विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शनिवार को एक नई चेतावनी देते हुएकहा है कि, मौजूदा समय मेंऐसे कोई सबूत नहीं है जिनके आधार पर ये कहा जा सके कि कोविड-19 वायरस से ठीक होने वाले मरीज़ों के शरीर में ऐसी एंटीबॉडीजहैं जो कि उन्हें आगे कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाए रखेंगी। संगठन ने ये भी कहा कि इस बात को लेकर भी संदेह है कि किसी को एक बार कोरोना हो जाने के बाद उसे दोबारा नहीं होगा।
कुछ दिनों पहले तक ये माना जा रहा था कि कोरोना वायरस से संक्रमित होकर ठीक होने के बाद लोगों में ऐसे एंटीबॉडीज़ के विकसित होने की संभावना है जो कि वायरस पर हमला करके दोबारा संक्रमण के खतरे को टाल सकती है। इसी के आधार पर दुनियाभर में प्लाज्मा थैरेपी से कोरोना का इलाज किया जा रहा है।
https://ift.tt/37Fny4L के अनुसार कोरोना वायरस से दुनिया भर में मरने वालों की कुल संख्या एक लाख 95 हजार 859हो गई है, वहीं संक्रमितों की कुल तादाद कम से कम 28लाख 46 हजार 536 हो गई है।
अभी और भी बुरा वक्त आने का डर
इससे पहले संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रॉस गीब्रियेसस ने कहा है किइससे भी बुरा वक्त अभी आने वाला है और ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं कि दुनिया कोविड-19 महामारी का और ज्यादाबुरा रूप देखेगी।उनकी चेतावनी के पीछे नए डेटा को आधार बताया जा रहा है जिसके मुताबिक पूरे विश्व में सिर्फ 2 से 3 फीसदी आबादी में ही इस वायरस की इम्यूनिटी है और बिना वैक्सीन के स्थितियां लगातारबिगड़ रही हैं।
लॉकडाउन में ढील से हालात बिगड़ेंगे
संगठन के महानिदेशकने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि वे लॉकडाउन हटाने का फैसला लेने जल्दबाजी न करें क्योंकि यह वायरस हमारे बीच लंबे वक्त तक बना रहेगा। इसलिए कोई गलती न करेऔर अलर्ट रहे। कई देश इससे लड़ने के शुरुआती दौर में हैं।टेड्रोस ने कहा, "यह बहुत खतरनाक स्थिति है और मौजूदा हालात 1918 के फ्लू की तरह बन रहे हैं, जिसमें 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। लेकिन, अब हमारे पास टेक्नोलॉजी है और इसकी मदद से हम इस आपदा से बच सकते हैं।’’
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