Thursday, October 31, 2019

दिवाली के बाद शरीर के टॉक्सिंस दूर करने के लिए मुर्धासन, अधोमुख श्वानआसन और शलभासन करें

हेल्थ डेस्क. त्योहारों के समय पर्यावरण प्रदूषण और जंक फूड से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में शरीर से टॉक्सिंस दूर करने में कुछ योगाभ्यास फायदेमंद हो सकते हैं। यह शरीर में मौजूद टाक्सिंस को आसानी से दूर करने में भी आपकी मदद करते हैं।योग विशेषज्ञ कल्पना कुंभारे से जानिएटॉक्सिंस दूर के लिए कौनसे योग आसन करें...

  1. मुर्धासन

    करने का तरीका : दोनों पैरों के बीच करीब 3 फीट का अंतर रखकर खडें हो जाएं। सामने की तरफ झुकें और हथेलियों को जमीन पर रखें। इस अवस्था में शरीर का वजन समान रूप से हाथ और पैरों पर रहेगा। अब सिर को सामने जमीन पर दोनों हाथों के बीच रखने की कोशिश करें।एड़ियों को हल्का उठाएं और शरीर का संतुलन बनाकर रखें। इसके एक या दो चक्र करें। आसन करते समय यथासंभव रुकें।

  2. अधोमुख श्वानआसन

    करने का तरीका : आसन पर हाथों और घुटनों के बल फर्श पर आएं। धीरे-धीरे कमर के भाग को ऊपर उठाते हुए घुटनों को सीधा करें। इस दौरान एड़ियां जमीन पर टिकाए रखें। दोनों हाथों को सिर के समानांतर या बाहर की ओर फैलाकर रखें। अब धीरे-धीरे दाएं पैर को ऊपर की तरफ उठाएं। पैरों को सीधा करते हुए इतना ऊपर उठाएं कि शरीर और उठा हुआ पैर एक सीध में आ जाए। अब 10 से 15 सेकंड रुकें। यही क्रिया बाएं पैर के साथ दोहराएं। इस आसन को करने से पहले धनुरासन या दंडासन करने से भी आपको फायदा मिलेगा। इसे सूर्य नमस्कार के साथ भी किया जा सकता है।

  3.  शलभासन

    करने का तरीका : पेट के बल आसन पर लेट जाएं। दोनों हथेलियों की मुठ्ठी बनाकर पेट के नीचे या नाभि के नीचे रखें। ठुड्डी को थोड़ा आगे की ओर करते हुए जमीन पर ही रखें। पूर्ण सजगता के साथ शरीर को शिथिल करें। अब पैरों को पीछे की ओर तानकर एड़ियों और पंजों को जमाकर रखें और धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। यथासंभव रुकें। फिर धीरे-धीरे पैरों को नीचे लेकर आएं और शरीर को शिथिल करें। इस आसन के 4-5 चक्र करें।

  4. ये आसन पेट के भाग को क्रियाशील बनाते हैं। यकृत एवं अमाशय की क्रियाशीलता बढ़ाते हैं। इससे ब्लड सर्कुलशन भी सुचारू होता है। सिर और चेहरे की ओर रक्त संचार बढ़ने के कारण आंखों की रोशनी सुधरती है और बालों का झड़ना कम होता है। इन आसनों से पाचन-तंत्र ठीक होता है। हाथ और पैरों में तनाव उत्पन्न करके मांसपेशियों में ऊर्जा प्रदान करता है। कमर दर्द, स्लीप डिस्क जैसी तकलीफ में फायदेमंद है। मेरुदंड को लचीला बनाने में सहायक होता है।

    • सावधानी: हाई बी.पी., हार्ट-पेशेंट और हर्निया रोगी सावधानीपूर्वक करें।
    • विशेष: ये आसन करते समय पेट और लिवर पर दबाव पड़ता है जिससे टाॅक्सिंस शरीर से बाहर निकलने में मदद मिलती है और बीमारियों से बचाव होता है।


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      3 yoga asanas helpful in removing toxins of the body after Diwali


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बारिश के मौसम में मच्छरों से रहें सावधान

बारिश के मौसम में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां यानी मलेरिया, जीका और डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन दोनों ही बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो जाता है। इस तरह की बीमारी का इलाज होने के बाद भी इससे हुई कमजोरी से उबरने में काफी समय लग जाता है। इसलिए सबसे बेहतर यही है कि आप मच्छरों से खुद का बचाव करें ताकि इन बीमारियों की चपेट में न आएं।

पानी जमा न होने दें- सबसे अहम बात यह है कि अपने आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। बारिश में कई जगह पानी इकट्ठा हो जाता है जिससे मच्छरों को पनपने का मौका मिलता है। कूलर आदि चीजों को भी साफ करते रहें ताकि मच्छर न बढ़े।

करें मॉस्किटो रेपलेंट का इस्तेमाल- अंदर हो या बाहर मच्छरों का आतंक हर जगह रहता है। इसलिए चाहे आप घर में रहें या बाहर मच्छरों से सावधान रहना ज्यादा जरूरी है। ख़ासकर घर में अगर बचें हैं तो सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। इसके साथ ही मॉस्किटो रेपलेंट का इस्तेमाल करने से मच्छरों से बचा जा सकता है।

पूरे कपड़े पहने- बरसात के समय नमी के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। खुले शरीर होने से मच्छर ज्यादा काटते हैं जिनसे बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए उनसे बचने के लिए पूरी बांह की शर्ट व नीचे भी फुल लेंथ पैंट्स पहनें ताकि मच्छरों से बचाव हो सके।

नोट: जीका वायरस से ग्रसित इलाके में ट्रैवल करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही जीका संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखनी जाइए। किसी भी लक्षण की शंका होने पर इलाज में देरी न करें क्यूंकी मरीज की हालत बिगाड़ सकती है जो उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।



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Beware of mosquitoes in rainy season


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जानें, समझें व ऐसे बचें जीका वायरस से

बारिश के मौसम में सिर्फ पानी नहीं बरसता बल्कि मुसीबत भी जमकर बरसती है। जैसे ही बरसात का मौसम खत्म होने लगता है पानी से संबंधित बीमारियां अपना पैर पसारना शुरू कर देती हैं। मच्छरों के वजह से फैलने वाले एक ऐसे ही वायरस का जिक्र यहां पर हम कर रहे हैं ‌जिसने साल 2016 में हंगामा मचा दिया था। ये ऐसा वायरस है जो सीधे तौर पर नवजातों को अपने आगोश में लेता है। इस वायरस के प्रभाव में आने के वजह से बच्चों पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ता है। बच्चों के लिए घातक इस वायरस के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

जीका वायरस का इतिहास
वर्ष 1940 में सबसे पहले जीका वायरस युगांडा में मिला था। लेकिन इसके बाद ये काफी तेजी के साथ इसने अफ्रीका के कई हिस्सों में अपना पैर पसार लिया। दक्षिण प्रशांत और एशिया के कुछ देशों को छूते हुए ये लैटिन अमेरिका तक पहुंच गया। ब्राजील में जब इसने अपना प्रकोप दिखाया तो कुछ विशेषज्ञों ने गहन अध्ययन के जरिए ये अंदेशा लगाया कि ये 2014 के फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान एशिया व दक्षिण प्रशांत के तरफ से आया होगा। हालांकि इस दावे की पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।

