डॉक्टर दवाओं को कंट्रोल करेगा
स्मार्ट बैंडेज को अमेरिका की कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया गया है। शोधकर्ता प्रो. अली तामायोल के मुताबिक, यह खास किस्म का बैंडेज है जिसे जख्म पर लपेटते हैं। डॉक्टर के पास इसका रिमोट कंट्रोल होता है। जिसकी मदद से समय-समय पर घाव में अंदरूनी हिस्से तक दवा पहुंचाई जाती है।
बार-बार क्लीनिक जाने की जरूरत नहीं
शोधकर्ता के मुताबिक, क्षतिग्रस्त टिश्यू में जैसे-जैसे सुधार होगा दवाओं को उसी के मुताबिक रिलीज कराया जाएगा। बार-बार घाव को भरने के लिए बैंडेज बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। एक बार इसे जख्म पर लगाने के बाद डॉक्टर के पास चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आम लोगों की तुलना डायबिटीज़ के मरीज़ों के जख्म धीमी गति से भरते हैं, इसलिए उनके इलाज में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। डायबिटिक लोगों के जख्म में संक्रमण की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे मामलों में भी यह बैंडेज एक समान काम करेगा।
चूहों पर किया गया था पहला टेस्ट
स्मार्ट बैंडेज का सबसे पहला इस्तेमाल चूहों पर किया गया था। शोध में शामिल चूहों के जख्म काफी गहरे थे और साथ ही उनकी स्किन भी काफी मोटी थी। इन सब के बावजूद इस बैंडेज ने बेहतरीन असर दिखाया। इसके इस्तेमाल से जख्म के बाद पड़ने वाला निशान भी काफी हल्का था। डायबिटिक चूहों पर भी ये प्रयास काफी सफल रहा था।
पुराने तरीकों से ज्यादा है असरदार
ये बैंडेज दिखने में भले ही सामान्य हो मगर इसके अंदर बारीक सुइयों में दवाइयां भरी हैं। पहले निडिल से जख्म को खोला जाता है और उसमें दवाइयां डाली जाती हैं। बाहरी दवाइयां लगाने से उनका असर अंदर की स्किन लेयर तक नहीं हो पाता है जिससे पुराने बंद जख्मों को ठीक करना काफी मुश्किल था। मगर इस तकनीक से पुरानी और गंभीर चोटों को भी ठीक किया जा सकता है।
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