Monday, January 13, 2020

संक्राति से सेहत का कनेक्शन, पतंगबाजी में धूप से मिलने वाला विटामिन-डी और तिल के लड्डू से तन और मन रहता सेहतमंद

हेल्थ डेस्क. मकर संक्रांति के त्योहार का एक रंग यह भी है कि मद्धम होती सर्दी के बीच खिली धूप में पतंगबाजी। मान्यता है कि पतंगबाजी के दौरान हम दिनभर में धूप में समय बिताते हैं। इससे शरीर मजबूत होता है और सक्रिय थी। विज्ञान कहता है, सर्दियों में धूप के जरिये मिलने वाला विटामिन-डी पूरे साल का कोटा पूरा करता है। पतंगबाजी के बहाने शरीर सक्रिय होता है, हड्डियों और ऊतकों की रिपयेरिंग होती है।

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के शोध आंकड़ों एवं आईसीएमआर के शोधों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत भारतीय विटामिन डी की कमी के शिकार हैं, जिनमें बच्चे एवं बड़े दोनों ही शामिल हैं। गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में एक हफ्ते तक पतंगबाजी करके मकर संक्रांति को सेलिब्रेट करते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सूर्य की किरणों से विटामिन-डी लेने का सही समय होता है सर्दी का असर घटने लगता है और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस दौरान संक्रांति के तिल के लड्डु खाने का रिवाज है। 100 ग्राम तिल में करीब 975 मिग्रा कैल्शियम पाया जाता है जो विटामिन-डी के साथ अवशोषित होकर हड्डियों को मजबूत बनाता है। फिजिशियन और बाल राेग एवं एलर्जी विशेष डॉ अव्यक्त अग्रवाल कहते हैं, सूर्य से दूरी यानी बीमारी। भारत सहित कई संस्कृतियों में सूर्य को देवता कहा गया है।

मॉडर्न मेडिसिन के सर्वाधिक प्रतिष्ठित जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि सूरज के प्रकाश से बरसों तक खुद को दूर रखने वाले लोगों की मृत्यु जल्दी होती है। लोग आज घरों, कारों में दिन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजार देते हैं। सूर्य से सीधे सम्पर्क न हो पाने के कई कारण कई शारीरिक और मानसिक दिक्कतें बढ़ रही हैं। जानिए कैसे रोजाना कुछ समय धूप में बिताकर स्वस्थ रह सकते हैं


विटामिन-डी का निर्माण...

सूरज की किरणें त्वचा पर पड़ने से विटामिन डी कानिर्माण होता है।विटामिन डी कई शारीरिक प्रक्रियाओं के संचालन में बेहद आवश्यक हॉर्मोन है। यह बच्चों की हड्डियों व दांतों के विकास और उनकी मजबूती के अतिरिक्त वयस्कों में हड्डियों, जोड़ों के क्षरण से सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से एलर्जी, अवसाद, हाथ-पैर में दर्द, थकावट, भूलने की बीमारी, अनिद्रा, हार्ट अटैक, कैंसर इत्यादि का भी सम्बंध है।

मानसिक स्वास्थ्य : अवसाद और अनिद्रा दूर होती है

यूरोप इत्यादि में अवसाद के बहुत से मरीज़ होने का एक मुख्य कारण साल के कुछ महीनों तक सूरज की रोशनी का कम मिलना है। यह स्थिति तब है जबकि वहां नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक स्थिति भारत से कहीं बेहतर है। दरअसल, सूर्य की किरणें सेरोटोनिन एवं मेलाटोनिन नाम के दो महत्वपूर्ण रसायनों के स्राव में मददगार होती हैं। इन रसायनों की कमी से अवसाद एवं अनिद्रा की समस्या हो सकती है। अनिद्रा के मरीजों के तो उपचार का हिस्सा है सुबह के समय सूर्य की रोशनी में एक घंटा बिताना।

प्रतिरक्षा : धूप में बैक्टीरिया और वायरस खत्म होते हैं

सूर्य की रोशनी प्राकृतिक ऑटोक्लेव (कीटाणुनाशक प्रक्रिया) भी है। धूप के सम्पर्क में आकर न सिर्फ बहुत से हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस ख़त्म होते हैं, बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफ़ा होता है। मेलाटोनिन हॉर्मोन त्वचा को सूर्य की पराबैंगनी किरणों से नुकसान से बचाता है। इसलिए धूप के अधिक सम्पर्क में रहने पर यह अधिक बनता है। साथ ही यह बॉडी की सर्काडियन रिम को नियंत्रित रख मीठी नींद, इम्युनिटी को बढ़ाता है।

स्वस्थ त्वचा: एक्जीमा औरस्किन कैंसर मेलानोमा का खतरा घटताहै

कुछ त्वचा रोग जैसे एक्जीमा, सोरायसिस में डर्मेटोलॉजिस्ट भी कुछ देर धूप में रहने की सलाह देते हैं। स्किन कैंसर मेलानोमा के होने की आशंका भी सूर्य की रोशनी से कम होती है। स्किन टीबी के मामलों में भी दवाओं के अतिरिक्त सूर्य किरणों से उपचार किया जाता रहा है।

बहरहाल, तेज धूप में देर तक बैठने या समुद्र किनारे तेज धूप में बैठने से त्वचा में सन बर्न के लक्षण उबर सकते हैं एवं लगातार तेज धूप में रहने से स्किन कैंसर की आशंका भी बढ़ती है। ऐसे में सनस्क्रीन के इस्तेमाल से दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। खासकर समुद्र किनारे जाने पर या समुद्री इलाकों में पर्यटन के समय ध्यान रखना अधिक आवश्यक है, क्योंकि पानी से परावर्तित होकर ये किरणें दोगुना प्रभाव डालती हैं।

दिमागी सेहत : अल्जाइमर्स जैसी बीमारी में फायदेमंद हल्की धूप

मल्टीप्लस्क्लेरोसिस एवं भूलने की बीमारी अल्जाइमर्स जैसे गंभीर मस्तिष्क रोगों के उपचार में भी सूर्य किरणों का लाभकारी प्रभाव पड़ता है।

आंखों का स्वास्थ्य : हल्की धूप फायदेमंद

इसके लिए भी सूर्य की रोशनी मददगार है, किंतु ध्यान रहे कि सूर्य की तरफ़ सीधे देखना आंखों के लिए नुक़सानदेह हो सकता है।

कैंसर से सुरक्षा : धूप कीकमी से कैंसर का खतरा

सूर्य की किरणें कई प्रकार के कैंसर जैसे हॉजकिंस लिम्फोमा, कोलोन कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर आदि से बचाव का एक माध्यम हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन के शोध के अनुसार लंबे समय तक विटामिन डी की कमी (यानी धूप से दूरी) कैंसर की आशंका बढ़ाती है।

मजबूत शरीर: हड्डियों व जोड़ों की बेहतरी

रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी जोड़ों के दर्द से सम्बंधित बीमारियों एवं दमा के दौरे भी सूर्य की रोशनी से कम होते हैं।

तनाव में कमी : खुशी से भर देती है धूप

जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी (2003) के अनुसार, सूर्य की किरणें हैप्पी हॉर्मोन एंडोर्फिन के स्राव में भी उत्प्रेरक होती हैं। यही वजह है कि बादलों वाले दिन लम्बे चलें तो मनोदशा ख़राब होने लगती है और लम्बी बदली के बाद धूप का खिलना हमें ख़ुशी से भर देता है।



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