क्या हैं इसके लक्षण
ये वायरस एंडीज इजिप्टी नाम के मच्छर से फैलता है। ये वही मच्‍छर है जिसके कारण पीला बुख़ार, डेंगू व चिकुनगुनिया जैसी विषाणुजनित बीमारियां फैलती हैं। जीका संक्रमित मां से सीधे नवजातों में फैलती है। ये वायरस ब्लड ट्रांसफ्यूजन व यौन सम्बन्धों से भी फैलती है। जीका को तुरंत पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षणों की व्याख्या सटीकता के साथ अब तक सामने नहीं आई है। लेकिन कहा जाता है कि मच्छरों के काटने के तीन से बारह दिनों के भीतर चार में से तीन व्यक्तियों में तेज बुखार, रैशेज, सिर दर्द और जोड़ों में तेज दर्द होने के लक्षण दिख सकते हैं।

इससे क्या होती है समस्‍या
इससे माइक्रोसेफली नाम की बीमारी का खतरा बना रहता है। माइक्रोसेफली एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें बच्चे का सिर छोटा रह जाता है और उसके दिमाग का पूरा विकास नहीं हो पाता। इससे बच्चों की जान भी जा सकती है। इसके प्रकोप से बच जाने वाले बच्चे ताउम्र बुद्धि सम्बन्धी विकारों से पीड़ित रहते हैं।

कैसे बचें
जीका वायरस का कोई इलाज अब तक खोजा नहीं जा सका है, इससे बचने का एकमात्र विकल्प ये है कि आप जोखिम को कम कर सकते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य अधिकारी कीट नाशकों का उपयोग, पूरी बाजू के कपड़े जिससे शरीर कवर हो और खिड़कियों और दरवाजों को बंद करने की सलाह देते हैं। इस बीमारी में सजगता ही सबसे बड़ा उपाय है।



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Learn, Understand and Avoid Zika Virus


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इन कारणों से आपको ज्यादा काटते हैं मच्छर

अगर आप उन लोगो में से हैं जिन्हें मच्छर ज्यादा काटते हैं तो इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण है। डाॅक्टर्स का कहना है कि मच्छरो में इंसान और जानवरों को लोकेट करने के खास सेंसर होते हैं। इन सेंसर से ही मच्छर ये पता लगाते हैं कि उनका शिकार कहां पर हैं। मच्छर किन चीजों से ज्यादा आकर्षित होते हैं इस विषय पर दुनिया भर में कई रिसर्च हुए हैं। इन्हीं रिसर्च के आधार पर आपको बता रहें कि मच्छर को कौन सी चीज ज्यादा अट्रैक्ट करती है।

मच्छरों को ये चीजें करती हैं सबसे ज्यादा अट्रैक्ट :-

- एक रिसर्च में पाया गया है कि महिलाओं और बच्चों की तुलना में मच्छर पुरूषों को ज्यादा काटते हैं। मच्छरों को ज्यादा पसीना अट्रैक्ट करता है क्योंकि पसीने में नमी और बदबू जैसी चीजें होती हैं।

- कई रिसर्च में ये पाया गया है कि ब्लैक, ब्लू, अैर रेड जैसे डार्क कलर भी मच्छरों को अट्रैक्ट करते हैं।

- अगर आप परफ्यूम या डियो लगाते हैं तो मच्छर आपको ज्यादा काटेंगे, क्योंकि खुशबू मच्छरों को अट्रैक्ट करती है।

- लैक्टिक ऐसिड भी मच्छरों को अपनी ओर आकर्षित करता है और ये लैक्टिक एसिड ज्यादातर स्किन केयर क्रीम्स में पाया जाता है।

- जिन लोगों का कोलेस्ट्राॅल लेवल ज्यादा होता है उन्हें भी मच्छर ज्यादा काटते हैं।

- मच्छर बाॅडी की स्मेल के जरिये लोकेट करते हैं तो जितनी तेज बाॅडी स्मेल होगी मच्छर उतना ही काटेंगें।



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These are the reasons why you bite more mosquitoes


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डेंगू - मलेरिया से बचाव के टिप्स

यूं तो डेंगू-मलेरिया किसी को भी हो सकता है लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं में संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे समय में गर्भवती महिला को और भी सतर्क रहना चाहिए।

गर्भवती महिलाएं ऐसे रखें अपना ख्याल :
- इस बात का पूरी तरह ख्याल रखें कि ऐसी जगह पर बिल्कुल ना जाएं जहां इन बीमारियों का प्रकोप तेज हो।
- अपने आसपास मच्छर ना पनपने दें और घर को साफ-सुथरा रखें। इसके अलावा शाम होते ही घर की खिड़कियां बंद रखें ताकि बाहर से मच्छर अंदर ना आ सकें।
- हमेशा पूरे कपड़े पहनें जिससे कि आपका शरीर पूरी तरह ढ़का रहे। मच्छरदानी का इस्तेमाल जरूर करें।
- अपने शरीर में पानी की कमी ना होने दें। ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करें। जूस और नारियल पानी को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।
- अगर आपको लगे कि मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारियों के लक्षण हैं तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
- गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह लिए बिना कोई भी दवाई ना खाएं।



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Dengue in pregnancy - prevent this from malaria like this


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इन घरेलु पौधों से भागते हैं मच्चर

माॅनसून के बाद मच्छरों से परेशानी आम है। इन दिनों मच्छर बहुत परेशान करते हैं और बाहर बैठने का मजा भी किरकिरा करते हैं। मच्छर के काटने से खुजली पैदा होती है साथ ही यहमलेरियाजैसी अन्य बिमारियों के भी वाहक होते हैं। ऐसे में हमें पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए ताकि वक्त रहते हम बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सके।

आप प्राकृतिक रूप से मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए मॉस्किटो रेपेलेन्ट प्लांट्स अपने बगीचे में लगाएं। ये मॉस्किटो रेपेलेन्ट पौधे आपको ना केवल मच्छरों से निजात दिलाएंगे बल्कि आपके बगीचे की सुंदरता भी बढ़ाएंगे।


मच्छरों काे भगाने के लिए घर में रखें ये पौधें :

रोजमेरी,सिट्रोनेलाग्रास,गेंदा,लैवेंडर, बासिल, कैटनिप और पेपरमींट।



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The march runs away from these domestic plants


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Olympic Event Test: शिव थापा और पूजा ने जीता गोल्ड, भारत ने जीते कुल सात मेडल

आशीष (Ashish) ओलिंपिक टेस्ट इवेंट (Olympic Test Event) में सिल्वर जीतने वाले इकलौते खिलाड़ी रहे, फाइनल में जापान (Japan) के सेवोन ओकोजावा को मात दी

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टोक्यो ओलिंपिक में मैरीकॉम निभाएंगी अहम जिम्मेदारी, खास दल में हुई शामिल

भारत की 36 साल की मैरीकॉम (Mary Kom) हाल में विश्व चैंपियनशिप (Boxing World Championship) के इतिहास की सबसे सफल मुक्केबाज हैं

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पाइक शोल्डर प्रेस विद बॉल एक फायदेमंद एक्सरसाइज, पोश्चर सुधारने और शरीर का बैलेंस ठीक रखने में करता है मदद

हेल्थ जेस्क. जो लोग पेट, कंधों और अपर बॉडी पार्ट्स को मजबूत बनाना चाहते हैं, उनके लिए पाइक शोल्डर प्रेस विद बॉल एक फायदेमंद एक्सरसाइज है। एब्स की मजबूती के लिए भी इसे करने से लाभ होता है।10 बार तक पाइक शोल्डर प्रेस विद बॉल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। यह वर्कआउट पोश्चर सुधारने और शरीर का बैलेंस ठीक करने में भी मदद करता है। इससे हाथों को सही आकार मिलता है।

