Tuesday, October 22, 2019

तेल मील और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे चूहों को खा रहे सुअर जैसी पूंछ वाले मकाक बंदर

लाइफस्टाइल डेस्क. बंदरों की एक खास प्रजाति दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश मलेशिया की तेल मीलों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है। ये पेस्ट कंट्रोल का विकल्प बन रही है और वैज्ञानिकों को भी चौका रही है। मलेशिया में सूअर जैसी पूंछ वाले मकाक बंदर तेल मीलों को नुकसान पहुंचा रहे चूहों को खाकर खत्म कर रहे हैं। कुछ समय पहले ये माना जा रहा था कि इन बंदरों के कारण मील के आसपास की पाम फसलों को नुकसान पहुंच रहा है लेकिन जर्मनी की लिपजिग यूनिवसिर्टी की हालिया रिसर्च में इसे गलत साबित किया गया है।

  1. इन बंदरों को वैज्ञानिक भाषा में पिग-टेल्ड मकाक कहा जाता है। ये तेल मीलों और उसके आसपास पाम और दूसरेफलों की फसलों को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने रिसर्च की। मलेशिया के तेल मील वाले क्षेत्र और सेगरी फॉरेस्ट रिजर्व में पाए जाने वाले मकाक बंदरों के दो समूहों पर नजर रखी गई। जनवरी 2016 से सितंबर 2018 तक इनके बिहेवियर पर अध्ययन किया गया।

  2. करंट बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मकाक बंदर तेल मीलों के फायदेमंद साबित हो रहे हैं और नुकसान नाममात्र का ही हो रहा है। ये बंदर मील के पास आते हैं और चूहों को खाते हैं जो मील के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। चूहों की संख्या में कमी होने से फसलों को नुकसान कम हो रहा है।

  3. मलेशिया दुनियाभर में सबसे बड़ा पाम ऑयल का निर्यातक है। लिपजिग यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता एना होल्ज़नर के मुताबिक, दुनिया का कुल 30 फीसदी पाम ऑयल का उत्पादन मलेशिया में होता है। तेल मील जिस क्षेत्र में हैं वहां बंदर रोजाना तीन घंटे बिताते हैं। कथित तौर पर ये 12.4 टन पाम के फल को खा जाते हैं।

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  4. आंकड़ों के मुताबिक, ये बंदर कुल पाम का 0.56 फीसदी खा जाते हैं। जबकि कुल पाम ऑयल का 10 फीसदी नुकसान चूहों के कारण हो रहा है। शोध के मुताबिक, बंदरों के मुकाबले चूहे 18 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। रिसर्च के मुताबिक, मकाक बंदर चूहों की संख्या को 75 फीसदी तक घटाने में सक्षम हैं। इस तरह बंदर कीटनाशक का विकल्प भी साबित होरहे हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, चूहों की संख्या कम होने नुकसान 10 से घटकर 3 फीसदी हो सकता है। हर साल 4 करोड़ 27 लाख रुपए का नुकसान होने से बचाया जा सकता है।

  5. पिग-टेल्ड मकाक को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने दुर्लभ एनिमल घोषित किया है। इनका वास स्थान घटने और बढ़ते शिकार के कारण संख्या में तेजी से घट रही है। इनकी संख्या में कमी होने का एक अन्य कारण ऑयल मीलों के लिए पौधरोपण भी रहा है। दुनियाभर में करीब 1,90,000 स्कवायर किलोमीटर जमीन में पाम के पौधों लगे हैं। शोध के मुताबिक, किसानों को ऐसे बंदरों को सहेजने की सलाह दी गई है ताकि कीटनाशक का प्रयोग कम हो सके।



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      Rat Eating Monkeys Pig tailed macaques Are a Surprisingly Effective Form of Pest Control in in Malaysia


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