Wednesday, September 30, 2020

Covid-19: जानें ट्रेन यात्रा के दौरान किन नियमों का पालन करना है जरूरी

आपको ट्रेन (Train) से कहीं जाना है, तो IRCTC की वेबसाइट से ऑनलाइन टिकट (Online Ticket) बुक करवा सकते हैं. मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए भी ऐसा किया जा सकता है.

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केरल की अपर्णा कांच की बेकार बोतलों से बनाती हैं होम डेकोरेशन का सामान, यहां आने वाले टूरिस्टों को देती हैं पर्यावरण बचाने का संदेश

केरल की रहने वाली 24 साल की अपर्णा इधर-उधर से कांच की बोतलें उठाकर लाती हैं और उससे होम डेकोरेट करने वाले बेहद खूबसूरत प्रोडक्ट बनाती हैं। बीएड कर चुकी यह छात्रा आर्ट एंड क्राफ्ट के लिए वेस्टेज बोतलें ही इस्तेमाल करती हैं।

पर्यावरण के प्रति जागरूक अपर्णा मन्रोतुरुत्तु में रहती हैं। यह स्थान कोल्लम से कुछ दूर एक टूरिस्ट प्लेस हैं। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला 2017 में शुरू हुआ। मां को वेस्ट से बेस्ट बनाते देखकर इनकी रूचि भी इस क्षेत्र में बढ़ी।


इनका गांव टूरिस्ट प्लेस होने के कारण उन्हें अपने क्षेत्र में कूड़ा व कांच की बोतलें पड़ीं दिखती थीं। अपर्णा पढ़ने के लिए रोजाना कोल्लम जाती थीं और लौटते वक्त सड़क पर पड़ी बोतलें घर ले जाती थीं। यह देख लोग हंसा करते थे और चिढ़ाकर उनका काम 'कुप्पी' रख दिया था। अपर्णा इन्हीं बोतलों को साफ करके कलात्मक बनातीं और सोशल मीडिया पर पोस्ट करती थीं। कई लोगों ने इनकी तारीफ की।

अपर्णा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली और लोगों से अपने क्षेत्र की अष्टमुडी झील साफ करने के लिए मदद मांगी तो कई लोग आगे आए। इसी साल 17 से 21 मार्च तक उन्होंने सोशल मीडिया के दोस्तों के साथ मिलकर पूरी झील साफ कर दी। इसमें से निकली बोतलों से सभी लोगों ने तरह तरह की वस्तुएं बनाकर सड़क किनारें सजा दीं। अपर्णा चाहती हैं कि लोग कचरा न करने के लिए जागरूकता फैलाएं।

अपर्णा को चिढ़ाए जाने वाले कुप्पी शब्द को ही उन्होंने रजिस्टर्ड कराया और घर के कमरे को कुप्पी स्टूडियो में बदल दिया। उसके बाहर बोतलों से बनाई बेहतरीन कलाकृतियां रखीं। यहां से वे टूरिस्टों और अन्य लोगों को वर्कशॉप देती हैं।

इसके अलावा स्कूलों में जाकर बच्चों को सीखाती हैं कि वेस्ट को क्राफ्ट में कैसे बदलते हैं। लॉकडाउन में इनके ऑनलाइन सेशन कामयाब रहे और काफी लोगों ने वेस्ट से बनाई वस्तुएं पोस्ट की। जब उनसे बच्चे इसे सीखते हैं वो उन्हें खुशी होती है।



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Aparna of Kerala makes home decorations with useless glass bottles, gives a message to the tourists coming here to save the environment


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केरल की अपर्णा कांच की बेकार बोतलों से बनाती हैं होम डेकोरेशन का सामान, यहां आने वाले टूरिस्टों को देती हैं पर्यावरण बचाने का संदेश

केरल की रहने वाली 24 साल की अपर्णा इधर-उधर से कांच की बोतलें उठाकर लाती हैं और उससे होम डेकोरेट करने वाले बेहद खूबसूरत प्रोडक्ट बनाती हैं। बीएड कर चुकी यह छात्रा आर्ट एंड क्राफ्ट के लिए वेस्टेज बोतलें ही इस्तेमाल करती हैं।

