Tuesday, June 30, 2020

बच्चों को शख्स से बचाने के लिए कुत्ते ने खेला माइंड गेम- Video वायरल

इस बार एक प्यारे से कुत्ते का शख्स के साथ माइंड गेम (Mind Game) खेलते हुए वीडियो वायरल (Video Viral) हो रहा है. इस वीडियो को देखने के बाद आप भी समझ जाएंगे कि कुत्ते जितने वफादार होते हैं, उतने ही समझदार भी होते हैं.

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जुपिटर या डोसा? इस फोटो को देखकर कंफ्यूज हो गए लोग!

क्या आपने कभी डोसा (Dosa) खाया है? बताइए, बताइए इसमें डर किस बात का है. अब डोसा खाया है तो खाया है. अब जरा ऊपर दी गई फोटो को ध्यान से देखिए और बताइए ये क्या है? कंफ्यूज बिल्कुल भी नहीं होना है और फोटो को ध्यान से देखकर ही जवाब देना है कि ये है क्या?

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Recipe: इस बार घर पर ट्राई करें सोन पापड़ी की रेसिपी, दूसरी मिठाई भूल जाएंगे

इस बार आप मिठाई की दुकान पर मिलने वाली नरम सोन पापड़ी (Soan Papdi) की रेसिपी (Recipe) घर पर ही ट्राई कर सकते हैं. इसे घर पर बनाना आसान है.

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VIDEO: भूखी बकरी ने पत्तियां खाने के लिए पेड़ तक पहुंचने को अपनाया ये 'जुगाड़'

बकरी (Goat) के इस वायरल वीडियो (Viral Video) को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. ट्विटर पर इसे 12000 से भी अधिक बार देखा जा चुका है.

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हर दिन मरीजों को बचाने का हौंसला जुटाती हैं, लेकिन घर आकर अपनों का दर्द नहीं बांट पातीं

आज भारत में डॉक्टर्स डे मनाया जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानी और बंगाल के सीएम रहे भारत रत्न डॉ. बिधानचंद्र रॉय की याद में मनाया जाने वाला यह दिन इस बार विशेष भी है। आज का दिन दिन-रात जुटे उन डॉक्टर्स को सलाम करने का है जिनके लिए कोरोनावायरस को हराना ही एकमात्र लक्ष्य है।

दुनिया के हर देश में पहुंचे कोरोना से लड़ने के लिए इन फ्रंटलाइन डॉक्टर्स की हजारों कहानियां है। त्याग, समर्पण और संघर्ष की इन कहानियों में ही जिंदगी की उम्मीदे जगमगा रही हैं क्योंकि इस 2020 के डॉक्टर्स डे पर ऐसा लगता है कि हमारा हर दिन डॉक्टर्स की मेहरबानी पर है।

आज इस दिन के मौके परफोटो में देखते हैं फिलीपींस के दो डॉक्टर की कहानी जो बताती है कि हालात कितने मुश्किल हैं और डॉक्टर कितनी हिम्मत के साथ डटे हैं। (सभी फोटो रायटर्सएजेंसी के सौजन्य से)

सबसे पहले फिलीपींस के मनीला में काम कर रही डॉ जेन क्लेरी डोराडो की कहानी। यहां की राजधानी मनीला के ईस्ट एवेन्यू मेडिकल सेंटर हॉस्पिटल में कोविड-19 के इमरजेंसी रूम में काम की जिम्मेदारी लेने वाली इस डॉक्टर की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। जब उन्होंने काम शुरू किया तो सबसे पहले मन में आया कि अब घर नहीं जाना है ताकि परिवारजनों को इंफेक्शन से बचा सकूं, लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाईं।

बीते दो महीने से डॉ. जेन हर रोज बड़े हौसले के साथ कोविड-19 इमरजेंसी रूम में अपनी सेवाएं दे रही हैं। हर रोज वे करीब 12 घंटे की शिफ्ट करने के बाद घर लौटती हैं तो उनके मन में हमेशा यही डर होता है कि मैं कहीं इंफेक्शन का कारण न बन जाऊं।
30 साल की डॉ. जेन के पैरेंट्स ने अपनी डॉक्टर बेटी पर बहुत दबाव बनाया कि वह उनके साथ घर में रहें, लेकिन बेटी उनसे दूर रहना चाहती थी। ऐसे में उनके पिता ने अपने स्टोरेज रूम में ही एक प्लास्टिक शीट और फॉइल लगाकर आइसोलेशन एरिया बना दिया। अब हर रोज डॉ. जेन हॉस्पिटल से घर पहुंचकर बाहर शूज उतारती हैं और उसी आइसोलेशन एरिया में रात बिताती हैं।
उनके पैंरेट्स की चिंता है कि वे बेटी के लिए कुछ कर सकें। इसीलिए वे उसके लिए खाना पहले ही एक स्टूल पर रख देते हैं और खुद प्लास्टिक शीट में बनी खिड़की से उसे देखते रहते हैं। डॉ. जेन भी उनका वहीं से हालचाल पूछती हैं। वे अपनी प्यारी बिल्ली को दुलार भी उसी खिड़की से कर लेती हैं।
डॉ. जेन डोराडो कहती हैं कि, ये सबसे मुश्किल घड़ी होती है क्योंकि मैं अपनों के पास होकर भी उनसे दूर हूं। लेकिन, ये करना ही पड़ेगा क्योंकि और कोई विकल्प भी नहीं है। मेरी मां की इच्छा मुझे को गले लगाने की होती है, लेकिन मैं उन्हें ऐसा न करने देने के लिए मजबूर हैं।
हॉस्पिटल में डॉ. जेन और उनके साथियों का अधिकतर समय आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की देखभाल में बीतता है। उनके देश में कोरोना के कारण सैकड़ों मेडिकल वर्कर्स संक्रमित हुए हैं और 30 से ज्यादा डॉक्टरों की भी मौत हो चुकी है। बावजूद इसके वे पूरे हौसले से जुटी हुई हैं।
यह दूसरी कहानी मनीला की ही एक अन्य डॉक्टर की है जो बच्चों को बचाने में जुटी हैं। 38 साल की पेडियाट्रिशियन डॉ. मीका बास्टिलो मनीला के एक दूसरे हिस्से में बच्चों के हॉस्पिटल में काम करती है जो कि अब एक कोविड रेफरल फेसिलिटी बना दिया गया है। डॉ. मीका कहती हैं कि, मेरी फैमिली चाहती हैं कि मैं अपना काम छोड़ दूं, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा करना सही नहीं, क्योंकि मैं जहां जाऊंगा कोरोना को तो फेस करना ही पड़ेगा।
डॉ. मीका के पिता और उनकी बहन भी काफी बीमार हैं और उन्हें भी मेडिकल सपोर्ट पर रखा गया है, बावजूद इसके उनके परिवार ने अपने घर के बाहर अस्थायी जगह बना दी है जिसमें जरूरत भर का सामान है। डॉ. मीका रोज यहीं रहती है और इसे अपना "क्वारैंटाइन होम" कहती हैं।बारिश से बचने के लिए इस तंबू नुमा जगह को प्लास्टिक शीट से ढंक दिया गया है और इसी के जरिये उनका परिवार आपस में सुरक्षित सोशल डिस्टेंसिंग रखता है।
डॉ. मीका कहती हैं, "मेरी मां ने इसमें परदे और टेबल क्लॉथ लगा दिए हैं जिससे कि ये घर जैसा नजर आए.... और मेरे भाई ने प्लास्टिक शीट से सेपरेशन बना दिया है।कोरोना के कारण बिगड़ते हालात के बीच डॉ. मीका हर रात N95 लगाकर परिवार के साथ प्रार्थना करती है कि ईश्वर हमें इस विपदा से उबार ले और इसी के साथ अगले दिन की तैयारियों में जुट जाती है क्योंकि उन्हें हॉस्पिटल में अपना कर्त्तव्य निभाना होता है।

