Tuesday, December 25, 2018

कारगिल: युद्ध हुआ तो क्या गुजरा था वहां रहने वाले लोगों पर

कारगिल: युद्ध हुआ तो क्या असर  पड़ा  था वहां रहने वाले लोगों पर











बासुदेव  प्रसाद संबाद -
भीमभट्ट गांव बमबारी का काफी शिकार हुआ था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, आधा गांव तबाह हो गया था.


कारगिल में आज ही के दिन (26 जुलाई 1999 को) भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जंग जीत ली थी. इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, वहीं इंडिया गेट पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है.
इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि युद्ध के दौरान कारगिल में रहने वाले लोगों की जिंदगी पर क्या गुजरी थी. लड़ाई करीब 2 महीने तक चली थी, इस दौरान आसपास में रहने वाले लोग काफी डर गए थे. कारगिल से करीब 50 किमी दूर भीमभट्ट गांव बमबारी का काफी शिकार हुआ था.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आधा गांव तबाह हो गया और कुछ लोगों की मौत भी हो गई. बटालिक और काकसर में भी
पहुंचा था. कई टूटे हुए घर के हिस्से आज भी सालों बाद भी बमबारी की याद दिलाते हैं. हालांकि, कुछ लोगों ने नुकसान के बाद नया घर बना लिया.  
कारगिल के पास भीमभट्ट गांव में रहने वाले लोग जब 1999 के मई महीने में एक सुबह जगे तो अचानक उन्हें घबराहट होने लगी. तब धमाकों से उनके घर के सामान भी हिल जाते थे. एक-दो दिनों में गोलीबारी और तेज हो गई तो लोगों में डर बढ़ने लगा कि अगर उनके घर पर बम गिरे तो सभी मारे जाएंगे. कई लोग वहां से दूर चले गए तो कुछ अपने घरों के तहखाने में जा छुपे.
कैप्टन सौरभ कालिया ने कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों की बड़ी घुसपैठ का सामना किया था. 5 मई 1999 को कैप्टन कालिया और उनके 5 साथियों को पाकिस्तानी फौजियों ने बंदी बना लिया था. 20 दिन बाद वहां से भारतीय जवानों के शव वापस आए तो अटॉप्सी रिपोर्ट से पता चला कि भारतीय जवानों के साथ पाकिस्तान ने उसके साथ बेरहमी की थी. उन्हें कारगिल युद्ध में शहीद होने वाला पहला सैनिक कहा जाता है.

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