यह वायरल वीडियो (Viral Video) अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित डेनिया बीच का है. इसमें दिख रहा है कि एक दस फुट लंबा अजगर एक नीले रंग की फोर्ड कार के बोनट के अंदर इंजन के ऊपर बैठा है.from Latest News OMG News18 हिंदी https://ift.tt/34KYp9W
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यह वायरल वीडियो (Viral Video) अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित डेनिया बीच का है. इसमें दिख रहा है कि एक दस फुट लंबा अजगर एक नीले रंग की फोर्ड कार के बोनट के अंदर इंजन के ऊपर बैठा है.
इटली (Italy) के अब्रुजो क्षेत्र में स्थित है सैंटो स्टेफैनो डि सेसानियो गांव. इस गांव की आबादी 115 है. इनमें से 13 की उम्र 20 साल से कम है.
अंडे का हलवा रेसिपी (Egg Halwa Recipe): अंडे (Egg) का ऑमलेट, हाफ फ्राई, भुर्जी या सब्जी तो आपने जरूर खाई होगी लेकिन अंडे के हलवे का स्वाद शायद आपने नहीं चखा होगा.वजन घटाना चाहते हैं और हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं तो वीगन डाइट को अपना सकते हैं। फल, सब्जी और अनाज से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स पेट को दुरस्त रखने के साथ कैंसर का खतरा घटाते हैं। लेकिन कई महीनों तक इस डाइट के सहारे रहना खतरनाक है। क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुरभि पारीक कहती हैं, जब भी इस डाइट की शुरुआत करें तो इसके साथ कुछ और सप्लिमेंट्स लें वरना कुछ पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
आज वर्ल्ड वीगन डे के मौके पर जानिए वीगन डाइट को अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है...
वीगन डाइट कैंसर का खतरा घटाती है, रिसर्च में साबित हुआ
अमेरिका में हुई एक स्टडी बताती है वीगन डाइट वजन घटाने में कारगर है। इसमें फैट बेहद कम मात्रा में होने के कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है। फल और सब्जियों के जरिए शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रखते हैं और इम्युनिटी को बढ़ाते हैं।
मेयो क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वीगन डाइट में नॉन-वेज नहीं शामिल होता, इसलिए ये कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाते हैं। इसमें फायबर होने के कारण पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे कब्ज नहीं होता।

वीगन डाइट लें तो इन 6 बातों का ध्यान रखें

वीगन डाइट किसे नहीं लेनी चाहिए
ऐसे लोग जो पहले से अंडरवेट हैं। आयरन और कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें वीगन डाइट लेने से बचना चाहिए। जैसे- एनीमिक महिलाएं। ऐसे लोग जिन्हें नट्स, सोया और ग्लूटेन से एलर्जी है उन्हें भी वीगन डाइट नहीं लेनी चाहिए।
वेजिटेरियन और वीगन डाइट के फर्क को भी समझ लें
वीगन और वेजिटेरियन डाइट में एक सबसे बड़ा अंतर है। वेगन डाइट में ज्यादातर ऐसे फूड शामिल हैं जो पेड़े-पौधों से सीधे तौर पर मिलते हैं। वीगन डाइट में एक बात का खासतौर पर ध्यान दिया जाता है कि जो भी फूड ले रहे हैं वो केमिकल से तैयार न हुए हों। यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार होने वाले फूड होने चाहिए।

कैसे शुरू हुआ वर्ल्ड वीगन डे
जानवरों के अधिकारों की वकालत करने वाले ब्रिटेन के डोनाल्ड वॉटसन ने 1 नवम्बर 1944 को 5 लोगों की एक मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नॉन-डेयरी प्रोडक्ट पर चर्चा हुई। यहीं से पड़ी वर्ल्ड वीगन डे की नींव। इस दिन का लक्ष्य जानवर और पर्यावरण को बचाने के साथ लोगों को वेजिटेरियन फूड खाने के लिए जागरूक करना है।
वजन घटाना चाहते हैं और हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं तो वीगन डाइट को अपना सकते हैं। फल, सब्जी और अनाज से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स पेट को दुरस्त रखने के साथ कैंसर का खतरा घटाते हैं। लेकिन कई महीनों तक इस डाइट के सहारे रहना खतरनाक है। क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुरभि पारीक कहती हैं, जब भी इस डाइट की शुरुआत करें तो इसके साथ कुछ और सप्लिमेंट्स लें वरना कुछ पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
आज वर्ल्ड वीगन डे के मौके पर जानिए वीगन डाइट को अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है...