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National Doctors Day 2020; How doctors shield families from COVID-19 with 'quarantent', safe spaces


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डॉ. बिधान चंद्र रॉय से जुड़े 4 किस्से : जब गांधी ने कहा, तुम 40 करोड़ देशवासियों का फ्री इलाज नहीं करते हो तो बिधान चंद्र बोले, मैं 40 करोड़ लोगों के प्रतिनिधि का इलाज मुफ्त कर रहा हूं

दुनियाभर के मरीजों को बचाने में कोरोनावॉरियर यानी डॉक्टर्स जुटे हैं। संक्रमण के बीच वो मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं और खुद को बचाने की जद्दोजहद में भी लगे हैं। आज नेशनल डॉक्टर्स डे है, जो देश के प्रसिद्ध चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधानचंद्र रॉय के सम्मान में मनाया जाता है। केंद्र सरकार ने देश में डॉक्टर्स डे मनाने की शुरुआत 1 जुलाई 1991 में की। 1 जुलाई उनका जन्मदिवस है। जानिए उनकी लाइफ से जुड़े 5 दिलचस्प किस्से...

डॉ. बिधान चंद्र रॉय बापू के पर्सनल डॉक्टर भी थे और एक दोस्त भी।

किस्सा 1 : जब बापू ने बिधान चंद्र से कहा, तुम मुझसे थर्ड क्लास वकील की तरह बहस कर रहे हो

1905 में जब बंगाल का विभाजन हो रहा था जब बिधान चंद्र रॉय कलकत्ता यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने की जगह अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और धीरे-धीरे बंगाल की राजनीति में पैर जमाए। इस दौरान वह बापू महात्मा गांधी के पर्सनल डॉक्टर रहे।

1933 में ‘आत्मशुद्धि’ उपवास के दौरान गांधी जी ने दवाएं लेने से मना कर दिया था। बिधान चंद्र बापू से मिले और दवाएं लेने की गुजारिश की। गांधी जी उनसे बोले, मैं तुम्हारी दवाएं क्यों लूं? क्या तुमने हमारे देश के 40 करोड़ लोगों का मुफ्त इलाज किया है?

इस बिधान चंद्र ने जवाब दिया, नहीं, गांधी जी, मैं सभी मरीजों का मुफ्त इलाज नहीं कर सकता। लेकिन मैं यहां मोहनदास करमचंद गांधी को ठीक करने नहीं आया हूं, मैं उन्हें ठीक करने आया हूं जो मेरे देश के 40 करोड़ लोगों के प्रतिनिधि हैं।इस पर गांधी जी ने उनसे मजाक करते हुए कहा, तुम मुझसे थर्ड क्लास वकील की तरह बहस कर रहे हो।

यह तस्वीर उस दौर की है जब डॉ. रॉय पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री थे।

दूसरा किस्सा : रॉय इतने बड़े हैं कि नेहरू भी उनके हर मेडिकल ऑर्डर मानते हैं

डॉ. बिधान चंद्र रॉय की तारीफ का सबसे चर्चित किस्सा देश के पहले प्रधाानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से जुड़ा है। बिधानचंद्र देश के उन डॉक्टर्स में से एक थे जिनकी हर सलाह का पालन पंडित जवाहर लाल पूरी सावधानी के साथ करते हैं। इसका जिक्र पंडित जवाहर लाल ने वॉशिग्टन टाइम्स को 1962 में दिए एक इंटरव्यू में किया था। उन्होंने उस दौर की बात अखबार से साझा की जब वो काफी बीमार थे और इलाज के लिए डॉक्टर्स का एक पैनल बनाया गया था, जिसमें रॉय शामिल थे। इंटरव्यू के बाद अखबार ने लिखा था, रॉय इतने बड़े हैं कि नेहरू भी उनके हर मेडिकल ऑर्डर का पालन करते हैं।

डॉ. रॉय ने बंगाल में कई संस्थानों और 5 शहरों की स्थापना की। इनमें दुर्गापुर, कल्यानी, अशोकनगर, बिधान नगर और हाबरा शामिल है।

तीसरा किस्सा : सामाजिक भेदभाव का शिकार हुए, अमेरिक रेस्तरां ने रॉय को बाहर निकल जाने को कहा

1947 में बिधानचंद्र खाने के लिए अमेरिका के रेस्तरां पहुंचे तो उन्हें देखकर सर्विस देने से मना कर दिया गया। पूरा घटनाक्रम न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, रॉय अपने पांच दोस्तों के साथ रेस्तरां पहुंचे। उनको देखकर रेस्तरां ऑपरेटर ने महिला वेटर से कहा, उनसे कहें, यहां उन्हें सर्विस नहीं जाएगी, वो यहां से खाना लेकर बाहर जा सकते हैं।

यह बात सुनने के बाद रॉय वहां से उठे और चले गए। घटना के बाद इस सामाजिक भेदभाव का पूरा किस्सा रिपोर्टर से साझा किया और भारत लौट आए।

डॉ. रॉय को 1961 में भारत सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया था।

चौथा किस्सा : आर्थिक तंगी से जूझ रहे सत्यजीत रे को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई

