नाडा (NADA) ने बताया कि उन्होंने जिस पहलवान पर बैन लगाया, उसने अंडर 23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीता था, जबकि इस बारे में उस पहलवान को पता भी नहीं था.from Latest News अन्य खेल News18 हिंदी https://ift.tt/31p96Mh
Ayurveda health tips, letest News ,hestori, health tips, benefits of fruits, carrent affairs, and
नाडा (NADA) ने बताया कि उन्होंने जिस पहलवान पर बैन लगाया, उसने अंडर 23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीता था, जबकि इस बारे में उस पहलवान को पता भी नहीं था.हेल्थ डेस्क. चीन में कोरोनावायरस से 213 मौतें हो चुकी हैं। भारत में भी मामले सामने आ रहे हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि जरूरी नहीं कोरोनावायरस से संक्रमित इंसान में लक्षण तुरंत दिखने शुरु हों। लेकिन इनसे भी संक्रमण फैल सकता है। जर्मनी में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, जर्मनी के 33 वर्षीय बिजनेसमैन में 24 जनवरी को गले में सूजन और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हुई है, ऐसा मामला चीनी महिला से एक मीटिंग के बाद मामला सामने आया। रिसर्च जर्मनी के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल एलएमयू म्यूनिख में हुई हैं।
कब और कैसे पहुंचा वायरस
कब अलर्ट हो जाएं
इसके लक्षण आमतौर पर सर्दी जुकाम जैसे दिखते हैं। कफ, गले में सूजन, सिरदर्द, कई दिनों तक तेज बुखार और सांस लेने में दिक्कत हो तो यह कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए अलर्ट होने की जरूरत है और विशेषज्ञ से सलाह लें।
कैसे फैलता है यह वायरस
जानवरों के संपर्क में आने वाले इंसानों को यह वायरस संक्रमित करता है। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, यह जुकाम, छींक और हाथ मिलाने से भी फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित मरीज के संपर्क में आने पर इसका खतरा ज्यादा रहता है।
संक्रमण होने पर क्या करें
अब तक कोरोनावायरस का कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है। ज्यादातर मामलों में लक्षण समझते-समझते काफी देर हो जाती है। फिलहाल ऐसे मामलों में दर्द और बुखार की दवाएं दी जाती हैं। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, गुनगुने पानी से स्नान गले में सूजन और जुकाम में राहत देता है। संक्रमण होने पर ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ और पानी लें। नींद भरपूर लें।
चीज पिज्जा ऑमलेट रेसिपी (Cheese Pizza Omelette): आइए जानते हैं कि कैसे घर पर बनाएं चीज पिज्जा ऑमलेट (Cheese Pizza Omelette).हेल्थ डेस्क. तिरुवनंतपुरम में श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस ने हल्दी से कैंसर के इलाज का अमेरिकी पेटेंट हासिल किया है। इंस्टीट्यूट का दावा है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व से कैंसर का इलाज किया जा सकता है। इंस्टीट्यूट के मुताबिक, कैंसर के ट्यूमर को शरीर से हटाने बाद हल्दी से इलाज किया जाएगा ताकि ट्यूमर खत्म करें और शरीर में फैलने से रोका जा सके।
करक्यूमिन ही क्यों
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. लिसी कृष्णन के मुताबिक, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन आसानी से शरीर में अवशोषित होता है और कैंसर से लड़ता है। कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए ट्यूमर वाले हिस्से में सीधे करक्यूमिन रिलीज किया जाएगा। यह सामान्य कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचाकर सीधे सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करेगा। कई रिसर्च में भी यह साबित हो चुका है कि यह कैंसर कोशिकाओं को खत्म करता है।
ऐसे होगा इलाज
संस्थान की डायरेक्टर आशा किशोरी के मुताबिक, शरीर में करक्यूमिन एक इम्प्लांट 'वेफर' के जरिए पहुंचाया जाएगा। वेफर में करक्यूमिन और एल्ब्यूमिन दोनों तत्व होंगे। सर्जरी से ट्यूमर हटाने के बाद इसे कैंसर वाले हिस्से में वेफर इम्प्लांट किया जाएगा। वेफर में मौजूद एल्ब्यूमिन तत्व कैंसर कोशिकाओं को इकट्ठा करेगा और करक्यूमिन इन कोशिकाओं में जाकर उसे खत्म करेगा।
यह शोध इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किया गया है। पेटेंट मिलने के बाद अब इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू होगा और जल्द ही यह तकनीक कैँसर के मरीज के उपलबध होगी।
हेल्थ डेस्क. केंद्र सरकार ने चीन से भारत आने वाले यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के मुताबिक, सर्दी, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत अलर्ट हो जाएं। ये कोरोनावायरस के सबसे आम लक्षण हैं। चीन से लौटने के 28 दिन के अंदर बुखार, खांसी या सांस लेने में कठिनाई होती है तो हेल्पलाइन नम्बर 91-11-23978046 पर संपर्क करें। तत्काल मास्क पहनें, घबराएं नहीं और डॉक्टरी सलाह लें।
चीन से लौटे हैं तो ये ध्यान रखें
अगर आप पिछले 14 दिन के अंदर चीन गए थे तो कोरोनावायरस के संक्रमण की आशंका है इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-
कब-कब धोएं हाथ
कहां मिलेगी मदद
लक्षण महसूस होने या किसी इंसान में दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें। कई जगह हेल्प सेंटर शुरू किए गए हैं। यहां पहुंचकर इलाज कराया जा सकता है। लक्षण दिखने पर एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिस, लैंड चेक पोस्ट, स्थानीय स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।
मूली का पराठा रेसिपी (Mooli Paratha Recipe): आइए जानते हैं मूली का पराठा बनाने की रेसिपी....
स्पोर्ट्स राउंड अप (Sports Roundup) में जानिए क्रिकेट, फुटबॉल से लेकर शतरंज की अहम खबरें
हेलिकॉप्टर हादसे में कोबी ब्रायंट (Kobe Bryant) और उनकी बेटी गियाना (Giana) सहित कुल नौ लोग सवार थे.
