अब इंसान के चलने-फिरने और सांस लेने की गति से पता चल सकेगा कि वह कोरोनावायरस से संक्रमित है या नहीं। अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने ऐसी डिवाइस बनाई है जो कोरोना पीड़ितों का पता लगाएगी। डिवाइस पूरी तरह से वायरसलेस है। डिवाइस में लगा सेंसर इंसान केचलने-फिरने और सांसों की गति पर नजर रखते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है, ऐसे रोगी जिनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है उन्हें घर में रहना ही सबसे बेहतर विकल्प है। ऐसे में इस डिवाइस के जरिए अलर्ट रह सकते हैं।
4 बड़ी बातें : ऐसे काम करती है डिवाइस
- डिवाइस को नाम दिया एमरॉल्ड : शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस डिवाइस को एमरॉल्ड नाम दिया गया है और इसे घर पर रखा जा सकता है। डिवाइस दीवार परलगाकर वाईफाई से कनेक्ट करके अलर्ट रह सकते हैं। यह डिवाइस कोरोना पीड़ितों के अलावा सामान्य लोगों के लिए भी है जो संक्रमण से बचने के लिए सावधानरहना चाहते हैं।
- वायरलेस सिग्नल नजर रखते हैं : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह डिवाइस इंसानों की जरूरी शारीरिक एक्टिविटी पर नजर रखती है। डिवाइस से निकलने वालेवायरलेस सिग्नल इंसान के मूवमेंट का तरीका, नींद की आदत और व्यवहार के साथ सबसे अहम बात उनके सांस लेने की दर की जांचते हैं।

सांस लेने की दर को साफतौर पर देखा जा सकता है। तस्वीर साभार : एमआईटी
- सांस लेने की दर बदले तो डॉक्टरी सलाह लें : शोधकर्ताओं का कहना है कि डिवाइस बताती है आपके सांस लेने की तरह कितनी बदल रही है, इसके आधार पर भीअलर्ट होकर डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं।
- बुजुर्गों के खास मददगार : शोधकर्ता विलियम मैकग्रॉरी के मुताबिक, डिवाइस का ट्रायल बॉस्टन में चल रहा है। यह डिवाइस सबसे ज्यादा फायदेमंद बुजुर्गों के लिएसाबित होगी, क्योंकि उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसकी मदद से मेडिकल डाटा हासिल कर सकेंगे।
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