क्या आप घर में बैठे बोर हो रहे हैं. अगर हां, तो चलिए हम आपकी बोरियत दूर करने के लिए एक टास्क देते हैं. इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसे कई फोटोज वायरल हो रही हैं, जिनमें सांप या खतरनाक जानवर छिपे हुए हैं.
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मौजूदा हालात में सभी लोग जरूरतमंदों का मदद के लिए अपने-अपने स्तर पर योगदान दे रहे है। लोगों की मदद करती कई तस्वीरें और वीडियो लगातार सामने आ रही है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मुंबई की 99 साल की बुजुर्ग महिला लोगों के लिए खाना पैक करती दिख रही। वह अपने घर के डाइनिंग टेबल पर बैठकर प्रवासी मजदूरों के लिए खाने का पैकेट तैयार कर रही है। इस वीडियो को ट्विटर यूजर जाहिद एफ अब्राहिम ने शेयर किया है। वीडियो शेयर करते हुए जाहिद ने लिखा, यह बुजुर्ग महिला मेरी चाची है, जो मुंबई के प्रवासी मजदूरों के लिए खाने का पैकेट तैयार कर रही है। वह इस वीडियो के जरिए यह भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई भी सहायता छोटी या बड़ी नहीं होती।
इंटरनेट पर वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आते ही यह इंटरनेट पर वायरल हो गया। इस वीडियो को अबतक 1 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। यही नहीं वीडियो पर अबतक 11 हजार से ज्याद लाइक्स और 1700 सौ के करीब रिट्वीट मिल चुके हैं। लोग भी वीडियो को काफी पसंद भी करते हुए इमोशनल कमेंट कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया- वाह क्या शानदार तरीका है, तो वहीं एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, इस दादी को मेरा सलाम।
मौजूदा हालात में सभी लोग जरूरतमंदों का मदद के लिए अपने-अपने स्तर पर योगदान दे रहे है। लोगों की मदद करती कई तस्वीरें और वीडियो लगातार सामने आ रही है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मुंबई की 99 साल की बुजुर्ग महिला लोगों के खाना पैक करती दिख रही। वह अपने घर के डाइनिंग टेबल पर बैठकर प्रवासी मजदूरों के लिए खाने का पैकेट तैयार कर रही है। इस वीडियो को ट्विटर यूजर जाहिद एफ अब्राहिम ने शेयर किया है। वीडियो शेयर करते हुए जाहिद ने लिखा, यह बुजुर्ग महिला मेरी चाची है, जो मुंबई के प्रवासी मजदूरों के लिए खाने का पैकेट तैयार कर रही है। वह इस वीडियो के जरिए यह भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई भी सहायता छोटी या बड़ी नहीं होती।
इंटरनेट पर वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आते ही यह इंटरनेट पर वायरल हो गया। इस वीडियो को अबतक 1 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। यही नहीं वीडियो पर अबतक 11 हजार से ज्याद लाइक्स और 1700 सौ के करीब रिट्वीट मिल चुके हैं। लोग भी वीडियो को काफी पसंद भी करते हुए इमोशनल कमेंट कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया- वाह क्या शानदार तरीका है, तो वहीं एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, इस दादी को मेरा सलाम।
पनीर समोसा वीडियो रेसिपी (Cheese Samosa Video Recipe): क्या आपको बाजार वाले समोसे (Samosa) याद आ रहे हैं लेकिन घर में बंद होने के कारण आप उसका स्वाद नहीं चख पा रहे हैं. अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्वारंटाइन (Quarentine) में रहते हुए भी आप घर पर बड़ी ही आसानी से स्पेशल समोसे तैयार कर सकते हैं और इनका टेस्ट (Taste) भी बिल्कुल बाजार जैसा होगा. अगर इस बार आपका मन घर पर समोसे बनाकर खाने का हो तो हिचकिचाए नहीं बल्कि इसे बनाएं और इसका मजा उठाएं. आइए हम आपके लिए कनक किचन के सभार से पनीर समोसे की वीडियो रेसिपी लाए हैं...
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15 मिनट में बनेगा ये टेस्टी नाश्ता (15 Minutes Breakfast Recipe): लॉकडाउन के दौरान हर दिन कुछ अलग अलग खाने का मन करता है. कुछ ऐसा जो हेल्दी और टेस्टी तो हो ही साथ ही फटाफट बन भी जाए . आज इसे ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए लाए हैं कुछ ऐसी ब्रेकफास्ट रेसिपी जो 15 मिनट में बनकर तैयार हो जाएंगी साथ ही काफी पौष्टिक भी हैं. इसे बनाना भी काफी आसान है. आज हम आपके लिए लाए She Cooks की वीडियो रेसिपी के साभार से आपके लिए लाए हैं ये ईजी ब्रेकफास्ट. तो आप तैयार हैं इन कुकिंग टिप्स को अपनाने के लिए...