पर्यावरण के प्रति जागरूक अपर्णा मन्रोतुरुत्तु में रहती हैं। यह स्थान कोल्लम से कुछ दूर एक टूरिस्ट प्लेस हैं। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला 2017 में शुरू हुआ। मां को वेस्ट से बेस्ट बनाते देखकर इनकी रूचि भी इस क्षेत्र में बढ़ी।


इनका गांव टूरिस्ट प्लेस होने के कारण उन्हें अपने क्षेत्र में कूड़ा व कांच की बोतलें पड़ीं दिखती थीं। अपर्णा पढ़ने के लिए रोजाना कोल्लम जाती थीं और लौटते वक्त सड़क पर पड़ी बोतलें घर ले जाती थीं। यह देख लोग हंसा करते थे और चिढ़ाकर उनका काम 'कुप्पी' रख दिया था। अपर्णा इन्हीं बोतलों को साफ करके कलात्मक बनातीं और सोशल मीडिया पर पोस्ट करती थीं। कई लोगों ने इनकी तारीफ की।

अपर्णा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली और लोगों से अपने क्षेत्र की अष्टमुडी झील साफ करने के लिए मदद मांगी तो कई लोग आगे आए। इसी साल 17 से 21 मार्च तक उन्होंने सोशल मीडिया के दोस्तों के साथ मिलकर पूरी झील साफ कर दी। इसमें से निकली बोतलों से सभी लोगों ने तरह तरह की वस्तुएं बनाकर सड़क किनारें सजा दीं। अपर्णा चाहती हैं कि लोग कचरा न करने के लिए जागरूकता फैलाएं।

अपर्णा को चिढ़ाए जाने वाले कुप्पी शब्द को ही उन्होंने रजिस्टर्ड कराया और घर के कमरे को कुप्पी स्टूडियो में बदल दिया। उसके बाहर बोतलों से बनाई बेहतरीन कलाकृतियां रखीं। यहां से वे टूरिस्टों और अन्य लोगों को वर्कशॉप देती हैं।

इसके अलावा स्कूलों में जाकर बच्चों को सीखाती हैं कि वेस्ट को क्राफ्ट में कैसे बदलते हैं। लॉकडाउन में इनके ऑनलाइन सेशन कामयाब रहे और काफी लोगों ने वेस्ट से बनाई वस्तुएं पोस्ट की। जब उनसे बच्चे इसे सीखते हैं वो उन्हें खुशी होती है।



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International Coffee Day 2020: बिल्ली और हाथी के गोबर से तैयार होती हैं दुनिया की ये सबसे महंगी कॉफ़ी, कीमत जान उड़ जाएंगे होश

International Coffee Day 2020: दुनिया की इन कॉफ़ी को मुंह लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बात नहीं तो पछतायेंगे...

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Recipe: वीकेंड पर Bigg Boss 14 की प्रीमियर नाइट का मजा लें और खाएं चिली फिश

चिली फिश (Chilli Fish) बनाने के लिए बोनलेस फिश को सोया सॉस (Soya Sauce), टोमैटो सॉस (Tomato Sauce) और चिली सॉस (Chilli Sauce), अदरक (Ginger) और लहसुन (Garlic) के साथ मिलाकर फ्राई (Fry) किया जाता है.

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कॉफी के बीज खाकर पहली बार बकरियां झूमने लगीं थीं, जब इसकी भुनी खुशबू नशे की तरह चढ़ी तो इंसानों के भी मुंह लग गई कॉफी

अमूमन लोग कॉफी तब पीते हैं जब बॉडी में एनर्जी की कमी महसूस करते हैं या तनाव से जूझ रहे होते हैं। लेकिन कॉफी के सबसे पुराने ठिकाने इथियोपिया में ऐसा नहीं है। यहां की हर दावत में आपको कॉफी मिलेगी। अफ्रीकी देश इथियोपिया को कॉफी का जन्मस्थल कहते हैं।

आज वर्ल्ड कॉफी डे है, इस मौके पर कॉफी के सबसे बड़े ठिकाने से जानिए 4 दिलचस्प किस्से

