Wednesday, November 20, 2019

1924 में कार्डबोर्ड और पंखे की मोटर से बना था पहला टीवी, 17 साल बाद पहला विज्ञापन प्रसारित हुआ

गैजेट डेस्क. आज वर्ल्ड टेलीविजन डे है।टीवी का सफर भले ही 95 साल पुराना हो, लेकिन यह आज अपने सबसे मॉडर्न अवतार में हमारे बीच है। 9 दशक पहले कभी भारी-भरकम डिब्बे के रूप में दिखने वाला इडियट बॉक्स आज हमारे बोलने भर से ही चैनल को बदलने में सक्षम है। 1924 में बक्से, कार्ड और पंखे के मोटर से तैयार हुई टीवी से लेकर स्मार्ट टीवी के बदलाव का सफर जितना लंबा है, उतना ही दिलचस्प भी। रेडियो के दौर में टीवी की शुरुआत ही विरोध के साथ हुई थी। समय के साथ लोगों में इसकी दीवानगीयूं बढ़ी कि भारत में ही 1962 में 41 टीवी सेट और एक चैनल से टीवी की शुरुआत हुई। 1995 तक आते-आते 7 करोड़ भारतीयों के घरों में टेलीविजन जगह बना चुका था।

भारत में कलर टीवी 1982 में पहुंचा। आलम यह था कि 8 हजार रुपए का टीवी 15 हजार रुपए में खरीदने को तैयार थे। नतीजा, सरकार ने 6 महीने में विदेश से 50 हजार टीवी सेट आयात कराए। संयुक्त राष्ट्र में सबसे पहले वर्ल्ड टेलीविजन डे21 नवंबर 1997 को मनाया गया। इस मौके पर जानते हैं टेलीविजन के सफर के कुछ दिलचस्प किस्से...

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  1. टेलीविजन के आविष्कारक जॉन लोगी बेयर्ड बचपन में अक्सर बीमार रहने के कारण स्कूल नहीं जा पाते थे। 13 अगस्त1888 को स्कॉटलैंड में जन्मे बेयर्ड में टेलीफोन से इतना लगाव था कि 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना टेलीफोन विकसित किया। बेयर्ड सोचते थे कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब लोग हवा के माध्यम से तस्वीरें भेज सकेंगे। बेयर्ड ने वर्ष 1924 में बक्से, बिस्किट के टिन, सिलाई की सुई, कार्ड और बिजली के पंखे से मोटर का इस्तेमाल कर पहला टेलीविजन बनाया था।


    टेलीविजन के रिमोट कंट्रोल का आविष्कार यूजीन पोली ने किया था। यूजीन पोली का जन्म 1915 में शिकागो में हुआ था। वे जेनिथ इलेक्ट्रॉनिक में काम करते थे। 1950 में रिमोट कंट्रोल वाला पहला टीवी बाजार में आया, इसका रिमोट तार के जरिए टीवी सेट से जुड़ा होता था। 1955 में पूरी तरह से वायरलेस रिमोट कंट्रोल वाले टीवी की शुरुआत हुई।

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  2. दुनिया का पहला विज्ञापन 1 जुलाई 1941 को अमेरिका में प्रसारित किया गया। यह विज्ञापन घड़ी बनाने वाली कंपनी बुलोवा (Bulova) ने दिया था। इसे एक बेसबॉल मैच के पहले डब्ल्यूएनबीटी चैनल पर प्रसारित किया गया था। 10 सेकंड के इस विज्ञापन के लिए घड़ी कंपनी ने 9 डॉलर का भुगतान किया था।


    इसे विज्ञापन में बुलोवा कंपनी की घड़ी को अमेरिका के मैप के साथ रख कर दिखाया गया था। मैप पर रखी इस दीवार घड़ी की तस्वीर के साथ कंपनी का स्लोगन अमेरिका रन्स फॉर बुलोवा टाइम की आवाज दी गई थी।

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  3. मार्च 1954 में वेस्टिंगहाउस ने पहला कलर टीवी सेट बनाया। शुरुआती तौर पर इसके सिर्फ 500 यूनिट्स ही बनाए गए थे। इसकी समय इसकी कीमत करीब 6,200 रुपए थी। यानी कह सकते हैं कि उस समय यह आम लोगों की पहुंच से बाहर थी।


    इसके कुछ समय अमेरिकन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी आरसीए ने कलर टीवी CT-100 को पेश किया, कीमत लगभग 5 हजार रुपए थी। कंपनी ने इसके 4 हजार यूनिट तैयार किए थे। इसके बाद अमेरिकन कंपनी जनरल इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना 15 इंच का कलर टीवी पेश किया, जिसकी कीमत लगभग 5 हजार रुपए थी।

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  4. इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग के छात्र बीशिवाकुमारन ने चेन्नई में हुए एक एग्जीबिशन में पहली बार टीवी को पेश किया था। यह एक कैथोड-रे ट्यूब वाला टीवी था। हालांकि इससे जरिए ब्रॉडकास्ट नहीं किया गया, लेकिन इसे भारत की पहली टीवी के तौर पर पहचान मिली। भारत में पहला टेलीविजन कोलकत्ता की एक अमीर नियोगी फैमिली ने खरीदा था।

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  5. भारत में टेलीविजन के इतिहास की कहानी दूरदर्शन से ही शुरू होती है। दूरदर्शन की स्थापना 15 सितंबर 1959 को हुई थी। भले ही आज टीवी पर हजारों चैनल्स की भरमार हो लेकिन उस दौर में दूरदर्शन ने जितनी लोकप्रियता हासिल की उसे टक्कर दे पाना मुश्किल है। दूरदर्शन का नाम पहले 'टेलीविजन इंडिया' था। 1975 में इसका हिंदी नामकरण 'दूरदर्शन' के रूप में किया गया। शुरुआती दौर में दूरदर्शन पर हफ्ते में सिर्फ तीन दिन आधा-आधा घंटा ही प्रसारण हुआ करता था।


    1959 में शुरू हुए दूरदर्शन का 1965 में रोजाना प्रसारण होना शुरू हुआ। 1986 में शुरू हुए रामायण और महाभारत जैसे सीरियल्स को देखने के लिए लोगों में इतना उत्साह रहता था कि इस दौरान हर रविवार को सुबह देश भर की सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर जाता था। कार्यक्रम शुरू होने के पहले न सिर्फ लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करके अगरबत्ती और दीपजलाकर रामायण का इंतजार करते थे, बल्कि एपिसोड खत्म होने पर बाकायदा प्रसाद भी बांटते थे।

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  6. 5 जुलाई 1954 में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने पहली बार टेलीविजन पर डेली न्यूज बुलेटिन का प्रसारण किया गया। उस दौरान टीवी पर एंकर की बजाए सिर्फ फोटो और नक्शे ही दिखाई देते थे। तर्क यह था कि न्यूज एंकर का चेहरा देखने से समाचार जैसी गंभीर चीज से लोगों का ध्यान भटकता है। उस समय 20 मिनट के इस न्यूज बुलेटिन को रिचर्ड बैकर ने पढ़ा था। हालांकि इसके तीन साल बाद उन्हें स्क्रीन पर दिखने का मौका मिला था।

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      World Television Day first television made of Biscuit tin, sewing, cardboard and fan motor
      पहली टीवी के साथ आविष्कारक जे.एल. बेयर्ड
      पहली टीवी पर जारी हुई तस्वीरों में से एक तस्वीर


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