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मां अपना सब कुछ अलग रखकर बच्चे की परवरिश में खुद को खो देती है। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य होना चाहिए कि कैसे अपनी मां को ये अहसास कराएं कि वो हमारे लिए क्या हैं? इन 5 बातों का यदि हम अनुसरण करेंगे तो अपनी मां को दिल की गहराई से रूबरू करा सकते हैं।
1. यादें ताजा करें
सबसे ज्यादा खुश मां तब होती है जब वो ये याद करती है कि उसके बच्चे ने बचपन में क्या शरारतें की थीं और वो कैसे खेला करते थे। कभी मां से पूछें कि वो अपने बचपन के दिनों में क्या किया करती थीं। मां से बातों के दौरान आप गौर करें कि उनकी आंखें उसी दौर में पहुंच चुकी होंगी, जब आप छोटे थे। वो आपको सिर्फ अच्छी आदतें ही बताएंगी और बस खुश होती चली जाएंगी।
2. उनकी मदद करें
लॉकडाउन के दौरान हमें जो समय मिला है, इन सबके बीच सबसे ज्यादा भला हुआ है उस मां का जो हमेशा चाहती थी कि मेरे बच्चे कुछ समय बिना दुनिया जहान की परवाह किए मेरे पास बैठें। वैसे भी हर घर में पत्नी और बच्चों के लिए पुरुष कितना भी बिजी हो समय निकाल ही लेता है, पर मां के लिए ये संभव नहीं होता है। ऐसा करने से मां को आपके जीवन में उनकी अहमियत पता चलेगी।
3. उनकी परवाह करें
जैसा मां हमें प्यार करती हैं, वैसी ही देखभाल करना तो मुश्किल है पर जितना हम कर सकते हैं, उतने प्रयास जरूर करना चाहिए। यह सच है कि मां का दिल बच्चे की परवाह में जैसा जन्म के पहले दिन होता है, वैसा ही आखिरी तक बना रहता है। बच्चे भी उन पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो ये बराबर की खुशी महसूस कराएगा। उनकी छोटी-छोटी सी चीजों की परवाह करें और उन पर ध्यान रखें।
4. संस्कारों को अपनाएं
जैसे मां हमारी प्रथम गुरु होती हैं तो उनकी दी हुई शिक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसे अपने जीवन में उतारें। मां की दी हुई सीख ही हमारा आधार बनती है। यही व्यक्तित्व की पहचान भी होती है। जब भी उनकी दी हुई सीख की झलक मां हम में देखती हैं तो वो अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती हैं। ये करके हम उनकी ममता को वो दर्जा देते हैं जिसकी वो हकदार हैं। यकीन मानिए उनके दिए संस्कार हमें जीवन में सदा काम आते हैं।
5. नई चीजें सिखाएं
इंटरनेट जैसी दैनिक जीवन में काम आने वाले अपडेशन से अवगत कराएं। जैसे हमारी मां ने वक्त के हिसाब से हर उम्र में कुछ नया सिखाया है तो क्यों ना हम भी उन्हें आज के जमाने के हिसाब से नई चीजें सिखाएं। ताकि वो भी दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चल सकें और अपने आप को पिछड़ा हुआ महसूस न करें। उनका यह ज्ञान उन्हें आज के समय में अपडेट रहने में मदद करेगा।
आमतौर पर माता-पिता, भाई-बहन और सास, ननंद, देवर आदि के साथ कई बार छोटी-छोटी बातों पर तनाव हो जाता है। अच्छे संबंध के लिए एक अच्छा लिसनर होना जरूरी है। जानिए 4 कारण, जो संबंध मजबूत बनाए रखते हैं।
1. परिवार के सदस्य बोलें, तो बीच में न टोकें: परिवार के बीच मौजूद होने पर कई बार हमसे ऐसे टॉपिक्स पर भी चर्चा होती है, जिनमें हमारी दिलचस्पी नहीं होती है। उनकी बात बीच में काटने की भूल ना करें। यथासंभव शांत रहें।
2. खुद पर ना केंद्रित हो बातचीत : कई महिलाएं किसी भी विषय पर होने वाली बातचीत को खुद पर केंद्रित कर लेती हैं। यह गलती संबंधों में खटास लाती है। किसी विषय पर अपने अनुभव के बजाय उनकी बातें ध्यान से सुनना जरूरी है।
3. अच्छी नहीं है हड़बड़ी : घर परिवार से लेकर ऑफिस तक हो सकता है आप पर कई जिम्मेदारियां हों, लेकिन परिवार के सदस्यों से जल्दबाजी में बात करना और उन्हें कहने के लिए पर्याप्त समय ना देना आपके लिए अच्छा नहीं है।
4. नजरें मिलाकर बात करना जरूरी: परिवार में इमोशंस का महत्व होता है। सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि भाव भंगिमाएं भी मायने रखती हैं। जब आप परिवार के सदस्यों से नजरें मिलाकर बात करती हैं तो वे आपसे कनेक्ट फील करते हैं।
