Thursday, April 30, 2020

ऋषि कपूर के निधन से दुखी जॉन सीना, शेयर की रुला देने वाली तस्‍वीर

जॉन सीना (John Cena) ने अभिनेता ऋषि कपूर (Rishi Kapoor Death) की एक ऐसी पुरानी फोटो शेयर की है, जिसे देखकर इस बात पर विश्‍वास करना नामुमकिन है कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहे.

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Recipe: घर पर बनाएं दिल्ली की खस्ता कचौड़ी चाट, उंगलियां चाटेंगे आप

आप घर पर ही खस्ता कचौड़ी चाट बनाकर सबका मुंह नमकीन कर सकते हैं और दिल्ली के स्पेशल खस्ता कचौड़ी चाट की याद दिला सकते हैं. इसे घर पर बनाना काफी आसान है.

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सुब्बारमन विजयालक्ष्मी: भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर, जिन्होंने दिग्गजों को दी मात

सुब्बारमन विजयालक्ष्मी (Subbaraman Vijayalakshmi) चेस ओलिंपियाड में सबसे ज्यादा मेडल हासिल करने वाली भारतीय खिलाड़ी हैं

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चीनी शोधकर्ताओं का दावा, फेफड़े में छिपा रह सकता है कोरोना; चीन में इलाज के 70 दिन बाद मरीजों में मिला वायरस

कोरोना के इलाज के बाद वायरस फेफड़े में लम्बे समय तक छिपा रह सकता है। चीनी शोधकर्ताओं के मुताबिक, चीन में ऐसे मामले भी सामने आए जब हॉस्पिटलसे डिस्चार्ज होने के बाद 70 दिन बाद मरीज पॉजिटिव मिला। साउथ कोरिया में इलाज के बाद 160 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। ऐसे ही मामले चीन, मकाउ, ताइवान, वियतनाम में भी सामने आ चुके हैं।

जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आ सकती है
कोरिया सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर जियॉन्ग यूं-कियॉन्ग का कहना है, कोरोना वायरस दोबारा मरीज को संक्रमित करने की बजाय रि-एक्टिवेट हो सकता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनावायरस फेफड़े में अंदर गहराई में रह सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि यहजांच रिपोर्ट में पकड़ में न आए।



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Coronavirus can stay hidden in lungs after patients recover: Study


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Role Model: पायलट बनने का सपना देखा पर खेल चुना, फिर 23 बार बने वर्ल्ड चैंपियन

बिलियर्ड्स और स्‍नूकर खिलाड़ी पंकज आडवानी (Pankaj Advani) 23 बार के वर्ल्‍ड चैंपियन हैं

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एंटीवायरल नेजल स्प्रे से कोरोना को रोकने की तैयारी, ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने कहा- mCBMs ड्रग मास्क की तरह; यह नाक में वायरस की एंट्री ब्लॉक करता है

ब्रिटिश शोधकर्ताओं कहना है कि एंटीवायरल नेजल स्प्रे का इस्तेमाल किया जाए तो कोरोनावायरस को फेफड़ों तक पहुंचने से रोका जा सकता है। रिसर्च में इसकी पुष्टि भी हुई है। ब्रिटेन की सेंट एंड्रयू यूनिवर्सिटी में अलग-अलग तरह कोरोना का संक्रमण रोकने पर 3 तरह की रिसर्च की गई। रिसर्च टीम के प्रमुख प्रो. गैरे टेलर का कहना है कि आमतौर पर एंटीवायरल्स ड्रग वायरस के कुछ हिस्सों पर काम करते हैं लेकिन हमने जो ड्रग इस्तेमाल किया है वह कोरोना को कोशिकाओं में घुसने से रोकता है।

मास्क की तरह काम करता है ड्रग
शोधकर्ताओं में रिसर्च में न्यूमिफिल और मल्टीवैलेंट कार्बोहाइड्रेट बाइंडिंग मॉलीक्यूल्स (mCBMs) नाम के ड्रग का इस्तेमाल किया। न्यूमिफिल ड्रग आमतौर पर सांस से जुड़े रोगों में इस्तेमाल किया जाता है। प्रो. गैरे के मुताबिक, रिसर्च के दौरान हमने हर दूसरे दिन नेजल स्प्रे का प्रयोग किया। यह ड्रग नाक के रिसेप्टर्स पर मास्क की तरह काम करता है और वायरस की एंट्री को ब्लॉक करता है।

बचाव और इलाज दोनों में कारगर mCBMs
शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च में पाया गया कि मल्टीवैलेंट कार्बोहाइड्रेट बाइंडिंग मॉलीक्यूल्स नए कोरोनावायरस की संख्या घटाता है चाहें इस ड्रग का इस्तेमाल बचाव के लिए करें या संक्रमण के इलाज के तौर पर करें।


जल्द शुरू होगा क्लीनिकल ट्रायल
mCBMs को तैयार करने फार्मा कंपनी न्यूमेजेन के चीफ एग्जीक्यूटिव डग्लस थॉम्पसन का कहना है कि रिसर्च के परिणाम सकारात्मक रहे हैं और यह ड्रग काफी कारगर साबित हुआ है। फार्मा कंपनी न्यूमेजेन इंग्लैंड की हेल्थ एजेंसी और ग्लासगो यूनिवर्सिटी के साथ भी काम कर रही है। जल्द ही इसमें लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा।



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Antiviral nasal sprays prevent corona from reaching the body via the nose, British researchers claim, mCBMs resemble drug masks


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लॉकडाउन से आए लाइफस्टाइल में बदलाव बनी मूड स्विंग की वजह, इन 4 उपायों से दूर करें यह समस्या

लॉकडाउन के दौरान आपकी लाइफस्टाइल में काफी बदलाव आए हैं। हर वक्त घर में रहते हुए मूड स्विंग की समस्या का सामना हर उम्र के लोग कर रहे हैं। इससे निजात के लिए ये चार उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

क्या है मूड स्विंग: ये एक प्रकार का बायोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है, जिसकी वजह से दिमाग में एक प्रकार का रासायनिक असंतुलन हो सकता है। मूड स्विंग होने पर कभी व्यक्ति बेहद खुश और कभी बहुत उदास हो जाता है। हालांकि बार-बार मूड बदलने का कारण खून में मौजूद कार्टिसोल नामक स्ट्रेस का बढ़ना या थाइरॉयड असंतुलन भी है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है।

