देशभर में कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार जारी है। ऐसे में सभी लोग इस संकट काल के दौरान अपना- अपना योगदान दे रहे हैं। संक्रमण के कारण देश में बढ़ी सैनिटाइजर की मांग ने इसके दाम आसमान तक पहुंचा दिए है। ऐसे में कई लोग इसके बढ़े हुए दाम के कारण सैनिटाइजर खरीद नहीं पा रहे हैं। इसी समस्या का समाधान करते हुए इन दिनों अलीराजपुर जिले की महिलाएँ महुए से सैनिटाइजर बना रही है। दरअसल, क्षेत्र में महुए के पेड़ बहुआयात मात्रा में है। इन दिनों महुआ का सीजन है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के दौर में यह महिलाएँ महुआ का उपयोग सैनिटाइजर बनाने कर रहे हैं।
यूट्यूब पर से सीखी प्रक्रिया
मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उदयगढ़ विकासखंड में श्रीहरि आजीविका समूह की महिलाओं ने कोविड- 19 की रोकथाम के लिए सैनिटाइजर निर्माण का काम शुरू किया। इसके लिए समूह की अध्यक्ष भारती और उनके पति अमरसिंह ने यूट्यूब पर महुए से सैनिटाइजर निर्माण की प्रक्रिया देखी। इसके बाद समूह के सदस्यों ने कच्ची शराब, फिटकरी तुलसी के पत्ते, गर्म जल, गुलाब जल एवं रंग द्वारा सैनिटाइजर तैयार किया। यही नहीं उसे बीएमओ डॉ. मोती सिंह के माध्यम से जांच करवा कर जीवाणु एवं विशाणु की रोकथाम के लिए उपयोगी पाए जाने का प्रमाण पत्र भी प्राप्त किया।
60 से 65 रु की लागत से तैयीर हो रहा सैनिटाइजर
यह महिलाएं अभी तक सैनिटाइजर की 220 बोतल तैयार कर चुकी है। इतना ही नहीं 200 मिलीमीटर सैनिटाइजर से भरी यह बोतल ये महिलाएं बाजार में 70 रुपए की कीमत पर बेच रही है। जबकि यही सैनिटाइजर बाजार में 250 से 300 रुपए की कीमत पर बेचा जा रहा है। महुए से तैयार इस सैनेटाइजर को बनाने में 60 से 65 रुपए की लागत आ रही है। जिले में वर्तमान में छोटे- छोटे गांव में महुआ से बनी शराब को सैनेटाजर के रूप में उपयोग में ला रहे हैं। महिलाएं बताती है कि सैनिटाइजर भी 60 से 70 प्रतिशत शराब से बनता है। ऐसे में उन्होंने शुद्ध शराब को सैनिटाइजर के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
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