भारत की सर्वोपरि पर्यावरणविद के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाली सुमैरा अब्दुल अली पिछले बीस साल से ध्वनि प्रदूषण और अवैध रेत खनन के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं। वे कोरोना जैसी महामारी के बढ़ने की वजह भी पर्यावरण से की गई छेड़छाड़ को मानती हैं।
सुमैरा मुंबई की पर्यावरणविद और आवाज फाउंडेशन की संस्थापक हैं। वे कंवर्सेशन सब कमिटी की को चेयरमैन और एशियाके सबसे पुराने व सबसे बड़े एनवायरोमेंटल एनजीओ, द बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसायटी की सचिव हैं। फिलहाल वे गवर्निंग काउंसिल मेंबर भी हैं।

समझाना भी चुनौती भरा
पर्यावरण को बचाने की शुरुआत उन्होंनेलगभग 20 साल पहले उस वक्त की जब इस विषय को लेकर लोगों में जागरूकता काफी कम थी। वे मुख्य रूप से अवैध रेत खनन को रोकने औरध्वनि प्रदूषण को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाती हैं। अपने शुरूआती दिनों को याद करके सुमैरा कहती हैं बीस साल पहले जब मैं लोगों से सैंड माइनिंग और ध्वनि प्रदूषण जैसे विषय पर बात करती थीं तो उन्हें समझ में ही नहीं आताथा। इन मुद्दों पर लोगों को समझाना भी मेरे लिए चुनौती भरा था।

अपनी जान भी डाली जोखिम में
59 वर्षीय सुमैरा विभिन्न प्लेटफाॅर्म के माध्यम से लोगों को पर्यावरण से होने वाले नुकसान से न सिर्फ अवगत कराती हैं, बल्कि उनसे बचने के तरीके भी बतातीहैं। सुमैरा कोआज वो दिन याद है जब 2004 में रेत माफिया द्वारा उन्हें दो बार जान से मारने का प्रयास किया गया था। उन्होंने अपने जीवन का यह बुरा दौर भी देखा है। लेकिन उनके इरादों में कभी कमी नहीं आई। पर्यावरण के क्षेत्र में सुमैरा के उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अशोक फैलोशिप और मदर टेरेसा अवार्ड मिल चुका है।

फिलहाल प्रयासों में कमी है
सुमैरा कहती हैं कि हमारे देश में पर्यावरण को बचाने की दिशामें किए जाने वाले प्रयासों में कमी है। इसी का नुकसान कोरोना जैसी महामारीके रूप में देखा जा सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से सारी दुनिया लॉकडाउन जैसे नुकसान से गुजर रही है। इसलिए अब ये जरूरी है कि कुछ ऐसी पॉलिसी बनें जिससे पर्यावरण का ध्यान रखा जा सकें और आम नागरिक तमाम मुसीबतों से बच सकें।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2ByLZWz
No comments:
Post a Comment