इस बार रक्षाबंधन (Rakshabandhan) पर अपने भाई को अपने हाथों से बनाकर पनीर कोफ्ते (Paneer Kofta) का स्वाद जरूर चखाएं.from Latest News फूड News18 हिंदी https://ift.tt/39K7kt6
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इस बार रक्षाबंधन (Rakshabandhan) पर अपने भाई को अपने हाथों से बनाकर पनीर कोफ्ते (Paneer Kofta) का स्वाद जरूर चखाएं.केरल के कोल्लम में रहने वाली 105 साल की असमा बीवी 3 माह तक कोरोना से लड़ने के बाद घर लौटी हैं। असमा केरल की सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर हैं। उन्हें 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा बीवी को कोरोना का संक्रमण उनकी बेटी से हुआ था।
बेटी का कहना है कि पूरे इलाज के दौरान मां ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उम्र अधिक होने के कारण वह पहले ही कई तरह की दिक्कतों से जूझ रही थीं, इस दौरान डॉक्टर्स में लगातार नजर बनाए रखी।
स्वास्थ्य मंत्री ने उनके जज्बे की तारीफ की
असमा बीवी ने जिस तरह कोरोना का डटकर मुकाबला किया है, उसके लिए केरल की स्वास्थ्यमंत्री केके शैलजा ने उनकी तारीफ की है। स्वास्थ्यमंत्री ने कहा, उन्होंने इस उम्र में जो जज्बा दिखाया वह काबिलेतारीफ है। स्वास्थ्यमंत्री ने डॉक्टर्स, नर्स और हेल्थ वर्कर्स का भी शुक्रिया अदा किया।
केरल में बुधवार को कोरोना के 903 मामले सामने आए। इसमें हेल्थ वर्कर भी शामिल हैं। संक्रमितों का आंकड़ा 21,797 तक पहुंच गया है।
अप्रैल में केरल के थॉमस बने थे देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर
असमा बीवी से पहले सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर केरल के 93 साल के थॉमस अब्राहम रहे। थॉमस ने अप्रैल की शुरुआत में कोरोना को मात दी थी और देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर बने थे। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में अधिक उम्र वाले कोरोना सर्वाइवर के मामले सामने आए।
अब्राहम एक किसान हैं। उनके साथ उनकी 88 वर्षीय पत्नी मरियम्मा का इलाज कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में हुआ था।
केरल के कोल्लम में रहने वाली 105 साल की असमा बीवी 3 माह तक कोरोना से लड़ने के बाद घर लौटी हैं। असमा केरल की सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर हैं। उन्हें 20 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा बीवी को कोरोना का संक्रमण उनकी बेटी से हुआ था।
बेटी का कहना है कि पूरे इलाज के दौरान मां ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उम्र अधिक होने के कारण वह पहले ही कई तरह की दिक्कतों से जूझ रही थीं, इस दौरान डॉक्टर्स में लगातार नजर बनाए रखी।
स्वास्थ्य मंत्री ने उनके जज्बे की तारीफ की
असमा बीवी ने जिस तरह कोरोना का डटकर मुकाबला किया है, उसके लिए केरल की स्वास्थ्यमंत्री केके शैलजा ने उनकी तारीफ की है। स्वास्थ्यमंत्री ने कहा, उन्होंने इस उम्र में जो जज्बा दिखाया वह काबिलेतारीफ है। स्वास्थ्यमंत्री ने डॉक्टर्स, नर्स और हेल्थ वर्कर्स का भी शुक्रिया अदा किया।
केरल में बुधवार को कोरोना के 903 मामले सामने आए। इसमें हेल्थ वर्कर भी शामिल हैं। संक्रमितों का आंकड़ा 21,797 तक पहुंच गया है।
अप्रैल में केरल के थॉमस बने थे देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर
असमा बीवी से पहले सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर केरल के 93 साल के थॉमस अब्राहम रहे। थॉमस ने अप्रैल की शुरुआत में कोरोना को मात दी थी और देश के सबसे उम्रदराज कोरोना सर्वाइवर बने थे। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में अधिक उम्र वाले कोरोना सर्वाइवर के मामले सामने आए।
अब्राहम एक किसान हैं। उनके साथ उनकी 88 वर्षीय पत्नी मरियम्मा का इलाज कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में हुआ था।
कोरोना के कारण बार-बार हाथ धोना मजबूरी बन गई है। वहीं महिलाओं को घर के कार्यों के चलते खुद की देखभाल का वक़्त नहीं मिल पा रहा है। इसलिए समय निकालिए और हाथ-पैरों की देखभाल पर ध्यान दीजिए।
रूखापन दूर करें
एक चम्मच ग्लिसरीन को गुलाब जल में मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को सोते समय हाथ-पैरों पर लगा लें। इससे हाथ-पैरों में नमी बनी रहेगी और वे कोमल बनेंगे। इसके साथ ही एक चम्मच शक्कर में नींबू का रस मिलाकर हाथ-पैरों की मालिश करें और कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें। ग्लिसरीन, गुलाब जल और नींबू के रस के मिश्रण से नियमित मालिश करने से पैर मुलायम रहते हैं।
कच्चे दूध की मालिश
दूध उबालने से पहले उसे थोड़ा-सा निकालकर फ्रिज में रख लें। जब भी समय मिले इस दूध को हाथ-पैरों पर मल लें और धीरे-धीरे मालिश करें। इससे हाथ-पैरों पर जमी गंदगी दूर होती है, साथ ही त्वचा मुलायम बनती है। अगर तैलीय त्वचा की समस्या नहीं है तो चेहरे पर भी कच्चे दूध की मालिश कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को रोज़ दुहरा सकते हैं या फिर 1-2 दिन के अंतराल में भी कर सकते हैं।
कपड़े धोने के बाद
यदि डिटर्जेंट/साबुन युक्त पानी में हाथ-पैर अधिक समय तक रहते हैं तो उन्हें नुक़सान पहुंचता है। कपड़े धोने के बाद सादे पानी से हाथ ठीक से धोकर मलाई, मक्खन, देशी घी, नारियल का तेल या ग्लिसरीन आदि अच्छी तरह से हाथों पर मलें। इससे हाथों का रूखापन दूर होगा।
पैरों की मालिश
