कोरोना के गंभीर मरीजों का शुरुआत में ही ब्लड क्लॉट टेस्ट कराया जाए तो स्ट्रोक और किडनी फेल्योर का खतरा कम किया जा सकता है। यह दावा अमेरिकी वैज्ञानिकों ने किया है। कोलोराडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना के मरीजों में तेजी से रक्त के थक्के जम रहे हैं। मरीजों की थ्रॉम्बोइलास्टोग्राफी कराकर ये देखा जा सकता है कि उनमें कब और कैसे रक्त के थक्के बन रहे हैं।
थक्के अधिक बढ़ने पर ब्लीडिंग शुरू होती है
अमेरिकन कॉलेज ऑफ सर्जन्स जर्नल में प्रकाशित शोध के मुतातिक, इस जांच की मदद से कोरोना पीड़ितों की हालत नाजुक होने से रोकी जा सकती है। इसकी शुरुआत धमनियों में रक्त के थक्के जमने से होती है। धीरे-धीरे थक्के बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो जाती है ब्लीडिंग शुरू होती है।
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