार कोरोनावायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन के निर्देश जारी कर रही है। लेकिन मलेशिया के महिला मंत्रालय कानया कैंपेन #WomenPreventCOVID19 विवादों में आ गया है। महिला मंत्रालय ने सलाह दी है कि लॉकडाउन के दौरान महिलाएं घर परमेकअप करें लेकिन पतियों को परेशान न करें। देशभर में महिलाएं इस लिंगभेद टिप्पणी की आलोचना कर रही हैं।
लॉकडाउन में डोरेमोन की आवाज निकालें महिलाएं
मलेशिया का महिला मंत्रालय फेसबुक और इंस्टाग्राम पर महिलाओं को टिप्स दे रहा है कि वे लॉकडाउन के दौरान कैसे रहें। इसी कड़ी में मंत्रालय ने एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, लॉकडाउन के दौरान महिलाएं पतियों को परेशान न करें। मंत्रालय का लक्ष्य लॉकडाउन के दौरान घरेलू कलह के मामलों पर रोक लगाना था। इसके बाद एक और पोस्ट में लिखा, लॉकडाउन में महिलाओं को फेमस कार्टून कैरेक्टर डोरेमोन की आवाज निकालनी चाहिए। इस दौरान साफ कपड़ों में रहें। किचन और कमरों को साफ रखें।
सोशल मीडिया से हटाईं पोस्ट
विवाद बढ़ने पर मंत्रालय ने सोशल मीडिया से कुछ पोस्ट हटाईं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, अच्छे से तैयार और मेकअप करके कैसे कोरोनावायरस से बचाव कर सकते हैं, जरा हमें बताएं। एक दूसरे यूजर ने लिखा, ये 2020 है, आगे बढ़ें और महिलाओं से जुड़े जरूरी मुद्दों पर ध्यान दें।
जेंडर असमानता को बढ़ावा दे रही पोस्ट
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर महिलाओं का कहना है कि इस तरह की पोस्ट जेंडर असमानता को बढ़ावा दे रही हैं। एक यूजर लिखती हैं कि घरेलू हिंसा से कैसे निपटें मंत्रालय को इस पर अपनी सलाह जारी करनी चाहिए।
लॉकडाउन में शोषण के मामले बढ़े
मलेशिया में महिलाओं से जुड़े घरेलू हिंसा और शोषण मामले बढ़े हैं। मलेशिया में घरेलू हिंसा से जूझने वाली महिलाओं के बनाई गई हेल्पलाइनके आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन की शुरुआत (18 मार्च) से अब तक ऐसे 50 मामलों में बढोतरी हुई है।
लाइफस्टाइल डेस्क. देश में 61 फीसदी लोग मानते हैं कि लॉकडाउन के दौरान महंगाई बढ़ी है और 83 फीसदी लोगों को मोदी सरकार पर भरोसा है कि यह महामारी काे संभालने में कामयाबहोगी। 46.7 फीसदी लोगों को लगता है कि कोरोनावायरस का प्रकोप लोगों के लिए प्रकृति का एक संदेश है। ये बातें आईएएनएस सी-वोटर के हालिया सर्वे में सामने आई हैं। टेलीफोनिक साक्षात्कार के आधार पर लोगों की राय जानी गईं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद 26 और 27 मार्च को यह सर्वे किया गया था।
प्रकृति के संदेश वाली बात30 % ने खारिज की
सर्वे में लोगों से पूछा गया कि कोरोनावायरस का फैलना और पूरी व्यवस्था का अस्थिर हो जाना, क्या यह प्रकृति की ओर से एक संदेश है। इस पर 46.7 फीसदी लोगों ने कहा, हां, यह प्रकृति की ओर से एक संदेश है। वहीं 30.6 फीसदी लोगों ने इस बात को खारिज किया है। 22.7 फीसदी लोगों ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से मना किया।
28 फीसदी ने माना महंगाई नहीं बढ़ी
जब लोगों से यह पूछा गया कि लॉकडाउन के दौरान महंगाई बढ़ी तो 61 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि हां, ऐसा हुआ है। वहीं, 28.7 फीसदी लोगों की राय है, महंगाई नहीं बढ़ी।
74फीसदी लोगों को मीडिया से मिल रहीं कोरोना अपडेट
कोरोनावायरस की जानकारी कैसे मिल रही, इस पर 74.1 प्रतिशत लोगों का कहना कि वायरस से जुड़ी जानकारी और अपडेट मीडिया से मिल रहीं। 18.5 फीसदी लोग सोशल मीडिया और 5.2 प्रतिशत सामुदायिक जानकारी पर निर्भर हैं। 67.9 फीसदी लोगों के लिए जानकारी का जरिया टेलीविजन हैं वहीं मात्र 6.2 फीसदी लोग ही समाचार पत्रों से जानकारी ले रहे हैं।
94 फीसदी ने माना उनमें फ्लू के लक्षण नहीं
आईएएनएस सी-वोटर गैलप के सर्वे में 94 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनमें फ्लू के लक्षण जैसेसर्दी-खांसी या बुखारनहीं हैं। वहीं 27 फीसदी लोगों ने माना कि वे घरों में रह रहे हैं।
लाइफस्टाइल डेस्क. कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए हमने हाथों को अच्छी तरह से धोना तो सीख लिया पर अपने दैनिक जीवन में हम स्वच्छता का कितना ध्यान रखते हैं इसकी जांच भी कर ही लेते हैं। घर पर भी, दफ़्तर में और बाहरी जीवन में भी, देखिए कि हम कीटाणुओ से कितने दूर या कितने पास हैं-
घर का टीकाकरण
हमें घर जितना साफ लगता है असल में ये उतना साफ होता नहीं है। घर के ऐसे कई हिस्से और चीज़ें हैं जिन्हें हर कोई बार-बार छूता है। ऐसे में इन पर कीटाणुओं का होना आम बात है। इन्हें हम हर तरह के हाथों से छूते हैं और वही हाथ अपने चेहरे पर लगाते हैं या उन्हीं हाथों से खा लेते हैं। इनमें मौजूद कीटाणु हमें बीमार बना सकते हैं।
यहां छुपते हैं कीटाणु
घर के स्विच बोर्ड, दरवाजों के हैंडल, वॉशबेसिन,पोछे के कपड़े, चादरें, तकिए के खोल, तौलिए, कंघी, घर के कोने, टीवी या एसी के रिमोट कंट्रोल, पानी की बोतल, फ्रिज और उसका हैंडल, सोफे, फर्श से कुछ ऊपर की दीवारें, सीढ़ियों या बालकनी की रेलिंग, टेलीफोन आदि में कीटाणु छुपे रहते हैं।
