मेक्सिको के समुद्रतट पर दिखा अनोखा नजारा। समुद्र के किनारों पर आने वाली लहरें नीले रंग की रोशनी की तरह दिख रही थीं। यहां ऐसा 60 सालों में पहली बार हुआ है। इस नजारे को देखकर स्थानीय लोग आश्चर्यचकित हैं। ऐसी ही नीली लहरें चेन्नई के समुद्री तटों पर अगस्त 2019 में देखी गई थीं। ऐसा तब होता है जब समुद्र में खनिज तत्वों की मात्रा और खास किस्म केशैवालों की संख्या बढ़ती है।
खास तरह के शौवाल के कारण ऐसा होता है
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में एकाप्यूलको के समुद्र तट की ओर आती नीली रोशनी वाली लहरें देखी गईं। लहरों का चमकदार नीले रंग में बदलने का कारण एक रसायनिक प्रक्रिया है। नीली रोशनी को बायोल्यूमिनसेंट कहा जाता है और ऐसा समुद्र में मौजूद फाइटोप्लांकटन नाम के शैवाल के कारण होता है।बायोल्यूमिनेसेंट को उत्पन्न करने वाले शैवाल का वैज्ञानिक नाम नोक्टिलुका सिंटिलंस है। यह फाइटोप्लांकटन प्रजाति का है।

नीली रोशनी वाली लहरों को सी-स्पार्कल कहते हैं
लहरों के तट से टकराने के बाद इनकी केमिकल एनर्जी इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदल जाती है और ये नीली दिखने लगती हैं। इसे आम भाषा में समुद्र चमक यासी-स्पार्कल भी कहते हैं। 2018 में भी ऐसा मालदीव के पास हिंद महासागर में देखा गया था। इसके अलावा यह प्रशांत महासागर में अमेरिका के कैलिफोर्निया तटों के पास समुद्र में अक्सर देखी जाती है।
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