वीगन डाइट कैंसर का खतरा घटाती है, रिसर्च में साबित हुआ
अमेरिका में हुई एक स्टडी बताती है वीगन डाइट वजन घटाने में कारगर है। इसमें फैट बेहद कम मात्रा में होने के कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है। फल और सब्जियों के जरिए शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रखते हैं और इम्युनिटी को बढ़ाते हैं।
मेयो क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वीगन डाइट में नॉन-वेज नहीं शामिल होता, इसलिए ये कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाते हैं। इसमें फायबर होने के कारण पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे कब्ज नहीं होता।

वीगन डाइट लें तो इन 6 बातों का ध्यान रखें

वीगन डाइट किसे नहीं लेनी चाहिए
ऐसे लोग जो पहले से अंडरवेट हैं। आयरन और कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें वीगन डाइट लेने से बचना चाहिए। जैसे- एनीमिक महिलाएं। ऐसे लोग जिन्हें नट्स, सोया और ग्लूटेन से एलर्जी है उन्हें भी वीगन डाइट नहीं लेनी चाहिए।
वेजिटेरियन और वीगन डाइट के फर्क को भी समझ लें
वीगन और वेजिटेरियन डाइट में एक सबसे बड़ा अंतर है। वेगन डाइट में ज्यादातर ऐसे फूड शामिल हैं जो पेड़े-पौधों से सीधे तौर पर मिलते हैं। वीगन डाइट में एक बात का खासतौर पर ध्यान दिया जाता है कि जो भी फूड ले रहे हैं वो केमिकल से तैयार न हुए हों। यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार होने वाले फूड होने चाहिए।

कैसे शुरू हुआ वर्ल्ड वीगन डे
जानवरों के अधिकारों की वकालत करने वाले ब्रिटेन के डोनाल्ड वॉटसन ने 1 नवम्बर 1944 को 5 लोगों की एक मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नॉन-डेयरी प्रोडक्ट पर चर्चा हुई। यहीं से पड़ी वर्ल्ड वीगन डे की नींव। इस दिन का लक्ष्य जानवर और पर्यावरण को बचाने के साथ लोगों को वेजिटेरियन फूड खाने के लिए जागरूक करना है।
वजन घटाना चाहते हैं और हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं तो वीगन डाइट को अपना सकते हैं। फल, सब्जी और अनाज से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स पेट को दुरस्त रखने के साथ कैंसर का खतरा घटाते हैं। लेकिन कई महीनों तक इस डाइट के सहारे रहना खतरनाक है। क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुरभि पारीक कहती हैं, जब भी इस डाइट की शुरुआत करें तो इसके साथ कुछ और सप्लिमेंट्स लें वरना कुछ पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
आज वर्ल्ड वीगन डे के मौके पर जानिए वीगन डाइट को अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है...
