Tuesday, January 15, 2019

Meaning of Makar Sankranti / जानें, आखिर क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व, क्या है इसका महत्व

Meaning of Makar Sankranti /इस बार मकर संक्रांति दो दिन है क्योंकि 2019 में मकर संक्रांति 14 जनवरी की रात से शुरू होकर 15 जनवरी की दोपहर तक है। लिहाज़ा ज्यादातर लोगों में इस बार मकर संक्रांति के पर्व को लेकर अमंजस बरकरार है। लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि इस बार ये पर्व 14 जनवरी की रात से शुरू होगा लिहाज़ा इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। मकर संक्रांति महज़ एक त्यौहार भर नहीं है बल्कि सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ इस पर्व का संबंध हमारी प्रकृति से भी है तभी तो साल का ये पहला त्यौहार काफी खास माना जाता है। आइए आपको बताते हैं कि कैसे ये पर्व प्रकृति से है संबंधित और क्या है मकर संक्रांति मनाने के कारण..1. माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाता है सिर्फ यही नही मकर राशि में प्रवेश करने के साथ-साथ सूर्य उत्तरायण भी होने लगता है। कहते हैं ये बेहद ही शुभ काल होता है2. मान्यता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी छोड़कर उनके घर शनिदेव से मिलने गए थे। यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन को सुख और समृद्धि से भी जोड़ा जाता है।3. मकर संक्रांति का वसंत ऋतु से भी गहरा संबंध है। दरअसल माना जाता है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगाज़ हो जाता है...ठंड ऋतु में मौसम बदलने लगता है। दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी आगमन होता है और मौसम खुशगवार हो जाता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को नई ऋतु और मौसम के स्वागत के तौर पर भी मनाया जाता है।4. इस पर्व का किसानों से भी खास संबंध है। कहा जाता है कि इस वक्त किसानों की फसल पककर तैयार हो जाती है। लोग अपनी नई और साल की पहली फसल को भगवान को अर्पित करने के लिहाज़ से भी इस पर्व को मनाते हैं। हर राज्य में पर्व का नाम अलग अलग है लेकिन हर जगह इसे मनाने की पीछ परंपरा यही जुड़ी है। उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से जाना जाता है। जबकि गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान यहां पतंगबाज़ी का उत्सव होता है। वही आंध्रप्रदेश में इसे संक्रांति के नाम से जाना जाता है जो तीन दिन तक मनाया जाता है। दक्षिण के तमिलनाडु में ये पर्व पोंगल कहलाता है जो 4 दिनों तक चलता है। पंजाब में इसे लोहड़ी कहते हैं जो 13 जनवरी को हर साल मनाई जाती है।

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