पैर रूखे-रूखे और बेजान लगते हों तो गुनगुने पानी में नारियल या जैतून का तेल और थोड़ा-सा नमक डालकर पैर कुछ देर उस पानी में रखें। फिर पांव बाहर निकाल कर तौलिए से हल्के हाथों से पोंछकर सुखाएं। पैर सूखने के बाद मॉइश्चराइज़र या नारियल तेल से धीरे-धीरे मालिश करें। गुनगुने पानी से पैरों को आराम भी मिलेगा और संक्रमण व गंदगी भी दूर होगी।
कोरोना के कारण बार-बार हाथ धोना मजबूरी बन गई है। वहीं महिलाओं को घर के कार्यों के चलते खुद की देखभाल का वक़्त नहीं मिल पा रहा है। इसलिए समय निकालिए और हाथ-पैरों की देखभाल पर ध्यान दीजिए।
रूखापन दूर करें
एक चम्मच ग्लिसरीन को गुलाब जल में मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को सोते समय हाथ-पैरों पर लगा लें। इससे हाथ-पैरों में नमी बनी रहेगी और वे कोमल बनेंगे। इसके साथ ही एक चम्मच शक्कर में नींबू का रस मिलाकर हाथ-पैरों की मालिश करें और कुछ देर बाद गुनगुने पानी से धो लें। ग्लिसरीन, गुलाब जल और नींबू के रस के मिश्रण से नियमित मालिश करने से पैर मुलायम रहते हैं।
कच्चे दूध की मालिश
दूध उबालने से पहले उसे थोड़ा-सा निकालकर फ्रिज में रख लें। जब भी समय मिले इस दूध को हाथ-पैरों पर मल लें और धीरे-धीरे मालिश करें। इससे हाथ-पैरों पर जमी गंदगी दूर होती है, साथ ही त्वचा मुलायम बनती है। अगर तैलीय त्वचा की समस्या नहीं है तो चेहरे पर भी कच्चे दूध की मालिश कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को रोज़ दुहरा सकते हैं या फिर 1-2 दिन के अंतराल में भी कर सकते हैं।
कपड़े धोने के बाद
यदि डिटर्जेंट/साबुन युक्त पानी में हाथ-पैर अधिक समय तक रहते हैं तो उन्हें नुक़सान पहुंचता है। कपड़े धोने के बाद सादे पानी से हाथ ठीक से धोकर मलाई, मक्खन, देशी घी, नारियल का तेल या ग्लिसरीन आदि अच्छी तरह से हाथों पर मलें। इससे हाथों का रूखापन दूर होगा।
पैरों की मालिश
पैर रूखे-रूखे और बेजान लगते हों तो गुनगुने पानी में नारियल या जैतून का तेल और थोड़ा-सा नमक डालकर पैर कुछ देर उस पानी में रखें। फिर पांव बाहर निकाल कर तौलिए से हल्के हाथों से पोंछकर सुखाएं। पैर सूखने के बाद मॉइश्चराइज़र या नारियल तेल से धीरे-धीरे मालिश करें। गुनगुने पानी से पैरों को आराम भी मिलेगा और संक्रमण व गंदगी भी दूर होगी।
चेहरे पर मुंहासे, होंठ फटना या त्वचा पर खुजली होना आम समस्याएं लगती हैं। कई दफ़ा सोचते हैं कि प्रदूषण, मौसम या हॉर्मोन में बदलाव इसके कारण हैं। परंतु हर बार ऐसा नहीं होता है। ये अंदरूनी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो त्वचा पर नजर आने लगती हैं। कुछ ऐसी ही त्वचा संबंधी समस्याएं आपको बता रहे हैं, जो आम लगती हैं, लेकिन असल में ये आपकी सेहत का हाल बताती हैं।
आंखों के नीचे काले घेरे
अधिक नींद लेना, ज्यादा थकान, ज्यादा देर तक जागते रहना, टीवी या लैपटॉप/कंप्यूटर स्क्रीन पर अधिक वक़्त बिताना या अनियमित जीवनशैली के कारण बहुत से लोग काले घेरों की समस्या से पीड़ित हैं। आमतौर पर आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ती उम्र के कारण भी होते हैं। इसके अलावा कई बार यह समस्या आनुवंशिक भी होती है। आंखों में खिंचाव की वजह से काले घेरे बन सकते हैं। आंखों में सूखापन भी वजह बन सकती है। इसके अलावा डिहाइड्रेशन या धूप के कारण हो सकते हैं।
क्या करें : काले घेरों का उपचार इनके कारणों पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ उपाय आप कर सकते हैं, जैसे- कोल्ड टी की थैली लगाना और पर्याप्त नींद लेना। कोल्ड कंप्रेस लगाने से सूजन कम हो जाती है और रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ने में मदद मिलती है। हरी सब्ज़ियां और विटामिन-ई युक्त आहार लें। कई बार हीमोग्लोबिन की कमी के कारण भी ये घेरे हो सकते हैं, इसलिए आयरन युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे पालक, सेब, किशमिश, चुकंदर आदि आहार में शामिल करें।
होंठों का फटना
मौसम के कारण होंठ फटना आम बात है, जो लिप बाम या क्रीम से ठीक हो जाते हैं। अगर होंठ हमेशा फटते रहते हैं और इनमें दर्द भी होता है, तो ये डिहाइड्रेशन यानी कि शरीर में पानी की कमी होने का संकेत है। ऐसे में अधिक से अधिक पानी पिएं। होंठ फटने का कारण लिप एक्जिमा भी हो सकता है।
क्या करें : होंठ पर जीभ और लार न लगाएं और न इन्हें दांतों से चबाएं। अगर फटे होंठ ठीक नहीं हो रहे हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करें।
गाल पर लाल चकत्ते
अगर गाल पर या नाक के ऊपरी हिस्से पर लाल चकत्ते हो जाते हैं तो यह ल्यूपस की समस्या है। गंभीर सूजन वाली इस बीमारी में चेहरे पर तितली आकार के लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। आमतौर पर धूप के संपर्क में आने से इन चकत्तों की समस्या और भी बढ़ जाती है। इन लाल चक्कतों के साथ-साथ बुखार, खुजली और ठंड में उंगलियों की त्वचा हल्की नीली होने जैसी समस्या हो सकती है।
क्या करें : इस स्थिति में त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामश लेना ही अच्छा होगा।
त्वचा में खुजली
अगर शरीर के किसी भी हिस्से की त्वचा में लगातार खुजली होती है, खुजलाने के बाद भी नहीं रुकती, त्वचा लाल हो जाती है और खुजली के कारण नींद भी प्रभावित होती है, तो इसका कारण एटॉपिक डर्मेटाइटिस हो सकता है। ये समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। आमतौर पर ये एलर्जी या हे-फीवर की वजह से होती है।