वीगन डाइट कैंसर का खतरा घटाती है, रिसर्च में साबित हुआ
अमेरिका में हुई एक स्टडी बताती है वीगन डाइट वजन घटाने में कारगर है। इसमें फैट बेहद कम मात्रा में होने के कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है। फल और सब्जियों के जरिए शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रखते हैं और इम्युनिटी को बढ़ाते हैं।
मेयो क्लीनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वीगन डाइट में नॉन-वेज नहीं शामिल होता, इसलिए ये कोलोन और ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाते हैं। इसमें फायबर होने के कारण पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे कब्ज नहीं होता।

वीगन डाइट लें तो इन 6 बातों का ध्यान रखें

वीगन डाइट किसे नहीं लेनी चाहिए
ऐसे लोग जो पहले से अंडरवेट हैं। आयरन और कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें वीगन डाइट लेने से बचना चाहिए। जैसे- एनीमिक महिलाएं। ऐसे लोग जिन्हें नट्स, सोया और ग्लूटेन से एलर्जी है उन्हें भी वीगन डाइट नहीं लेनी चाहिए।
वेजिटेरियन और वीगन डाइट के फर्क को भी समझ लें
वीगन और वेजिटेरियन डाइट में एक सबसे बड़ा अंतर है। वेगन डाइट में ज्यादातर ऐसे फूड शामिल हैं जो पेड़े-पौधों से सीधे तौर पर मिलते हैं। वीगन डाइट में एक बात का खासतौर पर ध्यान दिया जाता है कि जो भी फूड ले रहे हैं वो केमिकल से तैयार न हुए हों। यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार होने वाले फूड होने चाहिए।

कैसे शुरू हुआ वर्ल्ड वीगन डे
जानवरों के अधिकारों की वकालत करने वाले ब्रिटेन के डोनाल्ड वॉटसन ने 1 नवम्बर 1944 को 5 लोगों की एक मीटिंग बुलाई। इस बैठक में नॉन-डेयरी प्रोडक्ट पर चर्चा हुई। यहीं से पड़ी वर्ल्ड वीगन डे की नींव। इस दिन का लक्ष्य जानवर और पर्यावरण को बचाने के साथ लोगों को वेजिटेरियन फूड खाने के लिए जागरूक करना है।
एक बार कोविड-19 (Covid-19) से संक्रमित हो चुके डॉ चेपर्नोव भी कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज (Antibodies) पर शोध करने वाले रिसर्चरों की टीम (Team of Researchers) के सक्रिय सदस्य थे. इसी शोध के क्रम में उन्होंने खुद को जानबूझकर दोबारा 6 महीने बाद संक्रमित (infected) कराया. दूसरी बार वे पहले की तुलना में भी ज्यादा बीमार (ill) हुए. उन्होंने अपना एक्सपीरिएंस (experience) भी शेयर किया है.
रिचर्ड के दवा लेने के 20 मिनट बाद ही ज्यादातर शारीरिक और मानसिक कमियां (Physical and mental deficiencies) दूर हो गई थीं. जो हमेशा व्हीलचेयर (Wheelchair), असंयम, एक फीडिंग ट्यूब पर, और पूरी तरह से नर्सिंग (Nursing) देखभाल पर निर्भर रहते थे.
टिहरी वन विभाग को एक नई उपलब्धि मिली है .जिसके तहत पीड़ी पर्वत पर करीब 50 करोड़ वर्ष पुराने स्ट्रोमैटोलाइट फासिल्स जीवाश्म मिले है.
मतदाताओं (voters) के लिए बिना अपने उम्मीदवारों (candidates) को जाने मत का निर्णय करना आसान नहीं होता. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं, दूसरे चरण (second phase) के उम्मीदवारों की आर्थिक पृष्ठभूमि (Economic Background) के बारे में सबकुछ ताकि वोटिंग से पहले आप निर्णय कर सकें कि आपका वोट किसे जाना चाहिए.
Blue Moon 2020: अगर आप आज हैलोवीन नाइट (Halloween Night) में 'ब्लू मून' की इस अद्भुत खगोलीय घटना के गवाह नहीं बन पाए तो आपको इस 'नीले चांद' को देखने के लिए 19 साल तक इंतजार करना होगा...देश में पिछले 10 साल में कैंसर के मामले 30 फीसदी तक बढ़े हैं। हर साल अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। बावजूद इसके देश में 80 फीसदी महिलाएं डॉक्टर्स के पास कैंसर की तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंचती हैं।
मेदांता की ब्रेस्ट कैंसर सविसेज की डायरेक्टर डॉ. कंचन कौर कहती हैं, भारत में ज्यादातर महिलाएं मानती हैं कि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर कभी किसी को नहीं हुआ, इसलिए मुझे भी नहीं हो सकता। यह गलत धारणा है। ब्रेस्ट कैंसर के 90 फीसदी मामले ऐसी महिलाओं में सामने आते हैं, जिनके घर में कभी किसी को कैंसर नहीं हुआ। ब्रेस्ट कैंसर से कैसे बचें और किन बातों का ध्यान रखें, बता रही हैं डॉ. कंचन कौर...
ब्रेस्ट में ये बदलाव दिखने पर अलर्ट हो जाएं?
