लॉकडाउन के पिछले कुछ महीनों में पार्लर जाने वाली महिलाओं ने घर में ही अपनी सुंदरता को निखारने के कई प्रयास किए हैं। किसी ने अपने बालों को कलर करना सीख लिया तो कोई फेशियल की नई-नई स्टेप्स सीख रहा है। अपनी आईब्रोज बनाने से लेकर हेयर कटिंग की कई स्टाइल सीखने में भी महिलाएं पीछे नहीं रहीं।
लेकिन इन महिलाओं द्वारा किए गए ट्रीटमेंट से खूबसूरती बढ़ी नहीं बल्कि कम हुई है। 2000 महिलाओं पर की गई स्टडी के अनुसार पैरों की वैक्सिंग करने से लेकर आईलैशेज अप्लाय करने वाली महिलाओं को इसके निगेटिव इफेक्ट मिले हैं।
इन महिलाओं द्वारा अपनी खूबसूरती बढ़ाने के सारे तरीके गलत साबित हुए। आईब्रोज बनाने में इनसे शेप बिगड़ गया। अपर लिप्स की वैक्स करने से चेहरे पर रैशेज हो गए।

कई महिलाओं ने ये भी माना कि घर में किए गए ब्यूटी ट्रीटमेंट या होममेड फेस मास्क से उनकी स्किन पर रिएक्शन हो गया। इस परेशानी से बचने के लिए 33% महिलाओं ने प्रोफेशनल्स की मदद लेना शुरू की। ये रिसर्च सेंटर : एम के की किम प्रिस्ट ने की। उनके अनुसार महिलाओं के फील गुड फैक्टर का संबंध परफेक्ट ब्यूटी ट्रीटमेंट से है। इससे हमें सारी जिंदगी अपनी सुरक्षा का अहसास होता है।
अगर हर महिला ये सोच ले कि अपनी सुंदरता को निखारने के लिए उसे किसी प्रोफेशनल की मदद लेने की जरूरत नहीं है। बल्कि वह खुद ही यह काम कर सकती है, तो ये संभव नहीं है। इनके निगेटिव इफेक्ट उनके चेहरे पर साफ नजर आते हैं।
कुछ सिंपल ब्यूटी हैक्स आप घर में आजमा सकते हैं। लेकिन ये काम भी ज्यादा चैलेंजिंग है। इसलिए इस तरह के काम खुद करने के बजाय एक्सपर्ट से करवाना फायदेमंद है। इसके लिए सैलून जाने से बेहतर कोई दूसरा तरीका नहीं हो सकता।
इस रिसर्च के अनुसार 40% महिलाएं घर में पेडिक्योर करती हैं। 15% महिलाएं ऐसी भी हैं जो खुद अपनी आइब्रोज सेट कर लेती हैं। वहीं एक तिहाई महिलाएं खुद वैक्सिंग करना पसंद करती हैं।
घर में ब्यूटी ट्रीटमेंट लेने वाली महिलाओं के 27% पार्टनर उनकी इस काम में मदद करते हैं। वहीं 12% बच्चे ऐसे हैं जो अपनी मॉम की सुंदरता को बनाए रखने में उनका साथ देते हैं।

इस रिसर्च ने ये साबित किया कि 51% महिलाओं को अपने बाल कलर करने के लिए किसी की जरूरत पड़ती है। वहीं 18% महिलाएं ये मानती हैं कि वे टैनिंग रिमूव करने के लिए दूसरों की मदद लेती हैं। 12% महिलाओं ने ये माना कि अपने ब्यूटी ट्रीटमेंट के लिए घर या पड़ोस से किसी की मदद लेने पर बाद में उन्हें पछतावा ही हुआ है।
34% महिलाओं के अनुसार ब्यूटी उन्हें फील गुड कराने वाले सबसे असरदार तरीका है। जबकि 28 % महिलाओं का कहना है कि लॉकडाउन के बुरे दौर में सेल्फ केयर उन्हें डिप्रेशन से उबारने में मदद करता है।
एक तिहाई महिलाएं ये भी मानती हैं कि लॉकडाउन ही वह दौर है जब उन्होंने 'मी टाइम' को डिफरेंट ब्यूटी ट्रीटमेंट के माध्यम से एंजॉय किया। कई महिलाओं ने ये भी माना कि उन्हें अपनी केयर के लिए ज्यादा वक्त की जरूरत है।
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