शख्स का दावा है कि उसकी ये कब्र (tombstone) किसी और ने नहीं बल्कि उसकी पूर्व पत्नी ने बनवाई है. ये वाकया स्कॉटलैंड (Scotland) का है. एलन हैटल नाम के जिस जिंदा शख्स की कब्र बनवाई गई है, उसकी उम्र 75 साल है.लाइफस्टाइल डेस्क. आज के समय में, आप में से हर एक के पास स्मार्टफोन है तो घर बैठे एक्स्ट्रा इनकम के लिए अपने फोन का उपयोग क्यों न करें? आप घर बैठे स्मार्टफोन एप्स से सामान रीसेल कर के पैसे कमा सकती हैं। ऐसी कई रिसेलिंग ऐप्स उपलब्ध हैं। ये ऐप्स टियर टू और टियर थ्री शहरों की महिलाओं, खासकर गृहणियों और माताओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। रूमानी सैकिया फुकन आपको ऐसी ही कुछ रिसेलिंग ऐप्स के बारे में बता रही हैं जो गूगल प्ले स्टोर पर आसानी से मिल सकती हैं। इनको डाउनलोड कर के आप घर बैठे एक्स्ट्रा कमा सकती हैं।
Meesho
ये ऐप 1 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसका 5 में से 4.5 का रिव्यू स्कोर है। यह भारत में शीर्ष रीसेलिंग ऐप में से एक है, जिसे एंड्रॉइड फोन पर डाउनलोड किया जा सकता है। इस ऐप की खासियत यह है कि काम शुरू करने के लिए बहुत अधिक औपचारिकताएं नहीं हैं, आप अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकती हैं। साथ ही इजी रिटर्न पॉलिसी और कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प भी है। इस ऐप पर मिलने वाले सामान ज्यादा महंगे भी नहीं हैं इसलिए इन्हें रीसेल करना आसान होता है। ये ज्यादातर फैशन और घरेलू उत्पादों के लिए लोकप्रिय है।
GlowRoad
इस ऐप को भी एक करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस ऐप के जरिए गृहिणियां, कॉलेज के छात्र, बुटीक ओनर्स आदि साड़ी, सूट, कुर्ते, शर्ट्स, टॉप्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि रीसेल कर के काफी अच्छे पैसे कमा रहे हैं। ग्लोरोड में होलसेल रेट पर 300 से अधिक श्रेणियों में सामान उलपब्ध है। इसमें 60 लाख से अधिक लोगों का बड़ा नेटवर्क है। इसका उपयोग करना आसान है, आसान रिटर्न पॉलिसी है और चीजें समय पर डिलीवर हो जाती हैं।
ZyMi
ये भारत की एक और सबसे बढ़िया रीसेलिंग ऐप है। आपको इस ऐप का उपयोग करके मुफ्त में अपना ऑनलाइन स्टोर बनाने का अवसर मिलता है। यहां आप आसानी से लगभग 2 मिनट में अपना ऑनलाइन स्टोर बना सकती हैं। आप यहां विभिन्न ब्रांडों के प्रोडक्ट्स बेच कर कमीशन कमा सकती हैं। इस ऐप में कैश ऑन डिलीवरी के साथ-साथ इजी पेमेंट के विकल्प भी हैं।
Shop101
इस ऐप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके इस्तेमाल से आप भी होम बेस्ड आंत्रप्रेन्योर बन सकती हैं। यह ऑनलाइन व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रोडक्ट बेचने के लिए देश के सर्वश्रेष्ठ ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों में से एक है। इस ऐप में ऑनलाइन स्टोर बनाने के लिए कुछ इंवेस्टमेंट नहीं लगता है और 2 मिनट से भी कम समय में ऑनलाइन स्टोर बनाया जा सकता है। यहां महिलाओं के लिए कई तरह के प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं इसलिए ये ऐप महिलाओं के बीच लोकप्रिय है।
ऐप्स को ऐसे करें इस्तेमाल
लाइफस्टाइल डेस्क. आज के समय में, आप में से हर एक के पास स्मार्टफोन है तो घर बैठे एक्स्ट्रा इनकम के लिए अपने फोन का उपयोग क्यों न करें? आप घर बैठे स्मार्टफोन एप्स से सामान रीसेल कर के पैसे कमा सकती हैं। ऐसी कई रिसेलिंग ऐप्स उपलब्ध हैं। ये ऐप्स टियर टू और टियर थ्री शहरों की महिलाओं, खासकर गृहणियों और माताओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। रूमानी सैकिया फुकन आपको ऐसी ही कुछ रिसेलिंग ऐप्स के बारे में बता रही हैं जो गूगल प्ले स्टोर पर आसानी से मिल सकती हैं। इनको डाउनलोड कर के आप घर बैठे एक्स्ट्रा कमा सकती हैं।
Meesho
ये ऐप 1 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसका 5 में से 4.5 का रिव्यू स्कोर है। यह भारत में शीर्ष रीसेलिंग ऐप में से एक है, जिसे एंड्रॉइड फोन पर डाउनलोड किया जा सकता है। इस ऐप की खासियत यह है कि काम शुरू करने के लिए बहुत अधिक औपचारिकताएं नहीं हैं, आप अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकती हैं। साथ ही इजी रिटर्न पॉलिसी और कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प भी है। इस ऐप पर मिलने वाले सामान ज्यादा महंगे भी नहीं हैं इसलिए इन्हें रीसेल करना आसान होता है। ये ज्यादातर फैशन और घरेलू उत्पादों के लिए लोकप्रिय है।
GlowRoad
इस ऐप को भी एक करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस ऐप के जरिए गृहिणियां, कॉलेज के छात्र, बुटीक ओनर्स आदि साड़ी, सूट, कुर्ते, शर्ट्स, टॉप्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि रीसेल कर के काफी अच्छे पैसे कमा रहे हैं। ग्लोरोड में होलसेल रेट पर 300 से अधिक श्रेणियों में सामान उलपब्ध है। इसमें 60 लाख से अधिक लोगों का बड़ा नेटवर्क है। इसका उपयोग करना आसान है, आसान रिटर्न पॉलिसी है और चीजें समय पर डिलीवर हो जाती हैं।
ZyMi
ये भारत की एक और सबसे बढ़िया रीसेलिंग ऐप है। आपको इस ऐप का उपयोग करके मुफ्त में अपना ऑनलाइन स्टोर बनाने का अवसर मिलता है। यहां आप आसानी से लगभग 2 मिनट में अपना ऑनलाइन स्टोर बना सकती हैं। आप यहां विभिन्न ब्रांडों के प्रोडक्ट्स बेच कर कमीशन कमा सकती हैं। इस ऐप में कैश ऑन डिलीवरी के साथ-साथ इजी पेमेंट के विकल्प भी हैं।
Shop101
इस ऐप को 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसके इस्तेमाल से आप भी होम बेस्ड आंत्रप्रेन्योर बन सकती हैं। यह ऑनलाइन व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रोडक्ट बेचने के लिए देश के सर्वश्रेष्ठ ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों में से एक है। इस ऐप में ऑनलाइन स्टोर बनाने के लिए कुछ इंवेस्टमेंट नहीं लगता है और 2 मिनट से भी कम समय में ऑनलाइन स्टोर बनाया जा सकता है। यहां महिलाओं के लिए कई तरह के प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं इसलिए ये ऐप महिलाओं के बीच लोकप्रिय है।
ऐप्स को ऐसे करें इस्तेमाल
ओलिंपिक पदक विजेता सायना (Saina Nehwal) के बुधवार को भाजपा में शामिल हुईं
1952 के हेलसिंकी ओलिंपिक में केडी जाधव (KD Jadhav) ने फ़्री स्टाइल कुश्ती में तीसरा स्थान हासिल किया.