  1. सबसे पहले पुश-अप की स्थिति में आ जाएं और अपने पैरों को किसी कुर्सी या मेज पर रख लें। अब दोनों हाथों के बल अपने कूल्हों को पाइक स्थिति में ऊपर की ओर उठाएं। शरीर की पाइक स्थिति को बनाए रखें और कोहनियों को सिर की ओर झुकाएं व शरीर के ऊपरी भाग को छत की ओर उठाएं। इसके 10 सेट करें।

    • शोल्डर प्रेस करते समय शुरुआत में हेवी वेट न उठाएं वरना आपको चोट लग सकती है। पहले ट्रेनर से सही वेट और पोश्चर को समझें और फिर ट्राय करें।
    • इसे करते हुए अगर दर्द होने लगे तो तुरंत बंद कर दें।
    • जिम में इस वर्कआउट की शुरुआत करने के बजाय इसे मेडिसिनल बॉल की मदद से घर में करना ज्यादा आसान है। हालांकि ट्रेनर की सलाह जरूर लें।
  2. मसल्स को आराम दें:रोज इस वर्कआउट को करने से बचें। अगर आपने आज शोल्डर की एक्सरसाइज की है तो दो दिन तक दोबारा शोल्डर की एक्सरसाइज न करें।
    सही तकनीक:एक्सरसाइज सही तरीके से करें। यदि आप ज्यादा वजन उठाते हैं लेकिन गलत तरीके से एक्सरसाइज कर रहे हैं तो आपको उसका फायदा नहीं मिलेगा।

    पार्टनर बनाएं:अकेले एक्सरसाइज करने के बजाय दोस्त के साथ एक्सरसाइज करें। इससे आप एक दूसरे को सही तरीके से एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

    सही डाइट लें:यदि आप चाहते हैं कि शोल्डर का साइज बढ़े तो अपनी डाइट पर खास ध्यान दें।इसके लिए डाइटमें प्रोटीन युक्त आहार जैसे अंडे, चिकन शामिल करें।



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      Core muscles strengthened by Pike Shoulder Press with Ball


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Ambulance जैसी ड्रेस पहनकर कुत्‍ता निकालता है साइरन की आवाज! देखें VIDEO

रिवर नामक य‍ह कुत्‍ता (Dog) एंबुलेंस (Ambulance) के साइरन (Siren) की आवाज निकालने के दौरान अपनी मालकिन के ऊपर इसलिए भी नजर रखता है कि वो उसका वीडियो बना रही है या नहीं. रिवर का यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है.

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बाजुओं को मजबूत और फिट रखने के लिए करें चेस्ट प्रेसे और रॉम्बोइड पुल्स जैसी एक्सरसाइज

हेल्थ डेस्क. कंधों और बाहों को मजबूत बनाने के लिए नियमित व्यायाम करना ज़रूरी है। ऐसे व्यायाम जो असरदार होने के साथ-साथ आसान भी हों। कुछ ऐसे ही व्यायाम लेकर आए हैं जिन्हें आसानी से कर सकते हैं। ये उन पीटी एक्सरसाइज की तरह है जिन्हें हम बचपन में स्कूल में करते थे। सभी व्यायाम एक-एक मिनट करना है और एक के बाद एक करना है।

  1. दोनों पैरों को कमर के समानांतर फैलाएं। हाथेलियों को तस्वीर अनुसार आपस में जोड़ते हुए चेहरे के समानांतर रखें। कोहनियों को आपस में जोड़ें। अब हथेली और कोहनी को आपस में जोर से दबाते हुए चेहरे के ऊपर ले जाएं। फिर दबाते हुए सामान्य अवस्था में नीचे ले आएं। फिर ऊपर ले जाएं और इसे कई बार दोहराएं।

  2. सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को कमर के समानांतर फैलाएं। दोनों हाथों की मुट्‌ठी बांधकर चेहरे के समानांतर लाकर आपस में जोड़ें। तस्वीर अनुसार कोहनियों को भी आपस में जोड़ें और आपस में जोर से दबाएं। अब मुट्‌ठी से हाथों पर ज़ोर देते हुए बाहों को एकसाथ तस्वीर अनुसार खोलें और कंधे के समानांतर ले जाएं। जोर देते हुए हाथों को वापस चेहरे के समने ले आएं। इसे कई बार दोहराएं।

  3. सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को कमर के समानांतर फैलाएं। बाहों को कंधे की सीध में फैलाएं और मुट्‌ठी बांध लें। दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़ते हुए समकोण आकार दें। अब मुट्‌ठी से हाथों पर ज़ोर देते हुए बाहों को आगे की ओर लाएं और फिर जोर देते हुए बाहों और कोहनी को पीछे ले जाएं। बाहों को पीछे ले जाते हुए खींचें। इसे कई बार दोहराएं।

  4. पैरों को हल्का-सा फैलाते हुए घुटनों को थोड़ा मोड़ लें और तस्वीर अनुसार कंधे को आगे की ओर झुकाएं। कोहनी मोड़ते हुए मुट्‌ठी बांधें और कंधों के सामने रखें। इसी अवस्था में मुट्‌ठी से हाथों को जोर देते हुए तस्वीर अनुसार कमर के पीछे ले जाएं। फिर जोर देते हुए कंधे की ओर आगे ले आएं। इसे इस तरह करना है जैसे हाथों में डंबल्स पकड़े हुए हैं।



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      chest presses and rhomboid bridges Exercise helps to keep the arms strong and fit


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सड़क पर गहरे गड्ढे में समा गई चलती बस, लोगों ने टाइटेनिक से कर दी तुलना

यह बस हादसा (Bus accident) अमेरिका (United states) के पेंसिलवेनिया के पिट्सबर्ग में हुआ. हादसे के वक्‍त बस में सिर्फ एक महिला यात्री और ड्राइवर ही सवार थे. दोनों को मामूली चोट आई.

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पेट में एसिड बनने के कारण होती है एसिडिटी की समस्या, जीवनशैली में बदलाव और कुछ घरेलू उपायों से मिलेगी राहत

हेल्थ डेस्क. बदलते खान-पान और जीवनशैली के कारण इन दिनों अमूमन लोगों को पेट से सम्बंधित कई समस्याएं होने लगी हैं। इनमें से एक है एसिडिटी। एसिडिटी एक आम समस्या है जिससे अक्सर लोगों को दो-चार होना पड़ता है। अगर आपको भी ये परेशानी है तो इस पर गौर कीजिए। निरोग स्ट्रीट की सह उपाध्यक्ष डॉ. पूजा कोहली बता रही हैं एसिडिटी से निजात पाने के उपाय...