मां अपना सब कुछ अलग रखकर बच्चे की परवरिश में खुद को खो देती है। ऐसे में हमारा भी कर्तव्य होना चाहिए कि कैसे अपनी मां को ये अहसास कराएं कि वो हमारे लिए क्या हैं? इन 5 बातों का यदि हम अनुसरण करेंगे तो अपनी मां को दिल की गहराई से रूबरू करा सकते हैं।
1. यादें ताजा करें
सबसे ज्यादा खुश मां तब होती है जब वो ये याद करती है कि उसके बच्चे ने बचपन में क्या शरारतें की थीं और वो कैसे खेला करते थे। कभी मां से पूछें कि वो अपने बचपन के दिनों में क्या किया करती थीं। मां से बातों के दौरान आप गौर करें कि उनकी आंखें उसी दौर में पहुंच चुकी होंगी, जब आप छोटे थे। वो आपको सिर्फ अच्छी आदतें ही बताएंगी और बस खुश होती चली जाएंगी।
2. उनकी मदद करें
लॉकडाउन के दौरान हमें जो समय मिला है, इन सबके बीच सबसे ज्यादा भला हुआ है उस मां का जो हमेशा चाहती थी कि मेरे बच्चे कुछ समय बिना दुनिया जहान की परवाह किए मेरे पास बैठें। वैसे भी हर घर में पत्नी और बच्चों के लिए पुरुष कितना भी बिजी हो समय निकाल ही लेता है, पर मां के लिए ये संभव नहीं होता है। ऐसा करने से मां को आपके जीवन में उनकी अहमियत पता चलेगी।
3. उनकी परवाह करें
जैसा मां हमें प्यार करती हैं, वैसी ही देखभाल करना तो मुश्किल है पर जितना हम कर सकते हैं, उतने प्रयास जरूर करना चाहिए। यह सच है कि मां का दिल बच्चे की परवाह में जैसा जन्म के पहले दिन होता है, वैसा ही आखिरी तक बना रहता है। बच्चे भी उन पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो ये बराबर की खुशी महसूस कराएगा। उनकी छोटी-छोटी सी चीजों की परवाह करें और उन पर ध्यान रखें।
4. संस्कारों को अपनाएं
जैसे मां हमारी प्रथम गुरु होती हैं तो उनकी दी हुई शिक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसे अपने जीवन में उतारें। मां की दी हुई सीख ही हमारा आधार बनती है। यही व्यक्तित्व की पहचान भी होती है। जब भी उनकी दी हुई सीख की झलक मां हम में देखती हैं तो वो अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती हैं। ये करके हम उनकी ममता को वो दर्जा देते हैं जिसकी वो हकदार हैं। यकीन मानिए उनके दिए संस्कार हमें जीवन में सदा काम आते हैं।
5. नई चीजें सिखाएं
इंटरनेट जैसी दैनिक जीवन में काम आने वाले अपडेशन से अवगत कराएं। जैसे हमारी मां ने वक्त के हिसाब से हर उम्र में कुछ नया सिखाया है तो क्यों ना हम भी उन्हें आज के जमाने के हिसाब से नई चीजें सिखाएं। ताकि वो भी दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चल सकें और अपने आप को पिछड़ा हुआ महसूस न करें। उनका यह ज्ञान उन्हें आज के समय में अपडेट रहने में मदद करेगा।
आमतौर पर माता-पिता, भाई-बहन और सास, ननंद, देवर आदि के साथ कई बार छोटी-छोटी बातों पर तनाव हो जाता है। अच्छे संबंध के लिए एक अच्छा लिसनर होना जरूरी है। जानिए 4 कारण, जो संबंध मजबूत बनाए रखते हैं।
1. परिवार के सदस्य बोलें, तो बीच में न टोकें: परिवार के बीच मौजूद होने पर कई बार हमसे ऐसे टॉपिक्स पर भी चर्चा होती है, जिनमें हमारी दिलचस्पी नहीं होती है। उनकी बात बीच में काटने की भूल ना करें। यथासंभव शांत रहें।
2. खुद पर ना केंद्रित हो बातचीत : कई महिलाएं किसी भी विषय पर होने वाली बातचीत को खुद पर केंद्रित कर लेती हैं। यह गलती संबंधों में खटास लाती है। किसी विषय पर अपने अनुभव के बजाय उनकी बातें ध्यान से सुनना जरूरी है।
3. अच्छी नहीं है हड़बड़ी : घर परिवार से लेकर ऑफिस तक हो सकता है आप पर कई जिम्मेदारियां हों, लेकिन परिवार के सदस्यों से जल्दबाजी में बात करना और उन्हें कहने के लिए पर्याप्त समय ना देना आपके लिए अच्छा नहीं है।
4. नजरें मिलाकर बात करना जरूरी: परिवार में इमोशंस का महत्व होता है। सिर्फ शब्द ही नहीं, बल्कि भाव भंगिमाएं भी मायने रखती हैं। जब आप परिवार के सदस्यों से नजरें मिलाकर बात करती हैं तो वे आपसे कनेक्ट फील करते हैं।