1. जब कॉफी के बीज खाने के बाद बकरियां झूमने लगी थीं
इथियोपिया में कॉफी की खुशबू को कैसे पहचाना गया, इसका यहां एक सबसे दिलचस्प किस्सा मशहूर है। एक समय यहां कालदी नाम का चरवाहा अपनी बकरियों को काफा के जंगल से लेकर निकलता था। एक दिन उसने देखा, यहां जमीन पर पड़ी लाल चेरियां खाने के बाद बकरियां खुशी से झूम रही हैं। चरवाहे ने कुछ चेरियां तोड़ीं और खाईं। स्वाद पसंद आने पर चेरियों को अपने चाचा के पास ले गया।

चाचा बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और मठ में रहते थे। उन्होंने मजहबी बंदिश के कारण कॉफी की चेरी को आग में डाल दिया। जैसे ही बीजों ने जलना शुरू किया उसकी खुशबू नशे की तरह चढ़ने लगी। इसके बाद कालदी के चाचा ने इन बीजों का इस्तेमाल खुशबू के लिए करना शुरू किया।

इन्हीं लाल चेरियों से बीज निकालकर उससे कॉफी तैयार की जाती है।

2. जले हुए कॉफी के बीजों को पानी में डाला और ऐसे हुई इसकी शुरुआत
इथियोपिया में काफा के रहने वाले मेसफिन तेकले कहते हैं, यहां कॉफी का चलन कैसे शुरू हुआ इसकी कहानी मैंने अपने दादा से सुनी थी। वह कहते थे एक बार चरवाहे कालदी की मां ने आग में जले हुए बीजों को साफ किया। फिर इसे ठंडा होने के लिए पानी में डाल दिया और तेज खुशबू आने लगी। यहीं से कॉफी पीने का चलन शुरू हुआ।

मेसफिन कहते हैं, यहां के जंगल दुनियाभर के लिए एक तोहफे की तरह हैं। दुनियाभर के लोग यहां पर उगी कॉफी की चुस्कियां लेते हैं। कॉफी यहां की मेहमाननवाजी का हिस्सा है। बचपन से लड़कियों को इसे तैयार करना सिखाया जाता है।

कॉफी सेरेमनी की तैयारी।

3. सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए 3 घंटे चलती है कॉफी सेरेमनी
इथियोपिया में हर खुशी के मौके पर कॉफी सेरेमनी आयोजित की जाती है। यह 2 से 3 घंटे का प्रोग्राम होता है। कॉफी को सर्व करने का काम घर की महिलाएं और बच्चे करते हैं। यह तैयार भी अलग तरह से होती है। कॉफी के दानों को रोस्ट करके उसे पीसते हैं और गर्म पानी के साथ मिलाते हैं। इसमें दूध नहीं मिलाया जाता है लेकिन शक्कर की मात्रा अधिक रहती है। तैयार होने के बाद इसे सुराहीनुमा बर्तन में लाते हैं और मेहमानों को सर्व करते हैं।

4. यहां कॉफी के पेड़ लगाए नहीं जाते, अपने आप उग आते हैं
इथियोपिया के जंगल में कॉफी की 5 हजार से अधिक किस्में हैं। यहां की जमीन कॉफी के लिए इतनी उपजाऊ है कि पौधे लगाए नहीं जाते, अपने आप जमीन से उग आते हैं। यूनेस्को की रिपोर्ट कहती है, 40 साल पहले इथियोपिया के 40 फीसदी इलाकों में काॅफी के जंगल थे। अब ये घटकर 30 फीसदी रह गए हैं।

कैसे हुई इंटरनेशनल कॉफी डे की शुरुआत
इस दिन का मकसद कॉफी को प्रमोट करना और इसे एक ड्रिंक के तौर पर सेलिब्रेट करना है। इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 2015 को हुई जब इटली के मिलान में इंटरनेशनल कॉफी ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत हुई।

साभार : बीबीसी, होमग्राउंड्स, कम्युनिकॉफी डॉट कॉम



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International coffee day 2020 interesting fact from home of coffee Ethiopia