संक्रमण और बीमारियां
घर और शरीर की ठीक से सफाई न की जाए तो संक्रमण और बीमरियां जकड़ सकती हैं। हल्के से लेकर तेज बुखार, खांसी, ज़ुकाम, सिरदर्द, गले में खराश, टाइफॉइड जैसी दिक्कत हो सकती हैं।
ऐसे सफाई रखें
बिस्तर की चादरें, सोफे के कवर और तकिया के खोल हर हफ्ते धो दें। इन्हें गर्म पानी में साफ करें। तकियों को हर दो साल में बदल दें।
घर के हर सदस्य के लिए अलग-अलग तौलिया रखें। रोजाना इस्तेमाल करने के बाद इन्हें धोकर धूप और हवा में सुखाएं। इसके लिए हर सदस्य दो-दो तौलिया रख सकता है।
वॉशबेसिन को रोजाना साफ करने की कोशिश करें। अगर हाथ पोछने के लिए टिशू रख रहे हैं तो इसे बंद होल्डर में रखें।
बाहर से आकर जूते और चप्पल घर के अंदर न लेकर आएं। अगर घर पर चप्पल पहनते हैं तो इसे घर के लिए ही रखें। हर दो-तीन दिन में इसको साफ करें।
रोजाना कीटाणुनाशक पदार्थ से घर साफ करें। दरवाजों की कुंडी, स्विच, प्लग आदि भी इससे रोजाना साफ करें।
सलाह
घर की सफाई के दौरान मुंह और नाक को ढककर रखें और आंखों पर चश्मा लगाएं ।
हाथों में दस्ताने पहनें। सफाई के बाद गुनगुने पानी से नहाएं ।
बंद डस्टबबन का इस्तेमाल करें। कूडते को रोजाना फेंकते और डस्टबिन को साफ रखें।
पोछे का कपड़ा इस्तेमाल करने के बाद गर्म पानी से धोएं । ऐसे पोछे का इस्तेमाल करने की कोशिश करें इनमें हाथ न लगाना पड़े जैसे कि मॉप।
कंघा, रिमोट,दरवाजों का हैंडल आदि छूने के बाद हाथों को साबुन से साफ करें।
कीटाणुमुक्त रसोई
रसोई की साफ-सफाई न रखने पर यहां भी कीटाणु अपना ढेरा जमाने लगते हैं, जो कई तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए रसोई की सफाई बेहद अहम हैं। इसके लिए एक दिन नहीं बल्कि रोज की आदत बनानी होगी।
यहां छुपते हैं कीटाणु
रसोई की वह सतह जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आती है, जैसे प्लेटफॉर्म, सिंक टॉप, स्टोव, किचन के तौलिए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि ऐसी जगहें कीटाणुओं का घर बन सकती हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि टॉयलेट या कचरे के डिब्बे की तुलना में किचन सिंक में अधिक बैक्टीरिया होते हैं।
संक्रमण और बीमारियां
रसोई की सफाई में अनदेखी या लापरवाही कॉकरोच,चींटियों और चूहों को आकर्षित करती है जो बीमारियों को न्योता है। संक्रमित भोजन से फूड पॉइजनिंग, पेट में संक्रमण और भी कई बीमारियां हो सकती हैं।
ऐसे रखें सफाई
भोजन बनाने और खाने से पहले अपने हाथ धोएं। भोजन की तैयारी से पहले भी हाथों को सही तरह से धोना जरूरी है। डस्टबिन का उपयोग करने के बाद हाथों को धोएं।
खाना पकाने वाले स्थान को साफ रखें। सब्जी और अन्य खाद्य पदार्थों को काटने के बाद स्थान को साफ़ करें व चॉपिंग बोर्ड को धोकर रखें। बचे हुए भोजन के कण और गीलापन मक्खियों और कीड़ों को आकर्षित करते हैं।
सिंक और काउंटर / स्लैब जैसे क्षेत्रों में हर दिन कुछ हल्के एंटी-बैक्टीरियल वाइप्स या साफ कपड़े में कीटाणुनाशक द्रव डालकर साफ करें। फ्रिज, अवन या माइक्रोवेव जैसे उपकरणों को सप्ताह में कम से कम एक बार क्लीनर से साफ करें।
बर्तन पोछने वाले कपड़े को काटीणुनाशक द्रव अच्छी तरह से साफ करें। हालांकि, समय-समय पर डिश क्लॉथ और स्पंज को बदलते रहना चाहिए। दिन में एक बार फ़र्श की अच्छी तरह से सफाई बैक्टीरिया के विकास को कम कर सकती है।
सलाह
फ्रिज में खाने की वस्तु रखने से पहले ये सुनिश्चित करें कि भोजन का तापमान कमरे के तापमान के बराबर या उससे कम हो। गर्म भोजन को फ्रिज में रखने से भोजन समान रूप से ठंड़ा नहीं होता है और फूड पॉइिनिंग का कारण बन सकता है।
भोजन को फ्रिज में रखते समय ढकें , खुलते में बचा हुआ भोजन बैक्टीररया की चपेट में आता है।
सब्जी और मांसाहारी वस्तुओं के लिए अलग- अलग चॉपिंग बोर्ड का उपयोग करें। इस्तेमाल के बाद इन्हे धोएं।
स्वच्छ हो बाथरूम
बाथरूम घर का वो हिस्सा है जिसका साफ रहना बहुत जरूरी है। बाथरूम में मौजूद नल, वॉशबेसिन, फ्लश बटन, साबुन या हैंड वॉश की बोतल आदि पर घर के सभी सदस्य हाथ लगाते हैं। इसमें मौजूद कीटाणु एक हाथ से दूसरे हाथ में फैलते हैं। हाथों के ही जरिए हम इन्हें बाथरूम से रसोई तक ले जाते हैं। इसलिए इसकी सफाई पर भी गौर फरमाएं।
यहां हैं कीटाणु
जिस बाथटब में आप नहाते हैं, उसी बाथटब में हजारों कीटाणु मौजूद होते हैं। वॉशबेसिन, नल, फर्श, टॉयलेट सीट, हैंडवॉश की बोतल, साबुन, टूथब्रश, दरवाजे पर टंगे कपड़े व अन्य रखा सामान आदि भी कीटाणुयुक्त होते हैं।
बीमारियां
गंदे शौचालय से सबसे ज्यादा संक्रमण होने की आशंका होती है। खासतौर पर महिलाएं इस संक्रमण की चपेट में आ सकती हैं जिसके कारण गर्भावस्था, मासिक धर्म या नियमित रूप से रोजमर्रा की जिंदगी में जटिलताएं हो सकती हैं। साथ ही आंत का संक्रमण, फेफड़े और त्वचा में संक्रमण, विषाणु संक्रमण और यौन रोग जैसी भयानक बीमारी होने का भी ख़तरा बना रहता है। अगर आप गंदी टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करेंगे, तो आपको दाद, क्लैमाइडिया या एसटीडी, यूटीआई जैसी बीमारियां होने का खतरा बन सकता है।