नाभि के ऊपरी हिस्से में ज्यादा एसिड बनने लगता है जिससे वहां जलन पैदा होने लगती है। कभी-कभी ये एसिड ऊपर की तरफ गले में आ जाता है जिससे खट्‌टी डकारें और जलन होने लगती है। ये मुख्य रूप से पित्त के कारण होता है। जब पेट में गर्माहट बढ़ने लगती है तो गर्म तासीर वाली चीजें, अधिक मिर्च, मसाला या खटाई खाने से पेट में पित्त उत्पन्न होता है। सीने और गले में लगातार जलन, सूखी खांसी, पेट फूलना, सांसों में बदबू, खट्‌टी डकार, कभी-कभी उल्टी होना, उल्टी में अम्ल या खट्‌टे पदार्थ का निकलना जैसी समस्याएं एसिडिटी के कारण होने लगती हैं।

  1. अगर एसिडिटी लंबे समय से है तो इससे पेट में छाले या सूजन हो सकती है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जो कि आंत को प्रभावित करती है, मालबसोर्पशन सिंड्रोम जिसमें शरीर खाद्य पदार्थों से पोषण तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता है और एनीमिया जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

  2. अगर आप गुनगुना पानी पीकर दिन की शुरूआत करते हैं तो एसिडिटी से काफ़ी आराम मिलेगा। गुनगुने पानी में थोड़ी-सी पिसी काली मिर्च और आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह पीने से भी लाभ होता है।

  3. भोजन के बाद सौंफ खाने से भी एसिडिटी में राहत मिलती है। सौंफ पेट में ठंडक पैदा करके एसिडिटी को कम करता है। सौंफ को सीधे चबाकर या फिर इसकी चाय बनाकर पी सकते हैं। नींबू पानी में थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से भी एसिडिटी नहीं होती। लंच के कुछ समय पहले इसे लेने से अधिक फ़ायदा होगा।

  4. ठंडा दूध एसिडिटी के लिए रामबाण उपाय है। ठंडे दूध में मौजूद कैल्शियम एसिडिटी के दर्द को शांत कर देता है। इसलिए जब भी पेट में जलन या गैस की वजह से पेट दर्द महसूस हो तो ठंडे दूध का सेवन कर सकते हैं। मुनक्के को एक गिलास दूध में उबालकर ले सकते हैं। ये अम्लपित्त को खत्म करता है।

    • अदरक के टुकड़े पर काला नमक छिड़ककर चूसें।
    • अदरक को पानी के साथ उबालकर भी पी सकते हैं।
    • आंवले को काले नमक के साथ या उबालकर या फिर मुरब्बे अथवा जूस के रूप में ले सकते हैं। आंवला और एलोवेरा का मिश्रित जूस भी पी सकते हैं।
    • भोजन के बाद तुलसी की कुछ पत्तियां चबाएं या फिर गर्म पानी में डालकर इसका सेवन करें।
    • दूध की चाय के बजाय हर्बल चाय पिएं। रोज़ाना नारियल पानी पिएं।
    • लौंग चबाने से भी एसिडिटी कम होती है।
    • चोकर सहित आटे की रोटी खाएं।
    • अजवायन को पानी में उबालकर और ठंडा होने पर छानकर पिएं।
    • अजवायन को तवे पर भूनकर काले नमक के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं।
    • इलायची मुंह में रखकर चूसते रहें।
    • पिसी हुई पुदीने की पत्तियां काले नमक के साथ मिलाकर पिएं।
    • जीरे को पानी में उबालकर पी सकते हैं।
    • रात में ईसबगोल के सेवन से भी एसिडिटी में फायदा होता है।
    • भोजन के बाद गुड़ का एक टुकडा ले सकते हैं।
    • खान-पान के अलावा सही दिनचर्या का पालन करना भी ज़रूरी है। जल्दी सोएं और जल्दी उठें। देर रात तक जागने और फिर सुबह देर तक सोने से पित्त बढ़ता है जिससे एसिडिटी की समस्या बढ़ती है।
    • भोजन के बीच लंबा अंतराल नहीं होना चाहिए। तली-भूनी चीज़ें, बेकरी प्रोडक्ट्स, अचार से भी बचें।
    • खाना जल्दी-जल्दी नहीं बल्कि आराम से चबा-चबाकर खाएं। छोटे निवाले लें। खाने के बीच में पानी नहीं पिएं। खाली पेट फल न लें। बाहर का भोजन या फास्ट फूड से बचें। तनाव भी एसिडिटी का कारण बन सकता है।
    • खाने में चावल, बैंगन, आलू, काला चना, चने का आटा, अधिक खट्टी चीज़ें, दही, कॉफी और दूध की चाय आदि एसिडिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। भरपूर नींद लें और सुबह सैर पर जाएं।


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      tips for get rid off from acidity problem


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Wednesday, October 30, 2019

Chhath Puja Prasad Recipe: ठेकुआ प्रसाद बनाएं ऐसे, छठ मैया होंगी खुश

छठ पूजा ठेकुआ प्रसाद रेसिपी (Chhath Puja Prasad Recipe): छठ पूजा का मुख्य प्रसाद ठेकुआ है. ठेकुआ प्रसाद के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है. छठ मैया को ठेकुआ प्रसाद बहुत पसंद है.

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ब्लडप्रेशर कंट्रोल करने और हृदय रोगों से लेकर दिमाग को ठंडा रखने में मदद करता आंवला

हेल्थ डेस्क. आंवला पेट के रोग दूर करने के साथ ही दिमाग को ठंडक पहुंचाने के लिए भी अत्यंत गुणकारी है। इसके अलावा भी आंवला के कई फायदे हैं। यहां कुछ आसान और मुख्य रूप से काम आने वाले उपाय बता रहें डॉ. ऋषि मोहन श्रीवास्तव...

  • आंवला चाहे हरा हो या सूखा, उसकी कुछ कलियों को पानी में पीसकर चेहरे पर कुछ देर लगाएं। चेहरे के दाग-धब्बे कुछ दिनों के प्रयोग के बाद दूर होंगे।
  • आंवले का चूर्ण रात को सोने से पूर्व खाने पर मोशन सही रहता है। कब्ज की शिकायत मिट जाती है। पेट में अजीर्ण, गैस, एसिडिटी हो रही है, तब भी आंवले की कली नमक लगाकर चूसें, शीघ्र लाभ पहुंचता है।
  • आंवले को बेसन के साथ पीसकर उबटन की तरह प्रयोग करने से त्वचा मुलायम बनी रहती है।
  • ब्लडप्रेशर, हृदय रोगों में आंवला बहुत फायदा देता है। यह विटामिन-सी का बहुत अच्छा स्रोत है। मसूढ़ों में समस्या हो या दांत का दर्द, एक दो आंवले की कलिया चूसें।
  • आंवले का मुरब्बा और अचार हडि्डयों को मजबूत बनाता है। सुबह-सुबह आंवले का मुरब्बा खाने से याद्दाश्त बढ़ती है। डायबिटीज के रोगी आंवले का मुरब्बा न खाएं।
  • आंवले के रस में यदि शहद मिलाकर पीते हैं तो डायबिटीज़ में लाभ पहुंचता है। रोजाना एक चम्मच आंवले का रस व एक चम्मच शहद पर्याप्त है।
  • जिन लोगों की आंखों के सामने अक्सर अंधेरा छा जाता है, वे दो चम्मच आंवले का रस एक गिलास पानी में मिलाकर दस-पंद्रह दिनों तक सेवन करें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
  • सफेद बालों के लिए भी आंवले का चूर्ण या त्रिफला का चूर्ण बहुत गुणकारी है। त्रिफला चूर्ण पानी में भिगो दें। लोहे का पात्र हो तो और भी उत्तम। इस पानी से सिर धोएं। कुछ समय में सफेद बाल काले होने लगेंगे। रूसी या जुएं की समस्या से भी निजात मिल जाएगी।


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Amla helps in keeping the brain cool, control blood pressure and good for heart diseases


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ट्रेवलिंग आरामदायक हो इसलिए सफर के दौरान सोच-समझ कर पहनें कपड़े और फुटवियर

लाइफस्टाइल डेस्क. यात्रा शब्द ही रोमांच से भर देता है। सफर पर निकलते समय तैयारियां करना स्वाभाविक है पर इस दौरान किन बातों का ख्याल रखना है ये जानना भी जरूरी है। सफर पर जाते वक्त हम अक्सर ये भूल जाते हैं कि क्या साथ ले जाना चाहिए, क्या नहीं। बिना सोचे-समझे ऐसे कपड़े या फुटवियर पहन लेते हैं, जो कि यात्रा के लिए मुनासिब नहीं होते। सफर आराम से गुजरे इसके लिए पंखुड़ी पाण्डेय से जानिए कुछ आसान टिप्स...