1. पानी ज्यादा पिएं

शरीर से टॉक्सिंस दूर करने के लिए रोज 8 से 10 गिलास पानी पीना पिएं। इससे शरीर में नमी बनी रहती है। साथ ही संपूर्ण शरीर और दिमाग में रक्त संचार सुचारू रूप से होता है। इस तरह पर्याप्त पानी पीने से मूड स्विंग की समस्या कम करने में मदद मिलती है। पानी के अलावा शिकंजी बनाकर पी सकते हैं। इससे मन शांत होता है और एनर्जी लेवल मेंटेन रहता है।

2. व्यायाम करें

रोज पिलाटे करें। इससे फेफड़े व खून का प्रवाह ठीक होता है। शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है। तनाव और मूड स्विंग जैसी समस्याएं दूर करने में पुश अप्स, एरोबिक्स और जंपिंग स्क्वाट जैसी एक्सरसाइज भी कारगर हैं। इससें आपके वजन को नियंत्रित करने में भी भरपूर मदद मिलेगी।

3. हेल्दी डाइट लें

खाने में मैग्नीशियम युक्त चीजों का सेवन ज्यादा करें जैसे केला। साथ ही विटामिन सी जैसे ऑरेंज, आंवला और नींबू की मात्रा बढ़ाएं। यह शरीर को एनर्जेटिक रखने में मदद करता है। डार्क चाॅकलेट, बींस, हर्बल चाय और हरी सब्जियां भी मूड स्विंग दूर करने में आपकी मदद कर सकती हैं। डाइट में शुगर और फैट सीमित मात्रा में ही लें।

4. अपनाएं म्यूजिक थैरेपी

जब मन उदास हो तो अच्छा म्यूजिक ‘मूड लिफ्ट’ करने का काम करता है। अपना मनपसंद संगीत सुन कर मूड को अच्छा कर सकते हैं। साथ ही अगर आप डांस करने का शौक रखते हैं तो यही सही वक्त है जब आप डांस करके टेंशन फ्री रह सकते हैं। घर में रहते हुए परिवार के अन्य सदस्यों को भी डांस में शामिल करें। आप ज्यादा एंजॉय कर सकेंगे।



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Change in lifestyle due to lockdown caused mood swings, overcome these problems with these 4 measures


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लॉकडाउन से आए लाइफस्टाइल में बदलाव बनी मूड स्विंग की वजह, इन 4 उपायों से दूर करें यह समस्या

लॉकडाउन के दौरान आपकी लाइफस्टाइल में काफी बदलाव आए हैं। हर वक्त घर में रहते हुए मूड स्विंग की समस्या का सामना हर उम्र के लोग कर रहे हैं। इससे निजात के लिए ये चार उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

क्या है मूड स्विंग: ये एक प्रकार का बायोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है, जिसकी वजह से दिमाग में एक प्रकार का रासायनिक असंतुलन हो सकता है। मूड स्विंग होने पर कभी व्यक्ति बेहद खुश और कभी बहुत उदास हो जाता है। हालांकि बार-बार मूड बदलने का कारण खून में मौजूद कार्टिसोल नामक स्ट्रेस का बढ़ना या थाइरॉयड असंतुलन भी है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है।

1. पानी ज्यादा पिएं

शरीर से टॉक्सिंस दूर करने के लिए रोज 8 से 10 गिलास पानी पीना पिएं। इससे शरीर में नमी बनी रहती है। साथ ही संपूर्ण शरीर और दिमाग में रक्त संचार सुचारू रूप से होता है। इस तरह पर्याप्त पानी पीने से मूड स्विंग की समस्या कम करने में मदद मिलती है। पानी के अलावा शिकंजी बनाकर पी सकते हैं। इससे मन शांत होता है और एनर्जी लेवल मेंटेन रहता है।

2. व्यायाम करें

रोज पिलाटे करें। इससे फेफड़े व खून का प्रवाह ठीक होता है। शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है। तनाव और मूड स्विंग जैसी समस्याएं दूर करने में पुश अप्स, एरोबिक्स और जंपिंग स्क्वाट जैसी एक्सरसाइज भी कारगर हैं। इससें आपके वजन को नियंत्रित करने में भी भरपूर मदद मिलेगी।

3. हेल्दी डाइट लें

खाने में मैग्नीशियम युक्त चीजों का सेवन ज्यादा करें जैसे केला। साथ ही विटामिन सी जैसे ऑरेंज, आंवला और नींबू की मात्रा बढ़ाएं। यह शरीर को एनर्जेटिक रखने में मदद करता है। डार्क चाॅकलेट, बींस, हर्बल चाय और हरी सब्जियां भी मूड स्विंग दूर करने में आपकी मदद कर सकती हैं। डाइट में शुगर और फैट सीमित मात्रा में ही लें।

4. अपनाएं म्यूजिक थैरेपी

जब मन उदास हो तो अच्छा म्यूजिक ‘मूड लिफ्ट’ करने का काम करता है। अपना मनपसंद संगीत सुन कर मूड को अच्छा कर सकते हैं। साथ ही अगर आप डांस करने का शौक रखते हैं तो यही सही वक्त है जब आप डांस करके टेंशन फ्री रह सकते हैं। घर में रहते हुए परिवार के अन्य सदस्यों को भी डांस में शामिल करें। आप ज्यादा एंजॉय कर सकेंगे।



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घर पर खुद सैनिटाइजर बना कर जरूरतमंदों को बांट रहीं सिमर शर्मा, अब तक 150 बोतलों कर चुकीं हैं दान

पूरे देश को अपनी चपेट में ले चुके कोरोना वायरस के कारण मौजूदा समय में सैनिटाइजर और फेस मास्क की मांग बढ़ रही है। ऐसे में इन उत्पादों की कमी लोगों को इस जरूरी सामान का निर्माण करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके चलते कई लोग अपने- अपने स्तर पर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। इसी बीच कोलकाता की सिमर शर्मा मौजूदा हालात में सैनिटाइजर की कमी को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को खुद सैनिटाइजर बना कर बांट रही हैं। मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन के तीसरे वर्ष में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रही सिमर बेहद अभावग्रस्त पीड़ितों की मदद के लिए आगे आई हैं।

