लाइफस्टाइल डेस्क. पानी की हर बूंद कीमती है, लेकिन केन्या के लोगों के लिए यह बेशकीमती है। यहां एक तिहाई से अधिक लोगों में पीने का पानी तक नहीं मिल पाता। परिवार के लिए पीने का पानी लाने के लिए घंटों का सफर तय करना पड़ता है। इस मुश्किल को आसान करने के लिए केन्या के कियुंगा में देश का पहला सोलर प्लांट लगाया गया है जो खारे पानी को पीने लायक बनाता है। इसे दुनियाभर में सोलर प्लांट लगवाने वाले एनजीओ गिवपावर ने बनाया है।
केन्या का कियुंगा कस्बा मछुआरों की बस्ती है। यहां करीब 3500 लोग रहते हैं। जो सोमालिया के बॉर्डर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। फार्म की मदद से पानी को फिल्टर किया जा रहा है और रोजाना 35 हजार से अधिक लोगों तक पीने का पानी पहुंच रहा है।
समुद्र तट के किनारे होने लगे इस सोलर वाटर फार्म से 50 किलोवाट बिजली पैदा होती है। यहां दो पम्प की मदद से रोजाना 75 हजार लीटर खारे पानी को पीने लायक बनाया जाता है। एक इंसान को पर्याप्त पानी देने के लिए करीब 1425 रुपए का खर्च आता है, फर्म अगले 20 साल की इसी दाम पर साफ पानी उपलब्ध कराने में सक्षम है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया में हर साल 84.4 करोड़ लोग साफ पानी की कमी से जूझते हैं। इनमें 3 लाख बच्चे हर साल दूषित पानी की वजह से फैलने वाली बीमारी के कारण मर जाते हैं। दुनियाभर में 200 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्र में रह रहे हैं जहां पानी बमुश्किल ही मिल पाता है।
एनजीओ गिवपावर 17 देशों के स्कूलों, मेडिकल क्लीनिक और गांवों में 2,650 से अधिक सोलर पावर एनर्जी सिस्टम लगाए हैं। एनजीओ गिवपावर का लक्ष्य अब ऐसी जगहों पर सोलर वाटर फार्म लगाना है जहां के लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
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