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बीते 50 सालों में 70% बीमारियां जानवरों से फैली हैं, इसीलिए रिसर्च कहती हैं कि बचना है तो डाइट में फल-सब्जियां आज से ही बढ़ा लें

वायरस के संक्रमण से बचना है तो वेजिटेरियन डाइट ही सेफ विकल्प है। स्वाइन फ्लू से लेकर कोरोना का संक्रमण फैलाने तक में जानवर एक बड़ी कड़ी साबित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, पिछले 50 सालों में 70 फीसदी वैश्विक बीमारियां जानवरों के जरिए फैली हैं।

कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि हृदय रोग, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम करना चाहते हैं तो वेजिटेरियन डाइट लें। खाने में फल-सब्जियों की मात्रा को बढ़ाएं। आज वर्ल्ड वेजिटेरियन डे है, इस मौके पर जानिए शाकाहारी खाना आपकी जिंदगी में कितना बदलाव जाता है....


4 वजह: वेजिटेरियन खाना क्यों बेहतर है

1. वायरल डिसीज का खतरा कम हो जाता है
2013 में आई यूनाइटेड नेशंस की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है, दुनियाभर में 90% से ज्यादा मांस फैक्ट्री फार्म से आता है। इन फार्म्स में जानवरों को ठूंस-ठूंसकर रखा जाता है और यहां साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता। इस वजह से वायरल डिसीज फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में गुजरात में फैली वायरल डिसीज कांगो फीवर में भी संक्रमित जानवरों से इंसान को खतरा बताया गया है।

2. दिल ज्यादा खुश रहता है और बीमार कम होता है
नॉनवेज के मुकाबले वेजिटेरियन डाइट आपको ज्यादा स्वस्थ रखती है, इस पर रिसर्च की मुहर भी लग चुकी है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित रिसर्च कहती है, हृदय रोगों का खतरा घटाना है तो शाकाहारी खाना खाइए।

इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में 44,561 लोगों पर हुई रिसर्च हुई। इसमें सामने आया कि नॉन-वेजिटेरियन के मुकाबले जो लोग वेजिटेरियन डाइट ले रहे थे उनमें हृदय रोगों के कारण हॉस्पिटल में भर्ती करने की आशंका 32 फीसदी तक कम है। इनमें कोलेस्ट्रॉल का लेवल और ब्लड प्रेशर दोनों ही कम था।

3. फल-सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो कैंसर का खतरा घटता है
अब तक सैकड़ों ऐसी रिसर्च सामने आ चुकी हैं जो कहती हैं, खाने में अगर फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो कैंसर का खतरा कम हो जाता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च के मुताबिक, अगर डाइट से रेड मीट को हटा देते हैं तो कोलोन कैंसर होने का खतरा काफी हद तक घट जाता है।

4. डायबिटीज कंट्रोल करना है तो 50% तक फल-सब्जियां खाएं
वियतनाम के मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. बिस्वरूप चौधरी कहते हैं, अगर ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो दिनभर की डाइट में 50 फीसदी से ज्यादा फल और सब्जियां लें। इसके बाद ही अनाज शामिल करें। नॉनवेज, अंडा, मछली, मक्खन और रिफाइंड फूड लेने से बचें। ऐसा करते हैं तो ब्लड शुगर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अब बात उस पहल की जिसके कारण यह दिन शुरू हुआ
दुनियाभर के लोगों को शाकाहारी खाना खाने के लिए प्रेरित करने और इसके फायदे बताने के लिए वर्ल्ड वेजिटेरियन डे की शुरुआत हुई। 1 अक्टूबर 1977 को नॉर्थ अमेरिकन वेजिटेरियन सोसायटी ने यह पहल शुरू की।

इस लक्ष्य लोगों को यह भी समझाना था कि वेजिटेरियन डाइट नॉनवेज फूड से ज्यादा हेल्दी है। वेजिटेरियन डाइट बॉडी में अधिक फैट नहीं बढ़ाती और हृदय रोगों का खतरा कम करती है। इसमें मौजूद फायबर और एंटीऑक्सीडेंट्स में कैंसर से लड़ने की क्षमता है।

क्या होगा अगर सभी वेजिटेरियन बन जाएं?

