Wednesday, June 17, 2020

डिप्रेशन से बचने के लिए ओल्ड एज होम की महिलाओं ने खोजे तरीके, रोज कर रहीं कुकिंग, एक्सरसाइज में भी आगे

कोरोना काल में कुकिंग, एक्सरसाइज, बेकिंग और गार्डनिंग करके किस तरह नकारात्मक विचारों से बचा जा सकता है, ये कोई वृद्धाश्रम में रहने वाली इन महिलाओं को देखकर सीख सकता है। वो भी तब जब इनमें से कई महिलाएं अपने ही घर में होने वाले बुरे बर्ताव से हर वक्त तनाव में रहती हैं। इन महिलाओं का मानना है कि कोविड-19 इनके जीवन में फिर एक बार टर्निंग पॉइंट साबित हो रहा है।

नकारात्मक विचारनहीं आते हैं
एक ओल्ड एज होम में रहने वाली 65 वर्षीय निर्मला कहती हैं मुझे कुकिंग करना बहुत अच्छा लगता है। जब ज्यादा गर्मी नहीं होती तो मैं अपने गार्डन में बैठकर सब्जियां काटती हूं। इस तरह व्यस्त रहने से मेरे दिमाग में नकारात्मक विचार भी नहीं आते हैं। इसी तरह 75 साल की एक अन्य महिला का कहना है कि वे रोज एक्सरसाइज करती हैं। वर्कआउट, मेडिटेशन और योगासन करने से डिप्रेशन जैसी भावनाओं से बच सकतेहैं।

किचन गार्डन मेंसमय बिताती हैं

67 वर्षीय गायत्री कहती हैं कि वे भजन सुनकर तनाव मुक्त रहती हैं। इससे मन शांत रहता है। वे किचन गार्डन में भी अपना समय बिताती हैं। गायत्री के अनुसार अपने हाथ से उगाई गई सब्जियों से खाना बनाना मुझे एनर्जी देता है। इससे बहुत खुशी मिलती है।

बेकिंग का बचपन से शाैक
अलीगढ़ के वृद्धाश्रम में रहने वाली शबनम कहती हैं मैं रोज बेकिंग करती हूं। अपने इस काम में दिनभर बिजी रहती हूं। मेरा यह तरीका डिप्रेशन जैसे विचारों को दूर रखने में भी मदद करता है। दरअसल मुझे बेकिंग का बचपन से शौक है। मैं जब छोटी थी तो अपने घर की बेकरी में मां के साथ मिलकर बेकिंग किया करती थी। लेकिन शादी के बाद मेरा ये शौक छूट गया।

जरा भी परवाह नहीं है

अब मैं फिर से इस काम में अपना समय बिता रही हूं। 72 साल की शबनम को इस बात का दुख है कि लॉकडाउन के इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक एक बार भी उनके बच्चों ने फोन नहीं किया। बच्चों को उनकी जरा भी परवाह नहीं है। वे अपने बेकिंग के शौक को आगे बढ़ाते हुए अब बर्थडे केक का ऑर्डर लेना चाहती हैं।

इम्युनिटी बढ़ाने में व्यस्त
इसी ओल्ड एज होम में रहने वाली फरजाना अपनी इम्युनिटी बढ़ानेे में व्यस्त हैं। वे रोज ब्रिस्क वॉकिंग करती हैं। उनका कहना है कि सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली खाने से भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। वैसे ऐसे कई तरीके जानने में खुद को व्यस्त रखती हैं जिसे अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही खुद को बिजी रखने का भी ये तरीका उन्हें पसंद है।

समझना भी मुश्किल है

उम्र के इस दौर में जब इनके लिए वाट्सएप, फेसबुक जैसे तकनीक को समझना भी मुश्किल है, ये अकेले ही अपने दुख से उबरने की कोशिश कर रही हैं। ओल्ड एज होम में रहने वाली कई महिलाओं के लिए यह समझना भी आसान नहीं है कि उन्हें लॉकडाउन के इस दौर में बाहर जाने से क्यों मना किया जा रहा है या वे मंदिर क्यों नहीं जा पा रही हैं।



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Women of old age home find ways to avoid depression, cooking daily, exercise also ahead


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