ऐसे करें सफाई
हर सदस्य नहाने के बाद बाथरूम साफ करके निकले तो भी इसे साफ रखा जा सकता है।
टॉयलेट सीट के पास रखे टूथब्रश में काफी कीटाणु छुपे होते हैं। नमी के कारण इनमें कीटाणु पनपते हैं जो एक बार में पानी से भी साफ नहीं होते। इसलिए वही ब्रश इस्तेमाल करें शिसमें ढक्कन लगा हो। ब्रश गीला न हो इसका भी ध्यान रखें। या फिर इसे बाथरूम में रखने से बचें।
बाथरूम के लिए एक अलग सेचप्पल रखें।
वॉशबेसिन पर रखा हैंडवॉश और साबुन भी रोज साफ करते रहें।
वॉशबेसिन और नल रोजाना डिटर्जेंट से साफ करें। गीले साबुन में कीटाणु जल्दी पनपते हैं, इसलिए खुली साबुनदानी रखें।
टॉयलेट का ढक्कन लनाने के बाद ही फ्लश करें। एक शोध के अनुसार टॉयलेट का ढक्कन खोलकर फ्लश करने से इसमें मौजूद जिवाणु और कीटाणु हवा में रह जाते हैं जो कि छह फीट तक फैलने में सक्षम होते हैं। आसपास की सतहों पर भी ये फैल सकते हैं।
फर्श और टॉयलेट सीट, फ्लश बटन, नल शिन्हें रोज छूते हैं, इन्हें गर्म पानी और डिटर्जेंट से साफ करें। बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखें।
साफ-सुथरी हो डेस्क
दफ़्तर में जिस डेस्क पर हम काम करते हैं, उसमें कई कीटाणु मौजूद होते हैं। इसके अलावा भी कई चीजें हैं जिनमें दफ़्तर के सभी कर्मचारियों के हाथ लगते हैं। ऐसे में इन पर कीटाणु रहना आम बात है।
यहां हैं कीटाणु
दफ़्तर की मेज (डेस्क) की सफाई के लिए इस्तेमाल किए गए कपड़े से पूरा दफ्तर साफ किया जाता है जिसके कारण इसमें अनगिनत कीटाणु हो जाते हैं। इसी गंदे कपड़े के कारण डेस्क पर कीटाणुओं की तादाद बढ़ जाती है। सबसे अधिक गंदगी कम्प्यूटर के की-बोर्ड में जमा होती है। जिन हाथों से की- बोर्ड इस्तेमाल करते हैं, उन्हीं हाथों से अपना चेहरा समेत पानी की बोतल, पेन, कम्प्यूटर, माउस, कुर्सी आदि भी छूते हैं।
यहां भी छुपे हैं
दरवाजों के हैंडल और स्विच बोर्ड को सभी कर्मचारी हाथ लगाते हैं, जिससे अनगिनत कीटाणु इस पर चिपक जाते हैं। एक हाथ से दूसरे हाथ पर कीटाणु पहुंच जाते हैं और उन्हीं हाथों से हम की-बोर्ड, माउस, कप, पैन आदि छू लेते हैं।
संक्रमण का कारण है
इससे सर्दी, ज़ुकाम, हल्के से लेकर तेज़ बुखार, खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, टाइफॉइड, पेट दर्द, फूड पॉइज़निंग आदि बीमारियां जन्म लेती हैं।
ये सावधानियां बरतें
अपनी डेस्क खुद साफ करें। इसके लिए साफ कपड़े में थोड़ा-सा विनेगर और पानी लेकर इस्तेमाल करें।
डेस्क साफ करने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
कम्प्यूटर का माउस, की-बोर्ड और बटनों को सैनिटाइजर से साफ करें। पानी की बोतल रोज साफ करें।
डेस्क पर खाना न खाएं। भोजन के तिनके डेस्क या की-बोर्ड पर छूट जाते हैं जिससे कीटाणु पनपते हैं।
पेन जैसी चीज़ों को मुंह में न लें।
सलाह
दरवाजे का हैंडल, कॉफी मशीन, फिल्टर, स्विच बोर्ड छूने के बाद हाथ धोएं ।
अधिक सावधानी के लिए टिशू से दरवाजे का हैंडिल पकड सकते हैं।
चाय आदि का झूठा कप अपनी डेस्क पर न रखें।
कूडेदान का उपयोग सिर्फ कचा डालने के लिए करें, थूंकने या हाथ धोने के लिए नहीं।
सफाई कर्मचारी के लिए दरवाजा खोल सकते हैं त़ाकि उनके हाथों की गंदगी हैंडिल पर न आए। इस बारे में उनको सचेत कर सकते हैं।
दफ़्तर में भी रह ख्याल
दफ़्तर में कार्य करने वाले दिन का अधिकतर समय वहां बिताते हैं। ऐसे में दफ़्तर के बाथरूम का इस्तेमाल करना सामान्य है। इस दौरान साफ-सफाई का ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। जरा-सी लापरवाही कई तरह के संक्रमण पैदा कर देती है। इसलिए सफाई का ख्याल रखना बेहद जरूरी है और इसे आदत में शामिल करना उससे भी जरूरी है।
संक्रमण के कारण
टॉयलेट को फ्लश किए बिना ही इस्तेमाल करना, हाथ धोए बिना फ्लश बटन दबाना, फ्लश करके अच्छी तरह से हाथ न धोना, वॉशरूम के तौलिए से हाथ पोंछना। इसके अलावा दरवाजे हैंडल को दिन में कई बार लोगों द्वारा छुआ जाता है। इन सभी चीजों का इस्तेमाल करने वाले लोग बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं और संक्रमण का शिकार हो जाते हैं।
स्वास्थ्य समस्याएं
टॉयलेट सीट पर सबसे ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं, जिनके संपर्क में आने पर सिरदर्द, त्वचा की बीमारियां, श्वसन समस्याओं से आसानी से प्रभावित हो सकते हैं। महिलाओं में यूटीआई यानी पेशाब में संक्रमण हो जाता है। महिलाओं में यह समस्या 20 से 40 की उम्र के बीच अधिक देखने को मिलती है। इससे उनकी किडनी पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।
सावधानियां और बचाव
टॉयलेट सीट को रोज साफ किया जाना चाहिए।
टॉयलेट के हैंडल, फ्लश बटन, दरवाजे के हैंडल, नल व लाइट की बटनों को कीटाणुनाशक वाइप से साफ करना चाहिए।
बाथरूम में हाथ साफ करने वाला तौलिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आता है। यही वजह है कि यह तौलिया सबसे अधिक गंदा होता है। इसलिए पेपर नैपकिन का इस्तेमाल करें।