जरूरतमंदों तक पहुंचाई 150 बोतलें

दरअसल, सैनिटाइजर महंगा होने की वजह से कई लोग इसे खरीद नहीं पा रहे हैं। इसलिए इन लोगों की मदद के लिए सिमर ने आइसोप्रोपिल एल्कोहल, ग्लिसरॉल और आवश्यक तेलों और पानी की मदद से तैयार किए 150 सैनिटाइजर जरूरतमंदों तक पहुंचाएं हैं। सैनिटाइजर बनाते समय वह इस बात का ध्यान में रख रही हैं कि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से उल्लिखित सुरक्षा मानकों का भी पालन करें। 80 फीसदी एल्कोहल बेस्ट यह सैनिटाइजर उचित देखभाल के साथ तैयार किए गए हैं।

पुलिस भी कर रहीं सहयोग

घर पर ही तैयार किए इन सैनिटाइजर्स को सिमर कोलकाता में अपने घर पर काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी, सब्जी विक्रेताओं, मछली विक्रेताओं, होम क्वारैंटाइन के साथ ही झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लोगों को भी बांट रही हैं। सिमर बताती है कि वहा इन्हें स्लम और जरूरी जगहों पर बांटने के लिए पुलिस का भी सहयोग ले रही हैं। उन्होंने अगले बैच के उत्पादन के लिए केमिकल और बॉटल का ऑर्डर दे दिया है। उनकी इस पहल के बारे में पता लगने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से लोग उन्हें इस कार्य के लिए दान दे रहे हैं, जिसके बाद अब सिमर हैंड सैनिटाइजर का 600 लीटर अधिक उत्पादन करने जा रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट के जरिए लोग कर रहे मदद

स्थानीय पुलिस की मदद से सिमर यह सुनिश्चित करती है कि इन बोतलों को ऐसी जगह वितरित किया जाए, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके दोस्त जो इस काम में विश्वास रखते हैं, उन्होंने डिजिटल पेमेंट के जरिए इस काम में अपनी पॉकेट मनी का योगदान दिया है। वह समाज से बड़े पैमाने पर धन इकट्ठा कर रही हैं और अब इकट्ठा किए इस धन का उपयोग करने में वह पारदर्शिता रखते हुए अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। फिलहाल सिमर रोजाना ऑनलाइन क्लासेस भी अटेंड कर रही है, लेकिन अपने खाली समय में इंजीनियरिंग के कॉन्सेप्ट्स को इस तरह से प्रैक्टिस कर रही है, जिससे वह समाज की मदद कर सकें।



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Meet Simar Sharma, a student from kolkata, who is distributing selfmade sanitizers to the needy, has donated 150 bottles so far


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घर पर खुद सैनिटाइजर बना कर जरूरतमंदों को बांट रहीं सिमर शर्मा, अब तक 150 बोतलों कर चुकीं हैं दान

पूरे देश को अपनी चपेट में ले चुके कोरोना वायरस के कारण मौजूदा समय में सैनिटाइजर और फेस मास्क की मांग बढ़ रही है। ऐसे में इन उत्पादों की कमी लोगों को इस जरूरी सामान का निर्माण करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके चलते कई लोग अपने- अपने स्तर पर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। इसी बीच कोलकाता की सिमर शर्मा मौजूदा हालात में सैनिटाइजर की कमी को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को खुद सैनिटाइजर बना कर बांट रही हैं। मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन के तीसरे वर्ष में बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई कर रही सिमर बेहद अभावग्रस्त पीड़ितों की मदद के लिए आगे आई हैं।

जरूरतमंदों तक पहुंचाई 150 बोतलें

दरअसल, सैनिटाइजर महंगा होने की वजह से कई लोग इसे खरीद नहीं पा रहे हैं। इसलिए इन लोगों की मदद के लिए सिमर ने आइसोप्रोपिल एल्कोहल, ग्लिसरॉल और आवश्यक तेलों और पानी की मदद से तैयार किए 150 सैनिटाइजर जरूरतमंदों तक पहुंचाएं हैं। सैनिटाइजर बनाते समय वह इस बात का ध्यान में रख रही हैं कि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से उल्लिखित सुरक्षा मानकों का भी पालन करें। 80 फीसदी एल्कोहल बेस्ट यह सैनिटाइजर उचित देखभाल के साथ तैयार किए गए हैं।

पुलिस भी कर रहीं सहयोग

घर पर ही तैयार किए इन सैनिटाइजर्स को सिमर कोलकाता में अपने घर पर काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी, सब्जी विक्रेताओं, मछली विक्रेताओं, होम क्वारैंटाइन के साथ ही झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लोगों को भी बांट रही हैं। सिमर बताती है कि वहा इन्हें स्लम और जरूरी जगहों पर बांटने के लिए पुलिस का भी सहयोग ले रही हैं। उन्होंने अगले बैच के उत्पादन के लिए केमिकल और बॉटल का ऑर्डर दे दिया है। उनकी इस पहल के बारे में पता लगने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से लोग उन्हें इस कार्य के लिए दान दे रहे हैं, जिसके बाद अब सिमर हैंड सैनिटाइजर का 600 लीटर अधिक उत्पादन करने जा रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट के जरिए लोग कर रहे मदद

स्थानीय पुलिस की मदद से सिमर यह सुनिश्चित करती है कि इन बोतलों को ऐसी जगह वितरित किया जाए, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके दोस्त जो इस काम में विश्वास रखते हैं, उन्होंने डिजिटल पेमेंट के जरिए इस काम में अपनी पॉकेट मनी का योगदान दिया है। वह समाज से बड़े पैमाने पर धन इकट्ठा कर रही हैं और अब इकट्ठा किए इस धन का उपयोग करने में वह पारदर्शिता रखते हुए अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। फिलहाल सिमर रोजाना ऑनलाइन क्लासेस भी अटेंड कर रही है, लेकिन अपने खाली समय में इंजीनियरिंग के कॉन्सेप्ट्स को इस तरह से प्रैक्टिस कर रही है, जिससे वह समाज की मदद कर सकें।



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प्लास्टिक, मेटल और कागज पर भी जिंदा रहता है कोरोनावायरस, इसलिए लिए इनको छुएं तो हाथ जरूर धोएं, बाहर निकलें तो मास्क लगाएं : एक्सपर्ट

कोरोनावायरस सिर्फ ड्रॉपलेट्स से फैलता है या हवा में मौजूद रहता है, ट्रिपल लेयर मास्क का इस्तेमाल कब करें और गांवों में संक्रमण के मामले कम क्यों हैं...ऐसे कई सवालों के जवाब डॉ. नरिंदर पाल सिंह, एमडी, मैक्स हॉस्पिटल, गाजियाबाद ने आकाशवाणी को दिए। जानिए कोरोना से जुड़े वो जवाब, जो आपके लिए जानने जरूरी हैं....


