वैज्ञानिकों ने कृत्रिम लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) विकसित की है। उनका दावा है कि यह वास्तविक आरबीसी से बेहतर काम करती है। कृत्रिम आरबीसी शरीर में आक्सीजन में पहुंचाने के साथ दवाओं को ले जाने में समर्थ है। यह जहरीले तत्वों का भी पता लगाती है। वैज्ञानिक अब कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में इसका प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं। इसे न्यू मेक्सिको यूनिवर्सिटी और साउथ-चाइना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है।
चूहों पर किया प्रयोग सफल रहा
शोधकर्ताओं ने कृत्रिम आरबीसी का प्रयोग चूहों पर किया है, जो सफल रहा है। उनका कहना है कि यह काफी बेहतर तरीके से काम कर रही है। इसका कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में सकारात्मक असर हो सकता है।
आरबीसी पर चढ़ा सिलिका का कवच
शोधकर्ताओं ने कृत्रिम आरबीसी पर सिलिका की बेहद बारीक पर्त चढ़ाई है जो इसके लिए कवच का काम करती है। इसके बाद आरबीसी पर पॉलीमर की ऐसी पर्त चढ़ाई है जिसमें पॉजिटिव और निगेटिव चार्ज है।
इंसानी आरबीसी जैसा आकार
अमेरिकन केमिकल सोयायटी के जर्नल नैनो में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कृत्रिम आरबीसी का आकार भी इंसानी आरबीसी जैसा गोल और दोनों ओर से चपटा है। इसमें हीमोग्लोबिन की मदद से शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता है। कृत्रिम आरबीसी में ATP बायोसेंसर लगे हैं जो शरीर में जहरीले तत्व, एंटीकैंसर ड्रग मिलते ही पता लगा लेते हैं।
'इसका बेहतर काम करनाबड़ी उपलब्धि'
शोधकर्ताओं का कहना है कि कृत्रिम आरबीसी का बेहतर काम करना बड़ी उपलब्धि है क्योंकि पिछली रिसर्च में ऐसा संभव नहीं हो पाया था और वह इंसानी कोशिका की तरह काम करने में असमर्थ साबित हुई थी। भविष्य में इसका इस्तेमाल कैंसर थैरेपी और टॉक्सिन बायोसेंसिंग में किया जा सकेगा।
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