स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, स्तन का सख्त होना, यहां पर किसी घाव का लम्बे समय ठीक न होना और निप्पल से रक्त या लिक्विड निकलना इसके लक्षण हैं। इसके अलावा स्तन में दर्द, बाहों के नीचे भी गांठ होना भी स्तन कैंसर के संकेत हैं। हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद जरूरी है, ताकि आगे चलकर कैंसर का रूप ना ले। इस रोग से डरे नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है। पहली स्टेज में ही अगर इस रोग की पहचान हो जाती है तो इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है।
क्यों होता है यह कैंसर
बढ़ती उम्र के अलावा हार्मोनल थैरेपी में दी जाने वाली दवाएं, अधिक उम्र में शादी करने के साथ ही अधिक उम्र में बेबी प्लान करना, खराब जीवनशैली और अल्कोहल लेने से यह कैंसर हो सकता है। स्तन कैंसर का कारण आनुवांशिक भी हो सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ 5-10 प्रतिशत महिलाओं में ही पाया जाता है।
किस उम्र में यह कैंसर होने का खतरा ज्यादा?
आमतौर पर 40 की उम्र के बाद इसकी आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री है तो भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है।
कैसे पता लगाएं कैंसर हुआ है या नहीं?
इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते। लेकिन सेल्फ एग्जामिनेशन और मैमोग्राम जांच करवाकर इसका पता लगा सकते हैं। अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षण भी अलग पाए जाते हैं। इसलिए कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

7 गलतियां जो बढ़ाती हैं ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
1. बढ़ता मोटापा
महिलाओं का बढ़ता मोटापा ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है। खासतौर पर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बॉडी में ज्यादा हार्मोन्स फैट टिशु से निकलते हैं। बहुत अधिक फैट जब बॉडी पर जमा होने लगता है तो एस्ट्रोजेन का लेवल कम होता है और कैंसर का खतरा बढ़ता है।
2. ब्रेस्ट फीडिंग न कराने पर
अधिकांश महिलाओं का मानना है कि ब्रेस्टफीडिंग कराने से उनका फिगर खराब हो जाता है। इसलिए वे इसे अवॉयड करती हैं। ऐसी महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। दरअसल ब्रेस्टफीडिंग कराने से हार्मोंस बैलेंस में रहते हैं, जबकि जो महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराती उनमें हार्मोंस का संतुलन बिगड़ता है और ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ती है।
3.खानपान का ध्यान न रखने पर
जो महिलाएं अपने खानपान का ध्यान नहीं रखती हैं, उनमें ब्रेस्ट ट्यूमर का खतरा अधिक होता है। ज्यादा मीठा, केचअप, स्पोर्टस ड्रिंक, चॉकलेट मिल्क सहित शुगर युक्त फूड ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसी तरह प्रोसेस्ड फूड में मिलने वाला फैट ब्रेस्ट कैंसर की वजह बन सकता है। इसलिए इस तरह की डाइट अवॉयड करें। फास्ट फूड जैसे बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चाट, रेड मीट ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
4. लम्बे समय से गर्भनिरोधक दवाएं लेने पर
अगर आप लंबे समय तक गर्भनिरोधक दवाएं खाती हैं तो इससे भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इन दवाओं में एस्ट्रोजन की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में जरूरत से ज्यादा हो जाए तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है। इतना ही नहीं बल्कि बर्थ कंट्रोल इंजेक्शन व अन्य तरीके भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ातेहैं। इसलिए इनके लंबे समय तक उपयोग से बचें।
5. प्लास्टिक की चीजों का अधिक इस्तेमाल
घर में, सफर के दौरान या मीटिंग में प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना या इससे बने बर्तनों में खाना खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है। दरअसल प्लास्टिक कंटेनर्स में इंडोक्राइन डिसरप्टिंग कैमिकल जैसा रसायन होता है जो शरीर के हार्मोनल सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।
6. एक्सरसाइज से दूरी बनाना
