रशियन वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन से पहले वहां के विशेषज्ञों ने इसकी सुरक्षा और साइडइफेक्ट की आशंका जताई थी। मॉस्को की एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल ट्रायल ऑर्गोनाइजेशन (ACTO) ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखा था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र में साफतौर लिखा गया था कि तीसरे चरण का ह्यूमन ट्रायल पूरा करने के बाद ही वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन कराएं। 100 से भी कम लोगों पर हुए ह्यूमन ट्रायल से लोग खतरे में पड़ सकते हैं।
एसोसिएशन ऑफ क्लीनिकल ट्रायल ऑर्गोनाइजेशन की एग्जीक्युटिव डायरेक्टर स्वेतलाना जावीडोवा के मुताबिक, क्यों सभी कार्पोरेशन नियमों का पालन कर रहे हैं लेकिन रशिया के लोग नहीं? क्लीनिकल ट्रायल की गाइडलाइन हमारे खून में हैं जिसे कभी नहीं बदला जा सकता है। कोई भी अप्रमाणित वैक्सीन इंसानों को लगने के बाद क्या होगा, हम नहीं जानते।
WHO ही नहीं, दुनियाभर के विशेषज्ञ सवाल उठा रहेयूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर फ्रांसुआ बैलक्स कहते है, रशिया का ऐसा करना शर्मनाक है। यह बेहद घटिया फैसला है। ट्रायल की गाइडलाइन को नजरअंदाज करके वैक्सीन को बड़े स्तर पर लोगों को देना गलत है। इंसान की सेहत पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा।
जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान के मुताबिक, रशियन वैक्सीन की पर्याप्त जांच नहीं की गई। इसे लोगों को देना खतरनाक साबित हो सकता है। वैक्सीन सबसे पहले बने, इससे ज्यादा जरूरी है यह सुरक्षित हो।
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