कोरोना महामारी के चार महीने के बादचीनी वैज्ञानिकों नेउस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि कोरोनावायरस वुहान के वेट मार्केटसे फैला है। यहां के वैज्ञानिकों का कहना है कि वेट मार्केट का रोल एक सुपर स्प्रेडर की तरह है, न कि किसीसोर्स की तरह। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन की इसे लेकर अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है।
वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा, कोरोना के संक्रमण का पहला मामला वुहान की बाजार से नहीं आया है। महामारी की शुरुआत में शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोरोना वुहान के हुनान स्थित सी-फूड मार्केट से फैला। इसे अब चीनी वैज्ञानिकों ने इसे फिरनकार दिया है।
डीएनए सबूतों में चमगादड़-पैंगोलिन पर शक
वैज्ञानिकों ने डीएनए सबूतों के आधार पर दावा किया है कि नोवल कोरोनावायरस Sars-CoV2 चीनी चमगादड़ों में पहले से मौजूद था। इंसानों में इसके आने में किसी बीच के वाहक जानवर की भूमिका हो सकती है और इसमें पैंगोलिन पर सबसे ज्यादा शक है।
चीन के सीडीसी ने भी दिया जवाब
वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के डायरेक्टर गाओ फू का कहना है कि वुहान के पशु बाजार से दोबारा सैम्पल लेने के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई है। यह बताता है कि यहां के दुकानदार संक्रमित नहीं हुए।
1 जनवरी को मार्केट बंद करा दी गई थी
वुहान प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ को 31 दिसम्बर को निमोनिया की तरह दिखने वाले अलग किस्म के लक्षणों के बारे में बताया था, जो बाद में कोरोनावायरस के लक्षण के तौर पर पहचाना गया। शुरुआत में वुहान की मार्केट से कोरोना के 41 मामलों को जोड़ा गया। इसके बाद 1 जनवरी से मार्केट को बंद करा दिया गया था।
सार्स में भी ऐसे ही बाजार से फैला था संक्रमण
अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता प्रो. कोलिन कार्लसन के मुताबिक, 2002 और 2003 में आई सार्स महामारी के समय भी गुआंगडॉन्ग के एक ऐसे ही बाजार से संक्रमण फैला था। लेकिन, जांच के दौरान वुहान के बाजार में एक भी जानवर कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला। अगर वो संक्रमित नहीं हुए तो इसका मतलब है कि उन्हें कोई ऐसा सम्पर्क नहीं मिला जिससे मामले फैलें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आशंका जताई थी
हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा था कि यह साफ है कि कोरोनावायरस के संक्रमण में वुहान की मीट मार्केट ने भूमिका रही है, लेकिन इस मामले में अभी और रिसर्च की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि या तो वुहान के मार्केट से यह वायरस विकसित हुआ या फिर यहां से इसका फैलाव हुआ है। चीन के अधिकारियों ने जनवरी में इस मार्केट को बंद कर दिया था, इसके साथ ही वन्यजीवों के व्यापार में अस्थायी प्रतिबंध भी लगा दिया था।
पहला मामला वुहान की झींगा बेचने वाली महिला में सामने आया था
मार्च में मीडिया रिपोर्ट में कोविड-19 की पहली संक्रमित महिला के स्वस्थ होने का मामला सामने आया है। 57 वर्षीय महिला चीन के वुहान में झींगेबेचती थी। वेई गुझियान को पेशेंट जीरो बताया गया था। पेशेंट जीरो वह मरीज होता है, जिसमें सबसे पहले किसी बीमारी के लक्षण देखे जाते हैं। खास बात यह है कि करीब एक महीने चले इलाज के बाद यह महिला पूरी तरह से ठीक हो चुकी थी।
वुहान वेट मार्केट में10 दिसंबर की घटना
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यह महिला उस समय संक्रमित हुई, जब वह वुहान के हुआन सी-फूड मार्केट में 10 दिसंबर को झींगे बेच रही थीं। इसी दौरान उसने एक पब्लिक वॉशरूमका इस्तेमाल किया थाऔर इसके बाद उसे बुरी तरह से सर्दी-जुकाम ने जकड़ लिया।