जो महिलाएं एक्सरसाइज करने से बचती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मेनोपॉज के बाद तो महिलाओं के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। अगर आपको हेवी एक्सरसाइज पसंद न हो तो रोज आधे घंटे की सैर कर सकती हैं। आप चाहें तो बागवानी या तैराकी जैसे विकल्प चुनकर भी अपनी फिटनेस को मेंटेन कर सकती हैं। इससे पेट और कमर की चर्बी कम करने में भी मदद मिलती है।
7. शराब और स्मोकिंग की लत
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार शराब पीने, स्मोकिंग से स्तन के कैंसर का खतरा 8% तक बढ़ता है। शराब महिलाओं के सेक्स हार्मोन का स्तर बढ़ाती है। जर्नल ऑफ दी अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक शराब से ब्रेस्ट ट्यूमर की ग्रोथ बढ़ती है।
कॉर्न केक रेसिपी वीडियो (Corn Cake Recipe Video): आज हम लेकर आए हैं आपके लिए एक थाई क्यूज़ीन कॉर्न केक्स की रेसिपी . कॉर्न केक्स खाने में बेहद टेस्टी होते हैं और सभी को ये बेहद पसंद आयेंगे. साभार: youtube/Sanjeev Kapoor Khazana
ज्यादातर लोगों के लिए अनजान इस द्वीप (island) पर किसी पर्यटक (tourist) को पसंद आने वाली सभी चीजे हैं. वो तो भला हो कि यहां का रास्ता (way) इतना दुर्गम है कि द्वीप की बेहतरीन सुंदरता अब भी बची है.असम में खास तरह की दुर्लभ प्रजाति वाली चायपत्ती ने फिर रिकॉर्ड बनाया है। मनोहारी गोल्ड टी खास तरह की चायपत्ती है, जिसे गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र पर 75 हजार रुपए प्रति किलो की कीमत पर बेचा गया है। यह असम में इस साल दर्ज चाय की सबसे ऊंची कीमत है।
इस चायपत्ती की पैदावार करने वाले मनोहारी टी स्टेट का कहना है, इस साल इसकी केवल 2.5 किलो पैदावार हुई। इसमें से 1.2 किलो की नीलामी हुई है। महामारी के बीच चाय की इतनी कीमत मिलना इंडस्ट्री के लिए राहत की बात है।
ये तो हुई नीलामी की बात अब ये भी समझ लीजिए कि यह चायपत्ती इतनी खास क्यों है...
चाय को तोड़ने का तरीका भी है अलग
मनोहारी टी स्टेट के डायरेक्टर राजन लोहिया कहते हैं, ये खास तरह की चायपत्ती होती है जिसे सुबह 4 से 6 बजे के बीच सूरज की किरणें जमीन पर पड़ने से पहले तोड़ा जाता है। इसका रंग हल्का मटमैला पीला होता है। यह चायपत्ती अपनी खास तरह की खुशबू के लिए जानी जाती है। इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं।

ऐसे तैयार होती है
पिछले 63 साल से असम की टी-इंडस्ट्री से जुड़े चंद्रकांत पराशर कहते हैं, इस खास तरह की चायपत्ती की पैदावार 30 एकड़ में की जाती है। पौधों से पत्तियों के साथ कलियों को तोड़ा जाता है। फिर इन्हें फर्मेंटेशन की प्रोसेस से गुजारा जाता है। फर्मेंटेशन के दौरान इनका रंग ग्रीन से बदलकर ब्राउन हो जाता है। बाद में सुखाने पर इसका रंग गोल्डन हो जाता है। इसके बाद इसे पत्तियों से अलग किया जाता है।
1 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रहा चाय का कारोबार
डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन, मानसून और बाढ़ का सीधा असर असम की चायपत्ती की पैदावार पर हुआ है। टी-इंडस्ट्री इस साल 1 हजार करोड़ के घाटे से जूझ रही है। लेकिन हाल ही में नीलामी ने कुछ राहत पहुंचाई है।
2018 में मनोहारी गोल्ड टी की बोली 39,001 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 50 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंचा। इस साल यह 75 हजार रुपए प्रति किलो में बिकी।
राजन लोहिया कहते हैं, ढाई किलो में से 1.2 किलो की नीलामी हुई है। बची हुई चायपत्ती यहां के नीलामी केंद्र पर मिलेगी। इसे गुवाहाटी की विष्णु टी कम्पनी ने खरीदा है। यह कम्पनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए दुनियाभर तक पहुंचाते हैं।
दुनिया भर में गर्भपात की दर (Abortion Rate) पर नज़र रखना मुश्किल है क्योंकि कई राष्ट्र गर्भपात की दर को रिकॉर्ड या रिपोर्ट नहीं करते हैं. यह बात उन देशों में विशेष रूप से सच है जहां गर्भपात गैरकानूनी (illegal) है और इसके किसी भी प्रकार के रिकॉर्ड नहीं रखे जाते. फिर भी जो आंकड़ें मौजूद हैं, हम उनके मुताबिक बता रहे हैं कि दुनिया (world) के किन 10 देशों में एबॉर्शन रेट सबसे कम (lowest abortion rate) है-
रॉंग पार्किंग और सीट बेल्ट को लेकर हुआ था ट्रैफिक एसएचओ चरणजीत सिंह और विधायक के ड्राइवर के साथ वाद विवाद .बीजेपी विधायक के ड्राइवर के साथ उलझना एसएचओ को पड़ा बड़ा महंगा.बीजेपी विधायक कृष्ण मिड्ढा से उलझने वाले ट्रैफिक एसएचओ निलंबित.