जाने माने फिल्मकार सत्यजीत रे को अपनी फिल्म पाथेर पंचाली बनाने के लिए आर्थिक संघर्ष से जूझना पड़ा था। कई दिक्कतों के बाद उनकी मां ने उन्हें अपने परिचितों से मिलवाया। रॉय उनमें से एक थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री भी थे। रॉय सत्यजीत रे के इस प्रोजेक्ट से काफी प्रभावित हुए और उन्हें सरकारी आर्थिक मदद देने के लिए राजी हुए। इतना ही नहीं फिल्म पूरी होने के बाद रॉय ने जवाहर लाल नेहरू के लिए इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग भी रखवाई। फिल्म में गरीबी से जूझते देश की कहानी दिखाई गई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय साल्ट लेक सुधार स्कीम के उद्घाटन के दौरान। यह तस्वीर 16 अप्रैल 1962 की है। काले चश्मे में डॉ. रॉय (दाएं)

पांचवा किस्सा : डीन से 30 मुलाकातों के बाद उन्हें लंदन में मिला एडमिशन

रॉय हायर स्टडी के लिए 1909 में लंदन के सेंट बार्थोलोमिव्स हॉस्पिटल पहुंचे थे। लेकिन यहां उनके लिए एडमिशन लेना आसान नहीं रहा। सेंट बार्थोलोमिव्स हॉस्पिटल के डीन ने रॉय को एडमिशन न देने के लिए काफी कोशिशें की। उन्होंने करीब डेढ़ महीने तक रॉय को रोके रखा ताकि वे वापस लौट जाएं। रॉय ने भी एडमिशन के अपनी कोशिशें जारी रखीं। डीन से एडमिशन के लिए 30 बार मुलाकात की। अंतत: डीन का दिल पिघला और एडमिशन देने के लिए राजी हुए।



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National Doctors Day 2020; Four Interesting Facts About Dr Bidhan Chandra Roy


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अब फेफड़े ही नहीं शरीर के हर अंग पर नजर रखने की जरूरत, ब्रेन से लिवर तक कोरोना पहुंचा; रेमेडेसिवीर,  डेक्सामेथासोन ड्रग लाइफ सेवर साबित हुईँ

महामारी के छह महीने बीत चुके हैं लेकिन न तो वैक्सीन तैयार हो पाई है न ही मामले थमते नजर आ रहे हैं। दुनियाभर में कोरोना का आंकड़ा एक करोड़ पार कर चुका है। इन छह महीनों में डॉक्टर्स और अस्पतालों ने कोरोना पीड़ितों के इलाज के दौरान कई नई बातें सीखी और समझी हैं। कोविड-19 के मामले सर्दी, सूखी खांसी और सांस की तकलीफ के साथ शुरू हुए थे लेकिन अब इसके लक्षणों में भी बढ़ोतरी हुई है। ब्रेन स्ट्रोक, पेट में तकलीफ, शरीर में खून के थक्के समेत कई नए लक्षण नजर आ चुके हैं। आज नेशनल डॉक्टर्स डे है। इस मौके परजानिए कोरोना के जरिए विशेषज्ञों को मिली ऐसी पांच सीख जो इलाज में काम आईं...

पहली सीख : कोविड के मरीजों में खून के थक्के जमने पर थिनिंग एजेंट देने से घटे

कोरोना से जूझ रहे मरीजों में खून के थक्के जमने के मामले बेहद आम हो रहे हैं। जो ब्रेन स्ट्रोक की वजह बन सकते हैं। इसका असर दिमाग से लेकर पैर के अंगूठों तक हो रहा है। अमेरिका की ब्रॉउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले दो महीने से कोरोना संक्रमितों में त्वचा फटने, स्ट्रोक और रक्तधमनियों के डैमेज होने के मामले भी दिख रहे हैं।

खून को पतला करने वालों की दवाओं (थिनिंग एजेंट) से कोरोना पीड़ितों की हालत को 50 फीसदी तक सुधारा जा सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं के मुताबिक, वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों को अगर ऐसी दवाएं दी जाएं तो उनके बचने की दर 130 फीसदी तक बढ़ जाती है। दवा से गाढ़े खून को पतला करने के इलाज को एंटी-कोएगुलेंट ट्रीटमेंट कहते हैं। शोध करने वाली न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम की टीम का कहना है कि यह नई जानकारी कोरोना के मरीजों को बचाने में मदद करेगी।

दूसरी सीख : फेफड़े के अलावा वायरस हार्ट, ब्रेन, किडनी और लिवर पर अटैक कर सकता है

कोरोना वायरस अब सिर्फ फेफड़े ही नहीं हार्ट, ब्रेन, किडनी और लिवर पर भी अटैक कर सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ब्रेन थैरेपी को कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए मददगार बताया है। केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, मस्तिष्क के कुछ जरूरी हिस्से ऐसे होते हैं जो सांसों और रक्तसंचार को कंट्रोल करते हैं।

अगर ऐसे हिस्सों को टार्गेट करने वाली थैरेपी का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया जाए तो उन्हें वेंटिलेटर से दूर किया जा सकता है। अब मरीजों में कोरोना शरीर के दूसरे अंगों को कितना नुकसान पहुंचा रहा है, डॉक्टर्स इसे भी मॉनिटर कर रहे हैं।


तीसरी सीख : एंटीवायरल रेमेडेसिवीर, स्टीरॉयड डेक्सामेथासोन और प्लाज्मा से बेहतर नतीजे मिल रहे

रिसर्च में अब तक एंटीवायरल रेमेडेसिवीर, स्टीरॉयड डेक्सामेथासोन ही दो ऐसी दवाएं हैं जिनका असर कोरोना के मरीजों पर बेहतर असर दिखा है। कई देशों में इसका इस्तेमाल मरीजों पर करने की अनुमति भी मिल चुकी है।

अमेरिकी फार्मा कंपनी गिलीड साइंसेज के पास रेमडेसिवीर का पेटेंट हैं। ग्लेन फार्मा और हेटरो लैब्स के बाद अब सिप्ला ने कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिवीर की जेनरिक मेडिसिन पेश की है। इसका नाम सिप्‍रिमी रखा गया है। हाल ही में भारत में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने हेटरो लैब्‍स को रेमेडेसिवीर के जेनरिक वर्जन के मैन्युफैक्चर और सप्लाई की अनुमति दी थी। हेटरो यह दवा भारत में कोविफॉर नाम से बेचेगी जो गेम चेंजर साबित हो सकती है।