चीन मेंबायोटेक कम्पनी सिनोवेट ने कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने की दिशा में काफी आगे बढ़ चुकीहै, लेकिन उसे ट्रायल के लिए मरीज नहीं मिल रहे हैं। कम्पनी का दावा है कि उसका वैक्सीन99 फीसदी तकअसरदार साबित होगा। बायोटेक कम्पनी सिनोवेट का कहना है कि हमने वैक्सीन के 100 मिलियन डोज तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
वैक्सीन का नाम रखा कोरोनावेक
एकेडमिक जर्नल साइंस में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कम्पनी ने वैक्सीन का नाम "कोरोनावेक" रखा है। ट्रायल में पाया गया है कियह बंदर को कोरोनावायरस से सुरक्षित रखती है। शोधकर्ता का कहना है कि अगले दौर के ट्रायल के लिए चीन में कोविड-19 के मरीजों की संख्या काकम होना सबसे बड़ी समस्या है।
तीसरे दौर के ट्रायल के लिए ब्रिटेन से बातचीत जारी
कम्पनी अपने दूसरे दौर का ट्रायल कर रही है जिसमें 1 हजार वॉलंटियरोंको शामिल किया गया है। वैक्सीन का तीसरा ट्रायल ब्रिटेन में किया जाना है और इसके लिए बातचीत चल रही है। शोधकर्ता लुओ बायशन का कहना है कि मैं 99 फीसदी तक निश्चिंत हूं कि ये वैक्सीन कारगर साबित होगी।
तस्वीर बायोटेक कम्पनी सिनोवेट के लैब की है जहां दूसरे चरण का ट्रायल चल रहा है।
हाई रिस्क जोन वालों को प्राथमिकता
कम्पनी के सीनियर डायरेक्टर हेलेन येंग का कहना है कि हम तीसरे दौर के ट्रायल के लिए ब्रिटेन और यूरोपीय देश से बातचीत कर रहे हैं। अभी यह शुरुआती दौर में है। वैक्सीन के प्रोडक्शन से पहले रिसर्च पूरी होना बेहद जरूरी है। इसके ट्रायल में सफल होने पर अप्रूवल के बाद सबसे पहले उन्हें दी जाएगी, जो हाई रिस्क जोन में हैं।
इधर, ऑक्सफोर्ड ब्रिटेन को पहले वैक्सीन देने की तैयारी में
दुनियाभर के वैज्ञानिक वैक्सीन तैयार करने की रेस में हैं। वैक्सीन तैयार होने के बाद भी सभी देशों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है, बड़े स्तर पर इसे तैयार करना और उपलब्ध कराना। देश अपनी ही जनसंख्या में कैसे वैक्सीन देने की प्राथमिकता तय करेंगे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही ड्रग कम्पनी एस्ट्राजेने का का कहना है कि ब्रिटेन पहला देश होगा, जिसे सबसे पहले हमारी वैक्सीन मिलेगी।
आज वर्ल्ड नो टोबैको डे है। इस साल की थीम है युवाओं को तम्बाकू और निकोटीन के दूर रखने के साथ उन झांसों से भी बचाना, जिससेकम्पनियां उन्हें धूम्रपान करने के लिए आकर्षित करती है। तम्बाकू से कमजोर हुए फेफड़े कोरोनावायरस को संक्रमण का दायरा बढ़ाने में मुफीद साबित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) और शोधकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है।
एक सर्वे कहता है, 27 फीसदी टीनएजर्स ई-सिगरेट पीते हैं। उनका मानना है कि ये स्मोकिंग नहीं सिर्फ फ्लेवर है और सेहत के लिए खतरनाक नहीं। इस पर मेदांता की विशेषज्ञ डॉ. सुशीला का कहना है, यह एक गलतफहमी है, वैपिंग भी सिगरेट पीने जितना खतरनाक है।
वर्ल्ड नो टोबैको डे पर जानिए कोरोना और तम्बाकू का कनेक्शन, इस मुद्देपर डब्ल्यूएचओ और मेदांता हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सुशीला कटारिया की सलाह।
लॉकडाउन तम्बाकू छोड़ने का सबसे अच्छा समय
डॉ. कटारिया कहती हैं, तम्बाकू छोड़ने के लिए लॉकडाउन सबसे अच्छा समय है। तम्बाकू छोड़ने के लिए कम से कम 41 दिन का समय चाहिए होता है। अगर तीन महीने तक कोई तम्बाकू नहीं लेता या स्मोकिंग नहीं करता तो वापस इसे शुरू करने की आशंका 10 फीसदी से भी कम रह जाती है। आप लॉकडाउन के दौरान दुनिया के सबसे बड़े एडिक्शन से पीछा छुड़ा सकते हैं।
टीनएजर्स में सिगरेट से ज्यादा आसान ई-सिगरेट की लत पड़ना
कुछ लोग कहते हैं हम तो सिगरेट नहीं ई-सिगरेट पी रहे हैं और इसका बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। इस पर डॉ. सुशीला कटारिया का कहना है कि ई-सिगरेट में खासतौर पर एक लिक्विड होता है, जिसमें अक्सर निकोटिन के साथ दूसरे फ्लेवर होते हैं। हमे इसकी लत लग जाती है और फेफड़े भी डैमेज होते हैं।