Halloween Dessert Recipe Video: हैलोवीन पार्टी (Halloween Party) में ये 'घोस्ट डेजर्ट' (Ghost dessert) देखकर आपके फ्रेंड्स भी आपके हुनर की तारीफ करते नहीं थकेंगे. साभार: youtube/Crafty Panda
Halloween 2020: हैलोवीन शब्द का अर्थ 'पवित्र शाम' है और इसे 'ऑल सेंट्स डे' भी कहा जाता है. हैलोवीन एक प्राचीन सेल्टिक त्योहार है जिसे यूरोपीय देशों और अमेरिका में फसल के अंतिम दिन मनाया जाता है.
कॉर्न केक रेसिपी (Corn Cake Recipe): थाई स्नैक्स (Thai cuisine)कॉर्न केक्स की रेसिपी . कॉर्न केक्स खाने में बेहद टेस्टी होते हैं और सभी को ये बेहद पसंद आयेंगे.
पन्ना का एक मजदूर रातों-रात लखपति बन गया है .ग्राम बिलखुरा निवासी बलवीर सिंह को कृष्णा कल्याणपुर हीरा खदान में 7 कैरेट 2 सेंट का जेम्स क्वालिटी का हीरा मिला .जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 लाख से ऊपर बताई जा रही है.फिट रहना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है, वर्कआउट के दौरान पानी पीने का ध्यान रखना। वर्कआउट से पहले, उस दौरान और बाद में कितना पानी पिएं, इसे समझना जरूरी है वरना इसका बुरा असर शरीर पर पड़ेगा। अधिक पानी पीने पर पेट दर्द और उबकाई हो सकती है और पानी कम लेते हैं तो चक्कर आ सकते हैं। साओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. बिमल छाजेड़ बता रहे हैं वर्कआउट से पहले, एक्सरसाइज के दौरान और वर्कआउट के बाद कब-कितना पानी पिएं।
वर्कआउट से पहले : पानी उतना पिएं कि गला तर हो जाए
कुछ लोग वर्कआउट शुरू करने से तुरंत पहले पानी पीते हैं ताकि वर्कआउट के दौरान पानी की ज़रूरत न महसूस हो। वर्कआउट के लिए बॉडी का हाइड्रेटेड रहना बेशक ज़रूरी है लेकिन ध्यान रहे कि इसके तुरंत पहले पानी पीने से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। सही मायनों में पानी वर्कआउट से आधा घंटा पहले पीना चाहिए। एक साथ अधिक पानी न पिएं क्योंकि वर्कआउट करने में परेशानी आ सकती है। केवल गला तर करने लायक़ ही पानी लें।
वर्कआउट के बाद : 25 मिनट बाद ही पानी पिएं
वर्कआउट से पसीना बहता है और सांस फूलती है, जिसके कारण गला भी सूखता है। शरीर गर्म हो जाता है। ऐसे में उसके तुरंत बाद पानी पीने से मांसपेशियों को झटका लग सकता है जिससे सीने में दर्द, पेट दर्द, उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए व्यायाम के 20-25 मिनट बाद ही पानी पिएं। तब तक शरीर का तापमान सामान्य हो चुका होता है।
वर्कआउट के दौरान : कुछ-कुछ देर में 2 से 3 चम्मच के बराबर पानी पिएं
अगर आप वर्कआउट (घर या जिम कहीं भी) कर रहे हैं तो उस दौरान शरीर से पसीना बहुत ज़्यादा निकलेगा, जिसके कारण शरीर में डिहाइड्रेशन होने का डर रहता है। पसीना निकलने के कारण शरीर पानी की मांग करता है और गला सूखने लगता है। ऐसे में कुछ-कुछ देर में केवल 2-3 चम्मच के बराबर पानी पिएं जिससे गले का सूखापन, चक्कर और डिहाइड्रेशन की समस्या न हो।
