हैदराबाद के सचिन और श्वेता दरबारवर केमिकल और पेस्टिसाइड फ्री ताजा सब्जियां और फल लोगों को उपलब्ध कराना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से इस कपल ने हैदराबाद में ग्रीन हाउस की स्थापना की। आज ये दोनों अपने एग्री टेक स्टार्ट अप 'सिंपली फ्रेश इंडिया' को पूरी कामयाबी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
वे हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल खेती के लिए करते हैं। इस तरह मिलने वाली खाने की चीजें इतनी शुद्ध होती है जिन्हें आप बिना धोए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वे अपने ग्रीन हाउस में पूरे साल मेडिसिनल प्लांट और इसी तरह की अन्य खाने की चीजें उगाते हैं।

पानी और बिजली की खपत कम होती है
हाइड्रोपोनिक तकनीक में बिना मिट्टी के उपज होती है। इस टेक्नोलॉजी के तहत पौधा जमीन से लगभग 2 फीट ऊंचाई तक बढ़ता है। बीज और पौधे की सिंचाई पानी और मिनरल्स के मिश्रण की सहायता से की जाती है।
पारंपरिक खेती के तरीको के बजाय इस तकनीक में पानी और बिजली दोनों की खपत कम होती है। वे अपने ग्रीन हाउस में पौधों के अच्छे विकास के लिए पंखे, एयर कंडिशनर या केमिकल बेस्ड कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं।

रेस्टोरेंट और कैफे जैसे सेगमेंट में इसे जगह मिली
सचिन ने फार्मिंग की इस तकनीक को सीखने के लिए ऑस्ट्रेलिया में तीन साल बिताए और उसके बाद इसे अपने ग्रीन हाउस में विकसित किया। उनके हर पैकेज का एक क्यू आर कोड होता है। इससे उस पैकेज के बारे में पूरी जानकारी मिलती है जैसे इस चीज के बीज को कब बोया था।
इसकी फार्मिंग कब हुई, ये कितना पुराना है आदि। इस तरह के पैकेज की शुरुआत भारत में 2013 में हुई। इसके अंतर्गत होटल, रेस्टोरेंट और कैफे जैसे सेगमेंट में इसे जगह मिली।
पौधे को कितनी मात्रा में उर्वरक की जरूरत है
सिंपली फ्रेश इंडिया के संस्थापक और सीईओ सचिन कहते हैं - ''हमारे खेत पूरी तरह से एआई प्लेटफॉर्म द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं जिसे 'फार्म इन ए बॉक्स' कहते हैं। इस डिजिटल सिस्टम से ये पता लगाया जाता है कि किस समय पौधे को किस तरह के और कितनी मात्रा में उर्वरक की जरूरत है और उसी हिसाब से पौधों में इनकी सप्लाई होती है''।

आज फार्म इन द बॉक्स कॉन्सेप्ट की शुरुआत करने वाले इस कपल की खुशी देखते ही बनती है। उनकी मेहनत रंग लाई। फिलहाल वे बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई की सबसे बड़ी होटलों में सलाद की पत्तियों, बेरीज, सलाद की सब्जियों और एडिबल फ्लॉवर्स के सबसे बड़े सप्लायर हैं।
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