नीरज (Neeraj Chopra) ने एसीएनई लीग में 85.00 मीटर के ओलिंपिक मार्क से ज्यादा लंबा थ्रो फेंका और ओलिंपिक का टिकट हासिल किया.
बैंडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल (Saina Nehwal) बुधवार को बीजेपी से जुड़ीं हैंदांत हमारे शरीर का एक अविभाज्य हिस्सा है। हमारी मुस्कराहट को खूबसूरत बनाते हैं हमारे दाँत। हमारे पाचनतंत्र की क्रिया दांतो से ही तो शुरू होती है। इसलिए हमारे दांतो का मजबूत और चमकदार होना बहुत जरूरी है। इसी मज़बूती के साथ विठोबा आयुर्वेदिक दन्त मंजन और विठोबा आयुर्वेदिक टूथपेस्ट पिछले बीस सालों से हमारे दांतों की रक्षा करते आ रहें हैं। तो चलिए हम विठोबा के इस सफर को विस्तार में जानने की कोशिश करते है।
आयुर्वेद हमारे देश की एक ऐसी देन हैं जिसका उपयोग और उपभोग हमारे पूर्वज प्राचीन काल से करते आ रहे हैं। आज २१वी सदी में आयुर्वेद का महत्व इतना बढ़ गया है कि देश विदेश के लोग इसे अपनाने लगे हैं। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए बीस साल पहले सन २००१ में शेंडे परिवार ने विठोबा आयुर्वेदिक दन्त मंजन का निर्माण किया। आयुर्वेदिक जड़ीबूटियां मिश्रित इस दन्त मंजन को घर घर में इस्तेमाल किया जाने लगा। ग्रामीण इलाकों में जहाँ ग्रामवासी अपनी परंपराओं का पालन बड़े स्तरों पर करते है, विठोबा दंतमंजन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था। विठोबा दंत मंजन के इस सफलता ने ही विठोबा के अगले पड़ाव को विठोबा आयुर्वेदिक टूथपेस्ट के रूप में पार किया।
जहाँ एक तरफ रासायनिक प्रक्रियाओं से बने टूथपेस्ट बड़े पैमाने पर बेचे जा रहे थे वही दूसरी तरफ विठोबा आयुर्वेदिक टूथपेस्ट जड़ से जुड़ते हुए अपने उपभोक्ताओं के दांतो की रक्षा कर रहे थे। आयुर्वेद के इन दोनों उत्पादों को देशभर के बड़े राज्य जैसे महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, और ऐसे कई छोटे बड़े इलाकों में प्यार मिलने लगा। ग्रामीण इलाकों में विठोबा ने एक ऊंचा स्थान हासिल किया है।
बात करें अगर दांतो के स्वास्थ्य की तो मसूड़ों और दांतो की समस्या आज के ज़माने में आम बात है। ध्यान न देने पर ये समस्याएं मुँह से जुडी कई बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। इन सबके बावजूद लोग दांतों की समस्याओं को नज़रअंदाज़ करते हुए दिखते हैं। आज के इस भागदौड़ वाले जीवन में युवा वर्ग अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी बेफिक्र हो गए हैं, और यहीं बात दांतो पर भी लागू होता है। आज अगर कम खर्च में अपने दांतो का ख्याल करेंगे तो भविष्य में दांतो के इलाज पर होनेवाले खर्च को टाल सकते हैं। विठोबा आयुर्वेदिक दंतमंजन और टूथपेस्ट आपके दांतो को भविष्य में होनेवाले इसी फ़िज़ूलखर्ची को पूरी तरह टाल सकता है। आज विठोबा के सारे उत्पादन amazon, flipkart, snapdeal व बिग बास्केट पर सस्ते दामों में उपलब्ध है।
पिछले बीस सालों से निरंतर प्रगति करते हुए विठोबा इंडस्ट्रीज़ आज देश का एक जाना माना ब्रैंड बन चुका है। आज टेलीविज़न विज्ञापन, मार्केटिंग के क्षेत्र में पदार्पण करते हुए मनोज बाजपाई जैसे बड़े अभिनेता विठोबा के ब्रैंड एम्बैसेडर हैं। उनकी छवि एक 'मिटटी से निकले' अभिनेता की है जो विठोबा से बिलकुल मिलती है। इसी वजह से उनका 'जड़ से जुडो' संदेश बड़ा मशहूर हो रहा है। वो दिन दूर नहीं होगा जब हर घर में एक विठोबा होगा और दांतो व मसूड़ों से जुड़ी हर परेशानी के लिए अपने देश का ब्रैंड विठोबा इस्तेमाल किया जायेगा।
ब्रैंड विठोबा के प्रोडक्टस के लिए क्लिक करें।
हेल्थ डेस्क. आयुष मंत्रालय ने बुधवार को कोरोनावायरस के संक्रमण से बचाव के लिए होम्योपैथी और यूनानी दवाओं के नाम जारी किए। मंगलवार को मंत्रालय और सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी की संयुक्त बैठक के बाद दवाओं के नाम तय किए। मंत्रालय से जारी रिलीज में होम्योपैथी दवा आर्सेनिक एल्बम-30 खाली पेट लेने की सलाह दी गई है। बचाव के तौर पर यूनानी दवाओं का काढ़ा भी पीने का जिक्र किया गया है। रिलीज जारी होने के बाद सीपीएम ने सरकार की एडवाइजरी में शामिल दवा आर्सेनियम एल्बम-30 पर सवाल उठाते हुए इसे पागलपन करार दिया है। इस दवा की सच्चाई क्या है और यह कितनी जरूरी हैं, इससे जानने के लिए भास्कर ने विशेषज्ञों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट
मंत्रालय ने एडवायजरी में क्या सलाह दी
सीपीएम के सवालों की वजह
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने ट्विटर पर एडवाजयरी को ट्वीट किया है। जिसे सीपीएम ने शेयर करते हुए लिखा, सरकार की जगह पीआईबी ने एडवाजरी को ट्वीट किया है जिसमें कोरोनावायरस से बचने के लिए होम्योपैथी दवा आर्सेनिक एल्बम-30 लेने की सलाह दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन साफतौर पर कह चुका है कि इस वायरस से बचने के लिए कोई प्रभावी दवा अब तक ढूंढी नहीं जा सकी है। इसलिए इस वायरस से बचाव के लिए डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन को फॉलो करें।
होम्योपैथी एक्सपर्ट ने कहा, दवा एक्सपर्ट की सलाह से ही लें
इस बारे में भास्कर ने होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. नमिता राजवंशी से बात की। डॉ. नमिता के मुताबिक, आर्सेनिक एल्बम-30 दवा वायरल इंफेक्शन के मरीजों को दी जाती है। संक्रमण से जुड़े लक्षण जैसे तेज बुखार, ज्यादा थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत होने पर इसे देते हैं। आमतौर पर संक्रमण के लक्षण एक से दूसरे मरीज में अलग-अलग दिख सकते हैं इसलिए दवा डॉक्टरी सलाह के बाद ही लें।
डब्ल्यूएचओ ने ट्वीट कर दूर किया भ्रम
कोरोना वायरस की दवाओं को लेकर भ्रम की स्थिति पर डब्ल्यूएचओ ने ट्वीट किया है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कोरोनावायरस के लिए अब तक कोई एंटीवायरल थैरेपी नहीं खोजी जा सकी है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम लगातार विश्लेषण कर रही है और बचाव के तौर पर क्लीनिक प्रोटोकॉल विकसित कर रही है।
लाइफस्टाइल डेस्क. खूबसूरत त्वचा की चाह सभी को होती है। फिलहाल मौसम सर्द है और अब बदलेगा, तो भी त्वचा को इसका नुक़सान झेलना पड़ेगा। इस समस्या को देखते हुए कुछ ऐसे घरेलू फेस पैक्स यहां दिए जा रहे हैं, जिन्हें चंद मिनटों में तैयार किया जा सकता है। ये हर तरह की त्वचा के लिए कारगर हैं। पुष्पलता श्रीवास्तव बता रही हैं इसे कैसे तैयार करें...
लाइफस्टाइल डेस्क. खूबसूरत त्वचा की चाह सभी को होती है। फिलहाल मौसम सर्द है और अब बदलेगा, तो भी त्वचा को इसका नुक़सान झेलना पड़ेगा। इस समस्या को देखते हुए कुछ ऐसे घरेलू फेस पैक्स यहां दिए जा रहे हैं, जिन्हें चंद मिनटों में तैयार किया जा सकता है। ये हर तरह की त्वचा के लिए कारगर हैं। पुष्पलता श्रीवास्तव बता रही हैं इसे कैसे तैयार करें...
लाइफस्टाइल डेस्क. वॉट्सऐप पर दो लाइनें पढ़ीं-घर की बेटियों, बहनों, ननदों को गर्मियों की छुट्टियों में ससम्मान उनके घर बुलाएं।
लाइनें पढ़कर मन में सवालों की झड़ी लग गई। ऐसा क्यूं लिखना पड़ा कि बेटियों को आदर से आमंत्रित करें? ऐसी क्या परिस्थितियां आ गईं कि घर की बेटियों को उनके ही मायके में बुलाना पड़ रहा है? इस ओर विचार करने पर कुछ ख़ास और ध्यान देने योग्य बातें सामने आईं, जिन पर विचार करना ज़रूरी है।
सुविधा की मांग
कुछ महिलाएं अपने बच्चों की कोचिंग या गर्मियों में लगने वाली समर क्लासेस के कारण नहीं जा पातीं और दूसरा कि आजकल के बच्चे बहुत ही सुविधाभोगी हो गए हैं। हर जगह उन्हें घर जैसा ही माहौल (पंखा, कूलर, एसी, वीडियो गेम, मोबाइल) चाहिए। फ़रमाइश करते ही फास्ट फूड या मनपसंद की चीजेंचाहिए। और अगर फ़रमाइश पूरी न हो, तो ये घर वापसी की ज़िद पकड़ लेते हैं। ऐसे में घरवाले भी परेशान होने लगते हैं।
साझा करना भूल गए हैं
एकल या छोटा परिवार होने की वजह से साझा करने की प्रवृत्ति नहीं होती। इस कारण परेशानी होती है। इसके साथ ही आजकल के बच्चे सबके साथ सामंजस्य बिठा पाने में असमर्थ होते हैं। उन्हें प्राइवेसी, स्पेस चाहिए होता है। मांएं भी इसमें उनका साथ देती हैं। उन्हें लगता है कि मायके में उन्हें अलग कमरा दिया जाए, जिसमें वे बच्चों के साथ ठहर सकें। इस कारण मायके वाले भी उनके इस तरह के व्यवहार से परेशान हो जाते हैं।
फ़रमाइशों की झड़ी
ये बात थोड़ी अटपटी लगेगी परंतु सच्चाई है। पता नहीं ससुराल की आदर्श बहुएं मायके जाकर नकचढ़ी बेटियां क्यों बन जाती हैं। जिस घर में (ससुराल) जीवनभर रहना है वहां के लिए, वहां के लोगों के लिए परायापन महसूस करती हैं या करवा देती हैं। जो बहू ससुराल में ख़ुशी से काम करती है वही बहू मायके जाकर कोई भी काम नहीं करना चाहती। दिनभर आराम करने के साथ ही बैठे-बैठे फ़रमाइशें करना उन्हें उनका हक़ लगता है। ये बड़ी विडंबना है।