  1. यात्रा के दौरान फिटिंग की जींस मुश्किल पैदा कर सकती हैं। एक स्थिति में बैठने में इससे समस्या होती है। साथ ही अक्सर लोग लेदर पेंट्स पहनना पसंद करते हैं। ये दिखने में तो अच्छी लगती हैं पर कुछ समय के लिए पहनना ही ठीक रहता है। इसके अलावा रिप्ड जींस भी सफर में न पहनें। सफर में या लंबे समय के लिए ढीली पैंट्स या स्ट्रेचेबल जींस ही पहनें।

  2. यात्रा करने के दौरान कई बार तेज़ गति से चलना और दौड़ना आम होता है। हील्स के कारण ऐसा करने में समस्याएं आती हैं। इसलिए कोशिश करें कि सफर में हल्की व फ्लैट सैंडल या फ्लोटर्स ही पहनें। लेस वाले जूते न पहनें। इन्हें बार-बार उतारने और पहनने में मुश्किल होती है।

  3. कई लोगों को सफेद कपड़े पहनना बहुत पसंद होता है। सफर में सफेद रंग के कपड़े जल्दी गंदे हो जाते हैं। यदि सफेद पहनना ही है तो प्रिंट में पहनें। पूरी सफेद ड्रेस पहनने से बचें। बड़े बैग ओवरसाइज बैग घर पर ही छोड़ दें। इनके बजाय छोटे, क्रॉस-बॉडी बैग्स साथ लें। ये कम जगह लेते हैं और संभालने में भी आसान होते हैं। इन्हें क्रॉस टांगने पर दोनों हाथ फ्री रहते हैं। बड़े हैंड बैग्स को बार-बार संभालना पड़ता है।

  4. कुछ लोग तेज महक पसंद करते हैं। सफर के दौरान कोशिश करें कि तेज महकने वाले इत्र या परफ्यूम का इस्तेमाल न करें। इत्र या परफ्यूम की तेज गंध से आसपास के यात्रियों को परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को तेज महक से एलर्जी भी होती है। कोशिश करें कि सफर के दौरान सौम्य परफ्यूम का ही इस्तेमाल करें।

    • लेंस की अपेक्षा चश्मा अधिक आरामदायक होता है। तेज़ हवा या धूल-मिट्‌टी के कारण लेंस लगाने पर तकलीफ हो सकती है। सफर में जाते समय चश्मा ही लगाएं। लम्बे सफर में सोने के पहले लेंस निकालना होगा, जबकि चश्मे के साथ इस तरह ही समस्या नहीं होगी।
    • बड़े ईयररिंग्स, हैवी नेकलेस पहनकर सफर में न जाएं। कई बार दिखावा महंगा पड़ सकता है। अगर जूलरी पहनना पसंद ही है तो सोबर टॉप्स, चोकर या पतली चेन पहन सकती हैं।


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      tips for relax traveling


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ट्रेवलिंग आरामदायक हो इसलिए सफर के दौरान सोच-समझ कर पहनें कपड़े और फुटवियर

लाइफस्टाइल डेस्क. यात्रा शब्द ही रोमांच से भर देता है। सफर पर निकलते समय तैयारियां करना स्वाभाविक है पर इस दौरान किन बातों का ख्याल रखना है ये जानना भी जरूरी है। सफर पर जाते वक्त हम अक्सर ये भूल जाते हैं कि क्या साथ ले जाना चाहिए, क्या नहीं। बिना सोचे-समझे ऐसे कपड़े या फुटवियर पहन लेते हैं, जो कि यात्रा के लिए मुनासिब नहीं होते। सफर आराम से गुजरे इसके लिए पंखुड़ी पाण्डेय से जानिए कुछ आसान टिप्स...

  1. यात्रा के दौरान फिटिंग की जींस मुश्किल पैदा कर सकती हैं। एक स्थिति में बैठने में इससे समस्या होती है। साथ ही अक्सर लोग लेदर पेंट्स पहनना पसंद करते हैं। ये दिखने में तो अच्छी लगती हैं पर कुछ समय के लिए पहनना ही ठीक रहता है। इसके अलावा रिप्ड जींस भी सफर में न पहनें। सफर में या लंबे समय के लिए ढीली पैंट्स या स्ट्रेचेबल जींस ही पहनें।

  2. यात्रा करने के दौरान कई बार तेज़ गति से चलना और दौड़ना आम होता है। हील्स के कारण ऐसा करने में समस्याएं आती हैं। इसलिए कोशिश करें कि सफर में हल्की व फ्लैट सैंडल या फ्लोटर्स ही पहनें। लेस वाले जूते न पहनें। इन्हें बार-बार उतारने और पहनने में मुश्किल होती है।

  3. कई लोगों को सफेद कपड़े पहनना बहुत पसंद होता है। सफर में सफेद रंग के कपड़े जल्दी गंदे हो जाते हैं। यदि सफेद पहनना ही है तो प्रिंट में पहनें। पूरी सफेद ड्रेस पहनने से बचें। बड़े बैग ओवरसाइज बैग घर पर ही छोड़ दें। इनके बजाय छोटे, क्रॉस-बॉडी बैग्स साथ लें। ये कम जगह लेते हैं और संभालने में भी आसान होते हैं। इन्हें क्रॉस टांगने पर दोनों हाथ फ्री रहते हैं। बड़े हैंड बैग्स को बार-बार संभालना पड़ता है।

  4. कुछ लोग तेज महक पसंद करते हैं। सफर के दौरान कोशिश करें कि तेज महकने वाले इत्र या परफ्यूम का इस्तेमाल न करें। इत्र या परफ्यूम की तेज गंध से आसपास के यात्रियों को परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को तेज महक से एलर्जी भी होती है। कोशिश करें कि सफर के दौरान सौम्य परफ्यूम का ही इस्तेमाल करें।

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आखिरी स्‍थान पर रहने वाला बना वर्ल्ड चैंपियन‌, 40 देशों के 250 लोग हुए शामिल

सबसे धीमा सिगार पीने का वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) स्वीडन के 48 साल के इंजीनियर इगोर कोवासिक के नाम है. उन्होंने 3 घंटे, 52 मिनट और 55 सेकंड तक सिगार पीने का कारनामा अंजाम दिया है.

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Olympic Test Event: शिव थापा और पूजा रानी फाइनल में पहुंचे, निकहत को ब्रॉन्ज

निकहत जरीन (Nikhat Zareen) और पुरूष वर्ग में वाहलीमपुइया (Vahlimpuia) (75 किग्रा) को अपनी सेमीफाइनल बाउट हारने से कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

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काटने के बाद सेब हो जाता है काला तो नींबू और शहद की मदद से रंग बदलने से बचाएं

हेल्थ डेस्क. कई बार सेब को काटकर रख देने के थोड़ी देर बाद ये भूरा होने लगता है। जब भी हम सेब को काटते हैं तो वह हवा में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आ जाता है। इससे एंजाइम रिलीज होता है जिस वजह से सेब ऑक्सिडाइज़ होने लग जाता है। ये रंग नहीं बदलें इसके लिए अर्चना दुबे बता रही हैं कुछ कारगर नुस्खे...

