कोरोनावायरस 27 फीसदी के दायरे तक लोगों को संक्रमित कर सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब कोई कोरोनापीड़ित छींकता या खांसता है तो मुंह में से निकलने वाली लार की बूंदों में मौजूद वायरस बाहर आता है। यह हवा में रहता है और 27 फीट कीदूरी तक जा सकता है। यह रिसर्च अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के शोधकर्ताओं ने की है।
फेस मास्क को लेकर रिसर्च करने की जरूरत
मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर लायडिया बॉउरोइबा के मुताबिक, ने सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ाकर 2 फीट करनेकी सलाह दी है। जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, सर्जिकल मास्क और एन95 मास्क इस खतरे सेकितना बचाने में कारगर हैं, इसी जांच अब तक नहीं हो पाई है।
नमी संक्रमण को फैलने से रोकती है
शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर वातावरण में नमी है या तापमान बढ़ा हुआ है तो वायरस का संक्रमण रुक सकता है।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज के डायरेक्टर डॉ. एंथनी फौजी ने एमआईटी शोधकर्ताओं की इस रिसर्च परसवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसा हर जगह संभव नहीं है। ऐसा केवल वहीं होगा जहां लोग बहुत ज्यादा छींक रहे हैं।
एक वक्त पर थूक से3,000 से अधिक कण निकलते हैं
वैज्ञानिकों ने बताया कि जब कोरोनावायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हीं कणों के जरिए संक्रमण फैलता है। व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण निकलते हैं। नमी होने पर हवा संघनित होती है और ऐसे में उसमें किसी की वायरस या बैक्टीरिया का संचरण बहुत दूर तक नहीं हो पाता है।
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