महत्व का विचार
मायके में अगर भाभी या उस घर की बहू है तो उसका महत्व बेटी के आते ही कम हो जाता है। ननद के आते ही भाभी के ऊपर काम का बोझ भी बढ़ जाता है। हम किसी परिवार की बहू हैं तो क्या मायके जाकर थोड़ा-सा बहू जैसा बनकर नहीं रह सकते।
ख़र्चों का बोझ
अब वो समय नहीं रह गया कि छुटि्टयां होते ही मायके जाया जाए। ऐसा वातावरण हम ख़ुद ही तैयार करते हैं। हमारी आराम की आदत, अनाप-शनाप फ़रमाइशें, मायके का बजट बिगाड़ देती हैं। अपनी भाभी से हम पूरी अपेक्षा रखते हैं परंतु अपनी ननद की वही सारी बातें हमें अच्छी नहीं लगतीं। दोनों पहलुओं पर ग़ौर करने से पता चलता है कि हम सामने वाले को तो बदलना चाहते हैं लेकिन ख़ुद नहीं बदलना चाहते। बहुत-सी महिलाएं छोटी-छोटी बातों पर मुंह फुला लेती हैं, नाराज़ हो जाती हैं फिर मान-मनुहार, माहौल को सामान्य करने में ही समय बीत जाता है।
जो देंगे वही पाएंगे
लाइफस्टाइल डेस्क. वॉट्सऐप पर दो लाइनें पढ़ीं-घर की बेटियों, बहनों, ननदों को गर्मियों की छुट्टियों में ससम्मान उनके घर बुलाएं।
लाइनें पढ़कर मन में सवालों की झड़ी लग गई। ऐसा क्यूं लिखना पड़ा कि बेटियों को आदर से आमंत्रित करें? ऐसी क्या परिस्थितियां आ गईं कि घर की बेटियों को उनके ही मायके में बुलाना पड़ रहा है? इस ओर विचार करने पर कुछ ख़ास और ध्यान देने योग्य बातें सामने आईं, जिन पर विचार करना ज़रूरी है।
सुविधा की मांग
कुछ महिलाएं अपने बच्चों की कोचिंग या गर्मियों में लगने वाली समर क्लासेस के कारण नहीं जा पातीं और दूसरा कि आजकल के बच्चे बहुत ही सुविधाभोगी हो गए हैं। हर जगह उन्हें घर जैसा ही माहौल (पंखा, कूलर, एसी, वीडियो गेम, मोबाइल) चाहिए। फ़रमाइश करते ही फास्ट फूड या मनपसंद की चीजेंचाहिए। और अगर फ़रमाइश पूरी न हो, तो ये घर वापसी की ज़िद पकड़ लेते हैं। ऐसे में घरवाले भी परेशान होने लगते हैं।
साझा करना भूल गए हैं
एकल या छोटा परिवार होने की वजह से साझा करने की प्रवृत्ति नहीं होती। इस कारण परेशानी होती है। इसके साथ ही आजकल के बच्चे सबके साथ सामंजस्य बिठा पाने में असमर्थ होते हैं। उन्हें प्राइवेसी, स्पेस चाहिए होता है। मांएं भी इसमें उनका साथ देती हैं। उन्हें लगता है कि मायके में उन्हें अलग कमरा दिया जाए, जिसमें वे बच्चों के साथ ठहर सकें। इस कारण मायके वाले भी उनके इस तरह के व्यवहार से परेशान हो जाते हैं।
फ़रमाइशों की झड़ी
ये बात थोड़ी अटपटी लगेगी परंतु सच्चाई है। पता नहीं ससुराल की आदर्श बहुएं मायके जाकर नकचढ़ी बेटियां क्यों बन जाती हैं। जिस घर में (ससुराल) जीवनभर रहना है वहां के लिए, वहां के लोगों के लिए परायापन महसूस करती हैं या करवा देती हैं। जो बहू ससुराल में ख़ुशी से काम करती है वही बहू मायके जाकर कोई भी काम नहीं करना चाहती। दिनभर आराम करने के साथ ही बैठे-बैठे फ़रमाइशें करना उन्हें उनका हक़ लगता है। ये बड़ी विडंबना है।
महत्व का विचार
मायके में अगर भाभी या उस घर की बहू है तो उसका महत्व बेटी के आते ही कम हो जाता है। ननद के आते ही भाभी के ऊपर काम का बोझ भी बढ़ जाता है। हम किसी परिवार की बहू हैं तो क्या मायके जाकर थोड़ा-सा बहू जैसा बनकर नहीं रह सकते।
ख़र्चों का बोझ
अब वो समय नहीं रह गया कि छुटि्टयां होते ही मायके जाया जाए। ऐसा वातावरण हम ख़ुद ही तैयार करते हैं। हमारी आराम की आदत, अनाप-शनाप फ़रमाइशें, मायके का बजट बिगाड़ देती हैं। अपनी भाभी से हम पूरी अपेक्षा रखते हैं परंतु अपनी ननद की वही सारी बातें हमें अच्छी नहीं लगतीं। दोनों पहलुओं पर ग़ौर करने से पता चलता है कि हम सामने वाले को तो बदलना चाहते हैं लेकिन ख़ुद नहीं बदलना चाहते। बहुत-सी महिलाएं छोटी-छोटी बातों पर मुंह फुला लेती हैं, नाराज़ हो जाती हैं फिर मान-मनुहार, माहौल को सामान्य करने में ही समय बीत जाता है।
जो देंगे वही पाएंगे
लाइफस्टाइल डेस्क.अभी तक आप खीरे सलाद के रूप में खाते आए होंगे। इसे सिर्फ़ सलाद में ही नहीं बल्कि कई रूपों में खा सकते हैं। इसका नाश्ता बना सकते हैं या मुख्य भोजन में भी परोस सकते हैं। ओम प्रकाश गुप्ता बता रहे हैंइससे बनी कुछ दिलचस्प रेसिपीज़...