  1. सेब सीधे पानी में काटें। एक बोल रख लें और सेब की फांके काट-काटकर तुरंत इसमें डालते जाएं। आधा सेब भी इस्तेमाल करना है तब भी इसे पानी में ही काटें।

  2. साइट्रिक एसिड सेब में बनने वाले ऑक्सिडेशन की प्रक्रिया को बंद कर देता है। इससे कटे हुए फल काले पड़ने से बच जाते हैं। नींबू का रस या संतरे का रस सेब के खुले हिस्से में लगाकर रखें। इससे ये काला नहीं पड़ेगा। इसी तरह नींबू का रस और पानी मिलाकर घोल तैयार करें। कटे हुए सेब इसमें पांच मिनट के लिए भिगोकर रखें। नींबू के अलावा किसी भी खट्‌टे फल के रस का उपयोग कर सकते हैं।

  3. आधे चम्मच शहद को एक कप पानी में मिलाएं। सेब की स्लाइज का आधा हिस्सा इस शहद के पानी में पांच मिनट के लिए भिगोकर रखें। फिर निथारकर रख दें।

  4. सोडियम क्लोराइड ऑक्सिडेशन की प्रक्रिया को रोकने में मदद करता है। पानी में नमक डालकर घोल बना लें। इसमें सेब की सभी फांकें डाल दें। कुछ देर बाद इसे निकाल लें और पानी निथारकर रखें। इससे सेब का रंग नहीं बदलेगा।



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      After cutting, the apple turns black, so with the help of lemon and honey, avoid changing the color


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रोजाना एक ही तरह के मिष्ठान खा-खाकर ऊब गए हैं तो खीर और लड्डू के साथ करिए नए प्रयोग

हेल्थ डेस्क. अधिकतर लोगों को भोजन के बाद मीठा खाना पसंद होता है। आमतौर पर खीर,हलवा, कस्टर्ड और लड्डू खाने के साथ परोसे जाते हैं। यह पारंपरिक व्यंजन हैं। इसमें प्रयोग कर कुछ नया बनाया जा सकता है। नीलम अग्रवाल से जानिए चंद स्वादिष्ठ नई तरह की रेसिपीज।

  1. सीताफल खीर
    • क्या चाहिए: दूध- 1 लीटर, सीताफल का गूदा- 1 बड़ी कटोरी, कंडेंस्ड मिल्क- 1 कटोरी, केसर- 4-6 रेशे दूध में घोले हुए, जायफल पाउडर- चुटकी भर, सूखे मेवे- थोड़े से कटे हुए, शक्कर- स्वादानुसार।
    • ऐसे बनाएं: दूध को मोटे तले के बर्तन में उबालकर गाढ़ा कर लें। इसमें कटे हुए सूखे मेवे और दूध समेत केसर डालकर थोड़ी देर उबालें और फिर आंच बंद कर दें। इसमें कंडेंस्ड मिल्क, शक्कर और जायफल पाउडर मिलाएं और फिर से पकाएं। इसे चम्मच से चलाते हुए पकाएं ताकि दूध तले पर नहीं लगे। लगभग 3-4 उबाल आने पर आंच से उतारकर थोड़ा ठंडा कर लें। अब इसमें सीताफल का गूदा अच्छी तरह से मिलाएं। स्वादिष्ठ सीताफल की खीर के ऊपर कटे हुए सूखे मेवे डालकर परोसें।
  2. पान के लड्डू
    • ऐसे बनाएं:नारियल चूरा- 1 कटोरी, कंडेंस्ड मिल्क- आवश्कतानुसार, गुलकंद- 2 छोटे चम्मच, सूखे मेवे- कटे हुए, गुलाब कतरी और सौंफ- आधा छोटा चम्मच, पान के पत्ते- 5 या 7 बारीककाटे हुए।
    • ऐसे बनाएं: बोल में नारियल का चूरा और पान के पत्ते मिलाएं।ं थोड़ा-थोड़ा कंडेंस्ड मिल्क डालते हुए मुलायम आटा गूंध लें और 5-8 मिनट के लिए ढककर रख दें। भरावन के लिए गुलकंद में सूखे मेवे, गुलाब कतरी, सौंफ़, थोड़ा-सा नारियल चूरा मिलाएं। अब हथेली में हल्का-सा घी लगाकर थोड़ा मिश्रण लें और गोल लोई बनाएं। बीच मे अंगूठे से दबाकर इसमें भरावन भरें। फिर चारों तरफ़ से लोई बंद करते हुए लड्डू बना लें। ऊपर से नारियल चूरा बुरकें। पान के लड्डू भोजन के बाद सर्व करें। इसे दो दिन फ्रिज के बाहर रख सकते हैं और फ्रिज में 8-10 दिन तक।
  3. खीर
    • क्या चाहिए: दूध- 2 लीटर, गाजर- 300 ग्राम कद्दूकस की हुई, गुड़- 300 ग्राम, घी- 2 छोटे चम्मच, सूखे मेवे-जरूरत अनुसार कटे हुए, दलिया- कटोरी पका हुआ, इलायची पाउडर- छोटा चम्मच।
    • ऐसे बनाएं: मोटे तले के बर्तन में दूध उबलने रखें। पैन में घी गर्म करके सूखे मेवे तलकर निकाल लें। बचें हुए घी में गाजर डालें और ढककर पांच मिनट तक भाप में पकाएं। जब दूध उबलकर आधा हो जाए तो इसमें दलिया और इलायची पाउडर मिलाकर 3-5 मिनट उबालें। आंच धीमी रखें और चम्मच से लगातार चलाते रहें। गाजर मिलाएं और खीर जितना गाढ़ा करें। आंच बंद करके गुड़ मिलाएं। दो मिनट में गुड़ घुल जाएगा। गुड़ सीधे मिलाने पर खीर फटने का डर रहता है। फिर से खीर को आंच पर रखकर 1-2 उबाल लाएं। ऊपर से मेवे मिलाएं।


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Tuesday, October 29, 2019

फिक्सिंग के आरोपों के बाद अब बॉक्सिंग में होगा बड़ा बदलाव, लागू होंगे नए नियम

इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) ने एआईबीए (AIBA) से ओलिंपिक गेम्स में बॉक्सिंग (Boxing) कराने के अधिकार छीन लिए हैं

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निमोनिया के बढ़ते खतरे पर अंकुश लगाने की तरफ फिलिप्स की एक पहल

गंभीर और खतरनाक के बीच हवा की गुणवत्ता में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है इसलिए इस दौरान सावधानी बरतनी आवश्यक है, खासकर यदि आपके घर में छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं। आउटडोर और इनडोर वायु प्रदूषण से निमोनिया और अन्य सांस से जुड़ी कई संक्रामक बीमारियों से सीधे जुड़ी हुई हैं। वायु प्रदूषण पांच साल से कम उम्र के बच्चों की 10 मौतों में से एक में जोखिम कारक है, जिससे वायु प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख खतरा बन चुका है।

ऐसे में 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए सबसे खतरनाक और संक्रमित बीमारी निमोनिया है जो एक तीव्र श्वसन संक्रमण का रूप है। निमोनिया एक सिंड्रोम है जिसमें वायरल, बैक्टीरियल और फंगल रोग जनकों सहित कई कारण होते हैं। निमोनिया होने पर साँस लेने में मुश्किल होती है और खासकर छोटे बच्चों को ज्यादा परेशानी होती है। गंभीर स्थिति में शिशु खाने या पीने में असमर्थ हो जाते हैं जिस वजह से ये बीमारी जानलेवा भी साबित हो जाती है।