कोरोना के मरीजों में कौन सी दवा सटीक काम कर रही है, इस सर गंगाराम हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. माला श्रीवास्तव का कहना है कि कुछ मरीजों में एंटीवायरल, स्टीरॉयड दवाएं बेहतर काम कर रही हैं कुछ में प्लाज्मा थैरेपी। कोरोना के मरीजों के लिए कौन सी एक दवा बेहतर है, यह कहना मुश्किल है।

चौथी सीख : जितनी ज्यादा टेस्टिंग करेंगे उतनी तेजी से हॉस्पिटल में मरीजों का दबाव घटेगा

विशेषज्ञों का कहना मरीजों की संख्या बढ़ने की बड़ी वजह यह नहीं है कि वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है बल्कि जांच में तेजी आने से मरीज सामने आ रहे हैं। अधिक से अधिक जांच बेहद जरूरी है। मरीज जितनी जल्दी सामने आएंगे मामले कम होंगे और हॉस्पिटल में बढ़ रहे मरीजों की संख्या घटेगी। उन पर इलाज करने का दबाव कम होगा।

हाल ही में आईसीएमआर ने भी अपनी जांच करने की रणनीति का दायरा बढ़ाया है। एसिम्प्टोमैटिक, सिम्प्टोमैटिक की जांच के अलावा इनसे मिलने वालों का भी आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की गाइडलाइन जारी की है।


पांचवी सीख : दुनियाभर में कोरोना से जुड़ी हर नई जानकारी डॉक्टर्स तक पहुंचना जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के मरीजों में दिख रहे नए लक्षण, रिसर्च और वैक्सीन से जुड़े हर अपडेट की जानकारी दुनियाभर के विशेषज्ञों तक पहुंचना जरूरी है। जैसे खाने का स्वाद न मिलना और खुश्बू को न पहचान पाना जैसे लक्षण अमेरिका और ब्रिटेन के कोरोना पीड़ितों में देखे गए, बाद में ये हर देशों के मरीजों में दिखे। ऐसे मामले आम होने के बाद इसके लक्षण अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था सीडीसी ने अपनी गाइडलाइन में शामिल किया। देश में भी इसे कोरोना का लक्षण माना गया। ऐसे मामलों की जानकारी विशेषज्ञों को कोरोना के मामले समझने में मददगार साबित होती है।



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National Doctors Day 2020; what covid teached to doctors and hospitals 5 learning of corona pandemic


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कोलकाता से लंदन तक चलती थी बस सेवा...45 दिनों में पूरी होती थी यात्रा

70 के दशक तक सिडनी की एक टूर एजेंसी कोलकाता से लेकर लंदन तक और लंदन से कोलकाता तक आऱामदायक बस सेवा चलाती थी. इसमें खान-पान, रास्ते में होटलों में ठहरने और बसों में स्लिपिंग की व्यवस्था होती थी. ये बस कई देशों से होते हुए जाती-आती थी.

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टिंडे को पनीर में मिलाकर बनाएं या रोस्ट करें, इससे बनी ये 3 डिशेज घर में सबको आएंगी पसंद

टिंडे कई लोगों को बेस्वाद और बोरियत भरी सब्जी लगती है। पर इसे बनाने की कुछ ऐसी रेसिपी हैं जो सबको पसंद आसकती है। इस तरह ये आम सब्जी भी खास और टेस्टी बनेगी।इसकी ये तीन रेसिपी ट्राय करके देखें।

पनीर टिंडे

क्या चाहिए...

टिंडे- 250 ग्राम

पनीर-50 ग्राम

जीरा- आधाछोटा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

हल्दी- आधाछोटा चम्मच

धनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मच

सौंफ दरदरी- आधाछोटा चम्मच,

अमचूर पाउडर-आधा छोटा चम्मच,

अदरक- 1 इंच बारीक कटा हुआ

हरी मिर्च- 1 बारीक कटी हुई

तेल- 1 बड़ा चम्मच

ऐसे बनाएं...

- टिंडे छील लें और ऊपर का हिस्सा ढक्कन की तरह गोलाई में काट लें। पीलर से टिंडे के अंदर का गूदा निकाल दें। कटा हुआ ऊपरी गोल हिस्सा टिंडे के ऊपर ढक्कन की तरह रखें। इसी प्रकार सभी टिंडों का गूदा निकालें।

- अब भरावन की सामग्री तैयार करने के लिए कड़ाही में ज़रा-सा तेल डालकर जीरा तड़काएं। फिर अदरक, हरी मिर्च, टिंडों का गूदा और पनीर डालकर चलाएं। नमक और सभी मसाले डालकर अच्छी तरह से मिलाएं और भूनें। मसाला ठंडा करके टिंडों में भर लें। हर टिंडे का कटा हुआ ऊपरी गोल हिस्सा टिंडों के ऊपर ढक्कन की तरह रखकर बंद करें।

- अब कड़ाही में तेल गर्म करें और टिंडों को इसमें सीधा रखें। इसे ढंककर कुछ देर पकाएं। एक-दो बार ध्यान से चलाएं ताकि मसाला बाहर न निकले। जब टिंडे गल जाएं, तो उन्हें आंच से उतार लें। बचा हुआ मसाला ऊपर से डालकर परोसें।

मलाई टिंडे

क्या चाहिए...

टिंडे- 500 ग्राम

अदरक पेस्ट- 1 छोटा चम्मच

हरी मिर्च- 1 छोटा चम्मच बारीक कटी हुई

जीरा पाउडर- 1 छोटा चम्मच

हींग- चुटकी भर

दरदरी सौंफ- 1 छोटा चम्मच

धनिया पाउडर- 1 बड़ा चम्मच

हल्दी- आधाछोटा चम्मच

अमचूर पाउडर- आधाछोटा चम्मच

दरदरा अनारदाना- आधाछोटा चम्मच

गरम मसाला- आधाछोटा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

मलाई- 1 छोटा चम्मच

तेल- 1 बड़ा चम्मच

ऐसे बनाएं...

- टिंडे छीलकर चार फांकों में फूल बनाते हुए चीरें, लेकिन ध्यान रहे कि निचले हिस्से में फांकेंजुड़ी रहनी चाहिए। एक बाउलमें तेल को छोड़कर सारी सामग्री मिला लें।

- अब इसे टिंडों में भर लें। कड़ाही में तेल गर्म करके भरे हुए टिंडे डालें। थोड़ा-सा नमक बुरक दें। कड़ाही ढंककर धीमी आंच पर पकाएं।

- अगर ढक्कन समतल है, तो इसमें पानी भर दें जिससे टिंडे जलेंगे नहीं। बीच-बीच में इन्हें चलाते रहें। जब टिंडे अच्छी तरह से गल जाएं, तो इन्हें उलट-पलटसकते हैं। तैयार टिंडों के ऊपरहरा धनिया डालकर परोसें।

रोस्टेड टिंडे

क्या चाहिए...

