Happy Makar Sankranti 2019: मकर संक्रांति 15 जनवरी (Makar Sankranti) को है। आमतौर पर यह 14 तारीख को मनाई जाती रही है। इस त्योहार यानी मकर संक्रांति (Happy Makar Sankranti 2019) का सीधा संबंध हमारे ग्रह यानी पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से जुड़ा है। इसी दिन, सूर्य उत्तरायण होकर मकर रेखा पर आता है। इसीलिए मकर संक्रांति का त्योहार इसी दिन मनाया जाता है। मकर संक्रांति के आसपास ही कुछ दिनों पर देशभर में अलग-अलग नाम और परंपराओं के हिसाब से त्योहार मनाए जाते हैं। आइए, यहां हम आपको इस महत्वपूर्ण त्योहार से जुड़ी 5 अहम बातें बताते हैं।मकर संक्रांति कब है: 15 जनवरी 2019मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं: जानिए 5 जरूरी बातें1) ज्योतिष के दृष्टिकोण सेज्योतिष के नजरिए से देखें तो भी मकर संक्रांति बहुत अहम त्योहार है। इसका धर्मग्रंथों में भी उल्लेख हुआ है। मकर संक्रांति ही वो दिन होता है जब सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। और इसी के साथ उसकी उत्तरायण होने की गति आरंभ होती है। यह शुभ काल माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है। इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत भी हो जाती है। इसीलिए मकर संक्रांति को सुख-समृद्धि का अवसर और प्रतीक मना जाता है।2) संस्कृति के अनुसारभारत में सांस्कृतिक विविधताओं के लिहाज से भी मकर संक्रांति का अपना महत्व है। देश के ज्यादातर हिस्सों में यह त्योहार मनाया जाता है। हालांकि, नाम और प्रचलित परंपराएं अलग-अलग हैं। जैसे, देश के दक्षिणी राज्यों केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इसे सिर्फ संक्रांति ही कहा जाता है। तमिलनाडु की बात करें तो वहां ये त्योहार चार दिन चलता है और वहां इसे पोंगल कहा जाता है। पंजाब और हरियाणा में इसे लोहड़ी कहा जाता है। असम में बिहू वही है जो हमारे यहां यानी उत्तर भारत में मकर संक्रांति है।3) खान-पान और दान भी विशेषमकर संक्रांति को तिल का उबटन लगाने के बाद स्नान की धार्मिक मान्यता है। पवित्र नदियों में स्नान के लिए लोग जुटते हैं और वहां मेले भी लगते हैं। चावल और दाल की खिचड़ी बनाई जाती है और इसे घी और गुड़ के साथ सपरिवार खाया जाता है। तिल और गुड़ के बने लड्डू या गजक भी बड़े चाव से खाए और खिलाए जाते हैं। तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल और छाता दान किए जाने का भी महत्व और मान्यता है। कई महिलाएं सुहाग से जुड़ी वस्तुएं भी दान करती हैं।4) सूर्य की प्रसन्नतास्नान और दान करने का महत्व ये माना गया है कि इससे सूर्य नारायण प्रसन्न होते हैं और जीवन में सफलता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। तिल के उबटन से स्नान के बाद सूर्य देवता को जल चढ़ाया जाता है और उनकी आराधना की जाती है। इसके बाद दान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर गए थे इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन भी माना जाता है।5) वसंत ऋतु का आरंभमकर संक्रांति के बाद कड़ाके की सर्दी का दौर खत्म होने लगता है और धूप तेज हो जाती है। ऐसा सूर्य के उत्तरायण होने की वजह से होता है। दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती है। कुल मिलाकर वसंत ऋतु का आगमन होता है और मौसम खुशगवार हो जाता है। वसंत ऋतु के आगमन को लेकर काफी साहित्यिक रचनाएं भी की गई हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में फसलें पकने लगती हैं। पोंगल और लोहड़ी इसी का प्रतीक हैं। यानी यह अन्नदाता के लिए आर्थिक दृष्टि से आशानुकूल समय होता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही प्राण त्यागे थे।
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