Monday, December 9, 2019

बघेल लोग गुजरात से सतना आए और साथ लाएं खान-पान की कुछ खास आदतें, रेसिपीज

हेल्थ डेस्क. किसी विशेष फूड या रेसिपी के साथ हम अक्सर उससे जुड़े हुए इतिहास की बात क्यों करते हैं? दरअसल किसी भी डिश का इतिहास से भी गहरा नाता रहता है। कई मामलों में हम वैश्विक हो गए हैं, लेकिन एक अच्छी बात यह भी है कि खाने के मामले में हम अब भी देसी बने हुए हैं। इसलिए जब भी बात परंपराओं की होगी, तो इतिहास अपने आप जुड़ ही जाएगा। आज फूड हिस्टोरियन लेखक और टीवी होस्टआशीष चोपड़ाबघेली कुज़ीन के बारे में कुछ खास बाता रहे हैं। बघेली कुजीन से मेरा परिचय तीन दशक पहले मेरे मित्र और रीवा के महाराज पुष्पराज सिंह के माध्यम से हुआ था। पुष्पराज सिंह महाराजा मार्तंड सिंह के बेटे हैं। बघेल शब्द तेरहवीं शताब्दी में आया। मोहम्मद गौरी के आक्रमण के बाद गुजरात के पाटन से सोलंकी राजपूत सतना के पास गहोरा में आकर बस गए। उस दौरान सोलंकी लोगों ने अपना सरनेम बदल लिया और बघेल हो गए।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Baghel people came to Satna from Gujarat and bring some special eating habits, recipes


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2YvsfdF

No comments:

Post a Comment

Diwali 2020: परफेक्ट हलवाई स्टाइल में घर पर ऐसे बनाएं गुजिया, ये हैं 5 टिप्‍स

Diwali 2020: इस साल कई लोग सुरक्षा कारणों से घर पर दिवाली की मिठाई (Diwali Sweets) बना रहे हैं. अगर आप इनमें से एक हैं, तो आप कुछ उपयोगी टिप...