दिल्ली की रहने वाली कृतिका सोढ़ी अपनी नानी आशा पुरी को जब स्वेटर बुनते हुए देखती तो उसे बहुत अच्छा लगता। ऐसा कई घरों में अब भी होता है जब सर्दी के आते ही मां, नानाी, मौसी या दादी स्वेटर, स्कार्फ या मोजे बुनते हुए दिखाई देती हैं। जब नानी को देखकर कृतिका ने खुद बुनाई सीखी तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि यह काम उसके लिए एक थैरेपी की तरह है।
दिल्ली के पश्चिम इलाके में कृतिका की नानी रहती हैं। 2017 में वह अपनी नानी के पास रहने लगी। कृतिका कहती हैं वह मेरी लाइफ का मुश्किल दौर था। उस वक्त मुझे किसी ऐसे काम की जरूरत थी जो मेरे लिए स्ट्रेस बस्टर साबित हो सके। मैंने नानी को देखकर ये महसूस किया कि जब भी वे बुनाई करती हैं तो अपनी सारी तकलीफें भुल जाती हैं। उन्हें इस काम को करने से बहुत खुशी मिलती है।

इसी खुशी की चाहत मे मैंने अपनी नानी से बुनाई सीखी। नानी के साथ रहते हुए मुझे ये भी लगा कि इतनी अच्छी बुनाई करने के बाद भी उन्हें कभी इस काम के बदले तारीफ नहीं मिली। न ही उनकी पहचान बुनाई करने से हुई। मैंने उन्हीं दिनों यह तय किया कि मुझे कुछ ऐसा काम करना है जिससे नानी को पहचान मिल सके।
इसी विचार के साथ कृतिका ने अपनी नानी के साथ हाथ से बुनी हुई इन चीजों को बेचने का प्लान बनाया। कृतिका ने जब इस बारे में नानी के साथ बात की तो उन्हें ये आइडिया ठीक नहीं लगा। लेकिन कृतिका के समझाने पर वे राजी हो गईं। पहले आशा पुरी अपने घर के सदस्यों के लिए बुनाई करके सिर्फ एक कुशल गृहिणी कहलाती थीं, वहीं अब कृतिका की समझदारी से एक सफल आंत्रप्रेन्योर कहलाती हैं।

कृतिका एमबीए ग्रेजुएट है। नानी के साथ किए गए अपने स्टार्ट अप का नाम उसने 'विद लव, फ्रॉम ग्रैनी' रखा है। सोशल मीडिया पर भी इन दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया जा रहा है।
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