Saturday, October 17, 2020

कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में प्रवासी कामगारों की मजबूरी दिखाती प्रतिमा, इसमें एक मां कार्तिकेय रूपी बच्चे को पकड़े हुए और दो बेटियों के साथ शक्ति रूप में खड़ी है

मां दुर्गा के अनेक रूपों में से एक है प्रवासी मां का रूप। कोलकाता के बेहला इलाके में स्थित बड़िशा क्लब ने इसे प्रतिमा के रूप में प्रस्तुत किया है। देवी दुर्गा की गोद में कार्तिकेय रूपी बच्चे को दिखाया गया है। इस क्लब ने प्रवासी मां की व्यथा को मां दुर्गा की प्रतिमा के रूप में दिखाया है। इस साल महामारी की वजह से कई प्रवासी मजदूर अपने गांव वापिस लौट गए। इनमें बड़ी संख्या उन महिलाओं की भी थी जो अपने मासूम बच्चों के साथ पैदल ही लंबी दूरी की यात्रा करने को मजबूर हुईं।

इस प्रतिमा को बनाने का मकसद महामारी में प्रवासी कारीगरों का दर्द बयां करना है।

प्रतिमा को बनाने वाले कलाकार रिंटू दास के अनुसार, ''इस प्रतिमा में एक महिला की गोद में बिना कपड़े पहने एक बच्चा है। इस प्रतिमा के माध्यम से ये दिखाया गया है कि किस तरह एक मां अपने भूखे बच्चों के साथ तेज धूप में चली जा रही है। वह अपने बच्चों के लिए पानी और खाने की व्यवस्था देख रही है। इस पंडाल के डेकोरेशन के लिए किसी से राशि नहीं ली गई है''।

पंडाल के संस्थापक सदस्य देबप्रसाद बोस ने कहा कोई भी पंडाल तालाबंदी के दौरान श्रमिकों की दुर्दशा को पूरी तरह नहीं बता सकता लेकिन हमने प्रवासी मजदूरों के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाने की कोशिश की है। मुझे याद है कि लॉकडाउन के दौरान टीवी और अखबारों में रोज ही यह खबर पढ़ने को मिली कि किस तरह प्रवासी कर्मचारी पैदल घर लौट रहे थे।

इस बार बड़िशा क्लब की मुख्य थीम भी 'रिलीफ' यानी राहत ही है।

उनमें से कुछ सड़क पर मर रहे थे। मेरे कुछ दोस्त जो बंगाल से दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में चले गए, उन्होंने मुझे सड़कों पर परेशान हाल में घूमते हुए प्रवासी मजदूरों के बारे में बताया था। हालांकि उस वक्त दुर्गा पूजा में कुछ महीने बाकी थे। लेकिन बच्चों के साथ घर चलने वाली महिलाओं की इस भावना ने मेरे दिल को छुआ। मेरे मन में, उन्होंने देवी को अवतार लिया जिसे मैंने नवरात्रि पर इस प्रतिमा के माध्यम से बताया। वैसे भी इस बार बड़िशा क्लब की मुख्य थीम भी 'रिलीफ' यानी राहत ही है।



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A statue depicting the helplessness of migrant workers in the Durga Puja pandal in Kolkata, with a mother holding a child like Kartikeya and standing in power with two daughters


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