#1) क्या कोई वायरस के ड्रॉपलेट से ही संक्रमित हो सकता है या हवा से भी फैलता है?
अगर वायरस से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से ड्रॉपलेट यहां-वहां बिखर गया है तो वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए बाहर जाएं तो मास्क जरूर लगाएं। बाहर से घर आने पर कुछ भी छूने से पहले हाथ धोएं। हवा में ड्रॉपलेट फैलते हैं, अब तक इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है।

#2) किसी भी वस्तु या प्लास्टिक या कागज पर कोरोनावायरस कितनी देर तक जिंदा रहता है?
अलग-अलग वस्तुओं पर वायरस की समय-सीमा अलग-अलग है। जैसे मेटल या स्टील पर वायरस ज्यादा देर तक जिंदा रहता है। इसके अलावा प्लास्टिक पर भी देर तक यह बना रहता है। इसीलिए कहा जा रहा है कि अगर पन्नी में भी सामान लेकर आ रहे हैं तो उसे बाहर ही रखा दें। हाथ धोएं और पन्नी को नष्ट कर दें। कागज पर ये वायरस कम देर तक रहता है लेकिन आप यह पता नहीं कर पाएंगे कि यह इस पर कब आया है इसलिए सावधानी बरतें।

#3) ट्रिपल लेयर मास्क क्या है, यह किसके लिए जरूरी है?
मास्क कई तरह के हैं। जैसे अगर आप किसी गमछा, रुमाल, या कपड़े से मुंह, नाक ढक लेते हैं तो बाहर जाने पर सुरक्षित रहेंगे। लेकिन किसी संक्रमित के संपर्क में आ रहे हैं या भीड़ में जा रहे हैं तो उसके लिए ट्रिपर लेयर मास्क की जरूरत होती है। आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों के लिए ट्रिपल मास्क जरूरी है। आम इंसानों के लिए साधारण या घर का बना मास्क ही काफी है। जो डॉक्टर्स कोरोना पीड़ितों के सम्पर्क में हैं उनके लिए एन-95 मास्क जरूरी है।

#4)क्या भारत में कोरोनावायरस की रिकवरी का आंकड़ा बढ़ा है?
अगर कोरोनावायरस का संक्रमण किसी में हो रहा है तो ज्यादातर लोगों में सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह ही यह असर कर रहा है। ऐसे लोग बहुत जल्दी ठीक हो रहे हैं। हां, हमारे यहां ठीक होने में मरीजों को समय लगता है। लेकिन मौत का आंकड़ा दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है। यह वायरस केवल पांच प्रतिशत लोगों को ही गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, उसमें भी जिन्हें पहले से कोई बीमारी है या थोड़ा बुजुर्ग हैं।

#5)वायरस से ठीक होकर वापस जाने वाले मरीजों को आसपास के लोग जल्दी स्वीकार नहीं करते?
जो लोग ठीक होकर आ रहे हैं वो तो सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं क्योंकि उनका दो बार टेस्ट होता है, जिसमें वे निगेटिव आते हैं। लेकिन जो सामान्य लोग हैं उनमें ज्यादा खतरा है क्योंकि बार उनमें लक्षण नहीं दिखाई देते। कई जगहों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों का ठीक हो चुके लोगों के प्रति रवैया बुरा है। कृपया ऐसा न करें।

#6)गांव की तुलना में शहर में वायरस का प्रकोप ज्यादा क्यों है?
जहां-जहां सोशल डिस्टेंसिंग कम है या भीड़-भाड़ वाले शहर हैं, वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा है। लेकिन ऐसी जगह, जहां ज्यादा भीड़ नहीं है, लोग एक-दूसरे से दूर हैं वेकाफी हद तक सुरक्षित हैं। गांव में ऐसा ही होता है और सोशल डिसटेंसिंग बनी रहती है। इसलिए संक्रमण के मामले वहां कम हैं।


#7)आजकल कैसी डाइट लें जिससे इम्युनिटी बढ़े?
एक दिन में इम्युनिटी नहीं बढ़ती लेकिन अगर रोजाना फल, सब्जी के जूस लें तो रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। डाइट में दूध जरूर शामिल करें। इस दौरान लिक्विड डाइट अधिक लें। बाहर नहीं जा सकते हैं इसलिए घर में भी वर्कआउट करें। घर में भी अधिक तेल वाली चीज या फस्ट फूड न खाएं।


#8)अगर एक कमरे में 5-6 लोग एक साथ रह रहे हैं तो सोशल डिस्टेंसिंग कैसे करें?
एक कमरे में अगर ज्यादा लोग हैं तोसोशल डिस्टेंसिंग मुश्किल है लेकिन एक घर में रहते हुए सावधानी बरत सकते हैं जिससे संक्रमण न हो। कई लोग साथ में हैं तो मास्क लगाकर रखें, बाहर से आने पर हाथ धोएं। कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रखें। फोन में आरोग्य सेतु ऐप जरूर रखें यह लोगों को कोरोना संक्रमित से अलर्ट करता रहेगा।



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Coronavirus In India Update; Frequently Asked Questions (Faqs) In Hindi On What is Corona virus droplets, triple layer mask; Coronavirus recovery data in India


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मुफ्त में कोरोना मरीजो का इलाज कर रहीं नर्स पीआर शिजी, बिना किसी वेतन के सरकारी अस्पताल में दे रहीं सेवाएं

देशभर में फैले कोरोनावायरस के दौरान सभी कोरोना योद्धा अपने- अपने स्तर पर इससे लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसी ही एक फ्रंटलाइन हेल्थ केयर वर्कर केरल के त्रिशूर की एक युवा नर्स है, जो मुश्किल के समय में भी बहादुरी से अपना कर्तव्य निभा रही हैं। नर्स पीआर शिजी इन दिनों त्रिशूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 इंसेंटिव केयर यूनिट में एक सेल्फ हेल्प स्टाफ नर्स के रूप में बिना किसी वेतन के अपनी सेवाएं दे रही हैं।