इलेक्ट्रिक हैंड ड्रायर से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए नैपकिन से हाथ पोछें।
हाथों को अच्छी तरह से साफ करने के बाद ही टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करें।
सलाह
बाथरूम इस्तेमाल करने से पहले और बाद में फ्लश करना न भूलें।
बाथरूम के इस्तेम़ाल के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं ।
बाथरूम से बाहर निकलने के बाद हाथों से नाक,आंख को छूने से बचें।
संक्रमण से बचने के लिए कार्य करने के दौरान बीच-बीच में सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
महिलाओं को बथरूम जाने से पहले फ्लश करके टॉयलेट सीट पर पानी डालकर सूखे नैपकिन से साफ करना चाहिए।
लाइफस्टाइल डेस्क. कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए हमने हाथों को अच्छी तरह से धोना तो सीख लिया पर अपने दैनिक जीवन में हम स्वच्छता का कितना ध्यान रखते हैं इसकी जांच भी कर ही लेते हैं। घर पर भी, दफ़्तर में और बाहरी जीवन में भी, देखिए कि हम कीटाणुओ से कितने दूर या कितने पास हैं-
घर का टीकाकरण
हमें घर जितना साफ लगता है असल में ये उतना साफ होता नहीं है। घर के ऐसे कई हिस्से और चीज़ें हैं जिन्हें हर कोई बार-बार छूता है। ऐसे में इन पर कीटाणुओं का होना आम बात है। इन्हें हम हर तरह के हाथों से छूते हैं और वही हाथ अपने चेहरे पर लगाते हैं या उन्हीं हाथों से खा लेते हैं। इनमें मौजूद कीटाणु हमें बीमार बना सकते हैं।
यहां छुपते हैं कीटाणु
घर के स्विच बोर्ड, दरवाजों के हैंडल, वॉशबेसिन,पोछे के कपड़े, चादरें, तकिए के खोल, तौलिए, कंघी, घर के कोने, टीवी या एसी के रिमोट कंट्रोल, पानी की बोतल, फ्रिज और उसका हैंडल, सोफे, फर्श से कुछ ऊपर की दीवारें, सीढ़ियों या बालकनी की रेलिंग, टेलीफोन आदि में कीटाणु छुपे रहते हैं।
संक्रमण और बीमारियां
घर और शरीर की ठीक से सफाई न की जाए तो संक्रमण और बीमरियां जकड़ सकती हैं। हल्के से लेकर तेज बुखार, खांसी, ज़ुकाम, सिरदर्द, गले में खराश, टाइफॉइड जैसी दिक्कत हो सकती हैं।
ऐसे सफाई रखें
बिस्तर की चादरें, सोफे के कवर और तकिया के खोल हर हफ्ते धो दें। इन्हें गर्म पानी में साफ करें। तकियों को हर दो साल में बदल दें।
घर के हर सदस्य के लिए अलग-अलग तौलिया रखें। रोजाना इस्तेमाल करने के बाद इन्हें धोकर धूप और हवा में सुखाएं। इसके लिए हर सदस्य दो-दो तौलिया रख सकता है।
वॉशबेसिन को रोजाना साफ करने की कोशिश करें। अगर हाथ पोछने के लिए टिशू रख रहे हैं तो इसे बंद होल्डर में रखें।
बाहर से आकर जूते और चप्पल घर के अंदर न लेकर आएं। अगर घर पर चप्पल पहनते हैं तो इसे घर के लिए ही रखें। हर दो-तीन दिन में इसको साफ करें।
रोजाना कीटाणुनाशक पदार्थ से घर साफ करें। दरवाजों की कुंडी, स्विच, प्लग आदि भी इससे रोजाना साफ करें।
सलाह
घर की सफाई के दौरान मुंह और नाक को ढककर रखें और आंखों पर चश्मा लगाएं ।
हाथों में दस्ताने पहनें। सफाई के बाद गुनगुने पानी से नहाएं ।
बंद डस्टबबन का इस्तेमाल करें। कूडते को रोजाना फेंकते और डस्टबिन को साफ रखें।
पोछे का कपड़ा इस्तेमाल करने के बाद गर्म पानी से धोएं । ऐसे पोछे का इस्तेमाल करने की कोशिश करें इनमें हाथ न लगाना पड़े जैसे कि मॉप।
कंघा, रिमोट,दरवाजों का हैंडल आदि छूने के बाद हाथों को साबुन से साफ करें।
कीटाणुमुक्त रसोई
रसोई की साफ-सफाई न रखने पर यहां भी कीटाणु अपना ढेरा जमाने लगते हैं, जो कई तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए रसोई की सफाई बेहद अहम हैं। इसके लिए एक दिन नहीं बल्कि रोज की आदत बनानी होगी।
यहां छुपते हैं कीटाणु
रसोई की वह सतह जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आती है, जैसे प्लेटफॉर्म, सिंक टॉप, स्टोव, किचन के तौलिए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि ऐसी जगहें कीटाणुओं का घर बन सकती हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि टॉयलेट या कचरे के डिब्बे की तुलना में किचन सिंक में अधिक बैक्टीरिया होते हैं।
संक्रमण और बीमारियां
रसोई की सफाई में अनदेखी या लापरवाही कॉकरोच,चींटियों और चूहों को आकर्षित करती है जो बीमारियों को न्योता है। संक्रमित भोजन से फूड पॉइजनिंग, पेट में संक्रमण और भी कई बीमारियां हो सकती हैं।
ऐसे रखें सफाई
भोजन बनाने और खाने से पहले अपने हाथ धोएं। भोजन की तैयारी से पहले भी हाथों को सही तरह से धोना जरूरी है। डस्टबिन का उपयोग करने के बाद हाथों को धोएं।
खाना पकाने वाले स्थान को साफ रखें। सब्जी और अन्य खाद्य पदार्थों को काटने के बाद स्थान को साफ़ करें व चॉपिंग बोर्ड को धोकर रखें। बचे हुए भोजन के कण और गीलापन मक्खियों और कीड़ों को आकर्षित करते हैं।
सिंक और काउंटर / स्लैब जैसे क्षेत्रों में हर दिन कुछ हल्के एंटी-बैक्टीरियल वाइप्स या साफ कपड़े में कीटाणुनाशक द्रव डालकर साफ करें। फ्रिज, अवन या माइक्रोवेव जैसे उपकरणों को सप्ताह में कम से कम एक बार क्लीनर से साफ करें।