बच्चों में न्यूमोनिया की स्थिति

दुनिया में सबसे अधिक भारत के नवजात बच्चे निमोनिया की बीमारी से ग्रसित होते हैं खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में ये बीमारी अधिकतर पाई जाती है जो उनकी मौत का भी एक प्रमुख कारण बनती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, निमोनिया दुनिया भर में बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा संक्रामक कारण है। 2017 में 5 साल से कम उम्र के 808 694 बच्चों की मौत निमोनिया के कारण हो गई, जिसमें 15% मृत्यु की घटनाओं में पांच साल से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं ।

ऐसे में बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए उनकी देखभाल करने के साथ कुछ जरूरी बातों पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए बच्चों के माता- पिता व परिजनों निमोनिया के संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है इसके साथ ही बच्चों के सांस लेने के पैटर्न को भी समझना बेहद आवश्यक है। अगर बच्चों के सांस लेने के पैटर्न में किसी भी प्रकार का परिवर्तन देखने को मिले तो तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

• निमोनिया की रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण पालन करें
• पहले 6 महीनों के लिए विशेष स्तनपान
• सुरक्षित पेयजल, अच्छी स्वच्छता और साबुन से बार-बार हाथ धोना
• अच्छा पोषण, विशेष रूप से 6 महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए
• इनडोर वायु गुणवत्ता में सुधार और स्वच्छता बनाए रखें
• जल्द से जल्द एक डॉक्टर से परामर्श करें।

ऐसे में फिलिप्स इंडिया एक जिम्मेदार ब्रांड होने के नाते भारत के बच्चों में होने वाली निमोनिया बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक सीएसआर अभियान 'हर सांस में जिंदगी ’की शुरुआत की है। जिसके द्वारा लोगों के स्वास्थ्य में सुधार और स्वस्थ रहने और रोकथाम, निदान और उपचार से स्वास्थ्य निरंतरता में बेहतर परिणामों को सक्षम करने के लिए काम किया जा रहा है।

क्यों फिलिप्स बचपन निमोनिया की रोकथाम का समर्थन कर रहा है?

• बच्चों में निमोनिया बीमारी और उससे होने वाली मृत्यु दर के मामले में भारत टॉप 10 देशों में शुमार है।

• यह एक संक्रमित रोग है जिसका आसानी से उपचार व रोकथाम किया जा सकता है।

• निमोनिया की बीमारी से जुड़े रिसर्च प्रोग्राम, जागरूकता फैलाने के लिए ग्लोबल हेल्थ कम्यूनिटी द्वारा इस जरूरत के मुताबिक आर्थिक रूप से मदद नहीं मिल पाती।



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An initiative by Phillips to curb the growing risk of pneumonia


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बेलफास्ट शहर के नीचे बहती है 170 साल पुरानी नदी, जिनेवा का संग्रहालय हैं खास

लाइफस्टाइल डेस्क. कुछ समय पहले एक व्यवसायी नीरज राठौड़ को आयरलैंड और स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा की यात्रा करने का मौका मिला। आयरलैंड की फारसेट नदी के राज जानने का अवसर और जिनेवा शहर की खूबसूरती ने उनकी यात्रा को यादगार बना दिया।आयरलैंड और स्विट्जरलैंड की अपनी इस यात्रा को उन्होंने हमारे साथ साझा किया। आइए जानते हैं उनकी इस यात्रा के बारे में...

बकौल नीरज, बेलफास्ट उत्तरी आयरलैंड की राजधानी और वहां का सबसे बड़ा शहर है। यह आयरलैंड के द्वीप पर दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इससे बड़ा शहर वहां पर डबलिन है, लागान नदी पर बसे इस शहर की आबादी 2011 में 3 लाख 13 हजार 871 थी। इंग्लैंड के लिवरपूल शहर से 1 घंटा 30 मिनट की फ्लाइट लेकर मैं बेलफास्ट पहुंचा। उत्तरी आयरलैंड में प्रोटेस्टेंट की संख्या कैथोलिक से अधिक है। मैंने उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट की सड़कों से गुजरते हुए यही महसूस किया कि यहां से हर रोज न जाने कितने लोग गुजरते हैं, लेकिन इनमें से शायद कुछ ही ये बात जानते हों कि उनके पैरों तले 170 साल पुराना एक राज छिपा है। इस जगमगाते शहर के ठीक नीचे बहती है फारसेट नदी। इस नदी के नाम पर ही इस शहर का नाम बेलफास्ट रखा गया है। बेलफास्ट की तरक्की और समृद्धि में भी इस नदी का अहम रोल है, लेकिन आज ये नदी दुनिया की नजरों से ओझल होकर खामोशी से जमीन के नीचे बहती है। यह जानकारी मुझे मिली तो मुझे भी आश्चर्य महसूस हुआ।

  1. जिनेवा समृद्धिशाली, वैभवशाली, सर्वाधिक स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर होने के कारण पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन यहां समय−समय पर आयोजित किए जाते हैं। जिनेवा के प्रसिद्ध स्थलों में प्राकृतिक इतिहास का संग्रहालय (नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम), कला व इतिहास संग्रहालय और विशाल जिनेवा झील एवं बड़े बगीचे शामिल हैं। यहां का घड़ी संग्रहालय पूरे संसार में अपनी तरह का अकेला संग्रहालय है। पिछले 500 वर्षों में अब तक जितनी तरह की कलाई, टेबल और दीवार घड़ियां बनाई गई हैं, उन सबके सेम्पल यहां पर प्रदर्शित किए गए हैं। यहां पर एक अनोखी घड़ी भी है जो ठीक 12 बजे समय के प्रभाव को अनोखे ढंग से प्रदर्शित करती है। ऐसी घड़ी पूरी दुनिया में कही भी देखने को नहीं मिलेगी।

  2. सन् 1600 में स्कॉटलैंड और इंग्लैंड से ईसाई धर्म के प्रोटेस्टेंट को मानने वाले लोगों ने यहां आना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उन्होंने फारसेट नदी पर घाट बनाने शुरू कर दिए। हाई स्ट्रीट में आज बड़ी-बड़ी दुकानें हैं, लेकिन एक दौर था जब यहां जहाज चलते थे। ये जहाज इन घाटों पर आकर रुकते थे, जिनमें शराब, मसाले और तंबाकू लदा होता था।

  3. उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट के साथ ही मुझे स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर जाने का मौका मिला। यह फ्रांस से सटा हुआ है और फ्रांस से मात्र 10 किमी दूर है। जेनेवा झील को फ्रांसीसी भाषा में Lac Léman कहते हैं जो कि पश्चिमी यूरोप की सबसे बड़ी स्वच्छ जल की झील है। यह झील 582 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली हुई है। इसका लगभग 60% एरिया स्विट्जरलैंड के क्षेत्राधिकार और शेष 40% भाग फ्रांस के क्षेत्राधिकार में आता है। जेनेवा शहर इसके दोनों किनारों पर बसा है। इस झील का पानी अल्प पर्वतमाला के सबसे स्वच्छ ग्लेशियर से आता है।

