दुनियाभर में कोरोना के मामले पुरुषों में अधिक सामने आ रहे हैं। इसकी वजह महिलाओं में रोगों से लड़ने की अधिक क्षमता को बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इम्युनिटी के अलावा भी कई वजह हैं। पुरुषों में लाइफस्टाइल डिसीज के मामले महिलाओं के ज्यादा हैं और ये साफ-सफाई रखने में पीछे हैं। दूसरा सबसे बड़ा फैक्टर है ACE2 प्रोटीन, जो कोरोना के फैलने में काफी मददगार साबित होता है।
दुनिया के 6 देशों में जब आंकड़ों की तुलना में हुई तो साफ हुआ कि महिलाओं में कोरोना के मामले कम है। इनमें चीन, फ्रांस, इटली, दक्षिण कोरिया शामिल हैं। यहां महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में संक्रमण के कारण मौत का आंकड़ा 50 फीसदी तक ज्यादा है। जानिए वो 5 वजह जिसकी वजह से पुरुषों में संक्रमण के मामले अधिक हैं-
स्मोकिंग : धूम्रपान का धुआं फेफड़ा डैमेज करके खतरा बढ़ाता है
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, चीन में कोरोना के कारण मरने वालों में 26 फीसदी धूम्रपान करने वाले थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, धूम्रपान करने में महिलाओं के मुकाबले पुरुष आगे हैं। दुनियाभर के एक तिहाई धूम्रपान करने वाले लोग सिर्फ चीन में हैं, जबकि यहां सिर्फ दो फीसदी महिलाएं ही स्मोकिंग करती हैं। ब्रिटेन में 16.5 फीसदी पुरुष और 13 फीसदी महिलाएं स्मोकर हैं। शोध के मुताबिक, सिगरेट पीने के दौरान, बार-बार हाथ मुंह के पास पहुंचता है, इसलिए खतरा और भी ज्यादा है।
आरएमएल हॉस्पिटल, नई दिल्ली के विशेषज्ञडॉ. एके वार्ष्णेय के मुताबिक, कोरोनावायरस का संक्रमण सिगरेट के धुएं से नहीं फैलता है, लेकिन धुआं फेफड़ों को खराब करता है। अगर कोई ज्यादा सिगरेट पीता है तो उसका फेफड़ा कमजोर होगा और ऐसे लोगों को वायरस के संक्रमण का खतरा ज्यादा है। जो इंसान किसी भी तरह का धूम्रपान करते हैं, उनमे संक्रमण जल्दी फैलने का खतरा है।
महिलाओं के शरीर में बीमारियों से लड़ने के लिए रिस्पॉन्स तेज होता है।
कमजोर इम्यून सिस्टम : फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन कोशिकाओं को मजबूत बनाता है
अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी के मुताबिक, कोरोना से लड़ने ने महिलाओं की इम्युनिटी बेहतर है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, महिलाओं में रिलीज होने वाले सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन शरीर की कोशिकाओं वायरस से लड़ने के लिए एक्टिवेट करते हैं। जबकि पुरुषों में सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन का असर उल्टा होता है। एक्स क्रोमोसोम्स में इम्यून जीन्स (TLR7) मौजूद होते हैं
आरएनए वायरस को ढूंढ लेते हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इम्यूनोलॉजिस्ट प्रो. फिलीप गोल्डर के मुताबिक, महिलाओं के शरीर में बीमारियों से लड़ने के लिए रिस्पॉन्स तेज होता है इसलिए उनका इम्यून सिस्टम तेजी से स्ट्रॉन्ग बनता चला जाता है और रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक हो जाती है।
लाइफस्टाइल डिसीज : सार्स के समय भी 50 फीसदी अधिक पुरुषों की मौत हुई थी
एन्नल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, पुरुषों में लाइफस्टाइल डिसीज जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, सांस रोगों के मामले महिलाओं से ज्यादा होते हैं। ये बीमारियां कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ाती हैं। शोध के मुताबिक, 2003 में सार्स के संक्रमण के दौरान हॉन्ग-कॉन्ग में सबसे ज्यादा महिलाएं संक्रमित हुई थीं लेकिन फिर भी पुरुषों की मौत का आंकड़ा 50 फीसदी तक अधिक था। मेर्स महामारी के दौरान भी संक्रमण से पुरुषों की मौत का आंकड़ा 32 फीसदी था। महिलाओं में यह आंकड़ा 25.8 फीसदी था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, महिलाएं पुरुषों से 6 से 8 साल अधिक जीती हैं।
ACE2 : यह प्रोटीन संक्रमण के लिए मुफीद और पुरुषों में अधिक पाया जाता है
जब कोरोनावायरस शरीर में पहुंचता है तो ऐसी कोशिकाओं से जुड़ता है जो ACE2 प्रोटीन रिलीज करती हैं। आमतौर पर प्रोटीन फेफड़े, हृदय और आंतों में पाया जाता है लेकिन इसकी सबसे ज्यादा मात्रा टेस्टिस (वीर्यकोष) में पाई जाती है। जबकि महिलाओं की ओवरी में यह बेहद कम मात्रा में पाया जाता है। एक हालिया शोध के मुताबिक, महिलाओं में संक्रमण खत्म होने में 4 दिन लगते हैं जबकि पुरुषों में 6-8 दिन तक लग जाते हैं।
हायजीन : पुरुष साफ-सफाई बरतने और हाथ धोने में पीछे
महामारी से निपटने के लिए दुनियाभर के विशेषज्ञों ने साफ-सफाई बरतने के साथ बार-बार हाथ धुलने की सलाह दी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं के मुकाबले बार-बार हाथ धोने में पुरुष अधिक गंभीर नहीं हैं। इनमें संक्रमण के मामले अधिक सामने आने की एक वजह ये भी है। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक यूनिहिरो मैत्सुहिता के मुताबिक, सफाई बरतने के मामले में पुरुष पीछे हैं, खासकर हाथों को धोने में।
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