बर्तन पोछने वाले कपड़े को काटीणुनाशक द्रव अच्छी तरह से साफ करें। हालांकि, समय-समय पर डिश क्लॉथ और स्पंज को बदलते रहना चाहिए। दिन में एक बार फ़र्श की अच्छी तरह से सफाई बैक्टीरिया के विकास को कम कर सकती है।
सलाह
फ्रिज में खाने की वस्तु रखने से पहले ये सुनिश्चित करें कि भोजन का तापमान कमरे के तापमान के बराबर या उससे कम हो। गर्म भोजन को फ्रिज में रखने से भोजन समान रूप से ठंड़ा नहीं होता है और फूड पॉइिनिंग का कारण बन सकता है।
भोजन को फ्रिज में रखते समय ढकें , खुलते में बचा हुआ भोजन बैक्टीररया की चपेट में आता है।
सब्जी और मांसाहारी वस्तुओं के लिए अलग- अलग चॉपिंग बोर्ड का उपयोग करें। इस्तेमाल के बाद इन्हे धोएं।
स्वच्छ हो बाथरूम
बाथरूम घर का वो हिस्सा है जिसका साफ रहना बहुत जरूरी है। बाथरूम में मौजूद नल, वॉशबेसिन, फ्लश बटन, साबुन या हैंड वॉश की बोतल आदि पर घर के सभी सदस्य हाथ लगाते हैं। इसमें मौजूद कीटाणु एक हाथ से दूसरे हाथ में फैलते हैं। हाथों के ही जरिए हम इन्हें बाथरूम से रसोई तक ले जाते हैं। इसलिए इसकी सफाई पर भी गौर फरमाएं।
यहां हैं कीटाणु
जिस बाथटब में आप नहाते हैं, उसी बाथटब में हजारों कीटाणु मौजूद होते हैं। वॉशबेसिन, नल, फर्श, टॉयलेट सीट, हैंडवॉश की बोतल, साबुन, टूथब्रश, दरवाजे पर टंगे कपड़े व अन्य रखा सामान आदि भी कीटाणुयुक्त होते हैं।
बीमारियां
गंदे शौचालय से सबसे ज्यादा संक्रमण होने की आशंका होती है। खासतौर पर महिलाएं इस संक्रमण की चपेट में आ सकती हैं जिसके कारण गर्भावस्था, मासिक धर्म या नियमित रूप से रोजमर्रा की जिंदगी में जटिलताएं हो सकती हैं। साथ ही आंत का संक्रमण, फेफड़े और त्वचा में संक्रमण, विषाणु संक्रमण और यौन रोग जैसी भयानक बीमारी होने का भी ख़तरा बना रहता है। अगर आप गंदी टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करेंगे, तो आपको दाद, क्लैमाइडिया या एसटीडी, यूटीआई जैसी बीमारियां होने का खतरा बन सकता है।
ऐसे करें सफाई
हर सदस्य नहाने के बाद बाथरूम साफ करके निकले तो भी इसे साफ रखा जा सकता है।
टॉयलेट सीट के पास रखे टूथब्रश में काफी कीटाणु छुपे होते हैं। नमी के कारण इनमें कीटाणु पनपते हैं जो एक बार में पानी से भी साफ नहीं होते। इसलिए वही ब्रश इस्तेमाल करें शिसमें ढक्कन लगा हो। ब्रश गीला न हो इसका भी ध्यान रखें। या फिर इसे बाथरूम में रखने से बचें।
बाथरूम के लिए एक अलग सेचप्पल रखें।
वॉशबेसिन पर रखा हैंडवॉश और साबुन भी रोज साफ करते रहें।
वॉशबेसिन और नल रोजाना डिटर्जेंट से साफ करें। गीले साबुन में कीटाणु जल्दी पनपते हैं, इसलिए खुली साबुनदानी रखें।
टॉयलेट का ढक्कन लनाने के बाद ही फ्लश करें। एक शोध के अनुसार टॉयलेट का ढक्कन खोलकर फ्लश करने से इसमें मौजूद जिवाणु और कीटाणु हवा में रह जाते हैं जो कि छह फीट तक फैलने में सक्षम होते हैं। आसपास की सतहों पर भी ये फैल सकते हैं।
फर्श और टॉयलेट सीट, फ्लश बटन, नल शिन्हें रोज छूते हैं, इन्हें गर्म पानी और डिटर्जेंट से साफ करें। बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखें।
साफ-सुथरी हो डेस्क
दफ़्तर में जिस डेस्क पर हम काम करते हैं, उसमें कई कीटाणु मौजूद होते हैं। इसके अलावा भी कई चीजें हैं जिनमें दफ़्तर के सभी कर्मचारियों के हाथ लगते हैं। ऐसे में इन पर कीटाणु रहना आम बात है।
यहां हैं कीटाणु
दफ़्तर की मेज (डेस्क) की सफाई के लिए इस्तेमाल किए गए कपड़े से पूरा दफ्तर साफ किया जाता है जिसके कारण इसमें अनगिनत कीटाणु हो जाते हैं। इसी गंदे कपड़े के कारण डेस्क पर कीटाणुओं की तादाद बढ़ जाती है। सबसे अधिक गंदगी कम्प्यूटर के की-बोर्ड में जमा होती है। जिन हाथों से की- बोर्ड इस्तेमाल करते हैं, उन्हीं हाथों से अपना चेहरा समेत पानी की बोतल, पेन, कम्प्यूटर, माउस, कुर्सी आदि भी छूते हैं।
यहां भी छुपे हैं
दरवाजों के हैंडल और स्विच बोर्ड को सभी कर्मचारी हाथ लगाते हैं, जिससे अनगिनत कीटाणु इस पर चिपक जाते हैं। एक हाथ से दूसरे हाथ पर कीटाणु पहुंच जाते हैं और उन्हीं हाथों से हम की-बोर्ड, माउस, कप, पैन आदि छू लेते हैं।
संक्रमण का कारण है
इससे सर्दी, ज़ुकाम, हल्के से लेकर तेज़ बुखार, खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, टाइफॉइड, पेट दर्द, फूड पॉइज़निंग आदि बीमारियां जन्म लेती हैं।
ये सावधानियां बरतें
अपनी डेस्क खुद साफ करें। इसके लिए साफ कपड़े में थोड़ा-सा विनेगर और पानी लेकर इस्तेमाल करें।
डेस्क साफ करने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
कम्प्यूटर का माउस, की-बोर्ड और बटनों को सैनिटाइजर से साफ करें। पानी की बोतल रोज साफ करें।
डेस्क पर खाना न खाएं। भोजन के तिनके डेस्क या की-बोर्ड पर छूट जाते हैं जिससे कीटाणु पनपते हैं।
पेन जैसी चीज़ों को मुंह में न लें।
सलाह
दरवाजे का हैंडल, कॉफी मशीन, फिल्टर, स्विच बोर्ड छूने के बाद हाथ धोएं ।
अधिक सावधानी के लिए टिशू से दरवाजे का हैंडिल पकड सकते हैं।
चाय आदि का झूठा कप अपनी डेस्क पर न रखें।
कूडेदान का उपयोग सिर्फ कचा डालने के लिए करें, थूंकने या हाथ धोने के लिए नहीं।