इंटर्न के तौर पर कर रहीं काम

बचपन में ही अपने पिता को खोने वाली शिजी की परवरिश उनकी मां ने की। फिलहाल वह एक इंटर्न के रूप में काम कर रही है, जिसके लिए उन्हें अस्पताल से ना ही कोई वेतन मिलता है और ना ही कोई अन्य भत्ता। एक निजी कॉलेज से बीएससी नर्सिंग पूरी करने वाली 22 वर्षीय शिजी ने बताया कि उन्होंने 4 महीने तक एक निजी अस्पताल में काम किया। इसके बाद पिछले साल ही उन्होंने जून में त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया, लेकिन शिजी को अभी तक सरकारी अस्पताल की तरफ से उनके काम के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया है।

काफी कुछ सीखने को मिल रहा

उनके लिए सरकारी अस्पताल के लिए काम करना एक विकल्प था, जिससे शिजी ने अपना कर्तव्य समझकर चुना। ऐसे कई वॉलिंटियर्स है, जो कोविड-19 वार्ड में नहीं जा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके शिजी ने अपना काम जारी रखा हुआ है। दरअसल प्रकोप के तुरंत बाद जब अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देख अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए शिजी ने इस काम को बखूबी तरीके से संभाल लिया है। उनका मानना है कि इस दौरान उन्हें मेडिकल इमरजेंसी के बारे में काफी कुछ सीखने को मिला है।

12 साल में हुआ पिता का देहांत

वह बताती है कि ज्यादातर मरीज जिनका उन्होंने इलाज किया, वह बेहोश रहते थे। एक बार उनकी स्थिति में सुधार आने के बाद उन्हें आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। शिजी अपने पिता राजन की इकलौती बेटी है, जिनका 12 साल की उम्र में ही निधन हो गया था। पिता के बाद उनकी मां ने दैनिक मजदूरी करते हुए अपनी जरूरतों कर शिजी और अपनी जरूरतों को पूरा किया है।



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Corona warriors: Meet PR Shiji, a nurse from trishur in kerela treating corona patients for free, giving services in government hospital without any salary


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मुफ्त में कोरोना मरीजो का इलाज कर रहीं नर्स पीआर शिजी, बिना किसी वेतन के सरकारी अस्पताल में दे रहीं सेवाएं

देशभर में फैले कोरोनावायरस के दौरान सभी कोरोना योद्धा अपने- अपने स्तर पर इससे लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसी ही एक फ्रंटलाइन हेल्थ केयर वर्कर केरल के त्रिशूर की एक युवा नर्स है, जो मुश्किल के समय में भी बहादुरी से अपना कर्तव्य निभा रही हैं। नर्स पीआर शिजी इन दिनों त्रिशूर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में कोविड-19 इंसेंटिव केयर यूनिट में एक सेल्फ हेल्प स्टाफ नर्स के रूप में बिना किसी वेतन के अपनी सेवाएं दे रही हैं।

इंटर्न के तौर पर कर रहीं काम

बचपन में ही अपने पिता को खोने वाली शिजी की परवरिश उनकी मां ने की। फिलहाल वह एक इंटर्न के रूप में काम कर रही है, जिसके लिए उन्हें अस्पताल से ना ही कोई वेतन मिलता है और ना ही कोई अन्य भत्ता। एक निजी कॉलेज से बीएससी नर्सिंग पूरी करने वाली 22 वर्षीय शिजी ने बताया कि उन्होंने 4 महीने तक एक निजी अस्पताल में काम किया। इसके बाद पिछले साल ही उन्होंने जून में त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया, लेकिन शिजी को अभी तक सरकारी अस्पताल की तरफ से उनके काम के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया है।

काफी कुछ सीखने को मिल रहा

उनके लिए सरकारी अस्पताल के लिए काम करना एक विकल्प था, जिससे शिजी ने अपना कर्तव्य समझकर चुना। ऐसे कई वॉलिंटियर्स है, जो कोविड-19 वार्ड में नहीं जा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके शिजी ने अपना काम जारी रखा हुआ है। दरअसल प्रकोप के तुरंत बाद जब अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देख अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए शिजी ने इस काम को बखूबी तरीके से संभाल लिया है। उनका मानना है कि इस दौरान उन्हें मेडिकल इमरजेंसी के बारे में काफी कुछ सीखने को मिला है।

12 साल में हुआ पिता का देहांत

वह बताती है कि ज्यादातर मरीज जिनका उन्होंने इलाज किया, वह बेहोश रहते थे। एक बार उनकी स्थिति में सुधार आने के बाद उन्हें आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। शिजी अपने पिता राजन की इकलौती बेटी है, जिनका 12 साल की उम्र में ही निधन हो गया था। पिता के बाद उनकी मां ने दैनिक मजदूरी करते हुए अपनी जरूरतों कर शिजी और अपनी जरूरतों को पूरा किया है।



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हाईजीन से जुड़ी कुछ ऐसी आदतें जिसे पुरुषों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जानें घर पर कैसे मेंटेन करें पर्सनल हाईजीन

देशभर में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन जारी है। ऐसे में सभी लोग घरों में बंद हो गए हैं और काफी लोग घर से ही काम कर रहे हैं। साथ ही सभी घर से बाहर जाने पर खुद को सैनिटाइज करने और नियमित रूप से हाथ साफ करने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। लेकन इस दौरान घर में रहने से हम में आलस्य आ रहा है, जिसके कारण हम पर्सनल हाईजीन से जुड़ी कुछ बुनियादी मामले नजरअंदाज कर रहे हैं।

निजी हाईजीन के मानकमहिलाओं की अपेक्षापुरुषों में कम

हाईजीन के प्रति पुरुषों और महिलाओं के रुख अलग हैं। और माना जाता है कि पुरुषों के निजी हाईजीन और सजने-संवरने के मानक महिलाओं के मुकाबले कम होते हैं। 2010 में अमेरिकन क्लीनिंग इंस्टीट्यूट और अमेरिकन माइक्रोबायोलॉजी सोसाइटी के एक अध्ययन ने पाया कि किसी जानवर को सहलाने, खाद्यपदार्थ को छूने खांसने या झींकने के बाद भी पुरुषों के हाथ धोने की संभावना कम रहती है।

सीके बिरला हॉस्पीटल के कंसलटैंट इंटरनल मेडिसिन, डॉ. तुषार तायल से जानें ,हाईजीन से जुड़े छह गोल्डन रूल जिन्हें व्यवहार में लाना चाहिए

