Wednesday, February 26, 2020

प्लास्टिक के खिलाफ बौद्ध भिक्षुओं की मुहिम, दो साल में 40 टन प्लास्टिक रिसायकल करके 800 जोड़ी पोशाक बनाईं

लाइफस्टाइल डेस्क. थाइलैंड में प्लास्टिक कचरे के खिलाफ बौद्ध भिक्षुओं ने भी जंग छेड़ रखी है। उनकी इस मुहिम में सीधे तौर पर लोग जुड़ रहे हैं और अब तक 40 टन से अधिक प्लास्टिक को रिसायकल करके कपड़ों में तब्दील भी कर चुके हैं। बौद्ध भिक्षु लोगों के पास जाकर प्लास्टिक कचरा मांग रहे हैं। इससे पॉलिस्टर धागे में तब्दील करके केसरिया रंग के कपड़े (चोले) तैयार किए जा रहे हैं।

बनाए गए रिसायकल सेंटर
थाइलैंड के समुत प्राकान प्रान्त में रिसायकल सेंटर बनाया गया है। यहां लगी मशीनें प्लास्टिक वेस्ट को दबाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलती हैं। इन टुकड़ों को भिक्षु शिप की मदद से दूसरे रिसायक्लिंग प्लांट तक पहुंचाते हैं। प्लास्टिक को बारीक टुकड़ों में बदलने के बाद इसे पॉलिस्टर धागे में तब्दील किया जाता है। धागे को रंगने के बाद इससे भिक्षुओं का केसरिया चोला तैयार होता है।

थाइलैंड के मठ में प्लास्टिक को अलग करता वॉलिंटियर।

पोशाक की कीमत 12 हजार रुपए तक
मंदिर के मठाधिकारी महा प्रणोम के मुताबिक, एक किलो प्लास्टिक बोतल की मदद से एक केसरिया चोला तैयार किया जाता है। इससे तैयार कपड़े की कीमत अधिक है और इसकी खूबियां भी हैं।
दो साल पहले जब महंत महा प्रणोम ने आसपास के समुदायों में प्लास्टिक डोनेट करने की बात रखी तो लोगों ने उसे स्वीकार किया। मंदिर अब तक 800 से अधिक पोशाक तैयार की जा चुके हैं। इनकी कीमत 4700 से लेकर 12 हजार रुपए तक है। इन कपड़ों को बेचने के बाद होने वाली कमाई प्लास्टिक रिसायक्लिंग को बढ़ावा दिया हा रहा है।

मशीनों के जरिए प्लास्टिक को छोटे-छोटे टुकड़ों में तब्दील करने की तैयारी।

मुहिम में दिव्यांग भी शामिल
बौद्ध भिक्षुओं के इस अभियान में उनके साथ युवा, महिलाएं, रिटायर और दिव्यांगजन शामिल हैं। महंत महा प्रणोम के मुताबिक, अगर आप प्लास्टिक को इकट्ठा नहीं करेंगे तो ये कैसे खत्म होगी। यह मछलियों, डॉलफिन और व्हेल जैसे समुद्री जानवरों में पहुंचेंगी।

2020 तक देश को प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प
साउथ एशियाई देशों में थाइलैंड प्लास्टिक पॉल्यूशन के मामले में पांचवे पायदान पर है। समुद्री संरक्षण संस्था के डायरेक्टर चेवर वोल्टमर कहते हैं, भिक्षु न केवल प्लास्टिक को रिसायकल कर रहे हैं बल्कि लोगों को जागरुक कर रहे हैं। कुछ महीने पहले एक व्हेल मछली की मौत 80 से ज्यादा प्लास्टिक बैग निगलने के कारण हुई थी, इस घटना से सबक लेते हुए थाइलैंड सरकार ने 2022 तक देश को प्लास्टिक मुक्त करने का संकल्प लिया है।

थाइलैंड में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को यूनेस्को पहले इमरजेंसी करार दे चुका है।

सरकार का कहना है कि तीन साल में प्लास्टिक की थैलियों, स्टायरोफोम, कप और सभी तरह के प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाकर देश को प्लास्टिक मुक्त कर दिया जाएगा। वैसे तो विश्व के देश प्लास्टिक प्रदूषण से अपने-अपने तरीके से निपट रहे हैं, लेकिन थाईलैंड ने इस पर काम शुरू कर दिया है। देश की 43 बड़ी फर्मों ने अपने सभी राज्यों, नगर निगम विभागों और मंत्रालयों की मदद लेकर प्लास्टिक उत्पादन कम करने की योजना लागू कर दी है।



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Monks Created Orange Robes from Recycled Plastic in two years 40 Tons Collected in Thailand


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