टिंडे- 250 ग्राम

पनीर- 100 ग्राम कद्दूकस किया हुआ

जीरा- 1 छोटा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

हल्दी- छोटा चम्मच

दरदरी सौंफ- 1 बड़ा चम्मच

धनिया पाउडर- 1 बड़ा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मच

अमचूर पाउडर- आधाछोटा चम्मच

गरम मसाला- आधाछोटा चम्मच

अदरक- 1 इंच बारीक कटा हुआ

प्याज़- 1 छोटे आकार की

हरी मिर्च- 1 बारीक कटी हुई

तेल- 2 बड़े चम्मच

ऐसे बनाएं...

- टिंडे का ऊपरी हिस्सा गोलाकार में काटकर अलग रखें। फिर अंदर का गूदा निकालकर खोखला करें। भरावन सामग्री तैयार करने के लिए प्याज़ मिक्सी में पीसें।

- टिंडे का गूदा भी पीस लें। कड़ाही में तेल गर्म करके जीरा तड़काएं। फिर प्याज़ डालकर हल्का ब्राउनहोने तक भूनें।

- अदरक, हरी मिर्च, टिंडों का गूदा और कद्दूकस किया हुआ पनीर डालकर अच्छी तरह से भूनें। फिर सभी मसाले डालकर मिलाएं और ठंडा कर लें।

- भरावन सामग्री टिंडों में भरकर ऊपर से गोलाकार कटा हिस्सा लगा दें। कड़ाही में तेल गर्म करके टिंडे छौंकें। कड़ाही को ढक्कन से बंद करें और ऊपर पानी भर दें। जब टिंडे पक जाएं और गल जाएं, तो आंच से उतार लें। टमाटर और खीरे के टुकड़ों से सजाकर परोसें।



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Make or roast Tinde by mixing it in paneer, these 3 dishes made from it will be liked by everyone at home


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Recipe Video: इस बार घर पर बनाएं रेस्तरां स्टाइल में लच्छा पराठा

अगर आप आलू (Potato) और प्याज (Onion) के पराठे बनाकर थक गए हैं तो इस बार उसमें थोड़ा सा टि्वस्ट जरूर लाएं. ऐसे में लच्छा पराठा (Lachcha Paratha) आपके लिए एक अच्छा और आसान ऑप्शन साबित हो सकता है. इसे अपने पसंद के किसी भी मेन डिश के साथ लंच या डिनर के समय आप ले सकते हैं जो किसी को भी खाना काफी भाता है. गेहुं के आटे (Wheat Flour) से बनाएं ढेर सारे लच्छों वाला लच्छा पराठा जिसके लच्छे गिनते-गिनते आप थक जाऐंगे. देखें वीडियो (Video) और फॉलो करें स्टेप्स. साभार- Youtube/Eat Yummiecious

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टिंडे को पनीर में मिलाकर बनाएं या रोस्ट करें, इससे बनी ये 3 डिशेज घर में सबको आएंगी पसंद

टिंडे कई लोगों को बेस्वाद और बोरियत भरी सब्जी लगती हैं। पर इस बनाने की कुछ ऐसी रेसिपी हैं कि ये किसी भी व्यंजन से टक्कर ले सकती है। इस तरह ये आम सब्जी भी खास और टेस्टी लग सकती है।

पनीर टिंडे

क्या चाहिए...

टिंडे- 250 ग्राम

पनीर-50 ग्राम

जीरा- आधाछोटा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

हल्दी-छोटा चम्मच

धनिया पाउडर- 1 छोटा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मच

सौंफ दरदरी- छोटा चम्मच,

अमचूर पाउडर- छोटा चम्मच,

अदरक- 1 इंच बारीक कटा

हरी मिर्च- 1 बारीक कटी हुई,

तेल- 1 बड़ा चम्मच

ऐसे बनाएं...

- टिंडे छील लें और ऊपर का हिस्सा ढक्कन की तरह गोलाई में काट लें। पीलर से टिंडे के अंदर का गूदा निकाल दें। कटा हुआ ऊपरी गोल हिस्सा टिंडे के ऊपर ढक्कन की तरह रखें। इसी प्रकार सभी टिंडों का गूदा निकालें।

- अब भरावन सामग्री तैयार करने के लिए कड़ाही में ज़रा-सा तेल डालकर जीरा तड़काएं। फिर अदरक, हरी मिर्च, टिंडों का गूदा और पनीर डालकर चलाएं। नमक और सभी मसाले डालकर अच्छी तरह से मिलाएं और भूनें। मसाला ठंडा करके टिंडों में भर लें। हर टिंडे का काटा हुआ ऊपरी गोल हिस्सा टिंडों के ऊपर ढक्कन की तरह रखकर बंद करें।

- अब कड़ाही में तेल गर्म करें और टिंडों को इसमें सीधा रखें। इसे ढंककर कुछ देर पकाएं। एक-दो बार ध्यान से चलाएं ताकि मसाला बाहर न निकले। जब टिंडे गल जाएं, तो उन्हें आंच से उतार लें। बचा हुआ मसाला ऊपर से डालकर परोसें।

मलाई टिंडे

क्या चाहिए...

टिंडे- 500 ग्राम

अदरक पेस्ट- 1 छोटा चम्मच

हरी मिर्च- 1 छोटा चम्मच बारीक कटी हुई

जीरा पाउडर- 1 छोटा चम्मच

हींग- चुटकी भर

दरदरी सौंफ- 1 छोटा चम्मच

धनिया पाउडर- 1 बड़ा चम्मच

हल्दी- आधाछोटा चम्मच

अमचूर पाउडर- आधाछोटा चम्मच

दरदरा अनारदाना- आधाछोटा चम्मच

गरम मसाला- आधाछोटा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

मलाई- 1 छोटा चम्मच

तेल- 1 बड़ा चम्मच

ऐसे बनाएं...

- टिंडे छीलकर चार फांकों में फूल बनाते हुए चीरें, लेकिन ध्यान रहे कि निचले हिस्से में फांकंे जुड़ी रहनी चाहिए। बोल में तेल को छोड़कर सारी सामग्री मिला लें।

- अब इसे टिंडों में भर लें। कड़ाही में तेल गर्म करके भरे हुए टिंडे डालें। थोड़ा-सा नमक बुरक दें। कड़ाही ढंककर धीमी आंच पर पकाएं।

- अगर ढक्कन समतल है, तो इसमें पानी भर दें जिससे टिंडे जलेंगे नहीं। बीच-बीच में इन्हें चलाते रहें। जब टिंडे अच्छी तरह से गल जाएं, तो इन्हें उलट-पलट कर सकते हैं। तैयार टिंडों पर ऊपर हरा धनिया डालकर परोसें।

रोस्टेड टिंडे

क्या चाहिए...