बस इस बात का ध्यान रखें कि वर्कआउट करते-करते पानी बिल्कुल नहीं पीना है। इससे तबियत बिगड़ सकती है और उल्टी हो सकती है। इसलिए पहले आराम से बैठ जाएं, लंबी सांसें भरें, फिर पानी पिएं और 2-3 मिनट रुककर ही वर्कआउट दोबारा शुरू करें।
वहीं, अगर आप योग करते हैं या दौड़ते-टहलते हैं तो इस दौरान पानी बिल्कुल न पिएं। अगर वर्कआउट से आधा घंटा पहले पानी पिया है तो हल्की एक्सरसाइज या योग में पानी पीने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर दौड़ने या टहलने के दौरान पानी पीते हैं तो पेट दर्द, जी मिचलाना और उल्टी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा पानी पीकर ज़्यादा देर दौड़ और चल नहीं पाएंगे क्योंकि पेट भरा होने के कारण थकान जल्दी महसूस होती है।
एक्सरसाइज से पहले खाना है या नहीं, इसे समझें
वर्कआउट के दौरान बॉडी पॉश्चर बार-बार बदलता है जिससे शरीर के पुर्ज़े पूरी तरह से हिल जाते हैं। अगर कुछ खाकर तुरंत एक्सरसाइज करते हैं, तो इससे पेट दर्द, उबकाई, आलस और आंतों की अकड़न की शिक़ायत हो सकती है। यहां तक कि उल्टी भी हो सकती है। खाना खाने के 3-4 घंटे बाद ही व्यायाम करना चाहिए। हालांकि व्यायाम सुबह के समय ख़ाली पेट ही करें, वही सही है।
एक्सरसाइज के आधे घंटे बाद नारियल पानी ले सकते हैं
वर्कआउट के आधे घंटे बाद जूस या नारियल पानी पी सकते हैं। इसके आधा घंटा बाद ही कुछ खाएं। एक्सरसाइज के तुरंत बाद कुछ खाने से पेट में गैस और एसिडिटी हो सकती है।
वर्कआउट के बाद नहाना कब है, यह भी जानना जरूरी
एक्सरसाइज के बाद शरीर गर्म हो जाता है। इसके तुरंत बाद नहाने से बुख़ार, ज़ुकाम, सिर दर्द, कमज़ोरी होने का ख़तरा रहता है। इसलिए वर्कआउट के बाद 15-20 स्ट्रेचिंग करें और फिर रिलैक्स करें ताकि बॉडी टेम्प्रेचर और ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाएं।
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कंधों का दर्द दूर करने वाले वर्कआउट, पेंडुलम और बैंड स्ट्रेचिंग से अकड़न और दर्द से मिलेगी राहत
एक मिनट के बर्पी वर्कआउट का शरीर के हर हिस्से पर पड़ता है असर, रोजाना करें 5 रिपीटिशन; घटेगी चर्बी
चीन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 60 साल के एक मरीज की आंखों में कीड़ों का गुच्छा मिला है। ये सभी जिंदा थे। डॉक्टर्स ने आंख की पलक से 20 जिंदा कीड़े निकाले। कुछ महीने पहले आंखों में अजीब सी हरकत महसूस होने पर मरीज डॉक्टर्स से सलाह लेने पहुंचा था। यहां सर्जरी के दौरान चौंकाने वाली बात सामने आई।
मरीज को थकान महसूस हो रही थी
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये जिंदा कीड़े मरीज की आंख में करीब सालभर से थे। मरीज को आंखों में अजीब सा महसूस होता था। उसे लगता था कि थकान के कारण ऐसा हो रहा है। डॉक्टर्स ने आंखों की जांच की तो सामने आया कि दाईं पलक के नीचे छोटे-छोटे कीड़ों का एक गुच्छा मिला।
आउटडोर वर्कआउट के दौरान पहुंचे कीड़े