क्या करें : कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखें, जैसे देर तक नहीं नहाएं, पसीना, धूल, डिटर्जेंट, परागकणों से दूर रहें। किन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, यह डॉक्टर की मदद से पता करें। सौम्य साबुन से नहाएं। नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह से सुखाएं। दिन में दो बार त्वचा को मॉइस्चराइज़ करें। वज़न कम करने और व्यायाम करने से त्वचा की खुजली कम हो सकती है। इस सबके बावजूद खुजली कम नहीं हो रही है, तो लिवर और किडनी की बीमारी भी कारण हो सकती है। ऐसे में जांच कराना बेहतर विकल्प है।
चेहरे पर मुंहासे
माथे पर मुंहासे बालों में अधिक डैंड्रफ के कारण हो सकते हैं। इसके अलावा तनाव या ठीक तरह से नींद न ले पाना भी वजह हो सकती है। जिनको यह समस्या होती है उनका पाचनतंत्र सही नहीं होता। अगर ठुड्डी पर लगातार मुंहासे निकल रहे हैं तो ये हॉर्मोन की समस्या हो सकती है। ऐसा सही तरह से पीरियड्स न होने पर भी होता है। अगर चेहरे और कान के किनारों पर मुंहासे निकल रहे हैं तो हॉर्मोन का असंतुलित होना कारण हो सकता है।
क्या करें : हो सकता है कि कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स और शैंपू त्वचा को नुक़सान पहुंचा रहे हों। ऐसे में इन्हें बदलकर देखिए। गालों पर मुंहासे निकलने की वजह आहार में शक्कर की अधिक मात्रा का सेवन करना है। ऐसे में कम प्रोसेस्ड शुगर लें। इसके बावजूद मुंहासों की समस्या बनी हुई है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
त्वचा का पीला पड़ना
त्वचा और आंखों का पीला पड़ना पीलिया और हैपेटाइटिस जैसी बीमारी का संकेत है। इसकी भी वजह से त्वचा में चकत्ते और खुजली हो सकती है।
क्या करें : यदि आपको ऐसे लक्षण दिखते हैं तो तुरंत जांच के लिए जाएं और दवा लेना शुरू करें।
क्या झाड़ू के हैंडल पर लिखा होता है कि इसे केवल महिलाएं ही चलाएंगी? क्या वॉशिंग मशीन और गैस स्टोव के मैनुअल में भी ऐसा कुछ लिखा होता है? फिर क्यों ज्यादातर पुरुष घर के कामों में हाथ नहीं बंटाते हैं? कमोबेश हर घर से जुड़े ये सब सवाल उस ऑनलाइन याचिका के अंश हैं जो कोरोनाकाल में घर और रसोई में अचानक बढ़े महिलाओं के कामकाज को लेकर दायर की गई है।
पिटीशन मुंबई में रहने वाली सुबर्णा घोष ने फाइल की है। इस पर तकरीबन 71 हजार से ज्यादा लोग अपने हस्ताक्षर कर चुके हैं। घोष चाहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने किसी संबाेधन में इस मामले पर कुछ बोलें। इस मसले का कोई उपाय सुझाएं और पुरुषों से कहें कि वे भी घर के कामों में अपनी जिम्मेदारी समझें।
सुबर्णा घोष ने शुरू की ऑनलाइन मुहिम
दरअसल, लॉकडाउन के दौरान सुबर्णा पर घर और ऑफिस के कामकाज का बोझ आ पड़ा। याचिका उन्हीं के अनुभवों का सार और उनके ही घर की कहानी है। बल्कि यूं कहें-एक तरह से घर-घर की कहानी है। तमाम महिलाएं ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। घरेलू कामकाज की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं के ऊपर होती है। खाना बनाना, साफ-सफाई, कपड़े धोना, तह करना, बिस्तर इत्यादि वही करती हैं। सुबर्णा एक चैरिटी संस्था भी चलाती हैं। उनके पति बैंकर हैं।
ऑनलाइन पिटीशन का मकसद- लोगों की सोच में आए बदलाव
वह कहती हैं कि यह अपेक्षा भी महिलाओं से ही की जाती है कि इतना सब कुछ करने के बाद वे अपने ऑफिस का काम भी पूरा करें। लॉकडाउन के दौरान उन्हें खुद भी अपने कामकाज से सबसे ज्यादा समझौता करना पड़ा। उनके दफ्तर के काम पर असर पड़ा। वर्क फ्रॉम होम और घर का कामकाज। वह बुरी तरह से थक जाती थीं। परिवार में संतुलन बिगड़ने लगा था। उन्होंने इसकी शिकायत भी की। हालांकि, बाद में ऐसी स्थितियों में कुछ बदलाव आया। घोष के मुताबिक यह एक मूलभूत सवाल है। लोग इस पर बात क्यों नहीं करना चाहते हैं? लोगों की सोच बदलना ही इस याचिका का मकसद है।
मोदी को संबोधित करते हुए इन पंक्तियों में बताई ‘मन की बात’
चेहरे पर मुंहासे, होंठ फटना या त्वचा पर खुजली होना आम समस्याएं लगती हैं। कई दफ़ा सोचते हैं कि प्रदूषण, मौसम या हॉर्मोन में बदलाव इसके कारण हैं। परंतु हर बार ऐसा नहीं होता है। ये अंदरूनी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो त्वचा पर नजर आने लगती हैं। कुछ ऐसी ही त्वचा संबंधी समस्याएं आपको बता रहे हैं, जो आम लगती हैं, लेकिन असल में ये आपकी सेहत का हाल बताती हैं।
आंखों के नीचे काले घेरे
अधिक नींद लेना, ज्यादा थकान, ज्यादा देर तक जागते रहना, टीवी या लैपटॉप/कंप्यूटर स्क्रीन पर अधिक वक़्त बिताना या अनियमित जीवनशैली के कारण बहुत से लोग काले घेरों की समस्या से पीड़ित हैं। आमतौर पर आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ती उम्र के कारण भी होते हैं। इसके अलावा कई बार यह समस्या आनुवंशिक भी होती है। आंखों में खिंचाव की वजह से काले घेरे बन सकते हैं। आंखों में सूखापन भी वजह बन सकती है। इसके अलावा डिहाइड्रेशन या धूप के कारण हो सकते हैं।
क्या करें : काले घेरों का उपचार इनके कारणों पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ उपाय आप कर सकते हैं, जैसे- कोल्ड टी की थैली लगाना और पर्याप्त नींद लेना। कोल्ड कंप्रेस लगाने से सूजन कम हो जाती है और रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ने में मदद मिलती है। हरी सब्ज़ियां और विटामिन-ई युक्त आहार लें। कई बार हीमोग्लोबिन की कमी के कारण भी ये घेरे हो सकते हैं, इसलिए आयरन युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे पालक, सेब, किशमिश, चुकंदर आदि आहार में शामिल करें।
होंठों का फटना
