एडुटेनमेंट शो 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' से प्रेरित होकर बिहार के नवादा जिले की टीनएज लड़कियों के समूह ने सैनिटरी पैड बैंक की स्थापना की है। इसके लिए वे हर लड़की से रोज 1 रुपया इकट्ठा करती हैं। इन पैसों से उन लड़कियों के लिए पैड खरीदे जाते हैं, जिनके पास पैड खरीदने के पैसे नहीं हैं।
जब उन्होंने देखा कि कैसे पैसे की कमी की वजह से लड़कियों की मासिक धर्म की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। इस बैंक की स्थापना के लिए लड़कियों ने एक-दूसरे की मदद की और एक साथ आने का फैसला किया।
मैं कुछ भी कर सकती हूं एक ऐसा शो है जो परिवार नियोजन, बाल विवाह, अनियोजित या जल्दी गर्भधारण, घरेलू हिंसा और यौन स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करता है। यह पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एक ट्रांस-मीडिया एडुटेनमेंट पहल है। उनकी कहानी को इस लिंक पर देखा जा सकता है : https://youtu.be/tYkJzVetwSQ
सेनेटरी पैड्स बैंक क्यों और कैसे बनाया गया, इस बारे में बताते हुए इस गांव की यूथ लीडर अनु कुमारी कहती हैं, "उन लड़कियों की मदद के लिए जिनके पास पैसे नहीं हैं, हम रोजाना एक रुपये जमा करते हैं। इसका मतलब हर लड़की एक महीने में 30 रुपये जमा करती है।" उस पैसे से हम पैड खरीदते हैं और गरीब लड़कियों में बांट देते हैं।”
इस बारे में नवादा के पूर्व सिविल सर्जन, डॉ. श्रीनाथ प्रसाद कहते हैं, "लड़कियां पहले खुद के लिए बोलने में असमर्थ थीं। वे अपने शरीर में हो रहे शारीरिक परिवर्तनों से अनजान थीं। उन्हें सैनिटरी पैड के बारे में पता नहीं था लेकिन आज उन्होंने सैनिटरी पैड्स का बैंक शुरू किया है। आप सोच सकते हैं कि लड़कियों पर शो का किस हद तक असर हुआ है कि वे अब आत्मविश्वास से कह रहीं हैं "मैं कुछ भी हासिल कर सकती हूं"।
कम्युनिटी की सदस्य संगीता देवी कहती हैं, "पहले हम मासिक धर्म के दौरान होने वाली तकलीफ को चुपचाप सहन करते थे। लेकिन हमारी बेटियों ने हमें नैपकिन्स के बारे में बताया। हमने भी 'मैं भी कुछ कर सकती हूं' देखा और प्रोत्साहित हुईं। मुझे लगता है ये सभी बदलाव सिर्फ उस शो की वजह से संभव हुए।"
पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा इस बात से खुश हैं कि किस तरह मैं कुछ भी कर सकती हूं ने लाखों युवा लड़कियों और महिलाओं को आवाज दी है। वह कहती हैं, “मुझे खुशी है कि यह शो उनके जीवन पर असर डाल रहा है और यही हमारा लक्ष्य है।
इस सीरीज की नायिका डॉ. स्नेहा माथुर के प्रेरक किरदार के माध्यम से, हमने मुश्किल लेकिन महत्वपूर्ण विषयों मसलन, लैंगिक भेदभाव, स्वच्छता, परिवार नियोजन, स्पेसिंग, बाल विवाह, मानसिक स्वास्थ्य, नशीली दवाओं के दुरुपयोग, पोषण और किशोर स्वास्थ्य के बारे में बातचीत शुरू की है।
बिहार की इन युवा लड़कियों ने सैनिटरी पैड्स का एक बैंक बनाया है और साथ ही किशोरियों के अनुकूल हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत करने में भी सफल रही हैं जो पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के लिए गर्व की बात है।”
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