  • 2016 में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की एक स्टडी आई थी। इसमें कहा गया था कि अगर दुनिया की सारी आबादी मांस छोड़कर सिर्फ शाकाहार खाना खाने लगे तो 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 70% तक की कमी आ सकती है।
  • अंदाजन दुनिया में 12 अरब एकड़ जमीन खेती और उससे जुड़े काम में इस्तेमाल होती है। इसमें से भी 68% जमीन जानवरों के लिए इस्तेमाल होती है। अगर सब लोग वेजिटेरियन बन जाएं तो 80% जमीन जानवरों और जंगलों के लिए इस्तेमाल में लाई जाएगी।
  • इससे कार्बन डाय ऑक्साइड की मात्रा कम होगी और क्लाइमेट चेंज से निपटने में मदद मिलेगी। बाकी बची हुई 20% जमीन का इस्तेमाल खेती के लिए हो सकेगा। जबकि, अभी जितनी जमीन पर खेती होती है, उसके एक-तिहाई हिस्से पर जानवरों के लिए चारा उगाया जाता है।

वेजिटेरियन और वेगन डाइट के फर्क को भी समझ लें

वेगन और वेजिटेरियन डाइट में एक सबसे बड़ा अंतर है। वेगन डाइट में ज्यादातर ऐसे फूड शामिल हैं जो पेड़े-पौधों से सीधे तौर पर मिलते हैं। वेगन डाइट में एक बात का खासतौर पर ध्यान दिया जाता है कि जो भी फूड ले रहे हैं वो रसायनिक पदार्थों से तैयार न हुए हों। यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार होने वाले फूड होने चाहिए।



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World Vegetarian Day 2020: What Are The Advantages Of Vegetarian Food For Your Health? Four Reasons for Going Veggie


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पेलेस्टिनियन ट्रेवल ब्लॉगर सोशल मीडिया के जरिये दे रहीं फिलिस्तीनी पर्यटन को बढ़ावा, इंटरनेशनल ट्रेवलिंग पर प्रतिबंध के दौर में काम कर गई उनकी मेहनत

वेस्ट बैंक में स्थानीय फिलिस्तीनी पर्यटन को बढ़ावा देने वाली दो ट्रैवल ब्लॉगर्स चर्चा में हैं। वेस्ट बैंक में ईसाई, मुस्लिम और यहूदियों के ऐसे कई पवित्र स्थल हैं जो पर्यटकों के बीच चर्चित रहते हैं। यहां के हेब्रोन और नब्लस की पहाड़ियां देखने के लायक हैं जो लॉकडाउन से पहले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही हैं।

आमतौर पर फिलीस्तीनी दूर दराज के इन स्थलों पर जाने से बचते हैं। ऐसे में मलक हसन और बिसन अलहजहसन ने अपने ब्लॉग और इंस्टाग्राम के माध्यम से 'अहलान पेलेस्टाइन' नाम से पेज की शुरुआत की है। इसका मतलब होता है 'हैलो पेलेस्टाइन'। इस पेज के माध्यम से ये दोनों ट्रेवल ब्लॉगर लोगों को ट्रेवल डेस्टिनेशन से जुड़ी जानकारी देती हैं। साथ ही वे कब और कहां जाए, इसे बारे में जानकारी भी देते हैं।

मलक और बिसन वेस्ट बैंक के पास आर्कियोलॉजिकल साइट पर सेल्फी लेते नजर आ रही हैं। ये दोनों यंग ब्लॉगर खूबसूरत साइट की तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पेज पर अपलोड करती हैं ताकि दूसरे लोग भी यहां जाने के बारे में विचार करें।

इन दोनों ने मिलकर मई में अपने पेज की शुरुआत की थी। फिलहाल उनके 5,600 फॉलोअर्स हैं। वे चाहती हैं कि कोरोना के प्रभाव से जब इंटरनेशनल ट्रेवलिंग पर प्रतिबंध हैं, ऐसे में पेलेस्टियंस को लोकल डेस्टिनेशंस की सैर करना चाहिए।