  4. आयरलैंड के प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर और 'रिवर ऑफ बेलफास्ट: ए हिस्ट्री' के लेखक डेस ओ राइली कहते हैं कि शहर के व्यापारिक केंद्र हाई स्ट्रीट में अगर आज किसी से इस नदी के बारे में पूछा जाए, तो हो सकता है कोई भी इसका जवाब ना दे पाए। आज लोग ये भूल चुके हैं कि बेलफास्ट को शहर की शक्ल में पनपने का मौका फारसेट नदी ने ही दिया था। आज जहां शहर के बड़े दौलतमंद इलाके हाई स्ट्रीट और विक्टोरिया स्ट्रीट आबाद हैं, वहां कभी फारसेट नदी का मुहाना होता था। आज यहां मशहूर सेंटजॉर्ज चर्च है, लेकिन ये चर्च भी एक प्राचीन गिरजाघर की जगह पर बनाया गया है। बताया जाता है कि 800 साल पहले श्रद्धालु यहां प्रार्थना करने आते थे। उनकी ख्वाहिश होती थी कि वो फारसेट नदी सुरक्षित तौर पर पार कर लें।चूंकि इस नदी के मुहाने पर अक्सर दलदली मिट्टी जमा रहती थी और पानी का उफान तेज रहता था। जब पानी की लहरें कमजोर पड़ती थीं, तभी इसमें नावें दौड़ाई जाती थीं।



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बेलफास्ट शहर के नीचे बहती है 170 साल पुरानी नदी, जिनेवा का संग्रहालय हैं खास

लाइफस्टाइल डेस्क. कुछ समय पहले एक व्यवसायी नीरज राठौड़ को आयरलैंड और स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा की यात्रा करने का मौका मिला। आयरलैंड की फारसेट नदी के राज जानने का अवसर और जिनेवा शहर की खूबसूरती ने उनकी यात्रा को यादगार बना दिया।आयरलैंड और स्विट्जरलैंड की अपनी इस यात्रा को उन्होंने हमारे साथ साझा किया। आइए जानते हैं उनकी इस यात्रा के बारे में...

बकौल नीरज, बेलफास्ट उत्तरी आयरलैंड की राजधानी और वहां का सबसे बड़ा शहर है। यह आयरलैंड के द्वीप पर दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इससे बड़ा शहर वहां पर डबलिन है, लागान नदी पर बसे इस शहर की आबादी 2011 में 3 लाख 13 हजार 871 थी। इंग्लैंड के लिवरपूल शहर से 1 घंटा 30 मिनट की फ्लाइट लेकर मैं बेलफास्ट पहुंचा। उत्तरी आयरलैंड में प्रोटेस्टेंट की संख्या कैथोलिक से अधिक है। मैंने उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट की सड़कों से गुजरते हुए यही महसूस किया कि यहां से हर रोज न जाने कितने लोग गुजरते हैं, लेकिन इनमें से शायद कुछ ही ये बात जानते हों कि उनके पैरों तले 170 साल पुराना एक राज छिपा है। इस जगमगाते शहर के ठीक नीचे बहती है फारसेट नदी। इस नदी के नाम पर ही इस शहर का नाम बेलफास्ट रखा गया है। बेलफास्ट की तरक्की और समृद्धि में भी इस नदी का अहम रोल है, लेकिन आज ये नदी दुनिया की नजरों से ओझल होकर खामोशी से जमीन के नीचे बहती है। यह जानकारी मुझे मिली तो मुझे भी आश्चर्य महसूस हुआ।

  1. जिनेवा समृद्धिशाली, वैभवशाली, सर्वाधिक स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहर होने के कारण पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन यहां समय−समय पर आयोजित किए जाते हैं। जिनेवा के प्रसिद्ध स्थलों में प्राकृतिक इतिहास का संग्रहालय (नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम), कला व इतिहास संग्रहालय और विशाल जिनेवा झील एवं बड़े बगीचे शामिल हैं। यहां का घड़ी संग्रहालय पूरे संसार में अपनी तरह का अकेला संग्रहालय है। पिछले 500 वर्षों में अब तक जितनी तरह की कलाई, टेबल और दीवार घड़ियां बनाई गई हैं, उन सबके सेम्पल यहां पर प्रदर्शित किए गए हैं। यहां पर एक अनोखी घड़ी भी है जो ठीक 12 बजे समय के प्रभाव को अनोखे ढंग से प्रदर्शित करती है। ऐसी घड़ी पूरी दुनिया में कही भी देखने को नहीं मिलेगी।

  2. सन् 1600 में स्कॉटलैंड और इंग्लैंड से ईसाई धर्म के प्रोटेस्टेंट को मानने वाले लोगों ने यहां आना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उन्होंने फारसेट नदी पर घाट बनाने शुरू कर दिए। हाई स्ट्रीट में आज बड़ी-बड़ी दुकानें हैं, लेकिन एक दौर था जब यहां जहाज चलते थे। ये जहाज इन घाटों पर आकर रुकते थे, जिनमें शराब, मसाले और तंबाकू लदा होता था।

  3. उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट के साथ ही मुझे स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर जाने का मौका मिला। यह फ्रांस से सटा हुआ है और फ्रांस से मात्र 10 किमी दूर है। जेनेवा झील को फ्रांसीसी भाषा में Lac Léman कहते हैं जो कि पश्चिमी यूरोप की सबसे बड़ी स्वच्छ जल की झील है। यह झील 582 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली हुई है। इसका लगभग 60% एरिया स्विट्जरलैंड के क्षेत्राधिकार और शेष 40% भाग फ्रांस के क्षेत्राधिकार में आता है। जेनेवा शहर इसके दोनों किनारों पर बसा है। इस झील का पानी अल्प पर्वतमाला के सबसे स्वच्छ ग्लेशियर से आता है।

  4. आयरलैंड के प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर और 'रिवर ऑफ बेलफास्ट: ए हिस्ट्री' के लेखक डेस ओ राइली कहते हैं कि शहर के व्यापारिक केंद्र हाई स्ट्रीट में अगर आज किसी से इस नदी के बारे में पूछा जाए, तो हो सकता है कोई भी इसका जवाब ना दे पाए। आज लोग ये भूल चुके हैं कि बेलफास्ट को शहर की शक्ल में पनपने का मौका फारसेट नदी ने ही दिया था। आज जहां शहर के बड़े दौलतमंद इलाके हाई स्ट्रीट और विक्टोरिया स्ट्रीट आबाद हैं, वहां कभी फारसेट नदी का मुहाना होता था। आज यहां मशहूर सेंटजॉर्ज चर्च है, लेकिन ये चर्च भी एक प्राचीन गिरजाघर की जगह पर बनाया गया है। बताया जाता है कि 800 साल पहले श्रद्धालु यहां प्रार्थना करने आते थे। उनकी ख्वाहिश होती थी कि वो फारसेट नदी सुरक्षित तौर पर पार कर लें।चूंकि इस नदी के मुहाने पर अक्सर दलदली मिट्टी जमा रहती थी और पानी का उफान तेज रहता था। जब पानी की लहरें कमजोर पड़ती थीं, तभी इसमें नावें दौड़ाई जाती थीं।



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World Squash Championship: जोशना प्रीक्वार्टरफाइनल में हारकर हुईं बाहर

तीन बार की विश्व चैंपियन (World Champion) इल शेरबिनी (Nour El Sherbini) से हारीं जोशना चिनप्पा (Joshna Chinappa)

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Diwali 2020: परफेक्ट हलवाई स्टाइल में घर पर ऐसे बनाएं गुजिया, ये हैं 5 टिप्‍स

Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...