टिंडे- 250 ग्राम

पनीर- 100 ग्राम कद्दूकस किया हुआ

जीरा- 1 छोटा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

हल्दी- छोटा चम्मच

दरदरी सौंफ- 1 बड़ा चम्मच

धनिया पाउडर- 1 बड़ा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर- छोटा चम्मच

अमचूर पाउडर- छोटा चम्मच

गरम मसाला- छोटा चम्मच

अदरक- 1 इंच बारीक कटा हुआ

प्याज़- 1 छोटे आकार का

हरी मिर्च- 1 बारीक कटी हुई

तेल- 2 बड़े चम्मच

ऐसे बनाएं...

- टिंडे का ऊपरी हिस्सा गोलाकार में काटकर अलग रखें। फिर अंदर का गूदा निकालकर खोखला करें। भरावन सामग्री तैयार करने के लिए प्याज़ मिक्सी में पीसें।

- टिंडे का गूदा भी पीस लें। कड़ाही में तेल गर्म करके जीरा तड़काएं। फिर प्याज़ डालकर भूरा होने तक भूनें।

- अदरक, हरी मिर्च, टिंडों का गूदा और कद्दूकस किया हुआ पनीर डालकर अच्छी तरह से भूनें। फिर सभी मसाले डालकर मिलाएं और ठंडा कर लें।

- भरावन सामग्री टिंडों में भरकर ऊपर से गोलाकार कटा हिस्सा लगा दें। कड़ाही में तेल गर्म करके टिंडे छौंकें। कड़ाही को ढक्कन से बंद करें और ऊपर पानी भर दें। जब टिंडे पक जाएं और गल जाएं, तो आंच से उतार लें। टमाटर और खीरे के टुकड़ों से सजाकर परोसें।



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Make or roast Tinde by mixing it in paneer, these 3 dishes made from it will be liked by everyone at home


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अगर पति ने पत्नी को छोड़ दिया है या तलाक दे दिया है, तो महिलाएं धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते की मांग कर सकती हैं

जब परिवार में कमाने वाला एक ही व्यक्ति हो और वो भी अपनों की ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ ले, तो परिजन कहां जाएं? इन हालातों मेंबच्चों की पढ़ाई, घर और अन्य सदस्यों की ज़रूरत के ख़र्चों की ज़िम्मेदारी घर की महिला पर ही आ जाती है, तो उसे दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इस दौरान परिवार को आर्थिक संबल की आवश्यकता होती है। इसी आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था क़ानून ने गुज़ारा भत्ते के रूप में की है। कहने को यह पारिवारिक मामला है, लेकिन ये आपका हक़ भी है। क्या होता है गुज़ारा भत्ता, आइए विस्तार से जानते हैं।

क्या कहता है क़ानून

गुज़ारा भत्ता अधिनियम धारा 125 का उपयोग अधिकांशत: भारतीय विवाहित स्त्रियों द्वारा ही किया जाता है। अगर पति ने पत्नी को छोड़ दिया है या तलाक़ दे दिया है, तो महिलाएं धारा 125 के तहत हक़ मांग सकती हैं।

अगर घर पर रहने के बावजूद कमाने वाला व्यक्ति परिवार की ज़िम्मेदारी लेने से मना करता है, तब भी इस अधिनियम के तहत पत्नी, बच्चे, बूढ़े माता-पिता का जीवनभर भरण-पोषण करना कमाने वाले व्यक्ति या पति की ज़िम्मेदारी है।

गुज़ारा भत्ता बढ़ाया जा सकता है

परिवार को भरण-पोषण के तौर पर कितना भुगतान किया जाना ज़रूरी है, यह पति की कुल आय के आधार पर तय होता है। इसके लिए दावेदार को भरण-पोषण की जितनी रक़म चाहिए होगी, उसे अदालत के सामने रखना होता है। कमाने वाले की आय के सबूत के तौर पर वेतन का ब्योरा या आयकर रिटर्न आदि अदालत के समक्ष रखना होता है जिसके आधार पर फैसला होता है।

भरण-पोषण कितना मिल सकता है उसकी गणना चाइल्ड मेंटनेंस सर्विस से करवाई जा सकती है। अगर पति की आमदनी बढ़ती है और पत्नी ख़र्च बढ़ने के चलते भत्ता बढ़ाने की मांग करती है, तो इस स्थिति में गुज़ारा भत्ता बढ़ाया जा सकता है।

कौन अर्ज़ी लगा सकता है

परिवार का कोई भी सदस्य जो निर्भर हो वे खाना, कपड़े, पढ़ाई, इलाज, दवाई, किराया आदि का ख़र्च मांग सकते हैं। इस एक्ट के तहत पत्नी, अवयस्क संतान,पुत्र या पुत्री जो भरण-पोषण कर पाने में असमर्थ हैं, मांग कर सकते हैं। जब तक पुत्र वयस्क न हो जाए, तब तक उसके सारे ख़र्चे और भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी पिता की होगी।

पुत्री की शादी तक उसकी ज़िम्मेदारी पिता की रहेगी। शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ पुत्र या पुत्री की ज़िम्मेदारी भी पिता की है। अगर महिला की आय पति से कम है, तो वो अर्ज़ी लगा सकती है। यदि उसकी आय पति से अधिक है, तो वो इसकी हक़दार नहीं है। इसके अलावा माता-पिता, जो अपना भरण-पोषण कर पाने में असमर्थ हैं, वे भी मांग कर सकते हैं।

विधवा पुत्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उसके ससुर की होगी। इसके लिए वह पिता से मांग नहीं कर सकती।

पुरुष भी मांग सकते हैं गुज़ारा भत्ता

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 और सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति या पत्नी, दोनों में से किसी को भी भत्ता मिल सकता है। हालांकि पति को तभी गुज़ारा भत्ता मिलेगा, अगर वह शारीरिक रूप से अक्षम हो जिसके चलते वह कमा नहीं सकता हो।



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If the husband has left the wife or divorced, then women can demand alimony under section 125


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अगर पति ने पत्नी को छोड़ दिया है या तलाक दे दिया है, तो महिलाएं धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते की मांग कर सकती हैं