खीरा बास्केट
क्या चाहिए-खीरा- 1, उबला आलू- 1, अनार के दाने- 2 बड़े चम्मच, नींबू का रस- 1 बड़ा चम्मच, नमक- स्वादानुसार, काली मिर्च- छोटा चम्मच।
ऐसे बनाएं-खीरा छीलकर तीन गोल टुकड़ों में काट लें। गूदा निकालकर खोखला कर लें। आलू छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। उनमें खीरे का गूदा, अनार के दाने, नमक, काली मिर्च और नींबू का रस अच्छी तरह से मिलाएं। तैयार सामग्री खीरे के खोलों में भरें।
खीरा अप्पे
क्या चाहिए-खीरा- 2 कप छीलकर कद्दूकस किया हुआ, सूजी- 1 कप, दही- कप, हरा धनिया- 2 बड़े चम्मच बारीक कटा हुआ, टमाटर- 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हुआ, हरी मिर्च- 1 छोटा चम्मच बारीक कटी हुई, अदरक- 1 छोटा चम्मच बारीक कटा हुआ, चाट मसाला- छोटा चम्मच, लाल मिर्च पाउडर- छोटा चम्मच, बेकिंग सोडा- छोटा चम्मच, नमक- स्वादानुसार, तेल- 1 बड़ा चम्मच।
ऐसे बनाएं-कद्दूकस किए हुए खीरे का पानी निथारें। एक बोल में कद्दूकस खीरा, सूजी और दही मिलाएं। तेल और बेकिंग सोडा छोड़कर बाकी सारी सामग्री इसमें डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। मिश्रण 15 मिनट के लिए ढककर रख दें। अब अप्पे पैन गर्म करके इसके सभी खानो में 2-2 बूंद तेल डालें। खीरे के मिश्रण में बेकिंग सोडा मिलाकर इसका 1-1 बड़ा चम्मच खानों में डालें। इसे ढककर 3-4 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। प्रत्येक अप्पे पर 2-2 बूंद तेल टपकाकर पलटें। 2-3 मिनट तक और पकाएं। दोनों तरफ़ से सुनहरा होने पर निकाल लें और नारियल चटनी के साथ गरमा-गरम परोसें।
खीरा करी
क्या चाहिए-खीरा- 1 (बड़े आकार का), प्याज़ का पेस्ट- 1 बड़ा चम्मच, टमाटर प्यूरी- 2 बड़े चम्मच, हरी मिर्च- 1 छोटा चम्मच बारीक कटी हुई, हरा धनिया- 1 छोटा चम्मच बारीक कटा हुआ, अदरक- 1 छोटा चम्मच बारीक कटा हुआ, अजवायन- छोटा चम्मच, हल्दी पाउडर- छोटा चम्मच, जीरा- छोटा चम्मच, हींग-चुटकी भर, धनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मच, गरम मसाला- छोटा चम्मच, लाल मिर्च पाउडर- छोटा चम्मच, नमक- स्वादानुसार, तेल- 2 बड़े चम्मच।
ऐसे बनाएं-खीरा छीलें और लंबाई में चार फांकें करके टुकड़ों में काट लें। कड़ाही में तेल गर्म करके जीरा, हींग और अजवायन डालकर भूनें। कटी हरी मिर्च, कटा अदरक, प्याज़ का पेस्ट और टमाटर प्यूरी मिलाकर भूनें। जब मसाला तेल छोड़ दे तो खीरे के टुकड़े और एक गिलास पानी डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। इसे ढककर 4-5 मिनट या खीरा मुलायम होने तक पकने दें। हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक मिलाकर दो मिनट और पकाएं। फिर गैस बंद कर दें। गरम मसाला मिलाएं और कटा हुआ हरा धनिया ऊपर से डालकर परोसें।
कोहनी की चोट के चलते नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने करीब डेढ़ साल बाद मैदान पर वापसी की है
सूजी के अप्पम रेसिपी (Appam Recipe, Instant Rava Appam): आइए जानते हैं सूजी अप्पम (Instant Rava Appam) बनाने की विधि...हेल्थ डेस्क. शोधकर्ताओं ने ऐसा ब्लड टेस्ट विकसित किया है जो टीबी होने के 3-6 महीने पहले ही इंसान को अलर्ट कर देगा। इससे इलाज आसान होगा और जिंदगियां बचाई जा सकेंगी। लेंसेट रेस्पिरेट्री मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, टेस्ट के जरिए रक्त में मौजूद जीन में खास तरह के बदलाव को समझ कर बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही भविष्यवाणी की जा सकेगी। रिसर्च टीम के प्रमुख भारतीय मूल के ऋषि गुप्ता ने यह टेस्ट विकसित किया है। शोध ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में किया गया है।
ऐसे समझें कैसे समय से पहले पता चलेगा रोग
मुख्य शोधकर्ता ऋषि गुप्ता के मुताबिक, हमने टीबी होने की शुरुआत में दिखने वाले बदलाव को पहनाया गया है। जो समय से पहले बीमारी का पता लगाने में मदद करते हैं। जीन एक्सप्रेशन सिग्नेचर का इस्तेमाल दूसरी बीमारी को समझने में भी कर रहे हैं ताकि इलाज आसानी से हो सके। कोशिकाओं में जीन के एक या अनेक समूह होते हैं जो खास तरह के होते हैं। इन्हें जीन एक्सप्रेशन सिग्नेचर कहते हैं। जब इनमें कोई बदलाव आता है तो ये बीमारी की ओर इशारा करते हैं।
पहली बार संक्रमित बीमारी पर हुआ प्रयोग
शोधकर्ता के अनुसार, वर्तमान में जीन एक्सप्रेशन का इस्तेमाल कैंसर को नियंत्रित करने में भी किया जा रहा है लेकिन कभी टीबी जैसी संक्रमण से फैलने वाली बीमारियों में नहीं किया गया है। इसके लिए टीबी के मरीजों के रक्त में मौजूद जीन सिग्नेचर का विश्लेषण किया गया। 1100 ब्लड सेंपल लिए गए जिसमें 17 मरीजों में टीबी के जीन एक्सप्रेशन सिग्नेचर देखे गए। इसमें साउथ अफ्रीका, इथियोपिया, द गैंबिया और ब्रिटेन के मरीज शामिल थे।
शोधकर्ताओं ने स्वस्थ इंसान और टीबी के मरीजों के ब्लड का कई महीनों विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया जीन में आठ तरह के बदलाव भविष्य में टीबी की बीमारी होने की ओर इशारा करता है। इसकी भविष्यवाणी 3-6 महीने पहले ही की जा सकती है।
2018 में टीबी से 15 लाख मौत