मौसम के कारण होंठ फटना आम बात है, जो लिप बाम या क्रीम से ठीक हो जाते हैं। अगर होंठ हमेशा फटते रहते हैं और इनमें दर्द भी होता है, तो ये डिहाइड्रेशन यानी कि शरीर में पानी की कमी होने का संकेत है। ऐसे में अधिक से अधिक पानी पिएं। होंठ फटने का कारण लिप एक्जिमा भी हो सकता है।
क्या करें : होंठ पर जीभ और लार न लगाएं और न इन्हें दांतों से चबाएं। अगर फटे होंठ ठीक नहीं हो रहे हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करें।
गाल पर लाल चकत्ते
अगर गाल पर या नाक के ऊपरी हिस्से पर लाल चकत्ते हो जाते हैं तो यह ल्यूपस की समस्या है। गंभीर सूजन वाली इस बीमारी में चेहरे पर तितली आकार के लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। आमतौर पर धूप के संपर्क में आने से इन चकत्तों की समस्या और भी बढ़ जाती है। इन लाल चक्कतों के साथ-साथ बुखार, खुजली और ठंड में उंगलियों की त्वचा हल्की नीली होने जैसी समस्या हो सकती है।
क्या करें : इस स्थिति में त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामश लेना ही अच्छा होगा।
त्वचा में खुजली
अगर शरीर के किसी भी हिस्से की त्वचा में लगातार खुजली होती है, खुजलाने के बाद भी नहीं रुकती, त्वचा लाल हो जाती है और खुजली के कारण नींद भी प्रभावित होती है, तो इसका कारण एटॉपिक डर्मेटाइटिस हो सकता है। ये समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। आमतौर पर ये एलर्जी या हे-फीवर की वजह से होती है।
क्या करें : कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखें, जैसे देर तक नहीं नहाएं, पसीना, धूल, डिटर्जेंट, परागकणों से दूर रहें। किन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, यह डॉक्टर की मदद से पता करें। सौम्य साबुन से नहाएं। नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह से सुखाएं। दिन में दो बार त्वचा को मॉइस्चराइज़ करें। वज़न कम करने और व्यायाम करने से त्वचा की खुजली कम हो सकती है। इस सबके बावजूद खुजली कम नहीं हो रही है, तो लिवर और किडनी की बीमारी भी कारण हो सकती है। ऐसे में जांच कराना बेहतर विकल्प है।
चेहरे पर मुंहासे
माथे पर मुंहासे बालों में अधिक डैंड्रफ के कारण हो सकते हैं। इसके अलावा तनाव या ठीक तरह से नींद न ले पाना भी वजह हो सकती है। जिनको यह समस्या होती है उनका पाचनतंत्र सही नहीं होता। अगर ठुड्डी पर लगातार मुंहासे निकल रहे हैं तो ये हॉर्मोन की समस्या हो सकती है। ऐसा सही तरह से पीरियड्स न होने पर भी होता है। अगर चेहरे और कान के किनारों पर मुंहासे निकल रहे हैं तो हॉर्मोन का असंतुलित होना कारण हो सकता है।
क्या करें : हो सकता है कि कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स और शैंपू त्वचा को नुक़सान पहुंचा रहे हों। ऐसे में इन्हें बदलकर देखिए। गालों पर मुंहासे निकलने की वजह आहार में शक्कर की अधिक मात्रा का सेवन करना है। ऐसे में कम प्रोसेस्ड शुगर लें। इसके बावजूद मुंहासों की समस्या बनी हुई है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
त्वचा का पीला पड़ना
त्वचा और आंखों का पीला पड़ना पीलिया और हैपेटाइटिस जैसी बीमारी का संकेत है। इसकी भी वजह से त्वचा में चकत्ते और खुजली हो सकती है।
क्या करें : यदि आपको ऐसे लक्षण दिखते हैं तो तुरंत जांच के लिए जाएं और दवा लेना शुरू करें।
क्या झाड़ू के हैंडल पर लिखा होता है कि इसे केवल महिलाएं ही चलाएंगी? क्या वॉशिंग मशीन और गैस स्टोव के मैनुअल में भी ऐसा कुछ लिखा होता है? फिर क्यों ज्यादातर पुरुष घर के कामों में हाथ नहीं बंटाते हैं? कमोबेश हर घर से जुड़े ये सब सवाल उस ऑनलाइन याचिका के अंश हैं जो कोरोनाकाल में घर और रसोई में अचानक बढ़े महिलाओं के कामकाज को लेकर दायर की गई है।
पिटीशन मुंबई में रहने वाली सुबर्णा घोष ने फाइल की है। इस पर तकरीबन 71 हजार से ज्यादा लोग अपने हस्ताक्षर कर चुके हैं। घोष चाहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने किसी संबाेधन में इस मामले पर कुछ बोलें। इस मसले का कोई उपाय सुझाएं और पुरुषों से कहें कि वे भी घर के कामों में अपनी जिम्मेदारी समझें।
सुबर्णा घोष ने शुरू की ऑनलाइन मुहिम
दरअसल, लॉकडाउन के दौरान सुबर्णा पर घर और ऑफिस के कामकाज का बोझ आ पड़ा। याचिका उन्हीं के अनुभवों का सार और उनके ही घर की कहानी है। बल्कि यूं कहें-एक तरह से घर-घर की कहानी है। तमाम महिलाएं ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। घरेलू कामकाज की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं के ऊपर होती है। खाना बनाना, साफ-सफाई, कपड़े धोना, तह करना, बिस्तर इत्यादि वही करती हैं। सुबर्णा एक चैरिटी संस्था भी चलाती हैं। उनके पति बैंकर हैं।
ऑनलाइन पिटीशन का मकसद- लोगों की सोच में आए बदलाव
वह कहती हैं कि यह अपेक्षा भी महिलाओं से ही की जाती है कि इतना सब कुछ करने के बाद वे अपने ऑफिस का काम भी पूरा करें। लॉकडाउन के दौरान उन्हें खुद भी अपने कामकाज से सबसे ज्यादा समझौता करना पड़ा। उनके दफ्तर के काम पर असर पड़ा। वर्क फ्रॉम होम और घर का कामकाज। वह बुरी तरह से थक जाती थीं। परिवार में संतुलन बिगड़ने लगा था। उन्होंने इसकी शिकायत भी की। हालांकि, बाद में ऐसी स्थितियों में कुछ बदलाव आया। घोष के मुताबिक यह एक मूलभूत सवाल है। लोग इस पर बात क्यों नहीं करना चाहते हैं? लोगों की सोच बदलना ही इस याचिका का मकसद है।
मोदी को संबोधित करते हुए इन पंक्तियों में बताई ‘मन की बात’