सफाई कर्मचारी के लिए दरवाजा खोल सकते हैं त़ाकि उनके हाथों की गंदगी हैंडिल पर न आए। इस बारे में उनको सचेत कर सकते हैं।
दफ़्तर में भी रह ख्याल
दफ़्तर में कार्य करने वाले दिन का अधिकतर समय वहां बिताते हैं। ऐसे में दफ़्तर के बाथरूम का इस्तेमाल करना सामान्य है। इस दौरान साफ-सफाई का ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। जरा-सी लापरवाही कई तरह के संक्रमण पैदा कर देती है। इसलिए सफाई का ख्याल रखना बेहद जरूरी है और इसे आदत में शामिल करना उससे भी जरूरी है।
संक्रमण के कारण
टॉयलेट को फ्लश किए बिना ही इस्तेमाल करना, हाथ धोए बिना फ्लश बटन दबाना, फ्लश करके अच्छी तरह से हाथ न धोना, वॉशरूम के तौलिए से हाथ पोंछना। इसके अलावा दरवाजे हैंडल को दिन में कई बार लोगों द्वारा छुआ जाता है। इन सभी चीजों का इस्तेमाल करने वाले लोग बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं और संक्रमण का शिकार हो जाते हैं।
स्वास्थ्य समस्याएं
टॉयलेट सीट पर सबसे ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं, जिनके संपर्क में आने पर सिरदर्द, त्वचा की बीमारियां, श्वसन समस्याओं से आसानी से प्रभावित हो सकते हैं। महिलाओं में यूटीआई यानी पेशाब में संक्रमण हो जाता है। महिलाओं में यह समस्या 20 से 40 की उम्र के बीच अधिक देखने को मिलती है। इससे उनकी किडनी पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।
सावधानियां और बचाव
टॉयलेट सीट को रोज साफ किया जाना चाहिए।
टॉयलेट के हैंडल, फ्लश बटन, दरवाजे के हैंडल, नल व लाइट की बटनों को कीटाणुनाशक वाइप से साफ करना चाहिए।
बाथरूम में हाथ साफ करने वाला तौलिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आता है। यही वजह है कि यह तौलिया सबसे अधिक गंदा होता है। इसलिए पेपर नैपकिन का इस्तेमाल करें।
इलेक्ट्रिक हैंड ड्रायर से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए नैपकिन से हाथ पोछें।
हाथों को अच्छी तरह से साफ करने के बाद ही टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल करें।
सलाह
बाथरूम इस्तेमाल करने से पहले और बाद में फ्लश करना न भूलें।
बाथरूम के इस्तेम़ाल के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं ।
बाथरूम से बाहर निकलने के बाद हाथों से नाक,आंख को छूने से बचें।
संक्रमण से बचने के लिए कार्य करने के दौरान बीच-बीच में सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
महिलाओं को बथरूम जाने से पहले फ्लश करके टॉयलेट सीट पर पानी डालकर सूखे नैपकिन से साफ करना चाहिए।
हेल्थ डेस्क. कोरोनावायरस की जांच 'स्ट्रीप तकनीक' से की जा सकेगी। जांच रिपोर्ट 1 से 4 घंटे में मिल जाएगी। बीएचयू में शोध कर रहींछात्राओं ने यह तकनीक विकसित की है। शोध छात्राओं की मदद से इसे बनाने वाली डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीकुलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स की प्रो.गीता राय का दावा है कि जांच की यह तकनीक बिल्कुल नई है। यह वायरस के प्रोटीन की जांच करती है। इसमें गलत रिपोर्ट आने की आशंकानहीं है। डॉ गीता राय के मुताबिक, इस तकनीक से सिर्फ यूनिक वायरस को सर्च किया जाएगा इसलिए यह 100 प्रतिशत सही होगा।
यह तकनीक सिर्फ कोरोना के स्ट्रेन को पकड़ती है
प्रो. गीता राय के मुताबिक, इस तकनीक को रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज पॉलीमर चेन रिएक्शन (आरटी- पीसीआर) कहा जाता है। यह ऐसे प्रोटीन सिक्वेंसको पकड़ती है जो सिर्फ कोविड-19 के वायरस में मौजूद है और जो किसी और वायरल स्ट्रेन में नहीं है। गीता राय की टीम में डोली दास, खुशबूप्रिया और हीरल ठक्कर ने इसकी खोज की है।
आईसीएमआर को भेजा प्रस्ताव
प्रो. गीता राय ने इस तकनीक को जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाने के लिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) और इंडियनकाउंसिल मेडिकल रिसर्च ऑफ इंडिया (आईसीएमआर) को प्रस्ताव भेज दिया है। कोविड-19 के संक्रमण की बढ़ती स्थिति को देखते हुए जांच कीगति को बढ़ाने में तकनीक बेहद कारगर होगी। इससे न सिर्फ सटीक जांच होगी बल्कि रिपोर्ट भी एक से चार घंटे के भीतर प्राप्त किया जासकेगी। इस तकनीक के कारण जांच बेहद कम कीमत में हो सकेगी।
तकनीक का पेटेंट फाइल किया गया
प्रो. गीता राय ने तकनीक का पेटेंट भी फाइल कर दिया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय के मुताबिक, देश में इस सिद्धांत पर आधारित अब तक कोईकिट नहीं है जो कि ऐसे प्रोटीन सिक्वेंस को टार्गेट करके जांच कर रहा हो।
100 फीसदी सही जांच का दावा
प्रो. गीता राय के मुताबिक, अभी तक जो भी किट बनाई गई हैं वो इस सिद्धांत पर आधारित नहीं थीं। इस तकनीक के माध्यम से हम 2 से 3 लाख तक की मशीनों पर जांच कर सकते हैं जो किसी भी शहर में भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में यह तकनीक काफी सरल और सस्ती साबित होगी।
