नई दिल्ली. MAGG को लेकर नेस्ले इंडिया (Nestle India Ltd) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। नेस्ले इंडिया के इस नूडल प्रोडक्ट (Maggi noodles) में सीसे यानी लेड पाए जाने के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सरकार को कार्रवाई के लिए मंजूरी दे दी है। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। इस दौरान जस्टिस डीवाय. चंद्रचूढ़ ने नेस्ले इंडिया के वकील अभिजीत मनु सिंघवी से कहा- आप ये बताइए कि अगर मैगी में लेड है तो हम उसे क्यों खाएं? अब NCDRC इस मामले में नेस्ले के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर सकेगा। सरकार ने नेस्ले पर अनुचित और भ्रामक प्रचार का आरोप लगाते हुए 640 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की है। नेस्ले ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।NCDRC का क्या आरोप?राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग यानी NCDRC ने अपनी पिटीशन में आरोप लगाया था कि नेस्ले ने मैगी को लेकर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया। मैगी नूडल्स को यह कहकर प्रचारित किया गया कि ये टेस्टी और हेल्दी है जबकि इसमें सीसे की मात्रा पाई गई है। बता दें कि दिसंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि मैगी नूडल्स की जांच सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी CFTRI में कराई जाए। यह लैब मैसूर में है।सीसा तय मात्रा मेंगुरुवार को सुनवाई के दौरान नेस्ले इंडिया के वकील सिंघवी ने कहा कि मैसूर की लैब के टेस्ट रिजल्ट आ गए हैं और इसमें पाया गया है कि नेस्ले में लेड की मात्रा तय सीमा में है। इस पर जस्टिस चंद्रचूढ़ ने सिंघवी से पूछा- हमें सीसे वाली मैगी क्यों खानी चाहिए? इस पर सिंघवी ने तर्क दिया कि मैगी नूडल्स में सीसे की मात्रा तय सीमा में है और थोड़ा बहुत लेड तो कई प्रोडक्ट में होता है। हालांकि, सिंघवी ने इस मामले को फिर NCDRC के पास भेजे जाने का विरोध किया और कहा कि अब मैसूर लैब की रिपोर्ट आ चुकी है और ऐसा कुछ भी नहीं बचा है जिस पर फैसला बाकी हो। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी यह दलील खारिज कर दी और कहा कि हमें NCDRC की शक्तियों को क्यों छीनना चाहिए? हम इस रिपोर्ट को उसके पास भेज रहे हैं और वह आगे की कार्रवाई करेगा।भारत में लोकप्रिय1983 में नेस्ले इंडिया लिमिटेड ने भारत में मैगी नूडल्स को लॉन्च किया था। लॉन्चिंग के कुछ वर्षों में इसका मसाला, चिकन और टमाटर स्वाद वाला वेरिएंट भी बाजार में आ गया। भारत में मैगी को जिस तरह प्रमोट किया गया, उससे यह घरेलू महिलाओं और बच्चों में खासा लोकप्रिय हो गया। भारत में इसका प्रचार 2 मिनट नूडल्स के रूप में किया गया। हालांकि, 2015 में यह लेड को लेकर विवादों में आ गया और 5 जून 2015 को FSSAI ने इस पर 5 महीने के लिए रोक लगा दी।
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