  • फेशियल हाईजीन (चेहरे की सफाई) – घर में रहते हुए भी रोज कम से कम दो बार अपने चेहरे को जरूर साफ करें। इसके लिए फेशियल क्लिंजर या फेश वॉश का उपयोग करें। साबुन, बॉडी जेल या बॉडी स्क्रब का उपयोग नहीं करें। इससे आपकी त्वचा आवश्यक नमी से मुक्त हो जाएगी और इसका प्राकृतिक पीएच संतुलन गड़बड़ा जाएगा। इससे त्वचा रुखी-सूखी लगेगी और आप परेशानी महसूस करेंगे। आप फेशियल मास्क जैसे मड, क्ले, घर में बने या ओटमील के मास्क का भी उपयोग कर सकते हैं। हर तरह की त्वचा के लिए मास्क उपलब्ध हैं। इससे आपकी नाक और गालों पर तथा कभी-कभी ठुड्डी और कान पर पाए जाने वाले ब्लैकहेड को भी हटाना संभव होता है।
  • डेंटल हाईजीन (दांतों की सफाई) – यह एक ऐसा मामला है जो बड़े आराम से उपेक्षित छोड़ दिया जाता है। मुंह का स्वास्थ्य निजी हाईजीन का अहम हिस्सा है। आपको रोज दो बार ब्रश करना चाहिए। जीभ को रोज एक बार फ्लॉस या स्क्रब करना चाहिए। यह शरीर का सबसे उपेक्षित हिस्सा है। इसे कायदे से साफ नहीं किया जाए तो बैक्टीरिया के लिए जबरदस्त है। और ये मुंह में पड़े रहते हैं और इकट्ठा होते हैं। इसलिए, सांसों की बदबू से बचने के लिए जीभ साफ कीजिए और खाद्य पदार्थों के खराब होने से बनने वाली कैविटी से बचिए।
  • हेयर हाईजीन (बालों की सफाई) – यह महत्वपूर्ण है कि सिर और चेहरे के बाल, नाक के बालों समेत ट्रिम किए और ठीक से संवारे हुए रहें। नियमित रूप से शेव कीजिए और दाढ़ी मूंछ ग्रूम करने करने वाले उत्पादों का उपयुक्त रूप से इस्तमाल कीजिए। बगलों के और गुप्तांगों के बाल भी ट्रिम करके रखें।
  • वर्कआउट (व्यायाम) के बाद शावर लेने (नहाने) में देर न करें - व्यायाम के दौरान निकलने वाला पसीना आपके रोमछिद्रों को बंद कर सकता है। इससे तेल और मृत त्वचा की कोशिकाएं अंदर ही रह जाएंगी। इससे मुंहासे और तकलीफदेह सिस्टिक पिम्पल होते हैं। यह न सिर्फ आपके चेहरे पर होगा बल्कि पीठ, बांह और पैरों पर भी होगा। एक मात्र समाधान यह है कि शावर में घुसिए और खुद पर किसी अनुशंसित बॉडी वॉश से झाग बनाइए। इसमें सैलिसिलिक एसिड या बेनजॉयल पेरोक्साइड हो। गर्म पानी का उपयोग करने से बचिए। गर्म पानी से नहाने से शुष्की, लाली, खुजली हो सकती और संभव है, त्वचा उतरने लगे। इसलिए हमेशा गुनगुने पानी का ही उपयोग करें।
  • नीचे अंदर तक साफ-सफाई रखिए - गुप्तांगों के आस-पास नीचे तक की जगह को भूलना नहीं चाहिए। यह जगह अमूमन नम रहती है, गर्म और अंधेरी भी। यह सब बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए बेहद अनुकूल है। वहां बैक्टीरिया की मौजूदगी दुर्गन्ध और त्वचा के संक्रमण का कारण बन सकती है। इसलिए, इस जगह को नियमित रूप से साफ कीजिए और हल्के-हल्के अच्छी तरह पोंछ दीजिए। पूरी जगह को सुखाकर एंटीफंगल डस्टिंग पावडर लगाइए। ऐसे अंडरवीयर पहनिए जिसमें हवा अच्छी तरह जाती-जाती हो।
  • अपना तौलिया नियमित बदलिए और चादर खूब साफ रखिए – आमतौर पर ये पॉलिएस्टर / कॉटन ब्लेंड से बने होते हैं, जिसमें दुर्गन्ध फंसा रह जाता है।
  • पैरों की साफ-सफाई (हाईजीन) – अगर आपके के पैर के नाखूनों में गंदगी जमा होने लगी है तो यह उन्हें काटने का संकेत है। नाखून काटिए किनारे गोल कीजिए और साफ रखिए। त्वचा को कोमल और फटने से बचाने के लिए हैंड लोशन लगाइए।
  • मॉयश्चराइज कीजिए – शरीर में लोशन लगाना और होंठो को मॉयश्चराइज करना सिर्फ महिलाओं की जरूरत नहीं है। होंठों को गीला रखने के लिए चाटने से बचिए। इससे आपका मुंह सूख जाएंगा और त्वचा खराब या रुखी हो जाएगी।

ग्रूमिंग की आदत उन चीजों में एक है जिसके बारे में माना जाता है कि हर कोई जानता है पर इसके बारे में खुलकर कोई बात नहीं करता है। आपकी त्वचा की किस्म के मद्देनजर आपको किन व्यवहारों का पालन करना चाहिए इस बारे में अपने चिकित्सा पेशेवरों से चर्चा करने में मत शर्माइए।



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Some hygiene-related habits that men should not ignore, learn how to maintain personal hygiene at home


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दो साल से ल्यूकेमिया से जूझ रहे थे ऋषि कपूर, यह एक तरह का ब्लड कैंसर जिसमें शरीर को बचाने वाली कोशिकाएं ही जानलेवा बन जाती हैं 

अभिनेता इरफान खान के बाद ऋषि कपूर भी नहीं रहे। वे 67 साल के थे। गुरुवार सुबह मुंबई के एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया।ऋषि कपूर दो साल से ल्यूकेमिया से जूझ रहे थे जो एक तरह ब्लड कैंसर होता है। ब्लड कैंसर खून बनाने वाले ऊतकों का कैंसर होता है जिसमें बोन मैरो भीशामिल है। इलाज की बात स्वीकारते हुए ऋषि कपूर ने अपने अंतिम इंटरव्यू में कहा था जैसे लोग लिवर, किडनी और हार्ट की बीमारी से जूझते हैं वैसे मेरा मैरो ट्रीटमेंट चल रहा है। जानिए क्या है ल्यूकेमिया...,