हेल्थ डेस्क. कोरोनावायरस की जांच 'स्ट्रीप तकनीक' से की जा सकेगी। जांच रिपोर्ट 1 से 4 घंटे में मिल जाएगी। बीएचयू में शोध कर रहींछात्राओं ने यह तकनीक विकसित की है। शोध छात्राओं की मदद से इसे बनाने वाली डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीकुलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स की प्रो.गीता राय का दावा है कि जांच की यह तकनीक बिल्कुल नई है। यह वायरस के प्रोटीन की जांच करती है। इसमें गलत रिपोर्ट आने की आशंकानहीं है। डॉ गीता राय के मुताबिक, इस तकनीक से सिर्फ यूनिक वायरस को सर्च किया जाएगा इसलिए यह 100 प्रतिशत सही होगा।
यह तकनीक सिर्फ कोरोना के स्ट्रेन को पकड़ती है
प्रो. गीता राय के मुताबिक, इस तकनीक को रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज पॉलीमर चेन रिएक्शन (आरटी- पीसीआर) कहा जाता है। यह ऐसे प्रोटीन सिक्वेंसको पकड़ती है जो सिर्फ कोविड-19 के वायरस में मौजूद है और जो किसी और वायरल स्ट्रेन में नहीं है। गीता राय की टीम में डोली दास, खुशबूप्रिया और हीरल ठक्कर ने इसकी खोज की है।
आईसीएमआर को भेजा प्रस्ताव
प्रो. गीता राय ने इस तकनीक को जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाने के लिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) और इंडियनकाउंसिल मेडिकल रिसर्च ऑफ इंडिया (आईसीएमआर) को प्रस्ताव भेज दिया है। कोविड-19 के संक्रमण की बढ़ती स्थिति को देखते हुए जांच कीगति को बढ़ाने में तकनीक बेहद कारगर होगी। इससे न सिर्फ सटीक जांच होगी बल्कि रिपोर्ट भी एक से चार घंटे के भीतर प्राप्त किया जासकेगी। इस तकनीक के कारण जांच बेहद कम कीमत में हो सकेगी।
तकनीक का पेटेंट फाइल किया गया
प्रो. गीता राय ने तकनीक का पेटेंट भी फाइल कर दिया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय के मुताबिक, देश में इस सिद्धांत पर आधारित अब तक कोईकिट नहीं है जो कि ऐसे प्रोटीन सिक्वेंस को टार्गेट करके जांच कर रहा हो।
100 फीसदी सही जांच का दावा
प्रो. गीता राय के मुताबिक, अभी तक जो भी किट बनाई गई हैं वो इस सिद्धांत पर आधारित नहीं थीं। इस तकनीक के माध्यम से हम 2 से 3 लाख तक की मशीनों पर जांच कर सकते हैं जो किसी भी शहर में भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में यह तकनीक काफी सरल और सस्ती साबित होगी।
हेल्थ डेस्क. कोरोनावायरस की जांच 'स्ट्रीप तकनीक' से की जा सकेगी। जांच रिपोर्ट 1 से 4 घंटे में मिल जाएगी। बीएचयू में शोध कर रहींछात्राओं ने यह तकनीक विकसित की है। शोध छात्राओं की मदद से इसे बनाने वाली डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीकुलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स की प्रो.गीता राय का दावा है कि जांच की यह तकनीक बिल्कुल नई है। यह वायरस के प्रोटीन की जांच करती है। इसमें गलत रिपोर्ट आने की आशंकानहीं है। डॉ गीता राय के मुताबिक, इस तकनीक से सिर्फ यूनिक वायरस को सर्च किया जाएगा इसलिए यह 100 प्रतिशत सही होगा।
यह तकनीक सिर्फ कोरोना के स्ट्रेन को पकड़ती है
प्रो. गीता राय के मुताबिक, इस तकनीक को रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज पॉलीमर चेन रिएक्शन (आरटी- पीसीआर) कहा जाता है। यह ऐसे प्रोटीन सिक्वेंसको पकड़ती है जो सिर्फ कोविड-19 के वायरस में मौजूद है और जो किसी और वायरल स्ट्रेन में नहीं है। गीता राय की टीम में डोली दास, खुशबूप्रिया और हीरल ठक्कर ने इसकी खोज की है।
आईसीएमआर को भेजा प्रस्ताव
प्रो. गीता राय ने इस तकनीक को जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाने के लिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) और इंडियनकाउंसिल मेडिकल रिसर्च ऑफ इंडिया (आईसीएमआर) को प्रस्ताव भेज दिया है। कोविड-19 के संक्रमण की बढ़ती स्थिति को देखते हुए जांच कीगति को बढ़ाने में तकनीक बेहद कारगर होगी। इससे न सिर्फ सटीक जांच होगी बल्कि रिपोर्ट भी एक से चार घंटे के भीतर प्राप्त किया जासकेगी। इस तकनीक के कारण जांच बेहद कम कीमत में हो सकेगी।
तकनीक का पेटेंट फाइल किया गया
प्रो. गीता राय ने तकनीक का पेटेंट भी फाइल कर दिया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय के मुताबिक, देश में इस सिद्धांत पर आधारित अब तक कोईकिट नहीं है जो कि ऐसे प्रोटीन सिक्वेंस को टार्गेट करके जांच कर रहा हो।
100 फीसदी सही जांच का दावा
प्रो. गीता राय के मुताबिक, अभी तक जो भी किट बनाई गई हैं वो इस सिद्धांत पर आधारित नहीं थीं। इस तकनीक के माध्यम से हम 2 से 3 लाख तक की मशीनों पर जांच कर सकते हैं जो किसी भी शहर में भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में यह तकनीक काफी सरल और सस्ती साबित होगी।
हेल्थ डेस्क. क्या हाईब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग के मरीजों को कोरोनावायरस से संक्रमण का खतरा ज्यादा है, क्या ब्लड प्रेशर की दवाएं संक्रमण की गंभीरता को बढ़ाती हैं, ऐसे ही कई सवालों के जवाब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने दिए हैं। जानिए उनके जवाब….