कीड़ों को निकालने वाले डॉक्टर्स का मानना है कि जो कीड़े पलकों में मिले हैं उनमें लार्वे थी थे। मरीज का नाम वैन है उसे स्पोर्ट्स एक्टविटी का काफी शौक है। ये कीड़े मरीज की आंखों में तब पहुंचे जब वह आउटडोर वर्कआउट करता था। धीरे-धीरे मरीज की हालत बिगड़ती गई और बर्दाश्त से बाहर होने पर वह पूर्वी चीन के सूझोयू म्यूनिसिपल हॉस्पिटल पहुंचा।
मरीज ने डॉक्टर से कहा, वह पिछले एक साल से आंखें में कुछ अटका हुआ सा महसूस कर रहा है।
मक्खियों के जरिए कीड़े आंखों तक पहुंचे
इलाज करने वाले डॉ. शी टिंग का कहना है, मरीज को मक्खियों ने काटा होगा। मक्खियों के जरिए कीड़े आंखों में पहुंचे। सर्जरी सफल रही है और कीड़े निकलने के बाद मरीज रिकवर हो रहा है।
ये कीड़े थेलेजिया कैलीपेडा प्रजाति के हैं। जो आंखों में संक्रमण फैलाने के लिए जाने जाते हैं। आमतौर पर ये परजीवी कीड़े कुत्ते और बिल्लियों में पाए जाते हैं।
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लोकेशन की मॉनिटरिंग करने के लिए इनमें रेडियो-टैग लगाया गया था। चियूलान के अलावा एक और चिड़िया इरांग भी हाल ही में वापस लौटी। इरांग ने 29 हजार किलोमीटर की दूरी पूरी की है। पिछले साल इनके उड़ान भरने से पहले मणिपुर के वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर पांच चिड़ियों में रेडियो टैग लगाया था।
4 महीने भारत में रहते हैं
कबूतर के आकार की आमूर फॉल्कंस एक प्रवासी पक्षी है। यह साइबेरिया का रहने वाली है। यह चिड़िया सर्दियों से पहले भारत के लिए उड़ान भरती है और उत्तर-पूर्व भारत में ये करीब दो महीने तक रहती है। इसके बाद ये दक्षिण अफ्रीका के लिए उड़ान भरती है। वहां, ये करीब 4 महीने रहती है।
क्यों शुरू हुई महिम और कैसे काम करता है रेडियो टैग
प्रवासी पक्षियों की घटती संख्या को रोकने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने यह मुहिम शुरू की थी। इसमें आमूर फॉल्कंस को खासतौर पर शामिल किया गया है। पक्षियों में लगा रेडियो टैग यह बताता है कि किस रास्ते से उसने सफर तय किया। वह कहां पर रुका। ये सभी बातें पक्षियों को संरक्षित करने में मदद करती हैं।
ये चिड़िया क्यों होती है माइग्रेट
तमेंगलोंग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर केएच हिटलर के मुताबिक, हमें इस बात की खुशी है कि दो चिड़िया चियूलॉन और इरांग 361 दिन बाद पूरा एक चक्कर लगाकर लौट आई हैं। चियूलॉन 26 अक्टूबर को लौटी थी और इयांग 28 अक्टूबर को वापस आई।
हिटलर कहते हैं, इनके वापस लौटने पर हमें कई नई जानकारियां मिल रही हैं। जैसे, इन्हें सर्दियों से दिक्कत है, इसलिए ये सर्दियों से पहले साइबेरिया से उड़कर भारत आती हैं।
खाने के लिए इनका शिकार हुआ और संख्या घटती गई
हिटलर कहते हैं, इरांग जब तमेंगलोंग से 200 किलोमीटर दूर चंदेल में लौटी थी तो हमारा उससे कनेक्शन टूट गया था लेकिन बाद में यह तमेंगलोंग के पूचिंग में पहुंची। इन्हें नवम्बर 2019 को छोड़ा गया था।
आमूर फॉल्कंस का शिकार खाने के लिए किया जाता था लेकिन अब इन्हें संरक्षित किया जा रहा है। मणिपुर और नगालैंड में इसका खासा रखा जा रहा है।
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