टीबी की वजह मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम का की बैक्टीरिया का संक्रमण है। जिसका ज्यादातर असर फेफड़ों पर होता है। टीबी से होने वाला संक्रमण एक इंसान से दूसरे में हवा के जरिए भी फैलता है। जब टीबी का मरीज छींकता है या थूकता है और किटाणु हवा के जरिए स्वस्थ मरीज में पहुंचकर उसे भी संक्रमित करते हैं। दुनियाभर में हो रही हैं मौतों की 10 वजहों में टीबी शामिल है। 2018 में इससे 15 लाख लोगों की मौत हुई थी। शोधकर्ता मेहडेड नॉर्सडेघी के मुताबिक, दुनिया की एक चौथाई आबादी टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित है।
राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) के अनुसार कोबी ब्रायंट (Kobe Bryant) के पायलट ने हवाई यातायात नियंत्रकों को अपने आखिरी रेडियो संदेश में बताया था कि वह बादलों की एक मोटी परत से बचने के लिए विमान को और ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं
बसंत पंचमी भोग रेसिपी (Basant Panchami Bhog Recipe, Recipe for Basant Panchami): क्यों न इस बसंत पंचमी आप मां सरस्वती को अपने हाथ से बनायी चावल की केसरिया खीर का भोग लगाएं...जयपुर (सुरेन्द्र स्वामी).घबराहट, बैचेनी, जंक फूड का सेवन, बदलती जीवन शैली, मानसिक तनाव, तंबाकू का सेवन और खानपान के चलते हाइपरटेंशन और डायबिटीज के शिकार लोगों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में पिछले 9 माह में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के 10 लाख मरीज सामने आए हैं। इनमें साढ़े 5 लाख तो अकेले हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के हैं। डायबिटीज में टॉप-10 जिले देखें तो अजमेर पहले नंबर पर है। सिरोही दूसरे व सीकर तीसरे नंबर पर है। इसी तरह से हाइपरटेंशन में राजसमंद पहले, बीकानेर दूसरे व डूंगरपुर तीसरे नंबर पर है।
सबसे चौंकाने वाली जानकारी ये है कि दोनों में ही पढ़ाई का दवाब और डिप्रेशन के चलते युवा सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। प्रदेश में 80 हजार एेसे मरीज भी मिले, जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज दोनों बीमारी थी। यह खुलासा भास्कर की ओर जयपुर समेत प्रदेश के 33 जिलों में सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या के आधार पर हुआ है।
यह खतरे की घंटी इसलिए
हाइपरटेंशन से रक्त वाहिकाएं सख्त, मोटी और संकरी होने से हृदय में खून का संचार नहीं होता। एंजाइना (छाती में दर्द) व गंभीर बीमारी के साथ हार्ट अटैक की आशंका रहती है। गुर्दों की रक्त कोशिकाएं कमजोर व संकुचित होने से कार्यक्षमता घट जाती है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ता है। डायबिटीज अौर दिल से जुड़ी बीमारी हो सकती है।
15-20 फीसदी लोगों को नहीं पता होता उनका बीपी असामान्य है
डॉक्टरों के अनुसार एंजाइटी व अन्य कारणों से हाइपरटेंशन से युवाओं के ज्यादा शिकार के मामले आ रहे हैं। आजकल 20 से 25 साल तक की उम्र वाले भी ब्लड प्रेशर की गिरफ्त में आ रहे हैं। 60 साल की उम्र से पहले पुरुषों में उच्च रक्तचाप का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन बाद में महिला-पुरुष दोनों में ही खतरे की आशंका बराबर होती है। लंबे समय तक रक्तचाप का स्तर ज्यादा रहना हाइपरटेंशन या हाई बीपी कहलाता है। इसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है। सबसे बड़ी बात ये है कि 15-20% लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि उन्हें यह समस्या है। कुछ में लक्षण नहीं दिखाई देते। सिर-दर्द, बैचेनी और सीने में दर्द जैसे लक्षणों में अनदेखी होती है। इससे शरीर के अन्य अंगों का भी खतरा बना रहता है। हालांकि अभी सरकार निरोगी राजस्थान अभियान के तहत जयपुर समेत प्रदेश के सभी जिलों में स्क्रीनिंग प्रारंभ करने जा रही है।
लाइफस्टाइल डेस्क.7 साल की उम्र से मैला ढोना पड़ा। 10 साल की उम्र में शादी हो गई। ससुराल में यही काम करना पड़ा। काम से लौटने के बाद खाना खाने की इच्छा नहीं होती थी। मंदिर में घुसने की इजाजत नहीं थी। लोग अछूत मानते थे। यह कहानी है53साल की दलित महिला ऊषा चौमार की। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। सुलभ इंटरनेशनल के एनजीओ नई दिशा ने उन्हें इस जिंदगी से आजादी दिलाई। राजस्थान के अलवर की ऊषा आज ऐसी सैकड़ों महिलाओं की आवाज हैं।
आज वह स्वच्छता के लिए संघर्ष और मैला ढोने के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्था की अध्यक्ष हैं। उषा ने सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से राजस्थान में स्वच्छता की अलख जगाई। इसके लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।उनके पति मजदूरी करते हैं। तीन बच्चे हैं - दो बेटे और एक बेटी। बेटी ग्रेजुएशन कर रही है और एक बेटा पिता के साथ ही मजदूरी करता है।

अछूत मान लोगों ने किया अलग
ऊषा ने कई सालों तकमैला उठाने कीकुप्रथा के साथ अपना जीवन गुजारा। कुप्रथा ने ना सिर्फ उन्हें एक अछूत की जिंदगी काटने पर मजबूर कर दिया, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी पर बुरा प्रभाव भी डाला। अपने इस काम को लेकर उन्हें इतना बुरा महसूस होता था कि कई बार वह काम से लौटने के बाद खाना तक नहीं खा पाती थी।
लोग उन्हें छूते नहीं थे, ना ही दुकान से सामान खरीदने देते थे। मंदिर और घरों तक में घुसने की इजाजात नहीं थी।उषा कहती है कि इंसान के मैले को हर सुबह उठाकर फेंकने केकाम को कौन करना चाहेगा, वो भी खुद अपने हाथों से। ये सिर्फ काम नहीं हमारी जिंदगी बन गया था। लोग हमें भी कचरे की तरह समझने लगे थे।"