सवाल : क्या हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों को कोरोनावायरस का खतरा ज्यादा है?
आईसीएमआर : नहीं, सामान्य लोगों के मुकाबले हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों को कोरोनावायरस से संक्रमण का खतरा अधिक नहीं है।
सवाल: क्या कोरोना का संक्रमण होने पर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों की हालत ज्यादा नाजुक हो जाती है?
आईसीएमआर : कोरोना से संक्रमित 80 फीसदी मरीजों में आमतौर पर बुखार, गले मेंं तकलीफ और खांसी के माइल्ड लक्षण दिखते हैं। ऐसे मामलों में मरीज पूरी तरह से रिकवर हो जाता है। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग के कुछ मरीजों में स्थिति नाजुक हो सकती है। कॉम्प्लिकेशन बढ़ सकते हैं। ऐसे मरीजों को अधिक देखभाल की जरूरत होती है।
हेल्थ डेस्क. मुंबई के स्टार्टअप क्योर डॉट एआई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस एक्सरे तकनीक विकसित की है जो टीबी का पता लगाने के साथ कोरोनावायरस को भी ट्रैक करेगी। नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, यह एआई आधारित चेस्ट एक्सरे है जो सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच के नतीजे देता है।
तकनीक बताती है, फेफड़ेकितने प्रभावित
यह तकनीक फेफड़ों की जांच करके एआई की मदद से कोरोनावायरस का पता लगाने में मदद करती है। इसके अलावा यह टीबी, क्रॉनिक पल्मोनरी डिसीज, कार्डियक डिसऑर्डर और फेफड़े डैमेज हैं या नहीं इसकी भी जानकारी देती है। कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं। सांस लेने में तकलीफ होना कॉमन लक्षण है। ऐसे में फेफड़े में होने वाले बदलाव भी वायरस का इशारा करते हैं।
कई राज्यों में अपनाई गई यह तकनीक
स्टार्टअप के सीईओ प्रशांत वारियर के मुताबिक, यह तकनीक रेडियोलॉजिस्ट और फिजिशियन को कुछ ही सेकंड में बताती है कि शरीर में कोरोनावायरस का संक्रमण है या नहीं। इस समय कोरोनावायरस के लिए पर्याप्त टेस्ट किट न होने के कारण इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्वैब आधारित टेस्ट करके जांच की जा सकती है। देश के कई हिस्सों में राज्य सरकार हॉस्पिटल्स में इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है।
कोरोना मरीजों को ट्रैक करने वाली ऐप भी विकसित की
क्योर डॉट एआई स्टार्टअप ने qSCOUT नाम से ऐप भी विकसित की है जो स्वास्थ्य कर्मियों को कई अहम जानकारी देती है। यह कोरोनावायरस के मरीजों का रिकॉर्ड रखती है। इसे मोबाइल और कम्प्यूटर दोनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ऐप आपके कॉन्टेक्ट में मौजूद मरीजों को भी मॉनिटर करती है। ऐप उनके लक्षणों को भी मॉनिटर करती है, वे हॉस्पिटल गए हैं या नहीं इसकी भी जानकारी देती है।
लाइफस्टाइल डेस्क. 13 मार्च को दिल्ली की 50 वर्षीया टूरिस्ट गाइड इटली की एक महिला को दिल्ली के म्यूजियम ले गई थी। अगले ही दिन गाइड को बुखार आया। जांच में कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद महिला ने खुद को घर में आइसोलेट कर लिया और डॉक्टरों के निर्देश पर इलाज करवा रही हैं। उनका कहना है कि यह कोई बड़ी बीमारी नहीं है। सिर्फ थोड़ी सी सावधानी रखनी है। गांधीजी और नेल्सन मंडेला सालों जेल में रह सकते हैं तो मैं दो-तीन हफ्ते एकांतवास में क्यों नहीं रह सकती? बताया कि वे एक हफ्ते से संक्रमण मुक्त होने के लिए बंद कमरे में कैसे दिन गुजार रही हैं....
एकांतवास में प्राणायाम और कसरत ने तरोताजा कर दिया
मेरा नाम मृगनयनी (बदला नाम) है। जांच में कोरोना की पुष्टि के बाद मैंने 24 मार्च से खुद को घर के एक कमरे में एकांतवास में रखा है। मेरा 20 साल का बेटा दूसरे कमरे में रह रहा है और वही मेरा शेष दुनिया से संपर्क का माध्यम है। डॉक्टर ने कहा कि मैं घर में एकांतवास कर सकती हूं और बुखार के लिए पैरासिटामोल ले सकती हूं। सांस में तकलीफ हो, तो अस्पताल में भर्ती होने की बात कही। 27 मार्च तक तीन दिन बुखार आया।
इस बीच, दो दिन नाक के बाईं ओर से सांस में ऐसा तीखापन था, जैसे जलती फुलझड़ी अंदर चली गई हो। पिछले तीन दिन से बुखार खत्म हो गया है। मैं गले की खराश के लिए तुलसी, अदरक, काली मिर्च, लौंग के काढ़े का इस्तेमाल कर रही हूं। प्राणायाम ने मुझे ताकत दी। कई अधूरे काम पूरे किए। अधूरा उपन्यास पढ़ा। तीन ब्लॉग भी लिखे। कमरे में ही कसरत कर रही हूं। मेरी आप सभी से अपील है कि कोरोना के बीमार को घृणा की नजर से मत देखना। यह बीमारी नहीं बल्कि सावधानी का दूसरा रूप है।