Tuesday, December 3, 2019

प्रोटीन को जरूरी नहीं मानते भारतीय, 73% लोग इसकी कमी से जूझ रहे; 93% को इसके फायदे तक नहीं मालूम

हेल्थ डेस्क. आयरन और कैल्शियम की तरह भारतीयों में प्रोटीन की भी कमी है। 73 फीसदी शहरी जनता में प्रोटीन का स्तर मानक से काफी कम है। खानापान में इसे क्यों शामिल करना चाहिए, 93 फीसदी लोगों को यह भी नहीं मालूम है। सबसे चौकाने वाली बात है कि भारतीय प्रोटीन को महत्व ही नहीं देते, उनका मानना है कि यह सिर्फ जिम जाने वाले बॉडी बिल्डर के लिए जरूरी है। इंडियन मार्केट रिसर्च ब्यूरो के हालिया सर्वे में यह बात सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 7 शहरों में हुए सर्वे में भारतीयों का मानना है कि डाइट में प्रोटीन का इस्तेमाल वजन घटाने के लिए किया जाता है। 2018 में इनबॉडी-आईपीएसओएस की रिसर्च के मुताबिक, 71 फीसदी भारतीयों की मांसपेशियां कमजोर हैं। मानक के मुकाबले शरीर में 68 फीसदी तक प्रोटीन की कमी है। नेशनल सेंपल सर्वे (2011-12) के मुताबिक, ग्रामीण इलाके में 56.5 ग्राम और शहरी इलाके के भारतीय 55.7 ग्राम प्रोटीन लेते हैं।

कितना प्रोटीन रोजाना है जरूरी
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में काम कर रहे डॉ. नंदन जोशी कहते हैं फिजिकली सक्रिय न रहना और मानक से कम प्रोटीन शरीर में पहुंचने से युवाओं की मांसपेशियों को कमजोर हो रही हैं। 30 साल की उम्र से मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होना शुरू होती हैं। हर 10 साल में 3-5 फीसदी तक मांसपेशियां डैमेज होती हैं। रोजाना एक्सरसाइज और प्रोटीन इसे रिपेयर करने का काम करते हैं और एक्टिव रखता है। नंदन जोशी के मुताबिक, इंसान को अपने वजन के मुताबिक प्रोटीन लेना चाहिए। जैसे आपका वजन 60 किलो है तो रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन डाइट में लेना चाहिए।

कैसे कमीपूरी करें
डाइटीशियन और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. नीतिशा शर्मा
बताती हैं कि मांसाहारी हैं तो डाइट में मीट, चिकन, अंडे ले सकते हैं। शाकाहारियों के लिए दूध, फलियों की सब्जियां, मूंगफली, नट्स और दालें बेहतर विकल्प हैं। डॉ. नीतिशा शर्मा कहती हैं, एक ही जगह पर दिनभर का ज्यादातर समय बिताना, शरीर सक्रिय न रखना और प्रोटीन का घटता स्तर मांसपेशियों को कमजोर कर रहा है। बचपन से लेकर बुढापे तक, प्रोटीन जीवन के हर पड़ाव के लिए जरूरी है।

सबसे ज्यादा प्रोटीन की कमी लखनऊ वालों में
इंडियन मार्केट रिसर्च ब्यूरो के एक अन्य सर्वे में देश के प्रमुख शहरों में प्रोटीन का स्तर जांचा गया। सर्वे में पाया गया 90 फीसदी लखनऊ के लोगों में प्रोटीन की कमी है। दूसरे पायदान पर दो शहर हैं अहमदाबाद और चेन्नई, यहां की 84 फीसदी आबादी प्रोटीन की कमी से जूझ रही है। तीसरे स्थान पर विजयवाड़ा (72%) और चौथे पर मुंबई (70%) है। वहीं, दिल्ली में यह आंकड़ा 60 फीसदी है। इस सर्वे में 1800 लोग शामिल किए और उनके खानपान का विश्लेषण किया गया।

इंडियन डाइटिक एसोसिएशन के मुताबिक, भारतीयों को खानपान से जरूरत का मात्र 50 फीसदी की प्रोटीन मिल पा रहा है। प्रोटीन बच्चों के विकास के अलावा उनके सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाता है। यह मांसपेशियों के लिए जितना जरूरी है उतना ही शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए भी अहम है। इसके अलावा स्किन और बालों को खूबसूरत और हेल्दी बनाने के लिए शरीर में पर्याप्त प्रोटीन का होना जरूरी है।



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Indians do not consider protein necessary, 73% of people are struggling with its deficiency; 93% do not even know its benefits


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