हफ्ते में एक एस्पिरिन की टेबलेट आहारनाल से जुड़े कई तरह के कैंसर के खतरे को 40 फीसदी तक कम करती है। यह बात 2 लाख 10 हजार मरीजों पर हुई113 रिसर्च में सामने आई है। इटली की मिलान यूनिवर्सिटी ने इन 113 रिसर्च रिपोर्ट का रिव्यू किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, आहार नाल से जुड़े कैंसर मेंबॉवेल, इसोफेगल, पेन्क्रियाटिक, लिवर और स्टमक कैंसर शामिल हैं। शोध के मुताबिक, यह दवा शरीर के उस एंजाइम को ब्लॉक करती है जो ट्यूमर को बनने में मदद करता है। शोधकर्ताओं की सलाह है कि पेनकिलर एस्पिरिन को बिना डॉक्टरी सलाह के न लें।
अधिक उम्र वालों में कैंसर से मौत के मामले अधिक
एन्नल ऑफ ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, आमतौर पर पेन्क्रियाटिक कैंसर को काफी खतरनाक माना जाता है। शोध के दौरान पाया गया किऐसे लोग जिन्होंने 5 साल तक एस्पिरिन ली उनमें इसका खतरा 25 फीसदी तक घट गया है। मिलान स्कूल ऑफ मेडिसिन के एपिडेमियोलॉजिस्ट कार्लोस ला वेकिया के मुताबिक, आहार से जुड़े कैंसर में एस्पिरिन के काफी फायदे देखे गए हैं। प्रो कार्लोस ला वेकिया कहते हैं, यूरोप में बॉवेल कैंसर से हर साल 1,75,000लोग मारे जाते हैं इनमें 1 लाख ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 से 74 साल की है।
जितनी ड्रग उतना ही कम होता है खतरा
शोध के मुताबिक, अगर इंसान दवा की मात्रा 75 से 100 एमजी लेता है तो कैंसर का खतरा 10 फीसदी तक घटता है लेकिन अगर मात्रा 325 ग्राम होती है तो 35फीसदी तक कैंसर होने की आशंका कम हो जाती है। हालांकि दूसरे ड्रग लेने पर कैंसर का खतरा कितना घटता या बढ़ता है, इस पर रिसर्च नहीं की गई है।
क्या काम करती है एस्पिरिन
यह एक दर्द निवारक दवा है। इसका इस्तेमाल हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम करने में भी किया जाता है क्योंकि यह रक्त को अधिक गाढ़ा होने से रोकतीहै। रक्त का यही गाढ़ापन दिल की बीमारियों की वजह बनता है। हालांकि एक्सपर्ट चेतावनी भी देते हैं कि इस दवा से आंतों में ब्लीडिंग होने का खतरा भी रहताहै। शोध में भी प्रो कार्लोस ला इस दवा का इस्तेमाल डॉक्टरी सलाह से करने की हिदायत दी है।
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