ऑस्ट्रेलिया के चिड़ियाघर में रहने वाले 12 साल के जिराफ ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। जिराफ का नाम फॉरेस्ट है। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने फॉरेस्ट को दुनिया का सबसे ऊंचा जीवित जिराफ घोषित किया है। इसकी लम्बाई 18 फीट 8 इंच है। गिनीज के मुताबिक, जिराफ की लम्बाई को नापना बेहद मुश्किल रहा। इसके लिए स्टाफ को एक विशेष नाप वाला खंभा बनाना। यह जिराफ क्वींसलैंड के ऑस्ट्रेलिया जू में रहता है।

इस बार रक्षाबंधन (Rakshabandhan) पर अपने भाई को समोसे या पकौड़े बनाकर नहीं बल्कि अपने हाथों से आलू ब्रेड रोल (Aloo Bread Roll) बनाकर जरूर खिलाएं. लॉकडाउन पर घर में बने आलू ब्रेड रोल आपके भाई को खूब पसंद आएंगे. इसे घर पर बनाना बहुत ही आसान है और यह स्नैक्स के लिए सबकी पसंद बन सकता है. यह खाने में बहुत ही टेस्टी होता है. देखें वीडियो (Video) और फॉलो करें स्टेप्स. साभार- Youtube/bharatzkitchen HINDIअमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्कूलों को दोबारा खोलने पर जोर दे रहे हैं लेकिन शोधकर्ताओं ने संक्रमण का खतरा जताया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में बड़ी संख्या में कोरोनावायरस मिल सकते हैं। ये संक्रमण की अहम वजह बन सकते हैं। यह दावा शिकागो में हुई रिसर्च में किया गया है।
5 साल से कम उम्र के 46 बच्चों पर हुई रिसर्च
शोधकर्ताओं के मुताबिक, 23 मार्च से 27 अप्रैल तक 145 मरीजों का स्वैब टैस्ट कराया। इनमें कोरोना के हल्के लक्षणों से लेकर सामान्य लक्षणों वाले मरीज शामिल थे। इन मरीजों को उम्र के मुताबिक समूहों में बांटा गया। पहला समूह 5 साल तक की उम्र वाले 46 बच्चों का बनाया गया। दूसरा समूह 5 से 17 साल उम्र वाले 51 बच्चों का बनाया गया। तीसरा समूह 18 से 65 साल के 48 बच्चों को बनाया गया।
कम उम्र के बच्चे कोरोना के वाहक बन सकते हैं
शोधकर्ता टेलर हील्ड सार्जेंट के मुताबिक, इन बच्चों की सांस नली में अधिक संख्या में कोरोनावायरस मिले। ये जितनी मात्रा में मिलेंगे संक्रमण का खतरा उतना ही बढ़ेगा। शोधकर्ता कहते हैं कि 5 साल से कम उम्र के बच्चे कोरोना के वाहक बन सकते हैं और इनसे आबादी के बीच संक्रमण फैल सकता है।
बड़े स्तर पर रिसर्च कराए जाने की जरूरत
शोधकर्ताओं के मुताबिक, बच्चों का व्यवहार और डे-केयर पैटर्न ऐसा है जो आबादी के बीच कोरोना के मामले बढ़ा सकता है। रिसर्च कम संख्या में बच्चों पर हुई है, इसे और बड़े स्तर पर कराए जाने की जरूरत है।
सुदर्शन क्रिया तनाव बेचैनी को घटने के साथ मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ाती है। येल यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, श्वसन तकनीक यानी सुदर्शन क्रिया से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ। फ्रंटियर्स इन सायकियाट्री जर्नल के मुताबिक, छात्रों को स्वास्थ्य के 6 क्षेत्रों अवसाद, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य, सचेतन अवस्था, सकारात्मक प्रभाव और सामाजिक जुड़ाव में सुधार देखा गया।
क्या है सुदर्शन क्रिया
सुदर्शन क्रिया एक लयबद्ध श्वसन तकनीक है, जो आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों में सिखाई जाती है। जो जीवकोषीय स्तर पर तनाव और भावनात्मक विष को दूर करती है। शोध यह दर्शाता है कि यह तकनीक नींद के चक्र को सुधारने, हैप्पी और फील गुड हार्मोन्स जैसे - ऑक्सीटोसिन के स्राव को सुधारने, तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन्स,जैसे - कॉर्टिसोल के स्राव को कम करने का काम करती है। यह सजगता को बढ़ाने और चिकित्सीय अवसाद लक्षणों को कम करने में मदद करती है।
8 हफ्तों में 135 स्टूडेंट्स पर हुई स्टडी
फ्रंटियर्स इन सायकियाट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कठिन परिस्थिति से उबरने के लिए ऐसे कार्यक्रम मददगार साबित हुए हैं। इन प्रोग्राम्स का परीक्षण 8 हफ्तों तक 135 अंडरग्रेजुएट विद्यार्थियों पर किया गया और परिणामों की तुलना उन नियंत्रित अंडरग्रेजुएट विद्यार्थियों के समूह से की गई, जिन्होंने ऐसे प्रोग्राम्स में हिस्सा नहीं लिया था।
तीन वेलनेस प्रोग्राम के आधार पर मूल्यांकन किया
शोधकर्ताओं के मुताबिक, नियंत्रित समूह की तुलना में एसकेवाई (सुदर्शन क्रिया योग) कैंपस हैप्पीनेस ने काफी सुधार दिखा। रिसर्च में शामिल स्टूडेंट्स को अवसाद, तनाव, सचेतन, अवस्था, सकारात्मक प्रभाव और सामाजिक जुड़ाव जैसी छह स्थितियों में मदद मिली।
येल चाइल्ड स्टडी सेंटर और येल सेंटर फॉर इमोशनल इंटेलिजेंस की शोध टीम ने क्लासरूम में हुए तीन वेलनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम के आधार पर मूल्यांकन किया। इन सभी प्रोग्राम्स में श्वसन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता की रणनीति शामिल थीं।
कोरोना वायरस (Coronavirus) के दौर में मामलू सी सर्दी-खांसी वाले मरीज भी परेशान हो रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि आस-पड़ोस में मौजूद डॉक्टर कोविड-19 के कारण मरीजों को देखने से कतरा रहे हैं. हालांकि महामारी के इस दौर में एक डॉक्टर ने मरीजों का इलाज करने के लिए एक अनोखा जुगाड़ अपनाया है.देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि देश में जांच का दायरा बढ़ रहा है। कोविड-19 की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इन जांच में फर्क नहीं समझ पा रहे हैं। जैसे आरटी- पीसीआर, रैपिड एंटीजन टेस्ट और ट्रू नेट टेस्ट में क्या अंतर यह कैसे समझें। जानिए कोरोना की कौन सी जांच कब कराएं...