Q&A : सवालों से समझिए कितना खतरनाक है ल्यूकेमिया

#1) क्या होता है ल्यूकेमिया?
यह एक तरह का ब्लड कैंसर है जिसे क्रॉनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (सीएलएल) भी कहते है। आमतौर पर शरीर में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स शरीर की रोगों सेलड़ने की क्षमता को बढ़ाती हैं लेकिन ल्यूकेमिया की स्थिति में असामान्य रूप से इन कोशिकाओं की संख्या बढ़ने लगती है। इनका आकार बदलने लगता है। धीरे-धीरे रोगों से लड़ने की क्षमता यानी इम्युनिटी घटने लगती है। इसके ज्यादातर मामले बढ़ती उम्र के लोगों में सामने आते हैं।

#2) क्या बदलाव दिखने पर अलर्ट हो जाएं?
ल्यूकेमिया की सटीक वजह क्या है यह अब साफ नहीं हो पाया है लेकिन कुछ लक्षण ऐसे है जिसके दिखने पर अलर्ट हो जाना चाहिए, जैसे-

  • तेजी से वजन का घटना
  • हर समय थकान महसूस होना
  • बार-बार शरीर में संक्रमण का फैलना या बीमारी होना
  • सिरदर्द महसूस होना
  • त्वचा पर धब्बे
  • हड्‌डी में दर्द महसूस होना
  • अधिक पसीना निकलना (खासतौर पर रात में)


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Rishi Kapoor Death News Updates; What Is Leukemia Blood Cancer? What Are The Symptoms?


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कैंसर से जूझने की कहानी भी एक जैसी, दो साल ट्रीटमेंट चला; इलाज सफल होने की खबर आई और फिल्में की पर अचानक अलविदा कह गए

कैंसर फिल्म जगत के दो दिग्गज कलाकार इरफान खान और ऋषि कपूर को निगल गया। दोनों ही दो साल से इससे जूझ रहे थे और लगभग इलाज सफल होने की खबरें भी आईं। फिल्म जगत में वापसी हुई और फिल्में भी की लेकिन अचानक 22 घंटे के अंदर दुनिया को अलविदा कह गए। दोनों ही दिग्गजों की बीमारी का सफर एक जैसा ही रहा। जानिए कैसे शुरू हुई उनकी कैंसर की कहानी...

ऋषि कपूर : लम्बे समय बाद न्यूयॉर्क से लौटे, फिल्में की और अचानक अलविदा कह गए

फरवरी 2018 : निमोनिया ने जकड़ा और दिल्ली में भर्ती हुए
ऋषि कपूर की तबियत बिगड़ने की शुरुआत फरवरी 2018 में हुई जब उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। उस दौरान वह दिल्ली में फैमिली फंक्शन में पहुंचे थे। उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती किया गया। वह निमोनिया के संक्रमण से जूझ रहे थे, यह बात उन्होंने खुद मानी, हालांकि रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई थी।ऋषि कपूर ने बीमारी की जानकारी देते हुए कहा था, मुझे बुखार है और जांच हो रही है। डॉक्टर्स ने हालात खराब होने की वजह निमोनिया बताया था, जिसका इलाज हो गया है। लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। मैं उन सभी अटकलों को रोकते हुए आपको एंटरटेन करना चाहता हूं, आपको प्यार करता है। फिलहाल में अब मुम्बई में हूं।

अक्टूबर 2018 : भाई रणधीर ने इलाज की पुष्टि की
ऋषि कपूर को कैंसर होने की पहली खबर 3 अक्टूबर 2018 को आई। भाई रणधीर कपूर ने बताया कि ऋषि सितंबर में इलाज कराने के लिए अमेरिका गए। हालांकि वह किस तरह कैंसर से जूझ रहे थे परिवार के किसी भी सदस्य ने इसकी जानकारी दी। अमेरिका में उनका मैरो ट्रीटमेंट चल रहा था। इलाज के कारण वह अपनी मां को अंतिम विदाई देने भारत नहीं आ पाए थे। वह न्यूयॉर्क से 11 महीने 11 दिन के बाद इलाज कराकर लौटे तो ट्वीट किया 'घर वापस आ गया'।

अंतिम इंटरव्यू : 'लोग लिवर, दिल की बीमारी से जूझते है मेरा मैरो ट्रीटमेंट चला'
ऋषि ने अपने अंतिम इंटरव्यू में बीमारी से जुड़ी बातों का खुलासा किया था। उन्होंने कहा, जब हम बुरे दिनों की बात करते हैं तो इसका मजतब कोई सर्जरी या दर्द नहीं होता। इसका तरह का कुछ भी नहीं होता। जैसे लोगों को किडनी, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियां होती हैं मुझे मैरो की समस्या थी। जिसका इलाज हुआ। यह कोई गंभीर विषय नहीं है। दो बार लम्बा इलाज चला इस दौरान वह (नीतू) मेरे साथ रहीं। हम अपने शहर आए और गए। आप बार-बार लम्बी दूरी की यात्रा नहीं कर सकते है। इसलिए लम्बे समय तक वहां रहा। मेरा वहां इलाज चला और यह सफल रहा। आप सभी लोगों को दुआ का धन्यवाद, इसने मुझे लड़ने का साहस मिला।



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Rishi Kapoor Irrfan Khan Death Neuroendocrine Cancer Updates On His Bollywood Journey; Everything you need to know about


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ओलिंपिक स्थगित होने से मुश्किल में दुती, लाखों रुपए का हुआ है नुकसान

दुती (Dutee Chand) खेल मंत्रालय की टारगेट ओलिंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) का हिस्सा नहीं है

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Wednesday, April 29, 2020

Video Recipe: घर बैठे हलवाई जैसी कुरकुरी केसर जलेबी का लें मजा

केसर जलेबी रेसिपी वीडियो (Kesar Jalebi Recipe Video): लॉकडाउन के कारण सभी रेस्तरां और मिठाइयों की दुकानें पिछले एक महीने से ज्यादा समय से बंद हैं. ऐसे में कभी कभी मीठा खाने की क्रेविंग काफी तेज होती है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो हम आपके लिए लेकर आए हैं देशी घी की केसरिया जलेबी की रेसिपी का वीडियो. बस इन कुकिंग टिप्स को अपनाकर आप घर में ही बहुत आसानी से हलवाई जैसी जलेबी घर पर बना सकते हैं...

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एआईबीए का बड़ा आरोप, कहा-18 महीने बाद भी भारत ने नहीं चुकाया पैसा

मेजबानी फीस न भर पाने के कारण अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज संघ (AIBA) ने 2021 में होने वाली वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप की मेजबानी भारत से छीन ली.

