जुलाई 2017 में एक रात को लगभग 11 बजे थे। उस रात मानसी चौधरी ने अपने 25 वें जन्मदिन की खरीदारी पूरी की। वह घर जाने के लिए जैसे ही अपनी कार में बैठीं तो कुछ लड़के उनके साथ छेड़छाड़ करने लगे। कार से उतरे दो लड़कों ने मानसी को गालियां दीं और धमकियां देना शुरू कर दिया।
उन्होंने कार के बोनट और खिड़की पर हाथ मारा और गाड़ी का दरवाजा खोलने की कोशिश की। जैसे-तैसे वो वहां से निकल गईं। ये घटना मानसी के लिए अविश्वसनीय थी। मानसी ने इन लड़कों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

मानसी को उस वक्त इस बात का अहसास हुआ कि मैं एक वकील हूं। इसलिए ये बात जानती हूं कि अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ किस तरह आवाज उठाना चाहिए। लेकिन वे महिलाएं जो कानूनी अधिकारों के बारे में नहीं जानतीं, वे अपने हक के लिए किस तरह लड़ती होंगी। इसी सोच के साथ मानसी ने महिलाओं के लिए कानूनी अधिकारों से जुड़े पहले वेब पोर्टल की शुरुआत की।
इसके जरिये वे महिलाओं को कानून संबंधी जानकारी देती हैं, ताकि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें। वे चाहती हैं कि हमारे देश की महिलाओं को न्याय व्यवस्था और खुद के लिए बने कानूनों की जानकारी हो।
उनके वेब पोर्टल पर महिलाओं से जुड़े कई मुद्दे जैसे बलात्कार, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और बाल विवाह आदि से जुड़े कानूनी अधिकारों को बताया गया है। वे कहती हैं -''आजकल सभी के पास मोबाइल है और लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करना भी बखूबी जानते हैं। ऐसे में यह पोर्टल उन महिलाओं के लिए उपयोगी है जो इंसाफ की लड़ाई लड़ना चाहती हैं''।

मानसी को यह देखकर अफसोस होता है कि गांव की महिलाओं के साथ-साथ शहरों की शिक्षित महिलाओं को भी अपने अधिकारों की जानकारी नहीं है।
अगर महिलाएं अपने साथ हुए अपराधों के खिलाफ उसी वक्त आवाज उठाएं जब उनके साथ अन्याय हुआ है तो संभव है कि उन्हें उनका हक मिल सके। लेकिन अधिकांश महिलाएं उस वक्त चुप रह जाती हैं। इस वजह से अपराधी समाज में खुले आम घूमते हैं।
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