#1) आरटी- पीसीआर टेस्ट
क्या है : कोरोना वायरस की जांच का तरीका है। इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मटीरियल है।
तरीका क्या है : नाक एवं गले के तालू से स्वैब लिया जाता है। ये टेस्ट लैब में ही किए जाते हैं।
रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : 12 से 16 घंटे
एक्यूरेसी कितनी है : टेस्टिंग की इस पद्धति की विश्वसनीयता लगभग 60% है। कोरोना संक्रमण के बाद भी टेस्ट निगेटिव आ सकता है। मरीज को लक्षणिक रूप से भी देखा जाना जरूरी है।
#2) रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट)
क्या है : कोरोना संक्रमण के वायरस की जांच की जाती है।
तरीका क्या है : नाक से स्वैब लिया जाता है। वायरस में पाए जाने वाले एंटीजन का पता चलता है।
रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : 20 मिनट
एक्यूरेसी कितनी है : अगर टेस्ट पॉजिटिव है तो इसकी विश्वसनीयता लगभग 100% है। मगर 30-40 % मामलों में यह निगेटिव रह सकता है। उस स्थिति में आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जा सकता है।
#3) ट्रू नेट टेस्ट
क्या है : ट्रू नेट मशीन के द्वारा न्यूक्लिक एम्प्लीफाइड टेस्ट किया जाता है। अभी इस मशीन से टीबी व एचआईवी संक्रमण की जांच की जाती है। अब कोरोना का स्क्रीन टेस्ट किया जा रहा है।
तरीका क्या है : नाक या गले से स्वैब लिया जाता है। इसमें वायरस के न्यूक्लियिक मटीरियल को ब्रेक कर डीएनए और आरएनए जांचा जाता है।
रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : तीन घंटे
एक्यूरेसी कितनी है : 60 से 70 % मरीजों में कोरोना के संक्रमण की संभावना को बताता है। निगेटिव होने पर आरटी-पीसीआर किया जा सकता है।
#4) एंटीबॉडी टेस्ट
क्या है : यह शरीर में पूर्व में हुए कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच के लिए किया जाने वाला टेस्ट है। संक्रमित व्यक्ति का शरीर लगभग एक सप्ताह बाद लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। 9वें दिन से 14वें दिन तक एंटीबॉडी बन जाती है।
तरीका क्या है : खून का सैंपल लेकर किया जाता है।
रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : एक घंटा
एक्यूरेसी कितनी है : कोरोना वायरस की मौजूदगी का सीधा पता नहीं चलता। केवल एंटीबॉडी की उपस्थिति की जानकारी मिलती है। इससे यह पता चलता है कि व्यक्ति को कभी इंफेक्शन हो चुका है। संक्रमण बहुत हल्का होने पर कभी कभी एंटीबॉडी टेस्ट में नहीं पाई जाएगी।
स्लीप एपनिया यानी नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी। स्लीप एपनिया की स्थिति में हमारी नींद कई बार टूटती है। कई स्थितियों में तो सांस रुक भी सकती है। स्लीप एपनिया की स्थिति में हम कई बार करवटें बदलते रहते हैं। आप जानकर हैरान होंगे- देश की 13 फीसदी आबादी ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित है। पुरुषों में 19.7%, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 7.4% है। स्लीप एपनिया की स्थिति में एक घंटे में तीस या इससे ज्यादा बार भी सांस का रुकना या करवटें बदलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। यह एक ऐसा विकार है, जिससे नींद से जुड़ी और समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर- शोध बताते हैं, यदि आपकी रात की नींद एक घंटे भी कम हो जाए तो अगले दिन आपकी अलर्टनेस 32 फीसदी तक कम हो जाएगी। स्लीप एपनिया को समझने से पहले हमें, नींद को समझना जरूरी है। दरअसल, हमारी नींद तीन से चार चक्रों में पूरी होती है। हर चक्र लगभग पांच चरणों से गुजरता है। चौथा चरण सबसे गहरी नींद का होता है। पांचवां चरण REM या रैपिड आई मूवमेंट का चरण होता है। यह वो चरण होता है, जिसमें हम सपने भी देखते हैं। नींद के वक्त ही, हमारे शरीर में ग्रोथ हार्मोन प्रवाहित होते रहते हैं। जिनसे शरीर की दैनिक क्रियाएं होती हैं। नींद के दौरान शरीर का तापमान कम होता है। हृदयगति एवं ब्लड प्रेशर में कमी आती है जिससे दिल को आराम मिलता है।
स्लीप एपनिया में कई बार नींद टूटती है। जिससे इन सभी प्रक्रियाओं में खलल पड़ता है। अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक शोध के अनुसार, कोविड-19 के इस दौर में स्लीप एपनिया की शिकायत और बढ़ सकती है। शिरीष जौहरी, ईएनटी विशेषज्ञ, नेशनल हेल्थ केयर ग्रुप, सिंगापुर बता रहे हैं स्लीप एपनिया है क्या और यह किस तरह से हमारे शरीर पर प्रभाव डालता है।
6 सवाल-जवाब से समझिए स्लीप एपनिया और उससे जुड़े खतरों के बारे में
#1) स्लीप एपनिया आखिर है क्या?
यह एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है। दरअसल, कुछ लोगों में पीठ के बल लेटने से गले की मुक्त पेशियां गुरुत्व के प्रभाव से गले के पिछले हिस्से की ओर फैल जाती हैं। और नींद की शिथिलता में श्वसन मार्ग के बीचों-बीच खिंच जाती हैं। इस खिंचावट से हवा का प्रवाह आंशिक या पूर्ण रूप से बाधित हो सकता है। इससे फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मस्तिष्क इस कमी को दस सेकंड तक ही सह सकता है। ऐसी स्थिति में दिमाग नींद को तोड़ देता है। जैसे ही नींद टूटती है- श्वसन मार्ग फिर खुल जाता है। बार-बार नींद आने और टूटने के इस चक्र को स्लीप एपनिया कहते हैं।
#2) इससे जुड़े प्रमुख लक्षण क्या हैं?