इन दिनों यह कई फ्लेवर में उपलब्ध हैं ऐसे में बच्चों में इसकी लत लगना सिगरेट से भी ज्यादा आसान है। ई-सिगरेट की आदत पड़ने के बाद सिगरेट और तम्बाकू की लत पड़ना काफी आसान हो जाता है, ऐसा कई शोध में भी सामने आया है।
4 सवालों में डब्ल्यूएचओ की नसीहत : तम्बाकू हर रूप में है खतरनाक और संक्रमण का खतरा भी बढ़ाता है
Q-1) मैं स्मोकिंग करता हूं, क्या मुझे कोरोना का गंभीर संक्रमण हो सकता है? डब्ल्यूएचओ : स्मोकिंग और किसी भी रूप में तम्बाकू लेने पर सीधा असर फेफड़े के काम करने की क्षमता पर पड़ता है और सांस लेने से जुड़ी बीमारियां बढ़ती हैं। संक्रमण होने पर कोरोना सबसे पहले फेफड़े पर अटैक करता है, इसलिए इसका मजबूत होना बेहद जरूरी है। वायरस फेफड़े की कार्यक्षमता को घटाता है। अब तक कि रिसर्च के मुताबिक धूम्रपान करने वाले लोगों में वायरस का संक्रमण और मौत दोनों का खतरा ज्यादा है।
Q-2) मैं स्मोकिंग नहीं करता सिर्फ तम्बाकू लेता हूं तो संक्रमण का कितना खतरा है? डब्ल्यूएचओ : यह आदत आपके और दूसरे, दोनों के लिए खतरनाक है। तम्बाकू लेने के दौरान हाथ मुंह को छूता है। यह भी संक्रमण का जरिया है और कोरोना हाथ के जरिए मुंह तक पहुंच सकता है। या हाथों में मौजूद कोरोना तम्बाकू में जाकर मुंह तक पहुंच सकता है। तम्बाकू चबाने के दौरान मुंह में अतिरिक्त लार बनती है, ऐसे में जब इंसान थूकता है तो संक्रमण दूसरों तक पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, इससे मुंह, जीभ, होंठ और जबड़ों का कैंसर भी हो सकता है।
Q-3) स्मोकिंग के अलग-अलग तरीकों से कैसे कोविड-19 का खतरा कितना बढ़ता है? डब्ल्यूएचओ : सिगरेट, सिगार, बीड़ी, वाटरपाइप और हुक्का पीने वाले कोविड-19 का रिस्क ज्यादा है। सिगरेट पीने के दौरान हाथ और होंठ का इस्तेमाल होता है और संक्रमण का खतरा रहता है। एक ही हुक्का को कई लोग इस्तेमाल करते हैं जो कोरोना का संक्रमण सीधेतौर पर एक से दूसरे इंसान में पहुंचा जा सकता है।
Q-4) स्मोकिंग या धूम्रपान छोड़ने पर शरीर में कितना बदलाव आता है? डब्ल्यूएचओ : इससे छोड़ने के 20 मिनट के अंदर बढ़ी हुई हृदय की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगता है। 12 मिनटबाद शरीर के रक्त में मौजूद कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर घटने लगता है। 2 से 12 हफ्तों के अंदर फेफड़ों के काम करने की हालत में सुधार होता है। 1 से 9 माह के अंदर खांसी और सांस लेने में होने वाली तकलीफ कम हो जाती है।
कितना दम घोट रहा तम्बाकू
तम्बाकू से दुनियाभर में हर साल 80 लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है। इनमें 70 लाख मौत सीधेतौर पर तम्बाकू लेने वालों की हो रही हैं और दुनिया छोड़ने वाले करीब 12 लाख ऐसे लोग हैं जो धूम्रपान करने वालों के आसपास होने के कारण प्रभावित हुए।
बीमार और स्वस्थ फेफड़ों के बीच फर्क बताता यह वीडियो आपको अलर्ट रखने के लिए काफी है
अधिकतर देशों में भले ही धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलना शुरू हो गया हो। लेकिन, अभी भी बड़ी संख्या में लोग या तो वर्क फ्रॉम होम पर हैं, या फिर उस सेक्टर से ताल्लुक रखते हैं, जिसे लॉकडाउन में भी शुरू होने की छूट नहीं मिली है। घर में अकेले समय बिताना आसान नहीं है। लेकिन, लॉकडाउन में दूसरे इंसानों से दूर रहना मना है, अन्य जीवों से नहीं। धरती पर और भी जीव हैं, जो लॉकडाउन में आपके अकेलेपन को दूर कर सकते हैं। लोग ऐसा कर भी रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में जानवरों और इंसानों के बीच एक नया रिश्ता पनपता हुआ देखा जा सकता है।
जानें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद उन लोगों की कहानियां जो कई तरह केजीवों के साथ खुशी से अपना लॉकडाउन बिता रहे हैं।
इसइंजीनियर ने गिलहरियों के लिए खाने के साथ एक्टिविटीज का भी किया इंतजाम