इस इमेज को शेयर करते हुए इन दोनों ने लिखा - ''इस वक्त हम दोनों आर्टासा गांव में हैं। इस गांव के बारे में हमने पहले भी बहुत सुना था। वैसे भी ये हफ्ता हमारे लिए खास है क्योंकि इस दौरान हमें यहां आने का मौका मिला। ये गांव बेथलेहम क्षेत्र में है''।

इस गांव की खूबसूरती का अंदाजा ट्रेवल ब्लॉगर्स द्वारा अपलोड की गई इस फोटो को देखकर लगाया जा सकता है। इसका यूनिक आर्किटेक्चर तारीफ के काबिल है। यहां जाने का सबसे अच्छा समय सुबह 7 बजे से लेकर शाम को 5 बजे तक है। इसकी सुंदरता देखने के लायक है।

इन दोनों को इस बात की खुशी है कि इनके एक छोटे से प्रयास से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। एक दुकान के मालिक ने इस बारे में जब बिसेन को बताया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वे कहती हैं - ''हम दोनों की कोशिश से अंजान टूरिस्ट प्लेस के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ी है''।



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Two Palestinian travel bloggers promoting Palestinian tourism through social media, their efforts worked during the period of international travel ban


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पेलेस्टिनियन ट्रेवल ब्लॉगर सोशल मीडिया के जरिये दे रहीं फिलिस्तीनी पर्यटन को बढ़ावा, इंटरनेशनल ट्रेवलिंग पर प्रतिबंध के दौर में काम कर गई उनकी मेहनत

वेस्ट बैंक में स्थानीय फिलिस्तीनी पर्यटन को बढ़ावा देने वाली दो ट्रैवल ब्लॉगर्स चर्चा में हैं। वेस्ट बैंक में ईसाई, मुस्लिम और यहूदियों के ऐसे कई पवित्र स्थल हैं जो पर्यटकों के बीच चर्चित रहते हैं। यहां के हेब्रोन और नब्लस की पहाड़ियां देखने के लायक हैं जो लॉकडाउन से पहले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही हैं।

आमतौर पर फिलीस्तीनी दूर दराज के इन स्थलों पर जाने से बचते हैं। ऐसे में मलक हसन और बिसन अलहजहसन ने अपने ब्लॉग और इंस्टाग्राम के माध्यम से 'अहलान पेलेस्टाइन' नाम से पेज की शुरुआत की है। इसका मतलब होता है 'हैलो पेलेस्टाइन'। इस पेज के माध्यम से ये दोनों ट्रेवल ब्लॉगर लोगों को ट्रेवल डेस्टिनेशन से जुड़ी जानकारी देती हैं। साथ ही वे कब और कहां जाए, इसे बारे में जानकारी भी देते हैं।

मलक और बिसन वेस्ट बैंक के पास आर्कियोलॉजिकल साइट पर सेल्फी लेते नजर आ रही हैं। ये दोनों यंग ब्लॉगर खूबसूरत साइट की तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पेज पर अपलोड करती हैं ताकि दूसरे लोग भी यहां जाने के बारे में विचार करें।

इन दोनों ने मिलकर मई में अपने पेज की शुरुआत की थी। फिलहाल उनके 5,600 फॉलोअर्स हैं। वे चाहती हैं कि कोरोना के प्रभाव से जब इंटरनेशनल ट्रेवलिंग पर प्रतिबंध हैं, ऐसे में पेलेस्टियंस को लोकल डेस्टिनेशंस की सैर करना चाहिए।

इस इमेज को शेयर करते हुए इन दोनों ने लिखा - ''इस वक्त हम दोनों आर्टासा गांव में हैं। इस गांव के बारे में हमने पहले भी बहुत सुना था। वैसे भी ये हफ्ता हमारे लिए खास है क्योंकि इस दौरान हमें यहां आने का मौका मिला। ये गांव बेथलेहम क्षेत्र में है''।

इस गांव की खूबसूरती का अंदाजा ट्रेवल ब्लॉगर्स द्वारा अपलोड की गई इस फोटो को देखकर लगाया जा सकता है। इसका यूनिक आर्किटेक्चर तारीफ के काबिल है। यहां जाने का सबसे अच्छा समय सुबह 7 बजे से लेकर शाम को 5 बजे तक है। इसकी सुंदरता देखने के लायक है।

