Sunday, March 17, 2019

करतारपुर कॉरिडोर पर भारत-पाक के बीच मीटिंग की ये हैं खास बातें, 2 अप्रैल को होगी अगली बैठक

नई दिल्ली. करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भारत और पाक दोनों ही राज़ी है। दोनों देश अपने अपने क्षेत्रो में इस कॉरिडोर की आधारशिला रख चुके हैं तो वही गुरूवार को पंजाब के अटारी में पहली अधिकारिक सचिव स्तरीय बैठक संपन्न हुई। जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के अधिकारी मौजूद रहे। इस तीर्थयात्रा को बिना वीज़ा कराए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।ये बैठक काफी पॉजीटिव रही है वही अब दूसरी मीटिंग 2 अप्रैल को वाघा मेंं होगी। आज की बैठक भी कई मायनों में खास रही है।भारत ने दिया हर दिन 5 हज़ार तीर्थयात्रियों को दर्शन की इजाज़त का प्रस्तावइस मीटिंग के दौरान सबसे खास बात ये रही कि भारत ने पाकिस्तान को सौंपे प्रस्ताव में मांग की है कि पाकिस्तान हर रोज़ कम से कम 5 हज़ार तीर्थयात्रियों को गुरूद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शनों की इजाज़त दें। जिसमें न सिर्फ भारतीय शामिल होंगे बल्कि भारतीय मूल के वो लोग जो दूसरे देशों में रहते हैं वो भी शामिल होंगे।SCL Das, Joint Secy, MHA on India-Pakistan meeting on Kartarpur: Our side pressed on the need for arranging the visit of at least 5000 pilgrims per day to begin with, in the phase 1 of the project. This should include not only Indian nationals but people of Indian origin as well. pic.twitter.com/CoGUdXwdH1— ANI (@ANI) March 14, 2019खास दिनों में 10 हज़ार तीर्थयोत्रियों के दर्शन का प्रस्ताववही सिखों के खास दिनों जैसे गुरूपर्व और बैसाखी के मौके पर तीर्थयात्रियों की संख्या दुगनी करने का प्रस्ताव रखा गया है। भारत ने कहा कि इन खास पर्वो पर तकरीबन 10 हज़ार तीर्थयात्रियों को दर्शन करने का मौका मिले।SCL Das, MHA: We've strongly urged them to allow, bcos ppl from all over the country&world will be coming for all 7 days throughout the yr without any break, provide for a much higher size of 'jathhas' of visiting pilgrims by another 10,000 on special days like Gurupurab,Baisakhi https://t.co/Yit8qBw6vX— ANI (@ANI) March 14, 2019करतारपुर कॉरिडोर क्या है?आपको बता दें कि भारत में डेरा बाबा नानक से पाकिस्तान के करतारपुर के बीच कॉरिडोर बनना है जिसे करतारपुर कॉरिडोर का नाम दिया गया है। नवंबर, 2018 में भारत और पाकिस्तान ने अपने-अपने क्षेत्र में इसके निर्माण की नींव रखी थी। करतारपुर गुरूद्वारे को गुरू नानक की कर्मस्थली कहा जाता है।

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