नासा और एप्पल में इंजीनियर रह चुके मार्क रॉबर जब अपने गार्डन में पक्षियों के लिए खाना रखते, तो पूरा खानाअकेले गिलहरियां ही चट कर जाती थीं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए मार्क ने अपने घर के बैकयार्ड में गिलहरियों के लिए एक सैट तैयार किया। इसमें अपने पसंदीदा खाने तक पहुंचने के लिए गिलहरियों को कई ऑब्सटेकल्स ( बाधाएं) पार करने होते हैं। गिलहरियां आश्चर्यजनक रूप से इन बाधाओं को पार करके खाने तक पहुंच भी रही हैं। इससे जुड़ा वीडियो भी मार्क ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसे खूब पसंद किया जा रहा है।
गिलहरियों के लिए इस तरह के कई ऑब्सटेकल्स बनाए गए हैं
ऑब्सटेकल्स बनाने के लिए मार्क ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की स्किल्स का भरपूर उपयोग किया है।
कड़ी मेहनत के बाद आखिर खाने तक पहुंच ही गएगिलहरियों का अधिकतर समय अब खाने के लिए मशक्कत करने में गुजरता है। इससे पक्षियों का खाना सुरक्षित रहता है।
रॉबिन बर्ड का आशियाना बनाकर खुद को एंग्जाइटी से बाहर ला रहे डॉन एस्परै
मूल रूप से अमेरिका और यूरोप में पाई जाने वाली सॉन्ग बर्ड, जिसका नाम है रॉबिन बर्ड। जितनी खूबसूरत चिड़िया होती है, उतने ही अनोखे इसके अंडे भी होते हैं। पहली नजर में देखने पर लगता है कि किसी ने सफेद अंडों पर नीला रंग पोत दिया है। लेकिन, इनका प्राकृतिक रंग ऐसा ही है। डॉन एस्परै लंबे समय से अपने घर में कई तरह की बर्ड्स का जन्म होते देखते आए हैं। लेकिन इस बार रॉबिन बर्ड्स का यह परिवार उनके लिए कुछ खास है। बर्ड्स का परिवार बनते देखने का सुखद अहसास उन्हें एंग्जाइटी से बाहर निकलने में मदद कर रहा है।
डॉन एस्परे खुद को व्यस्त रखने के लिए घर के पास स्थित पेड़ों को अपनी क्रिएटिविटी के जरिए इस तरह सजाकर खूबसूरत बनाते हैं। यह पेड़ पक्षियों के साथ पड़ोसियों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
डेरिल ग्रेंजर और उनकी पत्नि करेन फोटोग्राफर हैं। एक दिन बैकयार्ड में बैठे हुए उन्हें ख्याल आया कि क्यों न गिलहरियों के लिए एक बेहतरीन सैट बनाया जाए। कनाडा के इस कपल ने तीन सुपरमार्केट नुमा सैट बनाए हैं। जहां गिलहरियों के खाने-पीने के सामान को सुपरमार्केट की तर्ज पर सजाया गया है।
गिलहरियों के आते ही दोनों फोटोग्राफर का फोटोशूट शुरू हो जाता है।गिलहरियों के अलावा सुपरमार्केट में अन्य मेहमान भी आ रहे हैं
रिक ने गिलहरियों के लिए बनाई पिकनिक टैबल
यूनाइटेड स्टेट्स के पेंसिलवेनिया में रहने वाले 43 वर्षीय रिक कलिनोव्स्कीने गिलहरियों के लिए अपने गार्डन में एक छोटी पिकनिक टेबल बनाई है। यहां एक साथ दो गिलहरियों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
रिंक के दिन की शुरुआत गिलहरियों को टेबल पर नाश्ता सर्व करने के साथ होती है
10 साल पहले बर्ड्स के लिए बनाया गार्डन लॉकडाउन में दे रहा राहत
बर्ड्स के साथ समय बिताना चाहते हैं, तो सिर्फ उनके लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना काफी नहीं है। बल्कि उनके अनुकूल माहौल भी तैयार करना होता है। 10 साल पहले इंग्लैंड के लैनकास्टर में रहने वाले जेट हैरिस ने अपने गार्डन को इस तरह से तैयार किया, जो बर्ड्स को आकर्षित करे। गौरेया, गोल्डफिंच, डननॉक और रॉबिन बर्ड्स के जोड़े नियमित रूप से जेट के गार्डन में आते हैं। लॉकडाउन में अलग यह हुआ है कि अब जेट अपने इन साथियों के साथ ज्यादा समय बिता पा रहे हैं।
अधिकतर देशों में भले ही धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलना शुरू हो गया हो। लेकिन, अभी भी बड़ी संख्या में लोग या तो वर्क फ्रॉम होम पर हैं, या फिर उस सेक्टर से ताल्लुक रखते हैं, जिसे लॉकडाउन में भी शुरू होने की छूट नहीं मिली है। घर में अकेले समय बिताना आसान नहीं है। लेकिन, लॉकडाउन में दूसरे इंसानों से दूर रहना मना है, अन्य जीवों से नहीं। धरती पर और भी जीव हैं, जो लॉकडाउन में आपके अकेलेपन को दूर कर सकते हैं। लोग ऐसा कर भी रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में जानवरों और इंसानों के बीच एक नया रिश्ता पनपता हुआ देखा जा सकता है।