जब परिवार में कमाने वाला एक ही व्यक्ति हो और वो भी अपनों की ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ ले, तो परिजन कहां जाएं? इन हालातों मेंबच्चों की पढ़ाई, घर और अन्य सदस्यों की ज़रूरत के ख़र्चों की ज़िम्मेदारी घर की महिला पर ही आ जाती है, तो उसे दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इस दौरान परिवार को आर्थिक संबल की आवश्यकता होती है। इसी आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था क़ानून ने गुज़ारा भत्ते के रूप में की है। कहने को यह पारिवारिक मामला है, लेकिन ये आपका हक़ भी है। क्या होता है गुज़ारा भत्ता, आइए विस्तार से जानते हैं।

क्या कहता है क़ानून

गुज़ारा भत्ता अधिनियम धारा 125 का उपयोग अधिकांशत: भारतीय विवाहित स्त्रियों द्वारा ही किया जाता है। अगर पति ने पत्नी को छोड़ दिया है या तलाक़ दे दिया है, तो महिलाएं धारा 125 के तहत हक़ मांग सकती हैं।

अगर घर पर रहने के बावजूद कमाने वाला व्यक्ति परिवार की ज़िम्मेदारी लेने से मना करता है, तब भी इस अधिनियम के तहत पत्नी, बच्चे, बूढ़े माता-पिता का जीवनभर भरण-पोषण करना कमाने वाले व्यक्ति या पति की ज़िम्मेदारी है।

गुज़ारा भत्ता बढ़ाया जा सकता है

परिवार को भरण-पोषण के तौर पर कितना भुगतान किया जाना ज़रूरी है, यह पति की कुल आय के आधार पर तय होता है। इसके लिए दावेदार को भरण-पोषण की जितनी रक़म चाहिए होगी, उसे अदालत के सामने रखना होता है। कमाने वाले की आय के सबूत के तौर पर वेतन का ब्योरा या आयकर रिटर्न आदि अदालत के समक्ष रखना होता है जिसके आधार पर फैसला होता है।

भरण-पोषण कितना मिल सकता है उसकी गणना चाइल्ड मेंटनेंस सर्विस से करवाई जा सकती है। अगर पति की आमदनी बढ़ती है और पत्नी ख़र्च बढ़ने के चलते भत्ता बढ़ाने की मांग करती है, तो इस स्थिति में गुज़ारा भत्ता बढ़ाया जा सकता है।

कौन अर्ज़ी लगा सकता है

परिवार का कोई भी सदस्य जो निर्भर हो वे खाना, कपड़े, पढ़ाई, इलाज, दवाई, किराया आदि का ख़र्च मांग सकते हैं। इस एक्ट के तहत पत्नी, अवयस्क संतान,पुत्र या पुत्री जो भरण-पोषण कर पाने में असमर्थ हैं, मांग कर सकते हैं। जब तक पुत्र वयस्क न हो जाए, तब तक उसके सारे ख़र्चे और भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी पिता की होगी।

पुत्री की शादी तक उसकी ज़िम्मेदारी पिता की रहेगी। शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ पुत्र या पुत्री की ज़िम्मेदारी भी पिता की है। अगर महिला की आय पति से कम है, तो वो अर्ज़ी लगा सकती है। यदि उसकी आय पति से अधिक है, तो वो इसकी हक़दार नहीं है। इसके अलावा माता-पिता, जो अपना भरण-पोषण कर पाने में असमर्थ हैं, वे भी मांग कर सकते हैं।

विधवा पुत्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उसके ससुर की होगी। इसके लिए वह पिता से मांग नहीं कर सकती।

पुरुष भी मांग सकते हैं गुज़ारा भत्ता

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 और सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति या पत्नी, दोनों में से किसी को भी भत्ता मिल सकता है। हालांकि पति को तभी गुज़ारा भत्ता मिलेगा, अगर वह शारीरिक रूप से अक्षम हो जिसके चलते वह कमा नहीं सकता हो।



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ढलती उम्र में मां बनने का सपना पूरा करने की कारगर तकनीक, 32 से 40 साल की उम्र के बीच फ्रीज करवा सकते हैं अंडे

लाइफस्टाइल में बदलाव, पढ़ाई व कॅरिअर के बदलते माहौल और देर से शादी होने की वजह से कंसीव करनेकी उम्र बढ़ती जा रही है। कई युवतियां एक निश्चित उम्र तक सही पार्टनर न मिल पाने की वजह से भी सिंगल रह जाती हैं।

फिर सही पार्टनर मिल जाने पर जब शादी होती है तो कंसीव कर पाने की उम्र लगभग निकल जाती है।इन महिलाओं द्वारा बढ़ती उम्र में कंसीव करने का सपना सच करने में फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तकनीक ''सोशल एग फ्रीजिंग'' कारगर साबित हो रही है।

तेजी से अपनाया जा रहा है
हमारे समाज में लोगों की आधुनिक होतीसोच की वजह से इस तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है।मेट्रो सिटीज के अलावा छोटे शहरों में भी एग फ्रीजिंग का ट्रेंड चल रहा है।

गुड़गांव के क्लाउडिन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की क्लीनिकल डायरेक्टर, फर्टिलिटी डॉ. बीना मुकेश इस बारे में बताती हैं कि महिलाओं में बढ़ती उम्र में फर्टिलिटी प्रॉब्लम को रोकने में ये तकनीक इफेक्टिव है।

परिपक्व अंडे निकाले जाते हैं

सोशल एग फ्रीजिंग के तहत अंडाशय से परिपक्व अंडे निकाले जाते हैं। फिर इन्हेंफ्रीज करके भविष्य में उपयोग के लिए रख दिया जाता है। इस प्रकार फ्रीज हुए अंडो को जरूरतपड़ने पर प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है।

ये तकनीक महिलाओं के लिए उस समय कारगर हो जाती है जब उम्र अधिक होने पर एकमहिला अपने पार्टनर से खुद की संतान चाहती है। कई बार स्पर्म डोनर के साथ भी इन अंडों को इस्तेमाल में लाया जाता है।

सपने को पूरा करने में मददगार

कई बार जब महिलाएं 40 की उम्र के बाद मां बनना चाहती हैं तो यही स्टोरिंग एग मां बनने के सपने को पूरा करने में उनकी मदद करते हैं।

गौरतलब है किमहिलाओं की फर्टिलिटी को बनाए रखने में जितना महत्व अंडों की निश्चित संख्या का है, उतना ही उनकी गुणवत्ता का भी है।

जॉबकी चाहत में मां नहीं बनपाती

एग क्वालिटी से पैदा होनेवाले शिशु के सामान्य या असामान्य होने का पता चलता है। जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, अंडों में पाए जाने वाले डीएनए कम होते जाते हैं।

