लाइफस्टाइल डेस्क. राजस्थान के अजमेर में रहने वाली 33 वर्षीय धावक सूफिया खान ने 87 दिनों में 4,035 किमी दौड़कररिकॉर्ड बनाया है।सूफिया ने अपने 'मिशन होप' के लिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक की दूरी 87 दिन, 2 घंटे और 17 मिनट में दौड़कर पूरी की। उनका उद्देश्य देश के 22 शहरों का दौरा करना और लोगों से मिलकर भाईचारे, एकता, शांति, समानता का संदेश देना था। इसके लिए उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से नवाजा गया है।
क्या हैं मिशन होप के मायने
सूफिया के मुताबिक, वह देश के लोगों को मानवता, एकता, शांति और समानता का संदेश देने के लिए यात्रा पर निकली थीं। उनके मिशन होप के मायने हैं, H - Humanity (मानवता), O - Oneness (एकता), P - Peace (शांति), E - Equity (समानता)। लक्ष्य 100 दिनों में दौड़ को पूराकरना थालेकिन उन्होंने 87 दिनों में उस लक्ष्य को पूरा कर लिया। वह कहती हैं कि मैं अपने मिशन 'मिशन होप' के दौरान जिन शहरों में गई वहां मेरा स्वागत किया गया। स्थानीय लोग भी मेरे साथ दौड़े।
मेरी उपलब्धि मुहिम में जुड़े हर इंसान को समर्पित
सूफिया के मुताबिक, वह उन लोगों की आभारी हैं जिन्होंने मिशन में साथ दिया और परिवार का हिस्सा बनाया। बुजुर्गों ने मेरे साथ बेटी जैसा बर्ताव किया और देखभाल की। खासकर जब मैं चलने की स्थिति में भी नहीं थी, तब लोगों ने फरिश्तों की तरह सहायता की। गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सर्टिफिकेट मिलने पर उन्होंने कहा, यह मेरी एकमात्र उपलब्धि नहीं है। यह मिशन से जुड़ेसभी लोगों की उपलब्धि है और मैं इसे उन सभी को समर्पित करती हूं।सूफिया कहती हैं, यात्राके दौरान जिस तरह से मैं हर धर्म के लोगों से मिलीं। यह सब उन्हें मानवता का संदेश दे रहा था। भारत देश अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों से बना है। आज, एक इंसान भौतिक सुख प्राप्त करने के लिए नैतिक मूल्यों, भाईचारे और संस्कृति से दूर जा रहा है जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
2018 में भी बनाया था रिकॉर्ड
सूफिया ने 2018 में 16 दिनों में 720 किमी की दूरी को दौड़कर पूरा किया था, वह ऐसा करने वाली पहली महिला धावक बनी थीं। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। सूफिया का जन्म अजमेर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। महज 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। परवरिश का पूरा जिम्मा मां पर था। सूफिया ने कुछ समय के लिए एक एयरलाइन कंपनी में नौकरी की लेकिन अपने दौड़ने के जज्बे को पूरा करने के लिए जॉब छोड़ दी।
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