#3) स्लीप एपनिया के कितने प्रकार हैं?
#4) स्लीप एपनिया का इलाज क्या है
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लिए सबसे बेहतर उपचार सीपीएपी (कांटीनुअस पॉजटिव एयरवेज प्रेशर) थेरेपी को माना जाता है। इसकी मदद से सांस लेने वाले वायुमार्गों को खुला रखने के लिए एयर प्रेशर का स्तेमाल किया जाता है। यह काफी सस्ता और प्रभावी है। हालांकि इसके स्थायी उपचार के लिए सर्जरी का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह बहुत ही खर्चीला होता है। इसमें कुछ जोखिम भी हो सकते हैं।
#5) स्लीप एपनिया के खतरे क्या हैं?
स्लीप एपनिया एक खतरनाक स्वास्थ्य समस्या है। इससे खतरनाक ह्रदय रोग और लकवे जैसी गंभीर बीमारियां आपके शरीर पर हमला कर सकती हैं।
#6) खर्राटों का इससे क्या संबंध हैं?
खर्राटे स्लीप एपनिया का लक्षण हो सकते है लेकिन यह स्लीप एपनिया के बगैर भी हो सकते हैं। खर्राटों का होना प्राकृतिक है।
77 मिनट की ही गहरी नींद ले पाते हैं भारतीय
गहरी नींद के मामले में भारतीय सबसे ज्यादा पिछड़े हैं। पूरी रात में औसतन 77 मिनट की गहरी नींद ले पाते हैं। सिंगापुर, पेरू और हॉन्गकॉन्ग के लोग भी सबसे कम सोने वाले लोगों की लिस्ट में शामिल हैं। कम सोने से भारतीयों में स्लीप डिसऑर्डर आम है। ये आंकड़े फिटबिट द्वारा 1 अगस्त 2018 से 31 जुलाई 2019 के बीच किए गए अध्ययन के अनुसार।
खतरा सबसे कम नींद लेने वालों में भारतीयों का स्थान दुनिया में दूसरा
फिटबिट द्वारा 18 देशों में अध्ययन के अनुसार कम नींद के मामले में भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। एक भारतीय औसतन 7 घंटे और 1 मिनट की नींद ले पाता है जबकि हमसे भी कम 6 घंटे 41 मिनट की नींद जापानी लेते हैं।
Rat Snake viral video on Social media: जमीन-जायदाद के लिए इंसानों की लड़ाई के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा पर क्या आप जानते हैं कि जानवरों में भी इस तरह की लड़ाइयां होती हैं? दुनिया में ऐसे बहुत से जानवर और पशु-पक्षी हैं, जो अपने क्षेत्र और दोस्तों के लिए एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं. ऐसे ही वर्चस्व की लड़ाई हुई दो सांपों के बीच.
कोरोना (Corona) काल में घर पर बैठकर फ्रेंडशिप डे (Friendship Day) को कुछ अलग तरीके से सेलिब्रेट करें. इसके लिए आप कुछ अच्छी रेसिपीज (Recipes) भी ट्राई कर सकते हैं. इस फ्रेंडशिप डे पर आप कढ़ाई में सिर्फ 4 चीजों की मदद से सॉफ्ट पाइनएप्पल पेस्ट्री (Pineapple Pastry) बना सकते हैं. इसे घर पर बनाना बहुत ही आसान है और ज्यादा समय भी नहीं लगता. इसका टेस्ट आपके परिवार के सभी लोगों और दोस्तों का मन मोह लेगा. देखें वीडियो और फॉलो करें स्टेप्स. साभार- Youtube/Masala Kitchen
बबीता फोगाट (Babita Phogat) ने अपनी शादी में सात की जगह आठ फेरे लिए थे
वाइल्ड लाइफ (Wildlife) कितनी खूबसूरत होती है. घने पड़े और झाड़ियों के बीच जंगल के राजा शेर की दहाड़, हाथी की पुकार और नदी की आवाज. ये लाइनें पढ़ने के बाद यकीनन आप प्रकृति की खूबसूरती (Nature Beauty) के एहसास में खो गए होंगे.
लॉकडाउन (Lockdown) पर घर में बने आलू ब्रेड रोल (Aloo Bread Roll) आपके भाई को खूब पसंद आएंगे. इसे घर पर बनाना बहुत ही आसान है और यह स्नैक्स के लिए सबकी पसंद बन सकता है. यह खाने में बहुत ही टेस्टी होता है.
Maharashtra SSC Board Result 2020: महाराष्ट्र बोर्ड की दसवीं की परीक्षा के नतीजों का ऐलान हाल ही में किया गया. इस साल दसवीं का कुल परिणाम 95.30 प्रतिशत रहा.
भारत (India) के 34 निशानेबाजों का ओलिंपिक कोर ग्रुप रेंज में एक अगस्त से ट्रेनिंग पर लौटेगा क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने इसे अनिवार्य किया है.