कई महिलाएं मां बनने की सही उम्र होने पर भी परिवार में बढ़ते तनाव या अन्य परेशानियों के चलतेमां नहीं बनपाती हैं। इन महिलाओं के लिए उम्र बढ़ जाने पर भी कंसीव करनाएग फ्रीजिंग जैसी तकनीक से सहारे संभव हो सकता है।

केनेडियन फर्टिलिटी और एंड्रोलॉजी सोसायटी ने 2014 में एग फ्रीजिंग को अधिक उम्र में मां बनने का सपना पूरा करने का कारगरतरीका बताया है।

किसी वरदान से कम नहीं है

फर्टिलिटी एंग्जाइटी को कम करने का यह तरीका उन महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है जो 30-40 की उम्र कार्पोरेट कल्चर में ऊंचाईयां पानेमें बिताती हैं। चालीस के बाद संतान की चाहत को पूरा करने में यह तकनीक उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

एग फ्रीज करवाने की सही उम्र
आमतौर पर महिलाओं को 32 से 36 साल की उम्र के बीच अपने एग फ्रीज करवाना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं कर पाती तो 40 की उम्र तक भी अपने एगफ्रीज करवा सकती हैं।

इस तकनीक की मदद से एक या दो साइकिल में अंडों की ज्यादा तादाद फ्रीज हो जाती है। एक आईवीएफ लैब में ये अंडे कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रह सकते हैं।



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Effective technique of fulfilling the dream of becoming a mother at the age of waning, eggs can freeze between 32 and 40 years of age


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ढलती उम्र में मां बनने का सपना पूरा करने की कारगर तकनीक, 32 से 40 साल की उम्र के बीच फ्रीज करवा सकते हैं अंडे

लाइफस्टाइल में बदलाव, पढ़ाई व कॅरिअर के बदलते माहौल और देर से शादी होने की वजह से कंसीव करनेकी उम्र बढ़ती जा रही है। कई युवतियां एक निश्चित उम्र तक सही पार्टनर न मिल पाने की वजह से भी सिंगल रह जाती हैं।

फिर सही पार्टनर मिल जाने पर जब शादी होती है तो कंसीव कर पाने की उम्र लगभग निकल जाती है।इन महिलाओं द्वारा बढ़ती उम्र में कंसीव करने का सपना सच करने में फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन तकनीक ''सोशल एग फ्रीजिंग'' कारगर साबित हो रही है।

तेजी से अपनाया जा रहा है
हमारे समाज में लोगों की आधुनिक होतीसोच की वजह से इस तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है।मेट्रो सिटीज के अलावा छोटे शहरों में भी एग फ्रीजिंग का ट्रेंड चल रहा है।

गुड़गांव के क्लाउडिन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की क्लीनिकल डायरेक्टर, फर्टिलिटी डॉ. बीना मुकेश इस बारे में बताती हैं कि महिलाओं में बढ़ती उम्र में फर्टिलिटी प्रॉब्लम को रोकने में ये तकनीक इफेक्टिव है।

परिपक्व अंडे निकाले जाते हैं

सोशल एग फ्रीजिंग के तहत अंडाशय से परिपक्व अंडे निकाले जाते हैं। फिर इन्हेंफ्रीज करके भविष्य में उपयोग के लिए रख दिया जाता है। इस प्रकार फ्रीज हुए अंडो को जरूरतपड़ने पर प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है।

ये तकनीक महिलाओं के लिए उस समय कारगर हो जाती है जब उम्र अधिक होने पर एकमहिला अपने पार्टनर से खुद की संतान चाहती है। कई बार स्पर्म डोनर के साथ भी इन अंडों को इस्तेमाल में लाया जाता है।

सपने को पूरा करने में मददगार

कई बार जब महिलाएं 40 की उम्र के बाद मां बनना चाहती हैं तो यही स्टोरिंग एग मां बनने के सपने को पूरा करने में उनकी मदद करते हैं।

गौरतलब है किमहिलाओं की फर्टिलिटी को बनाए रखने में जितना महत्व अंडों की निश्चित संख्या का है, उतना ही उनकी गुणवत्ता का भी है।

जॉबकी चाहत में मां नहीं बनपाती

एग क्वालिटी से पैदा होनेवाले शिशु के सामान्य या असामान्य होने का पता चलता है। जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, अंडों में पाए जाने वाले डीएनए कम होते जाते हैं।

कई महिलाएं मां बनने की सही उम्र होने पर भी परिवार में बढ़ते तनाव या अन्य परेशानियों के चलतेमां नहीं बनपाती हैं। इन महिलाओं के लिए उम्र बढ़ जाने पर भी कंसीव करनाएग फ्रीजिंग जैसी तकनीक से सहारे संभव हो सकता है।

केनेडियन फर्टिलिटी और एंड्रोलॉजी सोसायटी ने 2014 में एग फ्रीजिंग को अधिक उम्र में मां बनने का सपना पूरा करने का कारगरतरीका बताया है।

किसी वरदान से कम नहीं है

फर्टिलिटी एंग्जाइटी को कम करने का यह तरीका उन महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है जो 30-40 की उम्र कार्पोरेट कल्चर में ऊंचाईयां पानेमें बिताती हैं। चालीस के बाद संतान की चाहत को पूरा करने में यह तकनीक उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

एग फ्रीज करवाने की सही उम्र
आमतौर पर महिलाओं को 32 से 36 साल की उम्र के बीच अपने एग फ्रीज करवाना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं कर पाती तो 40 की उम्र तक भी अपने एगफ्रीज करवा सकती हैं।

इस तकनीक की मदद से एक या दो साइकिल में अंडों की ज्यादा तादाद फ्रीज हो जाती है। एक आईवीएफ लैब में ये अंडे कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रह सकते हैं।



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भारतीय खिलाड़ियों को डोपिंग से बचाएगा यह मोबाइल ऐप , खेलमंत्री ने बताया कैसे?

खिलाड़ियों का डोप टेस्ट जल्दी और आसानी से कराने के लिए ऐप डोपिंग नियंत्रण अधिकारी को उनकी उपलब्धता रिकॉर्ड कराने की भी सुविधा देता है.

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8 गोल्‍ड मेडल जीत चुकी हैं ये भारतीय खिलाड़ी, अब गलियों में बेच रही है सब्‍जी

झारखंड की इस खिलाड़ी को आर्थिक परेशानियों के कारण गलियों में सब्जी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

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Diwali 2020: परफेक्ट हलवाई स्टाइल में घर पर ऐसे बनाएं गुजिया, ये हैं 5 टिप्‍स

Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...