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कोरोना वायरस के बीच डिंको सिंह को मिली मदद, यूं लड़ रहे हैं कैंसर की जंग

डिंको सिंह (Dingko Singh) लिवर कैंसर से पीड़ित हैं जिसके इलाज के लिए उन्हें समय-समय पर दिल्ली (Delhi) आना पड़ता है

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Recipe: देसी घी की गर्म और कुरकुरी केसर जलेबी खाएं

केसर जलेबी रेसिपी (Kesar Jalebi Recipe): इन कुकिंग टिप्स (Cooking tIps) को अपनाकर आप घर में ही बहुत आसानी से जलेबी (Kesar Jalebi) खा सकते हैं...

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इंसानी कोशिका को पूरी तरह घेरकर उसमे घुस जाता है कोरोनावायरस, 20 लाख गुना बड़ा करके उतारी तस्वीरों से पता चला

अमेरिका और ब्राजील के दो संस्थानों ने कोविड-19 फैलाने वाले कोरोनावायरस SARS-COV-2 की स्पष्ट तस्वीरें उतारे में सफलता पाई हैं। इन तस्वीरों को इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोस्कोप की मदद से उतारा गया है। इसके लिए माइक्रोस्कोप में वायरस के संक्रमण की स्थिति को 20 लाख गुना बड़ा करके देखा गया जिसमें पता चला कि किस तरह से यह वायरस इंसानी कोशिका को पूरी तरह घेर लेता है और उसके अंदर घुस जाता है। इसके बार वायरसउसके ही जीवन रस औरप्रोटीन के साथ जुड़कर कोशिका कोनष्ट होने पर मजबूर करदेता है।

ये नईतस्वीरें अमेरिका के मैरीलैंड स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज (एनआईएआईडी) इंटीग्रेटेड रिसर्च फैसिलिटी (आईआरएफ) फोर्ट फोर्ट्रिक, नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट(एनआईएच) और ब्राजील के ओसवाल्डो क्रूजफाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रयोगों के दौरान उतारी हैं। भारत में भी बीते महीनेनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस की पहली तस्वीरें ली हैं।

वैज्ञानिकों नेट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करते हुए, लेंस की मदद से ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जिससे सैम्पल को बीस लाख गुना बढ़ाया जा सकता है। इसके लिएटीम ने सेल कल्चर बनाया और फिर कोशिकाओं को वायरस से संक्रमित होनेकी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से देखा और वायरस के संक्रमण के तरीके कोसमझा।

तस्वीरों से समझते हैं कोरोना वायरस और उसका आक्रमण

नए नोवलकोरोनावायरस (Sars-Cov-2) के चारों ओर एक ताज नुमा (क्राउन) संरचना है, जिसके कारण इसे कोरोना नाम दिया गया है। लैटिन में क्राउन का मतलब कोरोना होता है।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर डॉ अतानु बसु के मुताबिक, कोरोनावायरस के एक कण काआकार 75 नैनोमीटर (एक मीटर का एक अरबवां हिस्सा)होताहै।

ये तस्वीर अमेरिका के मैरीलैंड स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ली है। स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ तकनीक से ली गई इस रंगीन तस्वीर में इंसानी शरीर की एपोप्टोटिक कोशिका (बैंगनी रंग में) को SARS-COV-2 वायरस (पीले रंग में) बहुत अधिक संख्या में झुंड बनाकर आसपास से घेरे हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक एपोप्टोटिक कोशिकाएं सिंगल या एक समूह में होती है। ये ऐसी कोशिकाओं का वह रूप है जो वायरस से संक्रमित हो जाने के बाद खुद ही अपने अंदर डेथ प्रोग्राम शुरू कर लेता है और बहुत जल्दी ये खुद ही नष्ट हो जाती हैं।

हर एक कोशिका एक मेम्ब्रेन या झिल्ली में सुरक्षित होती है। 02 अप्रैल को पहली बार एक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप तस्वीर में SARS-CoV2 का पहला ब्लैक एंड व्हाइट फोटो उतारा गया। इसमें एक लाल रंग के तीर से समझाया गया है कि वायरस की सतह पर विशिष्ट ग्लाइकोप्रोटीन के तंतु होते हैं जो कोशिका को पकड़ने के काम आते हैं। इस तस्वीर में छोटे काले धब्बों के रूप में वायरस दिखाई दे रहे हैं।

SARS-COV-2 वायरस कोशिका के साइटोप्लाज्म यानी एक कोशिका के जीवनरस में संक्रमण प्रक्रिया शुरू करता है। साइटोप्लाज्म के अंदर ही कोशिका का केंद्र न्यूक्लिअस होता है, जो कोशिका की आनुवंशिक सामग्री को जमा करने के लिए जिम्मेदार होता है। जैसे ही वायरस संक्रमित कोशिका के अंदर घुसता है तो उसकी झिल्ली के अंदर ही तेजी से अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर देता है। इस चित्र में बांयी ओर एक सफेद कोशिका में गोल-गोल कोरोनावायरस साफ देखे जा सकते हैं।

इस तस्वीर में काले रंग के धब्बों के रूप में SARS-COV-2 वायरस के झुंड नजर आ रहे हैं। एक बार कोशिका में घुसने और उसके साइटोप्लाज्म को संक्रमित करने के बाद ये वायरस न्यूक्लिअस को निशाना बनाते हैं जिसमें जेनेटिक मटेरियल यानी डीएनए होता है। इससे कोशिका की पूरी कार्यप्रणाली नष्ट हो जाती है और कोशिका स्वयं को नष्ट करने का प्रोग्राम शुरू कर देती है। तस्वीर में V शेप में कुछ संरचनाए नजर आ रही हैं जो एंटीबॉडीज हैं। तीव्र संक्रमण की स्थिति में इन एंटीबॉडीज की संख्या में कम होने और क्षमतावान न होने के कारण ये वायरस का मुकाबला नहीं कर पाती हैं और शरीर में संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और उसे वेंटीलेटर पर ले जाना पड़ता है। इसके बाद जीवन रक्षक मशीनों,दवाओं और मरीज की खुद कीइम्यूनिटी की भूमिका अहम होती है।



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Corona virus completely engulfs human cell, 20 million times larger than photos revealed


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Diwali 2020: परफेक्ट हलवाई स्टाइल में घर पर ऐसे बनाएं गुजिया, ये हैं 5 टिप्‍स

Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...