एनजीओ नई दिशा से मिली जीने की दिशा
ऊषा की ही तरह कई लोग ऐसे ही अपना पूरा जीवन इसी तरह बिता देते है। लेकिन वह उन लोगों में से नहीं थीं, वो एक मौके की तलाश में थी, जो उन्हें सुलभ इंटरनेशनल के एनजीओ नई दिशा ने दिया। इस संस्था ने उन्हें एक सम्मानपूर्ण जिंदगी जीने का अवसर दिया, जिसके बाद उषा ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। संस्था से जुड़ने के बाद उन्होंने सिलाई, मेंहदी तैयार करने जैसे काम सीखे।अब उषा ना केवल एक प्रभावशाली वक्ता बन गईं, बल्कि उन्होंने मैला ढोने जैसी कुप्रथा के खिलाफ अपनी आवाज भी उठाई। दुनिया भर में घूम-घूमकर महिलाओं को प्रेरित भी किया। आज वह सुलभ इंटरनेशनल संस्था की अध्यक्ष भी हैं।
समाज से कुप्रथा खत्म करने की है इच्छा
ऊषा के मुताबिक, वह अमेरिका, साउथ अफ्रीका और देशों मेंजा चुकी है। यहां उन्होंने अंग्रेजी सीखी और आज वो बिना किसी डर के कई लोगों के सामने बोल सकती है। वह चाहती हैं कि इस कुप्रथा को समाज से खत्म करने के लिए उनसे जो बन सकेगा वो करेंगी। आज इस मुकाम पर पहुंचने के बाद उषा इसका श्रेय सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ.बिंदेश्वर पाठक को देती हैं।
एक महिला जो कभी खुद के अधिकार के लिए खड़े नहीं हो पाती थी,आज वोदेश के सैकड़ों मैला ढोने वाले लोगों की आवाज बन गई है। एक कमजोर और अछूत महिला सेआत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जी रहीं उषा महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण बन के उभरी हैं। उनकी इच्छा है इस कुप्रथा को समाज से जड़ से उखाड़ फेंकने की। यह आसान काम तो नहीं, इसे करने के लिए काफी समय की जरूरत है।
लाइफस्टाइल डेस्क.7 साल की उम्र से मैला ढोना पड़ा। 10 साल की उम्र में शादी हो गई। ससुराल में यही काम करना पड़ा। काम से लौटने के बाद खाना खाने की इच्छा नहीं होती थी। मंदिर में घुसने की इजाजत नहीं थी। लोग अछूत मानते थे। यह कहानी है53साल की दलित महिला ऊषा चौमार की। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। सुलभ इंटरनेशनल के एनजीओ नई दिशा ने उन्हें इस जिंदगी से आजादी दिलाई। राजस्थान के अलवर की ऊषा आज ऐसी सैकड़ों महिलाओं की आवाज हैं।
आज वह स्वच्छता के लिए संघर्ष और मैला ढोने के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्था की अध्यक्ष हैं। उषा ने सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से राजस्थान में स्वच्छता की अलख जगाई। इसके लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।उनके पति मजदूरी करते हैं। तीन बच्चे हैं - दो बेटे और एक बेटी। बेटी ग्रेजुएशन कर रही है और एक बेटा पिता के साथ ही मजदूरी करता है।

अछूत मान लोगों ने किया अलग
ऊषा ने कई सालों तकमैला उठाने कीकुप्रथा के साथ अपना जीवन गुजारा। कुप्रथा ने ना सिर्फ उन्हें एक अछूत की जिंदगी काटने पर मजबूर कर दिया, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी पर बुरा प्रभाव भी डाला। अपने इस काम को लेकर उन्हें इतना बुरा महसूस होता था कि कई बार वह काम से लौटने के बाद खाना तक नहीं खा पाती थी।
लोग उन्हें छूते नहीं थे, ना ही दुकान से सामान खरीदने देते थे। मंदिर और घरों तक में घुसने की इजाजात नहीं थी।उषा कहती है कि इंसान के मैले को हर सुबह उठाकर फेंकने केकाम को कौन करना चाहेगा, वो भी खुद अपने हाथों से। ये सिर्फ काम नहीं हमारी जिंदगी बन गया था। लोग हमें भी कचरे की तरह समझने लगे थे।"

एनजीओ नई दिशा से मिली जीने की दिशा
ऊषा की ही तरह कई लोग ऐसे ही अपना पूरा जीवन इसी तरह बिता देते है। लेकिन वह उन लोगों में से नहीं थीं, वो एक मौके की तलाश में थी, जो उन्हें सुलभ इंटरनेशनल के एनजीओ नई दिशा ने दिया। इस संस्था ने उन्हें एक सम्मानपूर्ण जिंदगी जीने का अवसर दिया, जिसके बाद उषा ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। संस्था से जुड़ने के बाद उन्होंने सिलाई, मेंहदी तैयार करने जैसे काम सीखे।अब उषा ना केवल एक प्रभावशाली वक्ता बन गईं, बल्कि उन्होंने मैला ढोने जैसी कुप्रथा के खिलाफ अपनी आवाज भी उठाई। दुनिया भर में घूम-घूमकर महिलाओं को प्रेरित भी किया। आज वह सुलभ इंटरनेशनल संस्था की अध्यक्ष भी हैं।
समाज से कुप्रथा खत्म करने की है इच्छा
ऊषा के मुताबिक, वह अमेरिका, साउथ अफ्रीका और देशों मेंजा चुकी है। यहां उन्होंने अंग्रेजी सीखी और आज वो बिना किसी डर के कई लोगों के सामने बोल सकती है। वह चाहती हैं कि इस कुप्रथा को समाज से खत्म करने के लिए उनसे जो बन सकेगा वो करेंगी। आज इस मुकाम पर पहुंचने के बाद उषा इसका श्रेय सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ.बिंदेश्वर पाठक को देती हैं।
एक महिला जो कभी खुद के अधिकार के लिए खड़े नहीं हो पाती थी,आज वोदेश के सैकड़ों मैला ढोने वाले लोगों की आवाज बन गई है। एक कमजोर और अछूत महिला सेआत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जी रहीं उषा महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण बन के उभरी हैं। उनकी इच्छा है इस कुप्रथा को समाज से जड़ से उखाड़ फेंकने की। यह आसान काम तो नहीं, इसे करने के लिए काफी समय की जरूरत है।
Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...