जानें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद उन लोगों की कहानियां जो कई तरह केजीवों के साथ खुशी से अपना लॉकडाउन बिता रहे हैं।
इसइंजीनियर ने गिलहरियों के लिए खाने के साथ एक्टिविटीज का भी किया इंतजाम
नासा और एप्पल में इंजीनियर रह चुके मार्क रॉबर जब अपने गार्डन में पक्षियों के लिए खाना रखते, तो पूरा खानाअकेले गिलहरियां ही चट कर जाती थीं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए मार्क ने अपने घर के बैकयार्ड में गिलहरियों के लिए एक सैट तैयार किया। इसमें अपने पसंदीदा खाने तक पहुंचने के लिए गिलहरियों को कई ऑब्सटेकल्स ( बाधाएं) पार करने होते हैं। गिलहरियां आश्चर्यजनक रूप से इन बाधाओं को पार करके खाने तक पहुंच भी रही हैं। इससे जुड़ा वीडियो भी मार्क ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसे खूब पसंद किया जा रहा है।
गिलहरियों के लिए इस तरह के कई ऑब्सटेकल्स बनाए गए हैं
ऑब्सटेकल्स बनाने के लिए मार्क ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की स्किल्स का भरपूर उपयोग किया है।
गिलहरियों का अधिकतर समय अब खाने के लिए मशक्कत करने में गुजरता है। इससे पक्षियों का खाना सुरक्षित रहता है।
कड़ी मेहनत के बाद आखिर खाने तक पहुंच ही गए
रॉबिन बर्ड का आशियाना बनाकर खुद को एंग्जाइटी से बाहर ला रहे डॉन एस्परै
मूल रूप से अमेरिका और यूरोप में पाई जाने वाली सॉन्ग बर्ड, जिसका नाम है रॉबिन बर्ड। जितनी खूबसूरत चिड़िया होती है, उतने ही अनोखे इसके अंडे भी होते हैं। पहली नजर में देखने पर लगता है कि किसी ने सफेद अंडों पर नीला रंग पोत दिया है। लेकिन, इनका प्राकृतिक रंग ऐसा ही है। डॉन एस्परै लंबे समय से अपने घर में कई तरह की बर्ड्स का जन्म होते देखते आए हैं। लेकिन इस बार रॉबिन बर्ड्स का यह परिवार उनके लिए कुछ खास है। बर्ड्स का परिवार बनते देखने का सुखद अहसास उन्हें एंग्जाइटी से बाहर निकलने में मदद कर रहा है।
डॉन एस्परे खुद को व्यस्त रखने के लिए घर के पास स्थित पेड़ों को अपनी क्रिएटिविटी के जरिए इस तरह सजाकर खूबसूरत बनाते हैं। यह पेड़ पक्षियों के साथ पड़ोसियों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
गिलहरियों को लुभाने, घर पर बनाया सुपरमार्केट
डेरिल ग्रेंजर और उनकी पत्नि करेन फोटोग्राफर हैं। एक दिन बैकयार्ड में बैठे हुए उन्हें ख्याल आया कि क्यों न गिलहरियों के लिए एक बेहतरीन सैट बनाया जाए। कनाडा के इस कपल ने तीन सुपरमार्केट नुमा सैट बनाए हैं। जहां गिलहरियों के खाने-पीने के सामान को सुपरमार्केट की तर्ज पर सजाया गया है।
गिलहरियों के आते ही दोनों फोटोग्राफर का फोटोशूट शुरू हो जाता है।गिलहरियों के अलावा सुपरमार्केट में अन्य मेहमान भी आ रहे हैंसभी प्रोडक्ट्स पर प्राइज टैग भी लगे हैं, जिससे यह बिल्कुल असली लगे।दो सुपरमार्केट बन चुके हैं, तीसरा अंडरकंस्ट्रक्शन है
रिक ने गिलहरियों के लिए बनाई पिकनिक टैबल
यूनाइटेड स्टेट्स के पेंसिलवेनिया में रहने वाले 43 वर्षीय रिक कलिनोव्स्कीने गिलहरियों के लिए अपने गार्डन में एक छोटी पिकनिक टेबल बनाई है। यहां एक साथ दो गिलहरियों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
रिंक के दिन की शुरुआत गिलहरियों को टेबल पर नाश्ता सर्व करने के साथ होती है
10 साल पहले बर्ड्स के लिए बनाया गार्डन लॉकडाउन में दे रहा राहत
बर्ड्स के साथ समय बिताना चाहते हैं, तो सिर्फ उनके लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना काफी नहीं है। बल्कि उनके अनुकूल माहौल भी तैयार करना होता है। 10 साल पहले इंग्लैंड के लैनकास्टर में रहने वाले जेट हैरिस ने अपने गार्डन को इस तरह से तैयार किया, जो बर्ड्स को आकर्षित करे। गौरेया, गोल्डफिंच, डननॉक और रॉबिन बर्ड्स के जोड़े नियमित रूप से जेट के गार्डन में आते हैं। लॉकडाउन में अलग यह हुआ है कि अब जेट अपने इन साथियों के साथ ज्यादा समय बिता पा रहे हैं।