इन दोनों को इस बात की खुशी है कि इनके एक छोटे से प्रयास से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। एक दुकान के मालिक ने इस बारे में जब बिसेन को बताया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वे कहती हैं - ''हम दोनों की कोशिश से अंजान टूरिस्ट प्लेस के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ी है''।



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किचन में नैचुरल फाउंडेशन बनाने का तरीका सीखें, दालचीनी पाउडर को इन 3 चीजों में मिलाकर मिनटों में तैयार करें इसे

स्किन को केमिकल्स से बचाने के लिए घर के किचन में भी नैचुरल फाउंडेशन तैयार किया जा सकता है। यहां बताई जा रही है घर में फाउंडेशन तैयार करने की 100 प्रतिशत नैचुरल रेसिपी। इस विधि से फाउंडेशन बनाने में समय भी कम लगता है। इसे आप देर तक लगाए रखेंगी तो भी इंफेक्शन या एलर्जी होने का डर नहीं रहता है।

सामग्री :

3 बड़े चम्मच कॉर्नफ्लोर, आधा चम्मच कोको पाउडर या रेड क्ले और ताजा पिसा हुआ सिनेमन पाउडर।

ध्यान रखें :

सिनेमन पाउडर स्किन को गोल्डन टच देता है, इसलिए ये ऑप्शनल है। डार्क स्किन है तो कोको पाउडर ज्यादा ले सकते हैं और स्किन लाइट है तो कम कोको में ही काम हो जाएगा। इन चीजों के साथ फाउंडेशन को स्टोर करने के लिए भी एक पॉट लगेगा।

बनाने का तरीका

पॉट में कॉर्नफ्लोर रख लें। इसके बाद कोको और सिनेमन डालें। सभी इंग्रेडिएंट्स को छोटे चम्मच की मदद से हिला लें। इसे तब तक हिलाएं जब तक मिश्रण मुलायम न हो जाए।



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Learn how to make natural foundation in the kitchen, mix cinnamon powder in these 3 things and prepare it in minutes


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International Coffee Day: कॉफ़ी पीना सेहत के लिए है फायदेमंद, जानिए कैसे

अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस (International Coffee Day): हर दिन दो या उससे ज्यादा कप कॉफ़ी के पीने से फायदा होता है. इससे एक दो मेटाबॉलिक सिंड्रोम का जोखिम काफी कम हो जाता है. इसके अलावा टाइप 2 डायबिटीज में यह खासी मददगार है. टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों को कॉफ़ी जरुर पीना चाहिए.

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किचन में नैचुरल फाउंडेशन बनाने का तरीका सीखें, दालचीनी पाउडर को इन 3 चीजों में मिलाकर मिनटों में तैयार करें इसे

स्किन को केमिकल्स से बचाने के लिए घर के किचन में भी नैचुरल फाउंडेशन तैयार किया जा सकता है। यहां बताई जा रही है घर में फाउंडेशन तैयार करने की 100 प्रतिशत नैचुरल रेसिपी। इस विधि से फाउंडेशन बनाने में समय भी कम लगता है। इसे आप देर तक लगाए रखेंगी तो भी इंफेक्शन या एलर्जी होने का डर नहीं रहता है।

सामग्री :

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ध्यान रखें :

सिनेमन पाउडर स्किन को गोल्डन टच देता है, इसलिए ये ऑप्शनल है। डार्क स्किन है तो कोको पाउडर ज्यादा ले सकते हैं और स्किन लाइट है तो कम कोको में ही काम हो जाएगा। इन चीजों के साथ फाउंडेशन को स्टोर करने के लिए भी एक पॉट लगेगा।

बनाने का तरीका

पॉट में कॉर्नफ्लोर रख लें। इसके बाद कोको और सिनेमन डालें। सभी इंग्रेडिएंट्स को छोटे चम्मच की मदद से हिला लें। इसे तब तक हिलाएं जब तक मिश्रण मुलायम न हो जाए।



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Diwali 2020: परफेक्ट हलवाई स्टाइल में घर पर ऐसे बनाएं गुजिया, ये हैं 5 टिप्‍स

Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...