गुड़गांव की शिवानी कटारिया (Shivani Katria) ने 2016 रियो ओलिंपिक (Rio Olympic) में भारत (India) का प्रतिनिधित्तव कियादांत में दर्द हो रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें। यह संक्रमण हो सकता है जो बढ़कर दिमाग तक पहुंच सकता है। ब्रिटेन में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।
35 साल की रेबेका डॉल्टन को चलने में तकलीफ हुई और धीरे-धीरे मेमोरी घटने के बाद हॉस्पिटल लाया गया। जांच करने पर मस्तिष्क में बैक्टीरिया का संक्रमण देखा गया। डॉक्टर्स ने भी उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। रेबेका को लगातार हॉस्पिटल में 5 महीने बिताने पड़े। डिस्चार्ज होने पर उन्होंने कहा, मुझे नया नजरिया मिला है, ये सीख बताती है कि आप कुछ भी हल्के में नहीं ले सकते।
दांत के इलाज के बाद चलने-फिरने में दिक्कत हुई और मेमोरी घटी
रेबेका का इलाज करने वाले डॉक्टर के मुताबिक, दिसम्बर 2019 में उसके दांतों में बैक्टीरिया का संक्रमण हुआ था। जिसे उन्होंने कई बार नजरअंदाज किया। यही बैक्टीरिया दांतों से दिमाग तक पहुंचा। मार्च में दांतों की समस्या का इलाज कर दिया गया था। लेकिन दिक्कत कुछ दिन बाद शुरू हुई जब रेबेका को चलने-फिरने में दिक्कत शुरू हुई। मेमोरी घटने लगी। वह हॉस्पिटल आईं और जांच की गईं।
संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचा और हार्ट और लिवर तक में उसका असर दिखा
डॉक्टर्स के मुताबिक, महिला की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उस बैक्टीरिया का संक्रमण दिमाग तक पहुंचा। जांच रिपोर्ट में इसका असर हार्ट और लिवर तक में दिखा। वह अपने चलने-फिरने की क्षमता खो चुकी थीं। डॉक्टर्स ने रेबेका का मामला हल रॉयल इनफरमरी के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में ट्रांसफर किया। बचने की सम्भावना बेहद कम थी, यह बात रेबेका की मां को बताई जा चुकी थी।
कोरोना की 12 रिपोर्ट निगेटिव आईं और 30 किलो तक वजन घटा
रेबेका का इलाज कोरोना के मरीजों के बीच चल रहा था लेकिन उसकी 12 जांच की गईं जो निगेटिव आईं। लगातार 5 महीनों तक चले इलाज के बाद वह रिकवर हुईं। पिछले हफ्ते इन्हें डिस्चार्ज किया गया है और वजन करीब 30 किलो तक घट चुका है।
सीख मिली कि छोटी से छोटी चीज नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए
रेबेका चार बच्चों की मां हैं। इलाज के दौरान उनका अनुभव कैसा रहा, इस पर वह कहती हैं कि यह सबकुछ एक झटके जैसे था, इससे उबरना काफी मुश्किल रहा। मुझे नया नजरिया मिला है, ये सीख बताती है कि आप कुछ भी हल्के में नहीं ले सकते। छोटी से छोटी चीज भी जान को जोखिम में डाल सकती है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं बबीता फोगाट (Babita Phogat), बीजेपी के टिकट पर दादरी से लड़ चुकी हैं चुनावकोरोना से उबरने के बाद भी वायरस के संक्रमण का असर लम्बे समय तक शरीर में दिख सकता है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल की रिसर्च यही बताती है। शोध के मुताबिक, कोरोना से उबरने वाले 80 फीसदी लोगों में हृदय से जुड़ी दिक्कतें देखी गई हैं। रिसर्च अप्रैल और जून के बीच में हुई थी। इसमें कोरोना के ऐसे मरीज शामिल थे जो संक्रमण से पहले स्वस्थ थे और उम्र 40 से 50 साल के बीच थी।
100 मरीजों पर हुई रिसर्च
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना से पीड़ित 100 लोगों पर रिसर्च की गई। इनमें से 67 मरीज ऐसे थे जो एसिम्प्टोमैटिक थे या इनमें बेहद हल्के लक्षण दिख रहे थे। अन्य 23 मरीजों को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। मरीजों के हार्ट पर कोरोना का क्या असर पड़ रहा है इसे जानने के लिए एमआरआई, ब्लड टेस्ट और हार्ट टिश्यू की बायोप्सी की गई।
78 फीसदी मरीजों के दिल में सूजन
शोधकर्ता क्लायड डब्ल्यू येंसी के मुताबिक, रिसर्च में सामने आया कि 100 में से 78 मरीजों के हार्ट डैमेज हुए और दिल में सूजन दिखी। इससे इस बात के प्रमाण मिले कोरोना से उबरने के बाद बहुत सी बातें सामने आनी बाकी हैं कि भविष्य में शरीर के अंगों पर इसका कितना असर पड़ेगा। जितना ज्यादा संक्रमण बढ़ेगा भविष्य में उतना ज्यादा बुरे साइड-इफेक्ट का खतरा बढ़ेगा।
ब्रिटेन में हुई स्टडी में भी यही पैटर्न नजर आया
ब्रिटेन में हुई एक और ऐसी ही स्टडी में सामने आया कि कोरोना के 1216 मरीजों में संक्रमण के बाद हृदय से जुड़े डिसऑर्डर दिखे। 15 फीसदी मरीजों में हृदय से जुड़े ऐसे कॉम्प्लिकेशंस सामने आए जो बेहद गंभीर थे और जान का जोखिम बढ़ाने वाले थे।
ऐसा क्यों हो रहा है
मरीजों पर लम्बे समय तक कोरोना के साइडइफेक्ट क्यों दिखते हैं, वैज्ञानिक इसका पता लगाने में जुटे हैं। उनका कहना है कि कोरोना सीधे तौर पर मरीजों के फेफड़े पर असर करता है। जिससे शरीर में ऑक्सीजन का लेवल प्रभावित होता है। इस स्थिति में हृदय को ब्लड दूसरे अंगों तक पहुंचाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। लगातार दबाव बने रहने पर हार्ट के टिश्यू कमजोर होने लगते हैं और हृदय रोगों से जुड़े मामले सामने आते हैं।
टोक्यो के ज्यादातर रेस्तरां खाली पड़े हैं लेकिन यहां एक रेस्तरां ऐसा भी है जहां भीड़ नजर आती है। यह टोक्याे का मसातो टेकमाइन चाइनीज रेस्तरां है। यहां सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने और अकेलेपन को दूर करने का अनोखा तरीका ढूंढा गया है। रेस्तरां में मॉडल कस्टमर (डमी) रखे गए हैं। जो आपको खाना खाते समय अकेलेपन का अहसास नहीं होने देते और परिजनों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग भी बरकरार रखने में मदद करते हैं।
जापानी ड्रेस में दिखे मॉडल कस्टमर
रेस्तरां में 16 पुतलों को मॉडल कस्टमर के तौर पर रखा गया है। सभी मॉडल अलग-अलग मूड के हैं। कुछ ने जापानी पोशाक किमोनो पहन रखी है तो कुछ ने वेस्टर्न ड्रेस का पहना हुआ है।

पहले सोशल डिस्टेंसिंग के लिए टेबल हटाई गई थीं
रेस्तरां का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए पहले टेबल हटाई गई थीं ताकि अधिक जगह हो जाए। लेकिन ऐसा करने पर यहां आने वाले लोगों को काफी अकेलापन महसूस होता था। ऐसा लगता था कि रेस्तरां में कंस्ट्रक्शन वर्क चल रहा है।

बाहर से देखने पर रेस्तरां में भीड़ नजर आती है
रेस्तरां ओनर के मुताबिक, इन पुतलों के कारण रेस्तरां को बाहर से देखने के कारण भीड़ नजर आती है। कस्टमर को सर्विस देने के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं या नहीं।





Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...