श्रुति दिलीप साहित्य में विशेष रुचि रखती हैं। देश भर में साहित्य से संबंधित गतिविधियों को देखते हुए श्रुति दिलीप और रिचु जैन ने रीडिंग रूम को. की शुरुआत की।
ये नए लेखकों के लिए एक ऑनलाइन पब्लिकेशन प्लेटफॉर्म है जहां वे अपना क्रिएशन लॉन्च कर सकते हैं फिर चाहे वह कविता हो, फिक्शन या नॉन फिक्शन। नए लेखक और कवि अपने लेखन को इस प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर सकते हैं। श्रुति ने मणिपाल यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट किया है।
श्रुति कहती हैं ''मलयालम राइटर्स अन्य भाषाओं में भी लिखते हैं लेकिन इंग्लिश में लिखने वाले अधिकांश लेखकों की रचनाएं सिर्फ इंग्लिश में ही पढ़ी जा सकती हैं।

मेरे कई दोस्त फिक्शन और पोएट्री लिखते हैं। अगर कुछ पब्लिकेशन हाउस को छोड़ दिया जाए तो अपनी रचनाओं के प्रकाशन के लिए उनके पास कोई अन्य माध्यम नहीं होता है। फिक्शन को प्रकाशित करवाने के लिए भी हमारे देश में वेबसाइट की संख्या काफी कम हैं। कॉलेज की मैगजीन में कुछ फिक्शन का प्रकाशन होता है लेकिन वे अन्य पाठकों के काम का नहीं होता''।
रिचु जैन ऑनलाइन पब्लिकेशन प्लेटफॉर्म रीडिंग रूम को. के सह संस्थापक हैं। श्रुति इस साइट पर साहित्यिक गतिविधियों को देखती हैं, वहीं कनाडा बेस्ड रिचु पेशे से एक इंजीनियर हैं। वे इस साइट के तकनीकी स्वरूप को निखारने का काम करते हैं।
एक महीने से भी कम समय में उन्होंने लगभग 30 बुक्स को अपनी साइट पर अपलोड किया है। श्रुति को लगा था कि उनकी इस सालट पर दस या इससे अधिक कुछ व्यूज और सबमिशंस आएंगे। लेकिन जो प्रतिक्रिया मिली, उसकी मुझे कभी उम्मीद नहीं थी।
इस वेबसाइट पर हमें 6000 व्यूज मिले। रीडिंग रूम के लिए लेखक और अनुवादक देविका ने स्वर्गीय के सरस्वती अम्मा द्वारा लिखित शॉर्ट स्टोरीज को ट्रांसलेट किया है।

श्रुति कहती हैं अम्मा की शॉर्ट स्टोरीज मैंने कॉलेज में पढ़ी थीं जिसे फिर एक बार देविका की वजह से पाठकों को पढ़ने का मौका मिलेगा। उनकी कहानियां और पात्र मुझे जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकी जितनी तारीफ की जाए, कम है।
सरस्वती अम्मा की रचनाओं को आज भी वो दर्जा नहीं मिला है, जो मिलना चाहिए था। मैं चाहती हूं कि मेरी वेबसाइट के जरिये युवा ऐसी प्रतिभावान लेखिका के बारे में जानें।
मैंने अब तक उनकी आठ कहानियां प्रकाशित की हैं। इस वेबसाइट पर वर्क लोड अधिक होने की वजह से श्रुति ने अपनी टीम का भी विस्तार किया है।
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